SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF ACHIEVERS OF NORTH FELICITATION CEREMONY BY ECONOMIC TIMES AT CHANDIGARH ON JUNE 20, 2026.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के ‘अचीवर्स ऑफ द नॉर्थ’ सम्मान समारोह पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 20.06.2026, शनिवारसमयः शाम 7:30 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

‘अचीवर्स ऑफ द नॉर्थ’ सम्मान समारोह में आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। द टाइम्स ऑफ इंडिया और इकोनॉमिक्स टाइम्स की यह पहल उन असाधारण व्यक्तित्वों को सम्मानित करने और उनके योगदान का अभिनंदन करने का एक सराहनीय प्रयास है, जिनकी दूरदृष्टि, उद्यमशीलता और अथक परिश्रम ने उत्तर भारत की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को नई दिशा और नई गति प्रदान की है।

मैं आज इस मंच से सम्मानित होने वाले व्यवसाय, उद्योग, नवाचार, स्टार्टअप और सामाजिक उद्यमिता के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उत्तर भारत के सभी 25 विशिष्ट व्यक्तित्वों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आपकी उपलब्धियाँ उत्तर भारत की प्रगति, परिश्रम और संभावनाओं का प्रेरणादायी उदाहरण हैं।

इस प्रेरणादायी और विचारपूर्ण पहल के सफल आयोजन के लिए मैं द टाइम्स ऑफ इंडिया और इकोनॉमिक टाइम्स की पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता हूँ। विशेष रूप से सुश्री अंजलि कुमरिया, श्री मनीष मल्होत्रा और श्री प्राकुल वशिष्ठ के प्रयासों की मैं सराहना करता हूँ, जिन्होंने उत्तर भारत की उपलब्धियों, उद्यमशीलता और प्रेरणादायी सफलताओं को एक सम्मानजनक मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

180 से अधिक वर्षों की गौरवशाली यात्रा तय कर चुका यह प्रतिष्ठित समाचार संस्थान हमारे देश की पत्रकारिता का एक विश्वसनीय और सम्मानित स्तंभ रहा है। इसने केवल घटनाओं का लेखा-जोखा ही प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि समाज की आकांक्षाओं को स्वर दिया, जनमत को दिशा प्रदान की और बदलते भारत की चेतना को प्रतिबिंबित किया है। ऐसे मंच उपलब्धियों का सम्मान करने के साथ-साथ नई पीढ़ियों को निडर होकर सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी देते हैं।

कहा जाता है कि “कलम की ताकत तलवार से अधिक होती है।” इतिहास इसका साक्षी है कि जब-जब समाज परिवर्तन के दौर से गुजरा है, तब-तब पत्रकारिता ने जागरूकता, संवाद और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनकर अपनी भूमिका निभाई है।

हमारा लोकतंत्र चार मजबूत स्तंभों पर आधारित है, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया। यदि पहले तीन स्तंभ व्यवस्था का संचालन करते हैं, तो चौथा स्तंभ उस व्यवस्था की शुचिता, पारदर्शिता और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। 

एक जिम्मेदार और स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र की आत्मा को जीवंत बनाए रखता है। वह जनता की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देता है, जनहित के मुद्दों को सामने लाता है और शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाता है।

महात्मा गांधी ने कहा था, “स्वतंत्र पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है।”

आज जब सूचना और तकनीक का युग है, तब मीडिया की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों द्वारा समाज के उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को सम्मानित करना न केवल उनकी उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

देवियो और सज्जनों,

आज की यह शाम उपलब्धियों का उत्सव मनाने की शाम है। लेकिन उपलब्धि का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या उपलब्धि केवल पुरस्कारों, प्रशस्तियों, तय किए गए पड़ावों, बैलेंस शीट के आँकड़ों अथवा सफलता के बाद मिलने वाली तालियों से परिभाषित होती है?

मेरा मानना है कि उपलब्धि इससे कहीं अधिक गहरी और अर्थपूर्ण होती है। उपलब्धि वह संकल्प है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हमें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है। उपलब्धि वह साहस है, जो दुनिया के विश्वास करने से पहले स्वयं अपने सपनों पर विश्वास करना सिखाता है। उपलब्धि वह जिजीविषा है, जो हर ठोकर के बाद फिर से उठ खड़े होने का हौसला देती है और संघर्षों से प्राप्त अनुभव को अपनी शक्ति में बदल देती है।

सफलता अक्सर अनिश्चितताओं के बीच जन्म लेती है। हर सफल उद्योग, हर स्थापित संस्था और हर उपलब्धि के पीछे त्याग, अनगिनत जागी हुई रातों, कठिन निर्णयों और अटूट विश्वास की एक लंबी कहानी होती है। आज जो उद्यमी सफलता के शिखर पर दिखाई देते हैं, उन्होंने भी कभी न कभी संदेह का सामना किया है-कभी समाज के प्रश्नों का, तो कभी स्वयं अपने मन के द्वंद्व का।

आज हमारे बीच उपस्थित ये सभी सम्मानित हस्तियाँ इस सत्य को भली-भाँति समझती हैं।

हमारे बीच ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने पारिवारिक व्यवसायों की विरासत को आधुनिक संस्थानों में बदला है। ऐसे स्टार्टअप संस्थापक हैं, जिन्होंने परंपरागत सोच को चुनौती देते हुए एक नए भविष्य की कल्पना की। ऐसे नवाचारी हैं जिन्होंने तकनीक का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया। वहीं सामाजिक उद्यमी भी हैं, जिन्होंने सफलता को केवल लाभ के नजरिए से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा।

आप सभी उद्यमशीलता की श्रेष्ठतम भावना के प्रतीक हैं। आपने निश्चितताओं के स्थान पर संभावनाओं को चुना। आपने सुरक्षित सीमाओं में सिमटने के बजाय जोखिम उठाने का साहस दिखाया। आपने विचारों को संस्थानों में और आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदला। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि आपकी सफलता ने असंख्य लोगों के लिए अवसरों के द्वार खोले हैं।

आपके द्वारा स्थापित उद्योगों, कार्यालयों, विकसित उत्पादों और प्रदान की गई सेवाओं ने लाखों लोगों को आजीविका दी है, समुदायों को सशक्त बनाया है और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान दिया है। आप केवल संपदा के सृजनकर्ता नहीं हैं। आप अवसरों के निर्माता हैं। आप आशा के शिल्पकार हैं। और सही अर्थों में, आप राष्ट्र-निर्माता हैं।

मित्रों,

आज उत्तर भारत, देश की आर्थिक प्रगति के सबसे सशक्त और गतिशील केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। विनिर्माण और निर्यात से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि और सेवा क्षेत्र तक, यह क्षेत्र अपनी अद्भुत उद्यमशील ऊर्जा और दृढ़ता का निरंतर परिचय दे रहा है।

लेकिन इस परिवर्तन की कहानी केवल आँकड़ों में नहीं समाई हुई है। यह उस युवा उद्यमी की कहानी है जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने विचार और अटूट विश्वास के बल पर यात्रा शुरू की। यह उन पारिवारिक व्यवसायों की कहानी है जिन्होंने समय के साथ स्वयं को वैश्विक पहचान वाले प्रतिष्ठानों में रूपांतरित किया। यह उन स्टार्टअप्स की कहानी है जिन्होंने छोटे-से परिवेश से शुरुआत करके उद्योग जगत की स्थापित धारणाओं को बदल दिया।

सबसे बढ़कर, यह उस विश्वास की कहानी है कि ईमानदारी, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वालों के लिए कोई भी सपना इतना बड़ा नहीं होता कि उसे साकार न किया जा सके।

उद्यमशीलता की इसी परिवर्तनकारी शक्ति को पहचानते हुए, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार ने निरंतर ऐसे वातावरण के निर्माण का प्रयास किया है, जहाँ आकांक्षाओं को अवसरों का साथ मिल सके।

इस दिशा में सरकार का उद्देश्य स्पष्ट रहा है, प्रतिभा परिस्थितियों की मोहताज न बने और अवसरों के अभाव में किसी का उत्साह और महत्वाकांक्षा दम न तोड़ दे।

‘फंड द अनफंडेड’ की सोच ने असंख्य प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को अपने व्यवसाय की शुरुआत करने का आत्मविश्वास दिया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमों के लिए बिना गारंटी के ऋण तक पहुँच को आसान बनाया है। स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनने के लिए प्रोत्साहित किया है। पीएम विश्वकर्मा योजना ने हमारे कारीगरों और शिल्पकारों के अमूल्य योगदान को सम्मान देते हुए उनकी पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं से जोड़ने का कार्य किया है।

इसी प्रकार जनसमर्थ पोर्टल, उद्यम पंजीकरण और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे डिजिटल मंचों ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, पारदर्शिता को बढ़ाया है और नए अवसरों तक पहुँच का विस्तार किया है।

ये सभी प्रयास मिलकर उस राष्ट्रीय आत्मविश्वास को अभिव्यक्त करते हैं, जो यह मानता है कि असाधारण उपलब्धियों की शुरुआत साधारण परिस्थितियों से भी हो सकती है; नवाचार केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के प्रत्येक शहर, कस्बे और जिले में अपनी पहचान बना सकता है; और हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोगों की प्रतिभा, उद्यमशीलता और अदम्य जिजीविषा में निहित है।

‘विकसित भारत’ के संकल्प की ओर अग्रसर इस यात्रा में उद्यमियों और उद्योग जगत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है। 

विकास तभी सार्थक बनता है जब वह अवसरों का विस्तार करे, मानवीय गरिमा की रक्षा करे और अधिक से अधिक लोगों को राष्ट्र की प्रगति में सहभागी बनने का अवसर प्रदान करे।

देवियो और सज्जनो,

समृद्धि का वास्तविक अर्थ तब है जब सफलता के साथ उत्तरदायित्व जुड़ा हो और उपलब्धियाँ हमें स्वयं से आगे बढ़कर समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दें।

यही कारण है कि आज जैसी संध्याएँ विशेष महत्व रखती हैं। ये केवल उपलब्धि का सम्मान नहीं करतीं, बल्कि समाज के सामने ऐसे आदर्श भी प्रस्तुत करती हैं जिनसे प्रेरणा ली जा सके।

आज इस सभा में कहीं कोई युवा विद्यार्थी बैठा होगा, जिसकी आँखों में एक नया विचार आकार ले रहा होगा। कोई प्रथम पीढ़ी का उद्यमी होगा, जो अपने सामने उपस्थित चुनौतियों और संभावनाओं के बीच निर्णय लेने का साहस जुटा रहा होगा। और कोई ऐसा भी होगा जो बार-बार की असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ने का कारण तलाश रहा होगा।

आपकी जीवन-यात्राएँ उन्हें वह प्रेरणा प्रदान करती हैं। वे बताती हैं कि सपनों का महत्व होता है। असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर होती है। दृढ़ता भाग्य की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। और असाधारण उपलब्धियों की शुरुआत अक्सर साधारण परिस्थितियों से ही होती है।

आज जब हम आपकी सफलताओं का उत्सव मना रहे हैं, तब हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेंगे, अपने अनुभव उदारता से साझा करेंगे, नैतिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देंगे और ऐसे संस्थानों का निर्माण करेंगे जो समय की कसौटी पर खरे उतरें।

साथियो,

आज जब हम ए.आई, डेटा साइंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और नवाचार आधारित विकास के युग में प्रवेश कर रहे हैं, तब हमारे उद्यमियों और युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहूँगा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और निरंतर सीखने की इच्छा ही सफलता का वास्तविक मार्ग है।

भगवद्गीता में कहा गया है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” यानी हमारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं। जब व्यक्ति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करता है, तब सफलता स्वयं उसके पास आती है।

हम जिस भारत का निर्माण करना चाहते हैं, वह केवल समृद्ध ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, समावेशी और आशा से परिपूर्ण भी होना चाहिए।

आज सम्मानित किए जा रहे सभी अचीवर्स को मैं हृदय की गहराइयों से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आपकी उपलब्धियाँ भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति हमारे विश्वास को और मजबूत करती हैं। समाज के प्रति आपका योगदान अमूल्य है।

आपकी यात्रा हमें यह स्मरण कराती है कि उत्कृष्टता कभी संयोग से प्राप्त नहीं होती; वह दूरदृष्टि, अनुशासन, धैर्य और निरंतर परिश्रम की भट्ठी में तपकर ही आकार लेती है।

आप सभी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ और पुनः बहुत-बहुत बधाई।

जय हिंद!जय भारत!