SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THE LEADERS CONCLAVE 2026 AT LUDHIANA ON MAY 21, 2026.

‘लीडर्स कॉन्क्लेव 2026’ के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 21.05.2026,  गुरूवारसमयः दोपहर 12:00 बजेस्थानः लुधियाना

  

नमस्कार!

आज पंजाब के औद्योगिक दिल यानी लुधियाना की इस धरती पर, ‘‘समागम लीडर्स कॉन्क्लेव 2026’’ के इस अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। मैं इस शानदार और समय के अनुकूल आयोजन के लिए लुधियाना एंजल्स नेटवर्क की पूरी टीम को हृदय से बधाई देता हूँ।

आज का यह समागम केवल एक सम्मेलन नहीं है, बल्कि यह पंजाब की धरती पर व्यापार, तकनीक, नवाचार और नए विचारों के संगम का एक महाउत्सव है। यह मंच गवाह है कि पंजाब केवल खेती की हरी-भरी फसलों में ही आगे नहीं है, बल्कि हमारे युवाओं के मन में नए विचारों की फसलें भी उतनी ही तेजी से लहलहा रही हैं।

जब हम पंजाब के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बात करते हैं, तो वर्ष 2023 में स्थापित लुधियाना एंजल्स नेटवर्क का नाम सबसे आगे आता है। आठ अलग-अलग प्रतिष्ठित कंपनियों के निदेशकों ने हाथ मिलाकर इस नेटवर्क की स्थापना की है, ताकि लुधियाना को स्टार्टअप्स के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके। इसके प्रबंध निदेशक श्री एस.के. राय जी और सीईओ शिबानंद दास जी के नेतृत्व में यह मंच लुधियाना को केवल मैन्युफैक्चरिंग सिटी से आगे ले जाकर, ड्रोन, टैंक, मानव रहित वाहन और डिफेंस टेक्सटाइल जैसे रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ हेल्थकेयर और इनोवेशन का एक ग्लोबल हब बनाने के विजन पर काम कर रहा है।

आज वर्ष 2026 में, लुधियाना एंजल्स नेटवर्क पंजाब का एक अग्रणी और सबसे भरोसेमंद निवेश नेटवर्क बन चुका है। अब तक इस नेटवर्क ने दर्जनों से अधिक स्टार्टअप्स को न केवल करोड़ों रुपये की फंडिंग प्रदान की है, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुँच बनाने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म भी दिया है। लुधियाना के पारंपरिक उद्योगों (जैसे टेक्सटाइल, साइकिल और इंजीनियरिंग) को आधुनिक ए.आई. और डिजिटल तकनीक से जोड़ने में लुधियाना एंजल्स नेटवर्क की भूमिका वास्तव में सराहनीय है।

मुझे यह जानकर बेहद खुशी हुई कि यह संगठन युवाओं में उद्यमशीलता जगाने के लिए ‘आरंभ’ जैसा अद्भुत कार्यक्रम चलाता है, जिसके तहत हाई स्कूल के छात्रों को आई.आई.टी. और आई.आई.एम. शीर्ष संस्थानों का एक्सपोज़र दिया जाता है। पिछले साल आई.आई.टी. रोपड़ में आयोजित इस कार्यक्रम की सफलता से प्रभावित होकर पंजाब विधानसभा के माननीय अध्यक्ष, श्री कुलतार सिंह संधवां जी ने तो इसे पूरे राज्य के स्तर पर लागू करने का आग्रह किया है।

और आज, हम यहाँ इस मंच पर संगठन के सबसे प्रमुख कार्यक्रम, ‘समागम 2026’ के लिए एकत्रित हुए हैं। वर्ष 2023 में एक गरिमामयी शुरुआत के बाद, आज ‘समागम’ पूरे पंजाब के स्टार्टअप इकोसिस्टम का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह बन चुका है। इस वर्ष ‘समागम 2026’ में 5 मुख्य श्रेणियों में पुरस्कार दिए जा रहे हैं, जिनमें बेस्ट इमर्जिंग एंटरप्रेन्योर अवार्ड, बेस्ट इंस्टीट्यूट अवार्ड, बेस्ट स्टार्टअप अवार्ड, बेस्ट इनक्यूबेटर अवार्ड और बेस्ट चेंज मेकिंग प्रोग्राम अवार्ड शामिल हैं।

आज इस प्रतिष्ठित सभागार में हमारे बीच पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, आई.आई.टी. रोपड़ और आई.आई.एस.ई.आर. मोहाली जैसे शीर्ष संस्थानों के निदेशक और कुलपति मौजूद हैं। साथ ही, नीति निर्माता, स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप पंजाब, शहर प्रशासन, एंजेल इन्वेस्टर्स और वेंचर कैपिटल्स एक साथ एक मंच पर उपस्थित हैं। मैं आप सभी विचारकों और उद्योगपतियों का इस महामंथन में स्वागत करता हूँ।

देवियो और सज्जनो,

रचनात्मकता ही भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहकर हम यह अपेक्षा नहीं कर सकते कि बार-बार वही कार्य करने से हमारी उत्पादकता स्वतः बढ़ जाएगी। हमें अलग सोच अपनानी होगी और अपने प्रत्येक कार्य में नवाचार को स्थान देना होगा।

शायद यही कारण है कि हमारी माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने ‘ऑरेंज इकॉनमी’ की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए युवाशक्ति और रचनात्मकता पर विशेष बल दिया। इसका सीधा अर्थ है कि हमें युवाओं की ऊर्जा और सृजनात्मक क्षमता को एक साथ जोड़ना होगा। और इसके लिए सबसे प्रभावी माध्यम है, युवाओं को स्टार्टअप्स को एक गंभीर एवं सम्मानजनक करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना।

भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 1.25 लाख से अधिक हो चुकी है, जिनमें 110 से ज्यादा यूनिकॉर्न शामिल हैं।

अप्रैल 2025 में जब माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल जी ने यह कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स अभी भी उच्च तकनीकी नवाचार और विनिर्माण के क्षेत्र में अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं, तब मुझे दृढ़ता से महसूस हुआ कि पंजाब, विशेषकर लुधियाना, इस दिशा में देश का नेतृत्व कर सकता है और करना भी चाहिए। क्योंकि पंजाब, और विशेष रूप से लुधियाना, के लोगों के खून में व्यापार और उद्यमशीलता समाई हुई है।

जब हम लुधियाना की बात करते हैं, तो हम संघर्षशीलता, उद्यम और अद्भुत परिश्रम की बात करते हैं। यह वही शहर है जिसने देश को वस्त्र दिए, साइकिल उद्योग को गति दी और छोटे उद्योगों की मजबूत नींव रखी। लेकिन आज हमारे सामने प्रश्न यह नहीं है कि लुधियाना क्या था, बल्कि यह है कि लुधियाना क्या बन सकता है।

लुधियाना शायद देश का ऐसा अनूठा शहर है जहाँ व्यवसाय को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। यहाँ जब कोई किसी नए व्यक्ति से मिलता है तो अक्सर यह नहीं पूछता कि “आप क्या करते हैं?”, बल्कि यह पूछता है, “आपका व्यवसाय क्या है?” यही सोच इस शहर की वास्तविक शक्ति है। यही कारण है कि पंजाब के शीर्ष दस सबसे समृद्ध व्यक्तियों में से अधिकांश लुधियाना से हैं। यहाँ व्यवसाय केवल रोजगार नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा है।

फिर भी यह आश्चर्य का विषय है कि इतनी संभावनाओं के बावजूद लुधियाना ने अभी तक अपनी धरती से पहला यूनिकॉर्न स्टार्टअप नहीं दिया। संभवतः इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहाँ अभी तक ऐसा मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित नहीं हो पाया है जो उभरते उद्यमियों की क्षमता को सही दिशा दे सके।

मेरा पंजाब, विशेष रूप से लुधियाना, के लिए एक सपना है। एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब, और उसके केंद्र में स्थित लुधियाना, भारत के रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। विश्व में शेनझेन (चीन) और डेट्रॉइट (अमरीका) जैसे शहरों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वयं को परिवर्तित किया और वैश्विक पहचान बनाई। उसी प्रकार लुधियाना भी भारत में रक्षा उपकरणों, प्रणालियों और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

लुधियाना के पास स्टील उद्योग, मेटल फैब्रिकेशन, टेक्सटाइल, हैंड टूल्स, ऑटो पार्ट्स, मशीन टूल्स, ईवी कंपोनेंट्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसी विशाल औद्योगिक क्षमता पहले से मौजूद है। ये सभी रक्षा विनिर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक आधार हैं। इसलिए मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में लुधियाना भारत के लिए टैंक, ड्रोन और अत्याधुनिक रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

कल्पना कीजिए कि लुधियाना भविष्य में बख्तरबंद वाहनों के पुर्जे, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम, छोटे हथियारों के कंपोनेंट्स, सुरक्षात्मक उपकरण एवं स्मार्ट टेक्सटाइल, एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र के लिए प्रिसिजन कंपोनेंट्स आदि के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा हो।

यह कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम आवश्यक हैं।

सबसे पहला कदम इकोसिस्टम का निर्माण करना है। स्टार्टअप्स अकेले विकसित नहीं होते। उन्हें मार्गदर्शक, पूंजी, नीतिगत समर्थन और मजबूत नेटवर्क की आवश्यकता होती है। सफल वही शहर बनते हैं जो केवल उद्योग नहीं, बल्कि सम्पूर्ण इकोसिस्टम तैयार करते हैं। इसलिए हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ नवाचार सहज रूप से विकसित हो सके।

दूसरा कदम सहयोग है। सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थान और निवेशकों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक संयुक्त शक्ति के रूप में कार्य करना होगा। डीआरडीओ लैब्स, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, iDEX (Innovations for Defence Excellence) तथा रक्षा क्षेत्र से जुड़ी अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग इस दिशा में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

तीसरा कदम नवाचार है। इसमें विद्यार्थियों और स्टार्टअप्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नियमित स्टार्टअप प्रतियोगिताएँ, मैन्युफैक्चरिंग आधारित स्टार्टअप मेले, स्टार्टअप पिचिंग, फंडिंग और निवेश जैसे प्रयास रक्षा नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेंगे।

चौथा कदम है, सरकारी व्यवस्थाओं में सुधार। Ease of Doing Business अर्थात व्यवसाय करने की सरलता इस सपने को वास्तविकता में बदल सकती है। सिंगल विंडो सिस्टम तथा सभी सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने से स्टार्टअप्स को अनावश्यक लालफीताशाही से मुक्ति मिलेगी।

पाँचवाँ और सबसे महत्वपूर्ण कदम है, उद्योग जगत की भागीदारी। फंडिंग आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उद्योगों का सक्रिय सहयोग। उद्योगों की सहभागिता के बिना इतने बड़े सपने को साकार नहीं किया जा सकता। उद्योगों को कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी तथा अन्य माध्यमों से स्टार्टअप्स का मार्गदर्शन और सहयोग करना होगा।

मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि लुधियाना में लुधियाना एंजल्स नेटवर्क जैसे मंचों के माध्यम से उद्योग जगत पहले ही स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़ चुका है। ‘समागम’ जैसे आयोजन विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने का उत्कृष्ट प्रयास हैं। जब आई.आई.टी., पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के निदेशक, वेंचर कैपिटलिस्ट और उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तित्व, जैसे श्री जे.आर. सिंघल जी, श्री संजीव पाहवा जी, श्री एस.के. राय साहब एक मंच पर आते हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारे स्टार्टअप्स को सीखने और आगे बढ़ने का विशाल अवसर उपलब्ध है।

साथियो,

आज दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ग्रीन टेक्नोलॉजी, डीप टेक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग आने वाले समय की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे समय में पंजाब के उद्योगों और स्टार्टअप्स के सामने एक ऐतिहासिक अवसर है कि वे परंपरागत उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान बनाएं।

उद्योगपतियों और व्यापार जगत के दिग्गजों, प्रगति के इस सफर में हमें एक बात कभी नहीं भूलनी चाहिए। प्रगति वही स्थाई होती है जो प्रकृति के साथ कदम मिलाकर चले।

पंजाब की यह धरती श्री गुरु नानक देव जी की वाणी से पवित्र है, जिन्होंने कहा था, ‘‘पवन गुरू पानी पिता माता धरत महत।।’’ अर्थात, हवा गुरु है, पानी पिता है और धरती माता है।

आज बढ़ते औद्योगीकरण के बीच हमें पर्यावरण संरक्षण की चुनौती को स्वीकार करना होगा। मैं लुधियाना के अपने सभी औद्योगिक भाइयों से विशेष अपील करता हूँ कि आप उद्योगों में पानी के पुनर्चक्रण और शून्य जल अपशिष्ट की नीति अपनाएं ताकि हमारी नदियाँ और भूजल सुरक्षित रहें।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी पहलों का लाभ उठाते हुए हमें फैक्ट्रियों की छतों पर सोलर पैनल लगाने चाहिए। हरित ऊर्जा अपनाकर हम न केवल अपनी उत्पादन लागत कम कर सकते हैं, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट को भी घटा सकते हैं।

लुधियाना को भारत का ‘मैनचेस्टर’ कहा जाता है। यहाँ के उद्यमियों में वह माद्दा है जो शून्य से भी साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं। आपके इसी जज्बे के लिए कुछ लाइनें कहना चाहूँगा, ‘‘चट्टानें रास्ता रोकें तो मोड़ लो धाराएँ, मंजिल खुद चलकर आएगी, बस बढ़ाओ कदम और बढ़ाओ अपनी योजनाएं।’’

अपने भीतर के इस रिस्क लेने के जज्बे को कभी कम मत होने दीजिए। आज का नया भारत रिस्क लेने वाले और नए प्रयोग करने वाले युवाओं का स्वागत करने के लिए तैयार बैठा है।

महान दार्शनिकों और अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि आर्थिक स्वतंत्रता और औद्योगिक प्रगति ही किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और मजबूती की असली रीढ़ होती है। ‘‘उद्योग ही समृद्धि का द्वार है, और नवाचार ही भविष्य का आधार है।’’

देवियो और सज्जनो,

मैं आज के ‘समागम अवॉर्ड्स’ के सभी विजेताओं को विशेष बधाई देता हूँ। उन्हें सम्मानित करना मेरे लिए अत्यंत गौरव और संतोष का क्षण रहा। जब किसी स्टार्टअप या उद्यमी को सम्मान मिलता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होता, बल्कि भविष्य की संभावनाओं, आशाओं और नए भारत के सपनों का सम्मान होता है।

आज हमें एक दिशा में संगठित प्रयास करने होंगे, लुधियाना को “स्टार्टअप्स की नगरी” बनाने के लिए। ‘समागम’ जैसे कार्यक्रम सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे युवा, विद्यार्थी और यहाँ तक कि स्कूलों के छात्र भी इस नवाचार प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनें।

अंत में, मैं केवल इतना कहना चाहूँगा कि कोई भी व्यवस्था उतनी ही अच्छी होती है जितना उसका उद्देश्य होता है। हमारी नैतिकता, मूल्य प्रणाली और राष्ट्रहित इस पूरे इकोसिस्टम की आधारशिला होने चाहिए। यदि केवल धन और लालच ही हमारी प्रेरणा बन जाएँ, तो वही व्यवस्था भविष्य में हमारे लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए हमें सदैव “राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोपरि रखना होगा।

आइए, हम सब मिलकर लुधियाना को वैश्विक नवाचार, उद्यमशीलता और उच्च तकनीकी विनिर्माण का शक्तिशाली केंद्र बनाने का संकल्प लें।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम पंजाब को देश का सबसे समृद्ध, सबसे नवोन्मेषी और सबसे हरा-भरा औद्योगिक राज्य बनाएंगे।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!