SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CU SCHOLARS SUMMIT 2026 AT CHANDIGARH UNIVERSITY ON JUNE 3, 2026.

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के ‘स्कॉलर्स समिट 2026’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 03.06.2026,  बुधवारसमयः सुबह 10:00 बजेस्थानः मोहाली

 

नमस्कार!

सबसे पहले, मैं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय को इस तीन दिवसीय ‘स्कॉलर समिट 2026’ के तीसरे संस्करण के आयोजन के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। आज इस सभागार में, देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पधारे इन प्रतिभावान और मेधावी छात्र-छात्राओं के चेहरों पर जो तेज और आँखों में जो भविष्य के सपने मैं देख रहा हूँ, उसने मेरा यह विश्वास और भी सुदृढ़ कर दिया है कि भारत का भविष्य अत्यंत सुरक्षित और उज्ज्वल हाथों में है।

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय आज देश में सबसे बड़ी छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित करने वाली संस्थाओं में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह योजना न केवल इन युवा प्रतिभाओं को आर्थिक संबल प्रदान करती है, बल्कि यह उन्हें जीवन में कुछ बड़ा और असाधारण करने के लिए एक मजबूत आधार भी देती है।

मुझे बताया गया है कि इस वर्ष भी CU-CET स्कॉलरशिप टेस्ट के माध्यम से 10+2 और स्नातक पूर्ण कर चुके कुल 7 हजार विद्यार्थियों को लगभग 200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मेरे लिए यह और भी अधिक गर्व और संतोष का विषय है कि इन मेधावी छात्रों में हमारी 2 हजार 800 बेटियाँ भी शामिल हैं। समाज में समावेशिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक अत्यंत सशक्त और अनुकरणीय कदम है।

आज के इस प्रथम दिन में, हमने 10+2 और CU-CET स्कॉलरशिप टेस्ट उत्तीर्ण करने वाले लगभग 1 हजार मेधावी छात्रों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान की हैं, और आगामी दो दिनों में शेष सभी योग्य विद्यार्थियों को भी यह सम्मान और सहायता प्राप्त हो जाएगी।

चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की यह शानदार यात्रा यही नहीं रुकती। यह जानकर हृदय को अपार हर्ष होता है कि इस विश्वविद्यालय द्वारा अब तक लगभग 50 हजार मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी जा चुकी है। 

इतना ही नहीं, मुझे अवगत कराया गया है कि पिछले 13 वर्षों में, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने अन्य विभिन्न श्रेणियों में भी लगभग 2 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां प्रदान की हैं, जिनमें से 82 हजार से अधिक हमारी बेटियां हैं। यह विशाल आंकड़ा उस महान सोच और संकल्प का प्रतीक है, जो माननीय प्रधानमंत्री जी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के आह्वान को वास्तविकता में बदल रहा है।

यह एक प्रेरक संदेश है कि समाज और संस्थाएं ऐसे होनहार विद्यार्थियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं, उन्हें आगे बढ़ाने, उनका मार्ग प्रशस्त करने और उनके सपनों को साकार करने में सहभागी बनने के लिए सदैव तत्पर हैं। 

साथियो,

जब हम उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता की बात करते हैं, तो चंडीगढ़ विश्वविद्यालय का नाम अग्रिम पंक्ति में आता है। वर्ष 2012 में स्थापित चंडीगढ़ विश्वविद्यालय आज भारत के प्रमुख एवं प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल हो चुका है, जिसने वैश्विक स्तर पर अपनी एक सशक्त पहचान बनाई है।

आज चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में देश के 28 राज्यों, 8 केंद्रशासित प्रदेशों तथा 60 देशों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में 150 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जो स्नातक से लेकर पीएच.डी. स्तर तक उपलब्ध हैं। विविध संस्कृतियों, भाषाओं और पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति इसे वास्तव में एक वैश्विक शिक्षण केंद्र बनाती है।

QS World University Rankings 2025 में 575वीं वैश्विक रैंक प्राप्त कर चंडीगढ़ विश्वविद्यालय विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में शामिल हो चुका है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, वैश्विक दृष्टिकोण तथा उत्कृष्ट शिक्षण प्रणाली का प्रमाण है।

हाल ही में जारी QS World Rankings 2026 की विषय-विशेष वैश्विक रैंकिंग में भी विश्वविद्यालय के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय अब Computer Science Engineering, Electrical & Electronics Engineering तथा Mechanical-Aeronautical Engineering जैसे क्षेत्रों में विश्व के शीर्ष 300 विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त कर चुका है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा जारी प्रतिष्ठित NIRF Rankingsमें भी यह विश्वविद्यालय देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में 19वें स्थान पर है।

अनुसंधान एवं विकास पर विशेष ध्यान देने के कारण चंडीगढ़ विश्वविद्यालय नवाचार और शोध का एक उत्कृष्ट प्रतीक बनकर उभरा है। 25 हजार से अधिक शोध प्रकाशनों तथा 6 हजार से अधिक पेटेंट फाइल एवं प्रकाशित करने के साथ यह विश्वविद्यालय लगातार भारत के शीर्ष तीन शोध-प्रधान विश्वविद्यालयों में शामिल रहा है। 

इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने युवाओं में उद्यमिता की भावना को भी सशक्त किया है तथा इसके ऑन-कैंपस टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर में 250 से अधिक स्टार्टअप्स विकसित किए जा चुके हैं।

गर्व का विषय है कि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। विश्वविद्यालय लगातार दो वर्षों तक Khelo India Championship Trophy जीतने वाला भारत का पहला निजी विश्वविद्यालय बना है।

साथ ही, वर्ष 2025 में प्रतिष्ठित Maulana Abul Kalam Azad (MAKA) Trophy प्राप्त करने वाला यह देश का एकमात्र निजी विश्वविद्यालय है। Khelo India University Games 2025 जीतने के बाद इस वर्ष भी विश्वविद्यालय को MAKA Trophy के लिए नामांकित किया गया है।

विश्वविद्यालय के 100 से अधिक खिलाड़ियों ने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ तथा एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए पदक जीतकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है। यह उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, खेल, संस्कृति और नेतृत्व क्षमता को समान महत्व देता है।

देवियो और सज्जनो,

भारत की भूमि ज्ञान की भूमि रही है। यह वह देश है जिसने दुनिया को नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय दिए, जहाँ वैश्विक स्तर पर ज्ञान की किरणें फैलती थीं। हमारे यहाँ कहा गया हैः 

‘‘विद्वत्वम च नृपत्वम च नैव तुल्यम कदाचन।

स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते।।’’

अर्थात, एक राजा और एक विद्वान की तुलना कभी नहीं की जा सकती। राजा की पूजा केवल उसके अपने देश में होती है, लेकिन एक विद्वान और शिक्षित व्यक्ति की पूजा संपूर्ण विश्व में होती है।

जब हम भारत को ‘विश्वगुरु’ कहते हैं, तो यह कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि यह हमारे उन महान प्राचीन विद्वानों के अतुलनीय योगदान पर आधारित एक अटल सत्य है, जिन्होंने तब विश्व को ज्ञान का प्रथम प्रकाश दिया था, जब दुनिया की कई सभ्यताएं पढ़ना-लिखना भी नहीं जानती थीं। 

आज के इस ‘स्कॉलर समिट’ में, जहाँ देश भर की मेधा एकत्र है, हमें अपने उन प्राचीन शोधकर्ताओं और विद्वानों को अवश्य स्मरण करना चाहिए, जिनके नवाचारों पर आज का आधुनिक विज्ञान भी गर्व करता है।

गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महर्षि आर्यभट्ट और भास्कराचार्य के योगदान को आज पूरी दुनिया नमन करती है। ‘शून्य’ का आविष्कार हो, पाई का सटीक मान हो, दशमलव प्रणाली हो, या फिर यह खगोलीय सिद्धांत कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए सूर्य का चक्कर लगाती है, ये सभी वैज्ञानिक सत्य पश्चिम के वैज्ञानिकों से सदियों पहले हमारे भारतीय विद्वानों ने सिद्ध कर दिए थे।

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में, महर्षि सुश्रुत को आज भी पूरी दुनिया ‘शल्य चिकित्सा का जनक’ मानती है। उन्होंने हजारों वर्ष पूर्व मोतियाबिंद और प्लास्टिक सर्जरी जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की तकनीकें विकसित कर ली थीं। इसी प्रकार, महर्षि चरक ने ‘चरक संहिता’ के रूप में आयुर्वेद का वह महान ग्रंथ लिखा, जो आज भी मानव जीवन को प्राकृतिक रूप से निरोगी बनाने का सबसे प्रामाणिक आधार है।

अर्थशास्त्र, कूटनीति और राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ आज भी दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रबंधन और राज्य-संचालन का उत्कृष्ट ग्रंथ माना जाता है। इसी तरह महर्षि पाणिनी ने ‘अष्टाध्यायी’ के रूप में संस्कृत व्याकरण का जो वैज्ञानिक और तार्किक ढांचा तैयार किया, आज के आधुनिक कंप्यूटर वैज्ञानिक भी उसे कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए सबसे उपयुक्त और वैज्ञानिक भाषा मानते हैं।

मेरा आप सभी से यह आह्वान है कि आप शिक्षा और शोध के लिए केवल पश्चिम की ओर न देखें, बल्कि अपनी इन गहरी जड़ों से भी जुड़ें। आप कोई सामान्य विद्यार्थी नहीं हैं; आप उसी महान आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, पाणिनी और चाणक्य की बौद्धिक और वैज्ञानिक विरासत के सीधे उत्तराधिकारी हैं। आपके भीतर भी वही मेधा, वही शोध-क्षमता और वही जिज्ञासा छिपी है, जो भारत को 21वीं सदी में एक बार फिर से ‘विश्वगुरु’ के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित करेगी।

साथियो,

आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यह जनशक्ति तभी राष्ट्रशक्ति बनेगी जब उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, वैज्ञानिक सोच और नैतिक मूल्यों से सशक्त बनाया जाएगा। 

इसी सोच के साथ भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 लागू की। यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत का शैक्षिक रोडमैप है। एनईपी 2020 विद्यार्थियों को रटने की संस्कृति से निकालकर सोचने, नवाचार करने, शोध करने और जीवन-कौशल विकसित करने की दिशा में प्रेरित करती है।

अब एक विज्ञान का छात्र संगीत भी सीख सकता है और कला का छात्र कोडिंग भी कर सकता है। नीति के अन्तर्गत प्रारंभिक और तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व दिया जा रहा है, ताकि भाषा किसी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा न बने।

मेरे युवा मित्रों,

आप केवल नौकरी खोजने वाले युवा न बनें, बल्कि रोजगार देने वाले युवा बनें। Startup India, Stand-Up India, Skill India, Digital India, PM eVIDYA, SWAYAM, National Digital Library, Atal Innovation Mission और PM Vidya Lakshmi जैसी अनेक योजनाएँ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही हैं।

भारत सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में शिक्षा मंत्रालय के लिए लगभग 1 लाख 39 हजार करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।

स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया गया है। उच्च शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, रिसर्च, ए.आई. आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट तथा रोजगारपरक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया है।

यह अत्यंत सुखद है कि आज भारत में शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रही। अब शिक्षा का अर्थ है, नवाचार, उद्यमिता, नेतृत्व, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण। 

प्रिय शिक्षकों,

मैं इस अवसर पर आप सभी शिक्षकों को विशेष रूप से नमन करता हूँ। एक शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता; वह भविष्य गढ़ता है। विद्यार्थी की सफलता के पीछे माता-पिता के बाद यदि किसी का सबसे बड़ा योगदान होता है, तो वह शिक्षक का होता है।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था, ‘‘सच्चे शिक्षक वे हैं, जो हमें स्वयं सोचने के योग्य बनाते हैं।’’ आज आवश्यकता ऐसे शिक्षकों की है जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों का विकास करें। एक शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देता, बल्कि आत्मविश्वास भी देता है। वह विद्यार्थियों को यह विश्वास दिलाता है कि वे अपनी सीमाओं से आगे बढ़ सकते हैं।

मैं विश्वविद्यालय प्रशासन से भी कहना चाहूँगा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो नैतिक, संवेदनशील, राष्ट्रनिष्ठ और वैश्विक दृष्टिकोण से संपन्न हों।

मित्रों,

भारत आज ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारे युवा शिक्षित, कुशल, नवाचारी और चरित्रवान होंगे।

हमारा देश विश्वगुरु बनने की क्षमता रखता है। हमारे पास प्रतिभा है, ऊर्जा है, संसाधन हैं और सबसे महत्वपूर्ण, युवा शक्ति है।

प्रिय विद्यार्थियों,

याद रखिए, आपकी परिस्थितियाँ आपका भविष्य तय नहीं करतीं; आपका दृष्टिकोण और आपका परिश्रम आपका भविष्य तय करता है।

अपने माता-पिता का सम्मान करें, अपने शिक्षकों का आदर करें और अपने देश के प्रति कर्तव्य भावना रखें।

जीवन में बड़ा बनना है तो केवल सफल नहीं, बल्कि उपयोगी बनिए। ऐसे युवा बनिए जिन पर परिवार को गर्व हो, समाज को विश्वास हो और राष्ट्र को आशा हो।

अंत में, मैं एक बार फिर से चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, आयोजकों तथा सभी छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ।

मैं कामना करता हूँ कि यह ‘‘स्कॉलर समिट’’ आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थियों के जीवन में आशा, अवसर और सफलता का प्रकाश फैलाता रहे।

आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं, जहाँ शिक्षा केवल अधिकार न हो, बल्कि हर युवा के सपनों को उड़ान देने वाली शक्ति बने।

आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत।