SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY: GOA, SIKKIM AND TELANGANA AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 30, 2026.

सिक्किम, गोवा और तेलंगाना के स्थापना दिवस के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 30 मई, शनिवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः पंजाब लोक भवन

         

नमस्कार!

आज पंजाब लोकभवन में हम केवल तीन राज्यों का स्थापना दिवस नहीं मना रहे हैं, बल्कि भारत की उस महान सांस्कृतिक विविधता और अखंडता का उत्सव मना रहे हैं, जिसने हमारे विशाल राष्ट्र को एक अटूट सूत्र में पिरोया हुआ है। 

भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की दूरदर्शी पहल के अंतर्गत, आज हम उत्तर-पूर्व के प्राकृतिक स्वर्ग ‘सिक्किम’ (16 मई), पश्चिम के सांस्कृतिक संगम ‘गोवा’ (30 मई), और दक्षिण के तकनीकी और ऐतिहासिक गौरव ‘तेलंगाना’ (02 जून) को नमन कर रहे हैं।

गुरुओं, पीरों और शूरवीरों की इस धरती से इन तीनों राज्यों के निवासियों को उनके स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए मुझे अत्यंत गौरव की अनुभूति हो रही है। हमारी भाषाएं, वेशभूषा, खान-पान और भौगोलिक परिस्थितियां भले ही भिन्न हों, लेकिन हमारे दिलों की धड़कन एक है, और वह है हमारी ‘भारतीयता’।

इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता को नज़दीक से जानने और समझने का अवसर मिलता है। ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ का यह संकल्प भारत की आत्मा को जीवंत रूप में प्रतिबिंबित करता है, एक ऐसा भारत जो अनेकता में एकता का प्रतीक है।

सिक्किम

जब हम सिक्किम की बात करते हैं, तो आँखों के सामने बर्फ से ढकी कंचनजंघा की चोटियां, शांत मठ और हरियाली से भरे पहाड़ उभर आते हैं। 16 मई 1975 को भारतीय गणराज्य का 22वाँ राज्य बनने वाला सिक्किम, आज देश के विकास और पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। 

सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों, जिन्हें अक्सर ‘‘पूर्वोत्तर के अष्ट-रत्न’’ कहा जाता है, में से एक है। 

सिक्किम भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक पर्वतीय राज्य है, जो देश का दूसरा सबसे छोटा राज्य है। तीस्ता और रंगीत यहां की प्रमुख नदियाँ हैं, जिनका राज्य की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।

सिक्किम की संस्कृति बहुजातीय और बहुभाषी है, जिसमें नेपाली, भूटिया, लेपचा, लिंबू, तामांग, शेरपा आदि समुदायों का योगदान है। यहाँ के प्रमुख त्योहारों में ल्होसार, लूसोंग, सागा दावा, भूमचू, दशहरा, दीपावली, बोनालू, बुमचू, फांग आदि शामिल हैं। बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव राज्य की जीवनशैली, कला, संगीत, नृत्य और वास्तुकला में स्पष्ट झलकता है। मुखौटा नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, ऊनी कालीन, बांस और बेंत के उत्पाद, और स्थानीय व्यंजन जैसे मोमो, थुक्पा, चाउमीन, गुंड्रुक आदि सिक्किम की सांस्कृतिक पहचान हैं।

विश्व की तीसरी सबसे ऊँची चोटी और यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त कंचनजंगा (28169 फुट) सिक्किम में ही है। इसकी मनमोहक त्सोंगमो झील, विश्व की ऊँची झीलों में शामिल गुरुडोंगमार झील, पवित्र खेचियोपलरी झील, हरे-भरे राष्ट्रीय उद्यान आदि यहाँ की प्राकृतिक शोभा को और अधिक आकर्षक बनाते हैं। साथ ही यहां 200 से अधिक मोनेस्ट्रियां भी हैं। 

सिक्किम के प्रमुख पर्यटन स्थलों में कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान, ज़ुलुक, लाचुंग, लाचेन और फूलों से सजी युमथांग घाटी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त राफ्टिंग, ट्रेकिंग और स्काईवॉक जैसी रोमांचक गतिविधियाँ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। वर्ष 2025 में राज्य में 17 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जिसमें घरेलू पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

सिक्किम को ‘ग्रीनलैंड’ कहा जाता है। यहाँ 5 हजार से अधिक फूलों की प्रजातियाँ, 515 ऑर्किड, 36 रोडोडेंड्रॉन, 23 बांस की किस्में, और 550 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। राज्य ने प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध, जैविक खेती, और ग्रीन मिशन जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में मिसाल कायम की है।

जानकर खुशी हुई कि सिक्किम में “मेरो रुख मेरो संतति” (मेरा वृक्ष, मेरी संतान ) अभियान के अंतर्गत प्रत्येक नवजात शिशु के जन्म पर 108 पौधे लगाए जाते हैं। यह अभियान प्रकृति, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के सुंदर समन्वय का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

सिक्किम को देश का पहला पूर्णतः जैविक राज्य होने का गौरव प्राप्त है। इस प्रदेश ने बाइचुंग भूटिया और निर्मल छेत्री जैसे फुटबॉल खिलाड़ी, और तरुणदीप रॉय जैसे तीरंदाज भारत को दिए हैं। हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा भी सिक्किम से ही हैं। सम्पूर्ण भारत में बड़ी इलायची की सबसे अधिक उपज सिक्किम में ही होती है।

सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील सीमा पर स्थित होने के बावजूद, सिक्किम के नागरिकों ने जिस प्रकार शांति, सद्भाव और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया है, वह पूरे देश के लिए अनुकरणीय है।

गोवा

यदि गोवा की बात करें तो, गोवा 30 मई, 1987 को केंद्र शासित प्रदेश से भारतीय गणराज्य का 25वां राज्य बना। देश की आज़ादी के बाद 14 वर्षों तक गोवा पुर्तगालियों के कब्जे में रहा और 19 दिसंबर 1961 को आज़ाद हुआ। पुर्तगालियों ने सन 1510 से 1961 तक यानि 451 सालों तक गोवा में राज किया था। 1961 में ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारतीय सेना ने गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया

गोवा में दो स्वतंत्रता दिवस मनाये जाते हैं। 15 अगस्त के अलावा 19 दिसंबर को भी गोवा की स्वतंत्रता का जश्न मनाया जाता है।

गोवा स्थापना दिवस पर हम गोवा मुक्ति संग्राम के 31 शहीद सत्याग्रहियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनमें पंजाब के लुधियाना के करनैल सिंह बेनीपाल का बलिदान विशेष रूप से स्मरणीय है। 

15 अगस्त 1955 को गोवा सीमा पर सहोद्रा देवी राय पर गोली चलाए जाने का विरोध करते हुए उन्होंने वीरता से आगे आकर कहा कि यदि गोली चलानी है तो उन्हें मारो, और वहीं शहीद हो गए। उनका यह बलिदान भारत की एकता, अखंडता और नारी सम्मान की मिसाल है।

इसकी प्राकृतिक सुंदरता और जीवंत समुद्र तटों के कारण इसे ‘बीच कैपिटल ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। गोवा दुनियाभर के सैलानियों में इतना लोकप्रिय है कि यहां हर साल आने वाले पर्यटकों की संख्या राज्य की जनसंख्या से अधिक होती है।

शायद ही आप में से कोई जानता हो कि गोवा में भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस और एशिया के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में से एक गोवा मेडिकल कॉलेज स्थित है।

यही नहीं देश का सबसे पहला इंग्लिश मीडियम स्कूल सेंट जोसेफ हाई स्कूल भी गोवा राज्य में ही बना था। गोवा के निकट बोगमालो में स्थित नौसेना उड्डयन संग्रहालय एशिया में एकमात्र सैन्य संग्रहालय है।

गोवा के व्यंजनों की खासियत है कि ये सदी दर सदी पुर्तगाली, अरब, ब्राजीलियाई, अफ्रीकी, फ्रेंच, कोंकणी, मालाबारी, मलेशियाई और चीनी जैसी विभिन्न संस्कृतियों के मेल से विकसित हुए हैं।

गोवा की संस्कृति भारतीय और पश्चिमी परंपराओं का अद्भुत संगम है। यहाँ कोंकणी, मराठी, हिंदी, अंग्रेज़ी, पुर्तगाली आदि भाषाएँ बोली जाती हैं। ईसाई, हिंदू और मुस्लिम समुदायों के त्योहार-क्रिसमस, ईस्टर, गणेश चतुर्थी, दिवाली, संजोआ, कार्निवल-यहाँ बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। गोवा का लोक संगीत, मंडो, फुगड़ी, डेकनी नृत्य, और पारंपरिक वेशभूषा इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

भौगोलिक दृष्टि से छोटा होने के बावजूद गोवा ने जल-क्रीड़ाओं, खनन, कृषि, मसाला उत्पादन और सांस्कृतिक समृद्धि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्कूबा डाइविंग, पैरासेलिंग और वाटर स्कूटर जैसे साहसिक खेल गोवा को रोमांचप्रिय पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाते हैं। इसके साथ-साथ दूधसागर जलप्रपात की अद्भुत प्राकृतिक छटा, हरित पर्वत श्रृंखलाएँ और मनोहारी समुद्री तट गोवा को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं

गोवा ने देश को भारत रत्न लता मंगेशकर, आशा भोसले, डॉ आर ए माशेलकर, संगीतकार रेमो फर्नांडीस, कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा और कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व दिए हैं।

गोवा की साक्षरता दर देश में शीर्ष पर है और राज्य ने 2025 में पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता का दर्जा प्राप्त किया।

यहाँ के भव्य चर्च और कॉन्वेंट्स, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है, गोवा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करते हैं। इसके साथ ही गोवा के प्रसिद्ध समुद्र तट जैसे बागा, कलंगूट और पालोलेम; ऐतिहासिक चर्च जैसे बॉम जेसस और सेंट कैथेड्रल; किले जैसे अगुआड़ा और चापोरा; वन्यजीव अभयारण्य जैसे मोल्लेम और कोतिगाओ; तथा रंगारंग सांस्कृतिक उत्सव जैसे कार्निवल और संजोआ, इसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

तेलंगाना

वहीं अगर तेलंगाना की बात करें तो इसका इतिहास प्राचीन सातवाहन, काकतीय, कुतुब शाही, आसफ जाही (निज़ाम) राजवंशों से जुड़ा है। 1948 में हैदराबाद राज्य का भारत में विलय हुआ। दशकों तक चले आंदोलन के बाद 2 जून 2014 को तेलंगाना भारत का 29वाँ राज्य बना। राज्य गठन के बाद से तेलंगाना ने सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

तेलंगाना शब्द त्रिलिंग देश अर्थात ‘‘तीन लिंगों की भूमि’’ से बना है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कालेश्वरम (वर्तमान में तेलंगाना में), श्रीशैलम और द्रक्षरामा (दोनों वर्तमान में आंध्र प्रदेश में) तीन महत्वपूर्ण शैव मंदिर स्थित थे।

इस राज्य पर हिन्दू राजाओं के साथ-साथ मुस्लिम राजाओं ने भी लंबे समय तक राज किया। इस कारण तेलंगाना में मिश्रित संस्कृति देखने को मिलती है।

इस राज्य में ऐतिहासिक धरोहरें जैसे हैदराबाद का चारमीनार, वारंगल का किला, और करीमनगर का एल्गंडल किला और धार्मिक स्थलों का भी अद्भुत संगम है जैसे श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर, वेमुलावाड़ा का राजराजेश्वर मंदिर आदि, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यन्त पवित्र माने जाते हैं।

इस क्षेत्र ने कई महान हस्तियों को जन्म दिया है, जैसे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव, तेलुगू कवि कालोजी नारायण राव, क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन, खिलाड़ी सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, पी.वी. सिंधु और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला।

तेलंगाना के हैदराबादी व्यंजन अपनी विशेषता के कारण UNESCO creative city of gastronomy के तौर पर घोषित हैं।

तेलंगाना की हैदराबादी बिरयानी अपनी विशिष्टता के कारण देशभर के सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स की व्यंजन-सूचियों में शामिल है।

चारमीनार, फलकनुमा पैलेस, चौमहल्ला पैलेस, वारंगल फोर्ट, थाउजेंड  पिलर  टेम्पल और भोंगिर फोर्ट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं।

हैदराबाद के निकट स्थित ऐतिहासिक शहर गोलकुंडा हीरे के व्यापार का केंद्र है। कोहिनूर, होप डायमंड, ड्रेसडेन ग्रीन और ओरलोव जैसे विश्वविख्यात हीरे, गोलकुंडा की खदानों से ही निकले थे।

तेलंगाना की गौरवशाली लोक परंपराओं में ओग्गु डोल्लू नृत्य एक अत्यंत प्रभावशाली और ऊर्जावान कला रूप है। इस नृत्य में कलाकार ढोल की गूंजती हुई लय पर भगवान शिव की महिमा का स्तुति-गान करते हैं।

तेलंगाना की संस्कृति गंगा-जमुनी तहजीब, बहुभाषिकता, और विविध धार्मिक परंपराओं का संगम है। यहाँ तेलुगू, उर्दू , हिंदी, मराठी, कन्नड़ आदि भाषाएँ बोली जाती हैं। बोनालू, बथुकम्मा, दशहरा, उगादी, संक्रांति, रमजान, मिलाद-उन-नबी, क्रिसमस आदि त्योहार राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। 

यहां के पेमबर्थी गाँव को वर्ष 2023 में ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव’ के रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो राज्य की लोककला, परंपरा और ग्रामीण पर्यटन की समृद्धि को दर्शाता है।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना विश्व की सबसे बड़ी बहु-स्तरीय सिंचाई परियोजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने किसानों के जीवन में नई आशा और समृद्धि का संचार किया है।

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेलंगाना ने देश में अग्रणी स्थान प्राप्त कर भारत की डिजिटल प्रगति को नई दिशा दी है। 

साथियो,

इन तीनों राज्यों की विकास यात्रा हमें यह सिखाती है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है। कोई राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, कोई पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के लिए, तो कोई तकनीक और नवाचार के लिए। लेकिन सभी राज्यों का लक्ष्य एक ही है, राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण।

और पंजाब भी देश का एक अग्रणी राज्य है जो हमेशा से बड़े दिल वालों की धरती रही है। यहाँ के खेतों में मेहनत करने वाले और उद्योगों को गति देने वाले कामगारों में भारत के हर राज्य की महक है। जब सिक्किम का शांतिपूर्ण स्वभाव, गोवा की सांस्कृतिक जीवंतता, तेलंगाना की तकनीकी मेधा और पंजाब का अदम्य साहस एक साथ मिलते हैं, तभी ‘विकसित भारत 2047’ का वह महान संकल्प सिद्ध होता है जिसे हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने देश के सामने रखा है।

‘‘हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं,

रंग-रूप वेश भाषा चाहे अनेक हैं।’’

यह केवल एक कविता की पंक्तियां नहीं हैं, यह भारत का मूल चरित्र है। हमारे समाज को बाँटने वाली कृत्रिम दीवारें कभी भी हमारे आपसी प्रेम और राष्ट्रीय एकात्मता को नहीं डिगा सकतीं।

प्रिय युवाओं,

आप भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। आपको केवल अपने राज्य की संस्कृति ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की विविधता और विरासत को जानना चाहिए। जब एक पंजाबी युवा सिक्किम की संस्कृति को समझता है, गोवा के इतिहास को जानता है और तेलंगाना की प्रगति से प्रेरणा लेता है, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।

हमें यह याद रखना चाहिए कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का जीवंत महासंगम है।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा था, “भारत की आत्मा उसकी विविधता में बसती है।”

इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद ने कहा था, "We are one in spirit though many in form."

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम क्षेत्र, भाषा, जाति और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

मैं पंजाब की धरती से भी यह कहना चाहूँगा कि पंजाब ने सदैव राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशभक्ति की मिसाल प्रस्तुत की है। पंजाब की मिट्टी ने देश को वीर सैनिक, महान संत, किसान और कर्मयोगी दिए हैं। उसी प्रकार सिक्किम, गोवा और तेलंगाना ने भी भारत के विकास और गौरव में अमूल्य योगदान दिया है।

प्रिय साथियो,

आइए, इस स्थापना दिवस के अवसर पर हम यह संकल्प लें कि हम भारत की विविध संस्कृतियों का सम्मान करेंगे, एक-दूसरे की परंपराओं को समझेंगे, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेंगे और विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देंगे।

आइए, हम ऐसा भारत बनाएं, जहाँ विविधता विभाजन का नहीं, बल्कि शक्ति का आधार बने; जहाँ संस्कृति सम्मान का विषय बने; जहाँ विकास सबका हो; और जहाँ हर राज्य की प्रगति राष्ट्र की प्रगति बने।

अंत में, मैं पुनः सिक्किम, गोवा और तेलंगाना के सभी नागरिकों को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देता हूँ। मैं इन राज्यों की निरंतर प्रगति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करता हूँ।

भारत की एकता अमर रहे। भारत की सांस्कृतिक चेतना सदैव प्रखर रहे। और हमारा राष्ट्र निरंतर विकास और गौरव के पथ पर आगे बढ़ता रहे। 

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। 

जय हिंद!

जय भारत!