SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERACTION WITH MEMBERS OF SENIOR JOURNALIST FORUM AT PUNJAB LOK BHAVAN ON JUNE 20, 2026.
- by Admin
- 2026-06-20 13:35
‘सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम के पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ संवाद’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 20.06.2026, शनिवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
लोक भवन में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूँ कि मुझे उन वरिष्ठ पत्रकारों से मिलने का अवसर प्राप्त हो रहा है, जिन्होंने अपने जीवन के कई दशक पत्रकारिता जैसे महान और उत्तरदायी पेशे को समर्पित किए हैं।
आप में से अनेक ऐसे हैं जिन्होंने हमारे क्षेत्र और देश के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक जीवन की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं को न केवल देखा है, बल्कि उन्हें अपनी लेखनी और दृष्टि के माध्यम से समाज तक पहुँचाया है। आपकी रिपोर्टिंग, विश्लेषण और टिप्पणियों ने जनमत को दिशा देने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुझे जानकारी मिली है कि वर्ष 2025 में स्थापित इस सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम का गठन पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के उन वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा किया गया है, जो चंडीगढ़ में रह रहे हैं। कई मायनों में, यह फोरम समय की मांग था।
जीवन के इस पड़ाव पर, अन्य लोगों की तरह वरिष्ठ पत्रकारों को भी एक ऐसे साझे मंच की आवश्यकता होती है जहाँ वे आपस में मिल सकें, सुख-दुख साझा कर सकें और अपने अनुभवों को बाँट सकें। इसके साथ ही, यह मंच उनकी समस्याओं को सही अधिकारियों तक पहुँचाने और उनका समाधान खोजने का एक बेहतरीन माध्यम भी है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम, चंडीगढ़ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि वरिष्ठ पत्रकारों के सम्मान, कल्याण और सशक्तिकरण के लिए समर्पित एक संवेदनशील एवं सार्थक मंच है। इस मंच का उद्देश्य उन वरिष्ठ पत्रकारों को सहयोग प्रदान करना है, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज को जागरूक बनाने और जनहित के मुद्दों को उठाने में समर्पित किया है।
यह फोरम आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे पत्रकारों को सहायता उपलब्ध कराने, चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी सहयोग सुनिश्चित करने तथा वरिष्ठ पत्रकारों के अधिकारों, हितों और सम्मान की रक्षा के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है।
विशेष रूप से यह फोरम वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभव, ज्ञान और दूरदृष्टि को समाज के हित में उपयोग करने का अवसर प्रदान करता है। युवा पत्रकारों के मार्गदर्शन, ज्ञान-साझाकरण और पत्रकारिता के उच्च आदर्शों के संवर्धन में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह फोरम इस विश्वास को साकार करता है कि पत्रकारिता से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन समाज और राष्ट्र के प्रति पत्रकार का दायित्व कभी समाप्त नहीं होता।
वास्तव में, यह फोरम अनुभव, प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानजनक, सक्रिय और सार्थक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान कर रहा है। मुझे विश्वास है कि सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम भविष्य में भी पत्रकारों के कल्याण, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।
साथियो,
आज मैं आप सभी वरिष्ठ पत्रकारों से विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि आप वह पीढ़ी हैं, जिसने पत्रकारिता का एक लंबा और ऐतिहासिक परिवर्तन अपनी आँखों से देखा है। आपने हाथ से समाचार लिखने के दौर से लेकर आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग तक की यात्रा तय की है।
आप उस समय के साक्षी हैं, जब खबरें हाथ से लिखकर बसों के माध्यम से समाचार-पत्रों के मुख्यालय तक भेजी जाती थीं और कई बार इसके लिए बस कंडक्टरों की सहायता लेनी पड़ती थी। फिर टाइपराइटर, टेलीप्रिंटर और फैक्स का दौर आया। उसके बाद कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल पत्रकारिता और अब ए.आई. आधारित पत्रकारिता का समय है। हर दौर में आपने स्वयं को बदला, नई तकनीक सीखी और पत्रकारिता के धर्म को निभाते हुए समाज को सूचना और दिशा देने का कार्य किया।
एक समय था जब समाचार-पत्रों की संख्या सीमित थी, पत्रकार कम थे, लेकिन उनकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बहुत ऊँची थी। पत्रकार को समाज में सम्मान, विश्वास और नैतिक साहस के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। उस दौर में संसाधन कम थे, लेकिन प्रतिबद्धता गहरी थी; सुविधाएँ सीमित थीं, लेकिन सत्य के प्रति निष्ठा अटूट थी।
समय के साथ मीडिया का स्वरूप बदला है। पत्रकारिता का विस्तार हुआ है, प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और तकनीक ने इसे तेज़ तथा व्यापक बनाया है। लेकिन इस विस्तार के साथ कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। कभी-कभी तेजी से आगे बढ़ने की होड़ में तथ्य-जांच, संतुलन और संवेदनशीलता प्रभावित होती दिखाई देती है। सनसनी, तात्कालिकता और लोकप्रियता की दौड़ में पत्रकारिता से जुड़े सत्य, निष्पक्षता, मर्यादा और जनहित जैसे मूल्य और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
ऐसे समय में आप जैसे वरिष्ठ पत्रकारों की भूमिका और बढ़ जाती है। आपका अनुभव नई पीढ़ी को यह सिखा सकता है कि खबर केवल सबसे पहले देने की वस्तु नहीं है, बल्कि सही, संतुलित और जिम्मेदारी से देने का दायित्व है। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना, लोकतंत्र को मजबूत बनाना और जनहित की आवाज़ को सम्मानपूर्वक सामने लाना है।
मेरे प्रिय वरिष्ठ पत्रकारो,
आप समाज के उस विशिष्ट वर्ग से हैं, जिसकी पहचान केवल उसके पेशे से नहीं, बल्कि उसके विचार, दृष्टि और सामाजिक योगदान से होती है। आप अपने परिवारों और विशेष रूप से अपने बच्चों के भविष्य के प्रति सदैव सजग और संवेदनशील रहे हैं।
मुझे विश्वास है कि आपमें से अनेक के बच्चे आज देश और समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रहे होंगे। कोई प्रशासनिक सेवाओं में, कोई चिकित्सा के क्षेत्र में, कोई न्यायपालिका, शिक्षा, उद्योग, सेना, विज्ञान अथवा अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे रहा होगा। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन मूल्यों, संस्कारों और अनुशासन का परिणाम है जो उन्हें अपने घर और परिवार से प्राप्त हुए हैं।
आप समाज के लिए एक प्रेरणा हैं। आपने यह सिद्ध किया है कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद ईमानदारी, परिश्रम, सत्यनिष्ठा और सामाजिक प्रतिबद्धता के बल पर न केवल स्वयं सम्मान अर्जित किया जा सकता है, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए भी सफलता और संस्कारों की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
आज जब समाज अनेक प्रकार के बदलावों और चुनौतियों से गुजर रहा है, तब आपकी जीवन-यात्रा युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। आपकी उपलब्धियाँ केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज निर्माण की एक प्रेरणादायी कहानी भी हैं।
देवियो और सज्जनो,
पत्रकारिता को अक्सर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह जनता और शासन के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उनका क्रियान्वयन करती है, न्यायपालिका न्याय सुनिश्चित करती है, और पत्रकारिता जनता की आवाज़ को इन संस्थाओं तक पहुँचाती है।
मीडिया की भूमिका केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग करने तक सीमित नहीं है। यह नागरिकों को जागरूक बनाने, शासन को जवाबदेह बनाने, जनहित के मुद्दों को सामने लाने और स्वस्थ लोकतांत्रिक विमर्श को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। एक सशक्त लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र, जिम्मेदार और विश्वसनीय मीडिया का होना अत्यंत आवश्यक है।
पत्रकारिता की यात्रा मानव सभ्यता के विकास की यात्रा के साथ-साथ चलती रही है। भारत में पत्रकारिता केवल समाचारों के प्रसार का माध्यम नहीं रही, बल्कि सामाजिक जागरण, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की एक सशक्त वाहक भी रही है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं ने जनमत को संगठित करने, लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम थी।
भारत की पत्रकारिता परंपरा हमें अनेक महान व्यक्तित्वों की याद दिलाती है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने समाचार पत्र केसरी और मराठा के माध्यम से स्वतंत्रता की अलख जगाई। महात्मा गांधी ने यंग इंडिया, हरिजन और नवजीवन जैसे प्रकाशनों के माध्यम से सत्य, अहिंसा और सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। गणेश शंकर विद्यार्थी ने निर्भीक पत्रकारिता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समाज के वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज़ को बुलंद किया। उनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य सत्ता या लोकप्रियता नहीं, बल्कि सत्य और जनहित की सेवा है।
कहा गया है, ‘‘कलम की नोक पर इतिहास लिखा जाता है।’’ यह कथन पत्रकारिता की शक्ति और उसकी जिम्मेदारी दोनों को अभिव्यक्त करता है। एक संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकार समाज की आँख, कान और अंतरात्मा के समान होता है। वह उन मुद्दों को सामने लाता है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और उन लोगों की आवाज़ बनता है जिनकी आवाज़ दूर तक नहीं पहुँच पाती।
पत्रकारिता ने समय के साथ अनेक चरणों का विकास देखा है। प्रिंट मीडिया के युग से लेकर रेडियो, दूरदर्शन, सैटेलाइट चैनलों और आज के डिजिटल तथा सोशल मीडिया के दौर तक पत्रकारिता की प्रकृति और स्वरूप में व्यापक परिवर्तन आया है।
आज मीडिया का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पत्रकारिता के सामने अभूतपूर्व अवसर भी हैं और गंभीर चुनौतियाँ भी। डिजिटल क्रांति ने समाचारों के संकलन, प्रसारण और उपभोग की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। आज सूचनाएँ कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती हैं। इससे जहाँ सूचना तक पहुँच का विस्तार हुआ है, वहीं पत्रकारों की जिम्मेदारी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है कि वे सत्यता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के उच्चतम मानकों का पालन करें।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि समाचारों की गति से अधिक महत्वपूर्ण उनकी सत्यता होती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘‘सत्य को हजार तरीकों से कहा जा सकता है, फिर भी वह सत्य ही रहता है।’’ यह विचार पत्रकारिता की आत्मा को अभिव्यक्त करता है। पत्रकार का दायित्व किसी विचारधारा का प्रचार करना नहीं, बल्कि सत्य को समाज के सामने ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना है।
ऐसे समय में, जब भ्रामक सूचनाएँ और सनसनीखेज सामग्री बहुत तेजी से फैल सकती हैं, तब पत्रकारिता के सत्य, निष्पक्षता, ईमानदारी और जनसेवा जैसे मूल मूल्य और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकारों की भूमिका यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने अनुभव, ज्ञान और विवेक के माध्यम से वे नई पीढ़ी के पत्रकारों का मार्गदर्शन कर सकते हैं तथा पत्रकारिता के इन मूल आदर्शों को सुरक्षित रख सकते हैं।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम अनुभवी मीडिया पेशेवरों को समकालीन मुद्दों से जुड़े रहने तथा अपने बहुमूल्य विचारों और अनुभवों के माध्यम से समाज को दिशा देने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे फोरम संस्थागत स्मृतियों को संरक्षित करने और जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ की पत्रकारिता परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। यहाँ के मीडिया जगत ने सदैव विकास, सामाजिक सरोकारों और आमजन की आकांक्षाओं को रचनात्मक ढंग से सामने लाने का कार्य किया है। मुझे विश्वास है कि यह गौरवशाली परंपरा आने वाले वर्षों में भी निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
मैं फोरम के पदाधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना करता हूँ, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। उनका सामूहिक अनुभव ज्ञान और समझ का एक अमूल्य भंडार है, जिसका लाभ समाज को निरंतर मिलता रहेगा।
आज का यह संवाद केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण अवसर है। मैं शासन, विकास, जनकल्याण तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में मीडिया की भूमिका से जुड़े विषयों पर आपके विचार, सुझाव और अनुभव सुनने के लिए उत्सुक हूँ।
मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि संस्थाओं और मीडिया के बीच इस तरह का सकारात्मक जुड़ाव सुशासन और जनता के विश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे संवाद आपसी समझ को बढ़ाते हैं और हमें राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य की दिशा में मिलकर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
अपने संबोधन के समापन से पूर्व मैं वरिष्ठ पत्रकार फोरम के सभी सदस्यों को पत्रकारिता और समाज के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद और सम्मान व्यक्त करता हूँ। आपकी निष्ठा, पेशेवर प्रतिबद्धता और जनहित के प्रति समर्पण वास्तव में प्रशंसनीय है।
मैं एक बार पुनः आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूँ तथा वरिष्ठ पत्रकार फोरम की भावी गतिविधियों और प्रयासों की निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!
जय भारत!