SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF BAL SABHA MANN KA SAMVAD 2.0 AT CHANDIGARH ON MAY 22, 2026.

‘बाल सभा-मन का संवाद’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 22.05.2026, शुक्रवारसमयः सुबह 10:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज इस सभागार में कदम रखते ही मुझे जो सकारात्मक ऊर्जा और निश्छल मुस्कान देखने को मिली है, उसने मेरे दिल को पूरी तरह से सराबोर कर दिया है। बच्चों से बात करना और उन्हें सुनना मुझे हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। मुझे बेहद ख़ुशी है की मैं आप सबके बीच एक बार फिर बाल सभा 2.0 के माध्यम से जुड़ पाया और प्यारे बच्चों के साथ कुछ ज्ञान और ख़ुशी के पल बिताने का मौका मिला ।

मैं समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग को इस अद्भुत और संवेदनशील पहल के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। यह एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों की भावनाओं, सपनों, प्रतिभाओं और विचारों को अभिव्यक्ति देने का एक सशक्त मंच है। 

आज के कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय गीत, सरस्वती वंदना, नाटक एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने हम सभी का मन मोह लिया। बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और ऊर्जा वास्तव में प्रेरणादायक है।

आज इस अवसर पर “बाल शक्ति - अधिकार से आत्मविश्वास तक” पुस्तिका का विमोचन बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस पुस्तिका में संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन (UNCRC) के सभी 54 अनुच्छेदों को सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, विकास और सहभागिता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। यह पहल बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में सहायक होगी।

मुझे प्रसन्नता है कि आज “पाठशाला रथ” जैसी महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ भी किया गया है यह पहल उन बच्चों तक मदद पहुंचाएगी जो परिस्थितयों के कारण मुख्यधारा से दूर हो गए है। इस कदम के द्वारा बच्चों को शिक्षा, संरक्षण, कौशल प्रशिक्षण, खेल-कूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जायेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान कर उन्हें शिक्षा एवं बेहतर भविष्य से जोड़ना है। यह वास्तव में बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

मुझे यह जानकर अच्छा लगा की इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को सलाह, मानसिक और सामाजिक सहयोग, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण तथा पौष्टिक भोजन से जुड़ी सहायता दी जाएगी, ताकि उनका मन, स्वास्थ्य और शारीरिक विकास अच्छा बना रहे। मैं उम्मीद करता हूँ की सभी विभाग मिलकर इस पहल को सफल बनाएंगे। मुझे विश्वास है की “पाठशाला रथ” समय के साथ अधिकतम बच्चों के लिए कल्याण कारी सिद्ध होगी

देवियो और सज्जनो,

आज के इस मन का संवाद कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों ने जिस आत्मविश्वास और खुलेपन के साथ अपने विचार, प्रश्न और सपने हमारे साथ साझा किए, वह अत्यंत सराहनीय है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि हमारे बच्चे जागरूक हैं, संवेदनशील हैं और अपने अधिकारों के प्रति सचेत हैं। उनके विचारों में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

ऐसे ही एक सकारात्मक ऊर्जा का उदाहरण हैं चिल्ड्रन होम स्नेहालय फॉर बॉयज़ का युवा वंश तायल, जिसने अपनी असाधारण सामाजिक सेवा एवं मानवता के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 में प्राप्त किया। कम आयु में अपने माता-पिता को खोने के बावजूद वंश ने साहस, संवेदनशीलता और करुणा की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है।

स्वयं के जीवन में संघर्ष का सामना करते हुए इस युवा ने बाल देखभाल संस्थान में छोटे बच्चों एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल में निस्वार्थ भाव से जो सहयोग किया है वह असाधारण है। मेरा आशीर्वाद और शुभकामना हमेशा तुम्हारे साथ है।

मैं सभी अभिभावकों, शिक्षकों और बाल कल्याण से जुड़े अधिकारियों से आग्रह करता हूँ कि बच्चों की बातों को केवल सुनें ही नहीं, बल्कि उन्हें गंभीरता से समझें भी। कई बार बच्चों के छोटे-छोटे विचार समाज में बड़े परिवर्तन का आधार बन जाते हैं।

मेरे प्यारे बच्चों,

आप केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं। आपमें से प्रत्येक के भीतर प्रतिभा, ऊर्जा और असीम संभावनाएँ छिपी हुई हैं। स्वयं पर विश्वास रखिए, निरंतर सीखते रहिए और हमेशा अच्छे विचारों तथा अच्छे संस्कारों को अपने जीवन का आधार बनाइए।

 

आज मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूँ, जो आपको जीवन भर हिम्मत देगी।

एक बार एक मूर्तिकार जंगल से गुजर रहा था। उसे रास्ते में एक बहुत ही साधारण और खुरदरा पत्थर मिला। उसने उस पत्थर को उठाया, अपनी छेनी और हथौड़ी निकाली और उस पर वार करना शुरू किया। जैसे ही मूर्तिकार ने चोट की, पत्थर के भीतर से रोने और कराहने की आवाज आई, ‘‘मुझे छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है!’’ मूर्तिकार को दया आ गई और उसने उस पत्थर को वहीं छोड़ दिया।

वह थोड़ा आगे बढ़ा, तो उसे एक और वैसा ही साधारण पत्थर मिला। मूर्तिकार ने फिर अपनी छेनी उठाई और उस पर तराशना शुरू किया। इस दूसरे पत्थर को भी दर्द हुआ, लेकिन उसने मन ही मन सोचा, ‘‘अगर मैं इस दर्द को सह गया, तो शायद मेरा रूप बदल जाएगा।’’ उसने चुपचाप सारे दर्द को सहा, पत्थर की हर मार को बर्दाश्त किया। कुछ ही घंटों में मूर्तिकार ने उस साधारण से पत्थर को भगवान की एक अत्यंत सुंदर और भव्य मूर्ति में बदल दिया।

मूर्तिकार ने उस मूर्ति को एक पेड़ के नीचे रख दिया। कुछ दिनों बाद वहाँ एक भव्य मंदिर बन गया। उस मूर्ति की रोज़ पूजा होने लगी, लोग दूर-दूर से आकर उस पर फूल-मालाएं चढ़ाने लगे। और जानते हैं, जो पहला पत्थर दर्द के डर से भाग गया था, उसे लोगों ने मंदिर के दरवाजे पर रख दिया, जहाँ हर आने-जाने वाला व्यक्ति उस पर नारियल फोड़ता था।

प्यारे बच्चों, हमारे जीवन की परिस्थितियाँ भी उस छेनी और हथौड़ी की मार जैसी होती हैं। कभी-कभी हमें संघर्ष करना पड़ता है, कठिनाइयाँ आती हैं, हमें लगता है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है। लेकिन याद रखना, जो बच्चा इन मुश्किलों और संघर्षों के दर्द को सहकर, मुस्कुराते हुए मेहनत करता रहता है, वह एक दिन दुनिया के लिए ‘भगवान की सुंदर मूर्ति’ की तरह पूजनीय और सफल बन जाता है। और जो परिस्थितियों से हार मान लेता है, उसका जीवन संघर्षों से घिरा रहता है। इसलिए अपनी मुश्किलों से कभी डरना मत, वे तुम्हें तराशने आई हैं।

मेरे बच्चों, मैं चाहता हूँ कि आप जीवन में हमेशा इन तीन बातों को याद रखें, ‘‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’

हमारे देश के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन याद रखिए, जो बचपन में अखबार बेचते थे, लेकिन अपने हौसले के दम पर देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बने। आपके आज के हालात यह तय नहीं कर सकते कि आपका कल कितना शानदार होगा!

कभी भी छोटा सोचने की गलती मत करना। आप जो बनना चाहते हैं, डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक, खिलाड़ी, प्रशासनिक अधिकारी या कलाकार, पूरी शिद्दत से उसके लिए मेहनत कीजिए। चंडीगढ़ प्रशासन आपके सपनों की उड़ान में कभी पंख कम नहीं होने देगा।

पढ़ाई के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनना सबसे जरूरी है। हमेशा दूसरों की मदद करें, सच बोलें, अपने शिक्षकों का आदर करें और आपस में मिलजुल कर रहें।

मेरे प्यारे बच्चों, 

आज भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ युवाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। आप सभी केवल हमारे देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि “विकसित भारत 2047” के महान संकल्प की सबसे बड़ी शक्ति हैं। विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और संवेदनशील भारत का निर्माण आप जैसे जागरूक, शिक्षित और आत्मविश्वासी बच्चे ही करेंगे।

इसलिए यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम आपको सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छे संस्कार, बेहतर स्वास्थ्य और आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करें। जब हमारे बच्चे सशक्त होंगे, तभी भारत सशक्त होगा और “विकसित भारत” का सपना साकार होगा।

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार आप सभी के सुनहरे भविष्य, सुरक्षा और उत्तम स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह संकल्पित है। सरकार का विजन है, ‘कोई भी बच्चा पीछे न छूटे’। इसी सोच के साथ देश भर में कई ऐतिहासिक और दूरगामी योजनाएं चलाई जा रही हैं। 

‘मिशन वात्सल्य’ बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत बाल गृहों को आधुनिक एवं सुविधासंपन्न बनाया जा रहा है। साथ ही, 18 वर्ष की आयु के बाद संस्थानों से बाहर आने वाले बच्चों को ‘आफ्टर केयर’ के तहत आर्थिक सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना उन बच्चों के लिए संबल बनकर खड़ी है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने माता-पिता को खो दिया। इसके अंतर्गत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा तथा 18 वर्ष की आयु के बाद मासिक वजीफा प्रदान किया जा रहा है।

पीएम पोषण योजना और पोषण 2.0 जैसी पहलें स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों के माध्यम से बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके शारीरिक और मानसिक विकास को सशक्त बना रही हैं। वहीं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और 24×7 चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा व आपातकालीन सहायता के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम जैसे सशक्त कानून बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करते हुए उन्हें सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण में न्याय एवं पुनर्वास प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप निपुण भारत मिशन से प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ किया जा रहा है। वहीं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान बालिकाओं के सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहा है।

इन सभी योजनाओं और पहलों को प्रभावी रूप से धरातल पर लागू करने के लिए ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ एक मजबूत वैधानिक आधार प्रदान करता है। चंडीगढ़ का समाज कल्याण विभाग भी इसी भावना के अनुरूप प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और पारिवारिक वातावरण सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

चंडीगढ़ प्रशासन के लिए हमारे चाइल्ड केयर संस्थानों में रह रहे बच्चे किसी भी अन्य बच्चे की तरह ही हमारे अपने बच्चे हैं। आपका स्वास्थ्य, आपकी शिक्षा, आपका पोषण और आपके अधिकारों की सुरक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्रशासनिक प्राथमिकता है।

हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे सभी संस्थानों में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं हों, कौशल विकास के अवसर हों और खेल-कूद का बेहतरीन माहौल हो। आज शुरू हुआ ‘पाठशाला रथ’ और ‘बाल शक्ति-अधिकार से आत्मविश्वास तक’ बुकलेट इसी दिशा में हमारे बढ़ते कदम हैं।

मुझे यह देखकर भी खुशी हुई कि विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बच्चों के साथ इस संवाद में सक्रिय भागीदारी की। यह बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला अनुभव है और इसके लिए मैं सभी अधिकारियों एवं विभागों का धन्यवाद करता हूँ।

आज ‘मन का संवाद 2.0’ के इस मंच से मैं समाज कल्याण विभाग, हमारे सभी शिक्षकों और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों से भी यह अपील करता हूँ कि इन बच्चों को केवल हमारी सहानुभूति की नहीं, बल्कि हमारे विश्वास और हमारे साथ की जरूरत है। आइए, हम सब मिलकर इनके मार्गदर्शक बनें।

मैं एक बार फिर समाज कल्याण विभाग एवं इस आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई देता हूँ। आपने बच्चों को केवल प्रस्तुति का मंच नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और सशक्तिकरण का अवसर प्रदान किया है।

मेरे प्यारे बच्चों, आपकी आँखें बहुत कीमती हैं क्योंकि इनमें भारत का भविष्य पलता है। खूब पढ़ो, खूब खेलो, खिलखिलाकर मुस्कुराओ और देश का नाम रोशन करो।

किसी कवि की दो पंक्तियों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ, ‘‘खुद पर भरोसा रखो तो ताकत बन जाती है, और आपके हौसलों से ही इस देश की तकदीर बदल जाती है।’’

आप सभी बच्चों को मेरा ढेर सारा प्यार और उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!