SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY OF WEST BENGAL AT LOK BHAVAN PUNJAB ON JUNE 20, 2026.

पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 20.06.2026, शनिवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः पंजाब लोकभवन

 

नमस्कार!

आज का यह अवसर अत्यंत गौरवपूर्ण और आनंदमय है, जब हम यहाँ पंजाब लोकभवन में पश्चिम बंगाल राज्य के स्थापना दिवस को उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। इस शुभ अवसर पर मैं पश्चिम बंगाल के सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई देता हूँ।

भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से  ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ अभियान के अंतर्गत देशभर के सभी लोकभवनों में विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवसों को उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। 

इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता को नज़दीक से जानने और समझने का अवसर मिलता है। ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ का यह संकल्प भारत की आत्मा को जीवंत रूप में प्रतिबिंबित करता है, एक ऐसा भारत जो अनेकता में एकता का प्रतीक है।

देवियो और सज्जनो,

पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 20 जून को मनाया जाता है। यह दिवस 20 जून 1947 की उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जब बंगाल विधानसभा ने बंगाल के विभाजन तथा भारतीय संघ में पश्चिम बंगाल के रूप में शामिल होने के प्रस्ताव को पारित किया था। यह निर्णय राज्य के राजनीतिक भविष्य को निर्धारित करने के साथ-साथ लाखों लोगों के जीवन, संस्कृति और सामाजिक संरचना पर भी गहरा प्रभाव डालने वाला सिद्ध हुआ। 

भारत की स्वतंत्रता के समय वर्ष 1947 में धार्मिक आधार पर बंगाल का विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना, जो बाद में बांग्लादेश के रूप में स्थापित हुआ, जबकि पश्चिमी बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना। 

बाद में राज्य पुनर्गठन की प्रक्रिया के दौरान वर्ष 1956 में पश्चिम बंगाल की वर्तमान प्रशासनिक संरचना को औपचारिक स्वरूप मिला। यह दिवस राज्य की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास यात्रा को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है।

पश्चिम बंगाल की भौगोलिक संरचना अत्यंत विविध है, उत्तर में हिमालय की चोटियाँ (दार्जिलिंग, कलिम्पोंग), मध्य में गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान, दक्षिण में सुंदरबन का डेल्टा और बंगाल की खाड़ी का तटीय क्षेत्र। यहाँ की जलवायु, नदियाँ, वन, और जैव विविधता राज्य की प्राकृतिक संपदा हैं।

यह एक ऐसी भूमि है जहाँ गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ मिलती हैं, जो एक जीती जागती सभ्यता की अनुपम मिसाल है जो युगों से फलती-फूलती रही है।

पश्चिम बंगाल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रखर केंद्र रहा है। इस पावन भूमि ने ऐसे अनेक क्रांतिकारियों, राष्ट्रवादियों, विचारकों और समाज सुधारकों को जन्म दिया, जिन्होंने अपने साहस, त्याग और नेतृत्व से देश को नई दिशा प्रदान की। ’नेताजी सुभाष चंद्र बोस’, जिनकी अमर वाणी, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”, आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति और उत्साह का संचार करती है, इसी भूमि के गौरवशाली सपूत थे। 

‘जय हिन्द’ जैसे प्रेरणादायी राष्ट्रीय उद्घोष को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेताजी का दूरदर्शी नेतृत्व, साहस और त्याग ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा, दिशा और गति प्रदान की तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमिट स्रोत स्थापित किया।

इसके अतिरिक्त देशबंधु चित्तरंजन दास, खुदीराम बोस, बिनॉय बसु, मातंगिनी हाज़रा, विपिन चंद्र पाल, श्री अरविंद घोष, रासबिहारी बोस तथा कन्हाई लाल दत्त जैसे अनगिनत महान स्वतंत्रता सेनानियों ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया।

इन महान विभूतियों के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की गाथाएँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं और आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेंगी।

पंजाब और पश्चिम बंगाल में यह समानता तो ज़रूर है कि दोनों ही प्रदेश वीरों की जन्मभूमि हैं।

चाहे मात्र 18 वर्ष की अल्पायु में भारत माता के लिए फांसी पर चढ़ जाने वाले बंगाल के वीर खुदीराम बोस हों या फिर पंजाब के शूरवीर शहीद भगत सिंह (23 वर्ष की आयु में शहीद हुए) और मदनलाला ढींगरा (26 वर्ष की आयु में शहीद हुए) हों, इनके बलिदानों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा और दशा प्रदान की। 

इसी तरह बिपिन चन्द्र पाल का ज़िक्र करते हुए लाल-बाल-पाल की उस तिकड़ी का स्मरण होता है जिसमें बिपिन चन्द्र पाल के साथ पंजाब-केसरी लाला लाजपत राय भी थे।

इसी बंग-भूमि के गौरव, रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भारतीय संस्कृति, साहित्य और राष्ट्रचेतना को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने देशवासियों को ‘जन-गण-मन’ के रूप में राष्ट्रगान का अमूल्य उपहार दिया, वहीं ‘आमार सोनार बांग्ला’ की रचना कर बांग्लादेश के राष्ट्रगान को भी स्वर प्रदान किया। 

वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता थे, जिन्हें वर्ष 1913 में उनके काव्य-संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। साहित्य, शिक्षा, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान अद्वितीय और प्रेरणादायी है। 

उनके द्वारा स्थापित विश्व-भारती विश्वविद्यालय एवं शांतिनिकेतन आज भी वैश्विक ज्ञान, संवाद और सांस्कृतिक समन्वय के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उनकी दूरदर्शी शैक्षिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि के सम्मानस्वरूप शांतिनिकेतन को वर्ष 2023 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जो उनकी अमर विरासत का वैश्विक सम्मान है।

इसी प्रकार, ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की। उनका यह अमर गीत केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बन गया। 

इसके अलावा बंगाल की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध बनाने में शरत चंद्र चट्टोपाध्याय तथा माइकल मधुसूदन दत्त, काजी नजरुल इस्लाम, महाश्वेता देवी और अन्य साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

यह भूमि है वेदान्त का पाठ सिखाने वाले महान संत स्वामी विवेकानंद की और भक्ति का मार्ग दिखाने वाले चैतन्य महाप्रभु की। आधुनिक इतिहास में भारतीय नव-जागरण की ज्योति प्रकाशित करने वाले राजा राममोहन राय और ईश्वर चन्द्र विद्यासागर भी बंगाल के सपूत हैं।

जगदीश चंद्र बोस, पी.सी. रे, एस.एन. बोस और मेघनाद साहा जैसे अनगिनत वैज्ञानिकों ने इस पुण्य भूमि को ज्ञान और विज्ञान से सींचा है।

देश की राजनीति को मार्गदर्शन देने वाले देशबन्धु चितरंजन दास और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे बंगाल के सपूतों के नाम का स्वतः स्मरण हो जाता है। भारत रत्न, भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी इसी राज्य से हैं।

इसने अशोक कुमार, किशोर कुमार, आर डी बर्मन, राखी, शर्मिला टैगोर, बासु चटर्जी, उत्तम कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और अन्य लोकप्रिय फिल्म सितारों और कलाकारों को जन्म दिया है।

 खेलों के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेबल टेनिस और तीरंदाजी जैसे खेलों में राज्य ने देश को अनेक प्रतिभाएँ दी हैं। 

भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अपने नेतृत्व से भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई, जबकि मोहन बगान और ईस्ट बंगाल जैसे प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब भारतीय फुटबॉल की समृद्ध परंपरा और गौरव के प्रतीक हैं। 

पर्यटन की दृष्टि से भी बंगाल अहम स्थान रखता है। हावड़ा ब्रिज और विक्टोरिया मेमोरियल कोलकता की पहचान हैं। वहीं, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार अपनी हिमालयी जैव विविधता, चाय बागानों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात हैं। गंगा, हुगली, तीस्ता, दामोदर, अजय और महानंदा जैसी नदियाँ राज्य के कृषि, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन की आधारशिला हैं।

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र दार्जिलिंग का घुम रेलवे स्टेशन, दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन है जो यूनेस्को विश्व धरोहर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का हिस्सा है। 

यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित सुंदरबन को Royal Bengal Tiger जैसी वैश्विक रूप से लुप्त होती प्रजातियों के निवास स्थान के लिए विश्व भर में सराहा जाता है।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकता एक ऐतिहासिक शहर है। ब्रिटिश काल में कलकत्ता भारत का सबसे विकसित नगर था और कभी यह ब्रिटिश भारत की राजधानी हुआ करता था। कोलकाता में कई ऐतिहासिक स्थल, कालीघाट जैसे मंदिर, अर्मेनियाई चर्च, मस्जिद, शांतिनिकेतन और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे ब्रिटिश स्मारक हैं। 

पश्चिम बंगाल में असंख्य त्योहार मनाए जाते हैं। नवरात्रि में दुर्गा पूजा बंगाल का प्रमुख त्योहार है।

बंगाल के इतिहास में अनेक प्रतापी सम्राट हुए हैं। अनेक महान राजा और महाराजा हुए हैं। गुप्त, मौर्य, पाल, सेन सम्राटों ने बंगाल की संस्कृति को संजोया और इसकी विरासत को आगे बढ़ाया।

1757 के प्लासी की लड़ाई से लेकर 1946 में भारतीय नौसेना के विद्रोह तक के संघर्ष में बंगाल का महान योगदान रहा।

बंगाल की विलक्षणता की सूची इतनी लंबी है, कि सबका एक साथ उल्लेख करना संभव ही नहीं है।

साथियो,

भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जहाँ हर कुछ सौ किलोमीटर पर भाषा बदलती है, वेशभूषा में विविधता आती है, खानपान का स्वाद अलग होता है, लेकिन जो कभी नहीं बदलता, वह है हमारी एकता की भावना।

सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महानायक ने इसी एकता के सूत्र में भारत को पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनकी दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प और नेतृत्व के कारण ही आज हम एक अखंड और सशक्त भारत के रूप में संगठित खड़े हैं।

हमें यह भली-भांति समझना होगा कि भले ही हम भौगोलिक, भाषायी या सांस्कृतिक रूप से अलग दिखें, लेकिन हमारी आत्मा एक है; हम सब भारत माता की संतानें हैं। 

आज आवश्यकता है कि हम ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना को अपने जीवन का आधार बनाते हुए आतंकवाद, कट्टरता, विभाजनकारी प्रवृत्तियों तथा समाज-विरोधी शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों। राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

आइए, हम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएं तथा विविधता में एकता, सहिष्णुता, नवाचार, सेवा, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे गौरवशाली राज्य हमें यह संदेश देते हैं कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता, साझा विरासत और राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है।

इसी प्रेरणा के साथ हम एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जो समृद्ध, समावेशी, आत्मनिर्भर, प्रगतिशील तथा मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण हो तथा जो विश्व समुदाय के लिए शांति, सह-अस्तित्व और सतत विकास का प्रेरक उदाहरण बने।

पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर मैं राज्य के सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। माँ दुर्गा की पावन कृपा, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ज्ञानपरंपरा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की राष्ट्रभक्ति तथा इस महान भूमि की सांस्कृतिक चेतना हम सभी को राष्ट्रसेवा, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहे।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिंद! 

जय भारत!