SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INAUGURATION OF THE STATE-OR-ART DAS AUDITORIUM AT THE DAS & BROWN EXPERIENTIAL LEARNING SCHOOLS ON THE OCCASION OF THE DCM GROUP OF SCHOOLS’ 80 ANNIVE
- by Admin
- 2026-06-18 19:20
डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के ‘दास ऑडिटोरियम’ के उद्घाटन पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 18.06.2026, गुरूवार समयः शाम 5:30 बजे स्थानः पंचकूला
नमस्कार!
आज का यह अवसर बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली है। मुझे बेहद प्रसन्नता है कि मैं डी.सी.एम. ग्रुप ऑफ स्कूल्स की स्थापना के 80वें वर्षगांठ के इस उपलक्ष्य में, ’दास एंड ब्राउन एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल’ में इस नवनिर्मित और अत्याधुनिक ‘दास ऑडिटोरियम’ के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बना हूँ।
आठ दशक, यानी 80 साल, का यह सफर केवल समय का बीतना नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण, चरित्र-निर्माण और ज्ञान की अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखने का एक अनवरत यज्ञ है। इस शानदार यात्रा के लिए मैं डी.सी.एम. परिवार के हर एक सदस्य को दिल की गहराइयों से बधाई देता हूँ।
आज जब हमने इस भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया है, तो हमें इतिहास के उन पन्नों को जरूर पलटना चाहिए जहाँ इस महान वटवृक्ष का बीज बोया गया था। वर्ष 1946 में, जब हमारा देश आज़ादी की दहलीज पर खड़ा था, तब पंजाब के मालवा क्षेत्र में आधुनिक और अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा का अभाव था। उस दौर में, एक महान शिक्षाविद्, दूरदर्शी और परोपकारी व्यक्तित्व स्वर्गीय श्री एम. आर. दास जी ने एक सपना देखा था। उन्होंने देश के शैक्षिक मानचित्र को बदलने के संकल्प के साथ ‘डीसेंट चिल्ड्रन मॉडर्न स्कूल’ की स्थापना की।
इस पुनीत कार्य में उन्हें एक और महान शिक्षाविद् सुश्री सी. ब्राउन का साथ मिला। इन दोनों महान विभूतियों ने उस दौर में लीक से हटकर सोचने का साहस किया। पंजाब के फिरोजपुर जैसे सीमावर्ती और ऐतिहासिक क्षेत्र से शुरू हुई यह यात्रा आज एक विशाल कारवां बन चुकी है।
अपनी छोटी-सी शुरुआत से डीसीएम ग्रुप आज एक प्रसिद्ध शैक्षिक संस्था बन चुका है। आज इसकी 10 शाखाएँ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में शिक्षा का प्रकाश फैला रही हैं। ऐतिहासिक सीमावर्ती जिले फिरोजपुर से संचालित यह समूह आज भी साहस, देशभक्ति, समाज सेवा और जिम्मेदारी की भावना को आगे बढ़ा रहा है। इसी भावना ने शुरू से ही इस संस्था को एक अलग पहचान दी है।
मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता होती है कि इस समूह के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का अनूठा प्रदर्शन किया है। नासा जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर सहभागिता, ’आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’, ’आंत्रप्रेन्योरशिप’, ’वोकेशनल एजुकेशन’, ’फाइनेंशियल लिटरेसी’ और ‘नवाचार’ के क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि यह संस्थान भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान करता है।
इसके पूर्व विद्यार्थी आज देश और दुनिया के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों, उद्योगों, विश्वविद्यालयों, प्रशासनिक सेवाओं तथा विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। कई पूर्व छात्र आईएएस, आईपीएस तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं, जबकि अनेक पूर्व विद्यार्थी उद्योग, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
मैं सराहना करना चाहूँगा कि ’डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ सीमावर्ती क्षेत्रों, ग्रामीण समुदायों तथा समाज के वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा के माध्यम से अवसरों का विस्तार करना वास्तव में राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है।
मैं विशेष रूप से ’डॉ. अनिरुद्ध गुप्ता’ जी को बधाई देना चाहूँगा, जिन्हें शिक्षा, नवाचार और आंत्रप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्हें देश के ’टॉप 20 एजु-प्रेन्योर्स’ में स्थान दिया गया है तथा शिक्षा और उद्यमशीलता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उनके नेतृत्व में ’डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ ने विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में प्रेरणादायक योगदान दिया है। ऐसे शिक्षाविद् और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं।
साथियो,
हम सभी जानते हैं कि विकसित भारत के निर्माण और हमारे देश को विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में स्थापित करने के राष्ट्रीय संकल्प में शिक्षा की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। मुझे प्रसन्नता है कि ’डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ इस दिशा में सार्थक योगदान दे रहा है और विद्यार्थियों को 21वीं सदी के कौशलों, वैश्विक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है।
इसी दूरदर्शी सोच और भविष्य-केंद्रित विज़न को आगे बढ़ाते हुए, ’डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ ने गत वर्ष ट्राइसिटी में ’दास एंड ब्राउन एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल’ की स्थापना की। यह संस्थान शिक्षा को अनुभव, रचनात्मकता, जिज्ञासा, नवाचार और वास्तविक जीवन से जोड़ने का एक प्रेरणादायी प्रयास है।
आज मुझे इसी दूरदर्शी पहल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव, नव-निर्मित ’दास ऑडिटोरियम’ का लोकार्पण करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा समस्त ’डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स’ परिवार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
आज यह ‘दास ऑडिटोरियम’ स्वर्गीय श्री एम. आर. दास जी की पावन स्मृति और उनके अद्वितीय विज़न को हमारी एक सच्ची और भावभीनी श्रद्धांजलि है। शायद ऐसे ही महान व्यक्तित्वों के लिए किसी कवि ने कहा है, ‘‘लीक पर वे चलें जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं, हमें तो जो हमारी यात्रा से बने, ऐसे अनिर्मित पथ प्यारे हैं।’’
मुझे बताया गया है कि यह अत्याधुनिक ऑडिटोरियम लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और इसमें 700 लोगों के बैठने की क्षमता है। यह ऑडिटोरियम आधुनिक ऑडियो-वीडियो सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित है।
मुझे विश्वास है कि यह सभागार विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करेगा और पंजाब की समृद्ध कला, संस्कृति तथा परंपराओं के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह स्थान आने वाले समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का साक्षी बनेगा।
हमारी नई शिक्षा नीति भी इसी बात पर बल देती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें खेल, कला, संस्कृति, रचनात्मकता और नवाचार का भी समावेश हो। मुझे प्रसन्नता है कि यह ऑडिटोरियम इसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।
साथियो,
आज इस मंच से मैं हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक विशेष संदेश देना चाहता हूँ। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसके युवा होते हैं। आधुनिक भवन, प्रयोगशालाएँ, ऑडिटोरियम, पुस्तकालय और अन्य सुविधाएँ तभी सार्थक होती हैं, जब उनका उपयोग जिज्ञासा, परिश्रम और बड़े सपनों को सही दिशा देने में हो।
आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस साइंस, डेटा साइंस और डिजिटल इनोवेशन का युग है। लेकिन तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, चरित्र, करुणा, ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता का महत्व कभी कम नहीं होगा। हमारी युवा पीढ़ी को आधुनिक भी बनना है और मूल्यवान भी; सफल भी होना है और सार्थक भी।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” युवाओं को बड़े लक्ष्य रखने चाहिए, ईमानदार परिश्रम करना चाहिए और असफलता से घबराना नहीं चाहिए। असफलता अंत नहीं, बल्कि प्रयास को बेहतर बनाने का अवसर है।
हमारे युवाओं के सामने अवसरों की पूरी दुनिया खुली है, पर अवसर उन्हीं को मिलते हैं जो तैयार रहते हैं। इसलिए समय का सम्मान, तकनीक का संतुलित उपयोग, ज्ञान के साथ विनम्रता, प्रतिस्पर्धा के साथ सद्भाव और आधुनिकता के साथ संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक है।
पंजाब गुरुओं, संतों, वीरों, किसानों, सैनिकों, कलाकारों और उद्यमियों की धरती है। इस धरती ने देश को अन्न, बलिदान, संगीत और साहस दिया है। अब समय है कि पंजाब ज्ञान, नवाचार, शिक्षा और नैतिक नेतृत्व के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाए।
हमारी युवा पीढ़ी ही पंजाब को “रंगला पंजाब” के सपने से आगे बढ़ाकर “नवाचारी पंजाब”, “शिक्षित पंजाब” और “विकसित पंजाब” बना सकती है। इसके लिए तीन बातें आवश्यक हैं, परिश्रम, अनुशासन और मूल्य। परिश्रम उपलब्धि देता है, अनुशासन सपनों को दिशा देता है और मूल्ययुक्त ज्ञान समाज को ऊँचा उठाता है।
आदरणीय शिक्षकगण,
किसी भी शिक्षण संस्था की आत्मा उसके शिक्षक होते हैं। भवन संस्था का शरीर हो सकता है, पाठ्यक्रम उसका ढांचा हो सकता है, परंतु शिक्षक उसकी आत्मा होते हैं।
एक शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता; वह दृष्टि देता है। एक शिक्षक केवल उत्तर नहीं बताता; वह प्रश्न पूछना सिखाता है। एक शिक्षक केवल करियर नहीं बनाता; वह चरित्र बनाता है।
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी ने कहा था"Teaching is a very noble profession that shapes the character, calibre and future of an individual." आपके हाथों में केवल बच्चों की कॉपियाँ नहीं होतीं; आपके हाथों में राष्ट्र का भविष्य होता है। हर बच्चा अलग है। किसी में वैज्ञानिक छिपा है, किसी में कलाकार, किसी में खिलाड़ी, किसी में लेखक, किसी में उद्यमी, किसी में प्रशासक और किसी में समाज-सुधारक। शिक्षक का महान कार्य है, उस छिपी हुई संभावना को पहचानना और उसे सही दिशा देना।
आज शिक्षा का स्वरूप बदल रहा है। अब शिक्षक केवल ज्ञान के स्रोत नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक, मेंटर और जीवन-निर्माता हैं। ए.आई. और डिजिटल तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन विद्यार्थी के मन में आत्मविश्वास जगाने का कार्य केवल शिक्षक कर सकता है। मशीन उत्तर दे सकती है, परंतु मूल्य नहीं दे सकती। तकनीक गति दे सकती है, परंतु दिशा शिक्षक ही देता है।
मैं आप सभी शिक्षकों को प्रणाम करता हूँ और आपसे आग्रह करता हूँ कि आप बच्चों को केवल सफल नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनाएँ।
याद रखिए, ‘‘शिक्षक वह मोमबत्ती है जो खुद जलकर दूसरों की दुनिया को रोशन करती है।’’ आप पर यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि आप बच्चों को केवल परीक्षा पास करना न सिखाएं, बल्कि उन्हें ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को पूरा करने वाला एक जिम्मेदार नागरिक बनाएं।
देवियो और सज्जनो,
आज डी.सी.एम. ग्रुप अपनी स्थापना के 80वें वर्ष में खड़ा है। पीछे देखने पर एक गौरवशाली इतिहास दिखाई देता है। सामने देखने पर एक उज्ज्वल भविष्य दिखाई देता है। और आज का यह दास ऑडिटोरियम उस इतिहास और भविष्य के बीच एक सशक्त सेतु है।
मैं चाहूँगा कि यह ऑडिटोरियम केवल वार्षिक समारोहों तक सीमित न रहे। यह विचारों का खुला मंच बने। यहाँ विद्यार्थी संविधान पर चर्चा करें, विज्ञान पर प्रयोग साझा करें, पर्यावरण संरक्षण पर संकल्प लें, नशा-मुक्त समाज का संदेश दें, महिला सशक्तिकरण पर संवाद करें, भारतीय संस्कृति पर प्रस्तुतियाँ दें और वैश्विक मुद्दों पर अपनी समझ विकसित करें।
मैं डी.सी.एम. ग्रुप से आग्रह करूँगा कि इस ऑडिटोरियम को एक "Centre of Excellence for Student Expression" के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ हर विद्यार्थी को बोलने, सोचने और नेतृत्व करने का अवसर मिले।
मैं स्व. श्री एम. आर. दास जी की पावन स्मृति को नमन करता हूँ। मैं उन सभी शिक्षकों, प्राचार्यों, प्रबंधकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और पूर्व विद्यार्थियों को भी नमन करता हूँ जिन्होंने इस संस्था को ऊँचाई तक पहुँचाने में अपना योगदान दिया।
आज की यह शाम इसलिए भी विशेष है क्योंकि ’द पंजाब प्रोजेक्ट’ के कलाकारों ने हमें पंजाब की आत्मा से जोड़ने वाली एक अद्भुत सांगीतमय और सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव कराया है। पंजाब से प्रेरित यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध विरासत, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उत्सव है। ऐसी प्रस्तुतियाँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। मैं ’द पंजाब प्रोजेक्ट’ की पूरी टीम, कलाकारों और संगीतकारों को इस उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
अंत में, मैं डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के प्रबंधन को पुनः साधुवाद देता हूँ जिन्होंने शिक्षा की इस अलख को 80 वर्षों से लगातार जलाए रखा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि ’दास एंड ब्राउन एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल’ और ’दास ऑडिटोरियम’ आने वाले वर्षों में शिक्षा, नवाचार, खेल, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेंगे तथा देश के लिए उत्कृष्ट नागरिक तैयार करते रहेंगे।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं एक बार पुनः विद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई देता हूँ और इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिंद!जय भारत!