SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 5TH AICMA AWARDS CEREMONY AT LUDHIANA ON JUNE 13, 2026.
- by Admin
- 2026-06-13 15:35
ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के 5वें पुरस्कार समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 13.06.2026, शनिवार समयः सुबह 11:30 बजे स्थानः लुधियाना
नमस्कार!
आज भारत की साइकिल निर्माण राजधानी और औद्योगिक नगर लुधियाना में, ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) के 5वें पुरस्कार समारोह में दूसरी बार आपके बीच उपस्थित होना मेरे लिए, अत्यंत गौरव का विषय है। मैं (AICMA) (एकमा) को देश में विविध प्रकार की साइकिलों के निर्माण तथा साइकलिंग आंदोलन को आगे बढ़ाने के उनके सतत प्रयासों के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
आज हम केवल पुरस्कार प्रदान करने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवर्तनकारी आंदोलन का उत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए हैं, जो सतत गतिशीलता, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना से पूर्णतः मेल खाता है।
आज जिन उत्कृष्ट व्यक्तियों, निर्माताओं और स्टार्ट-अप्स को सम्मानित किया गया है, मैं उन सभी को बधाई देता हूँ। आप केवल उद्यमी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सतत विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के सच्चे संवाहक भी हैं। आपके प्रयास एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान देते हैं।
यह जानकर विशेष प्रसन्नता होती है कि साइकिल उद्योग की कंपनियां अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की सीमाओं से आगे बढ़कर समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बना रही हैं। आज एकमा की सदस्य कंपनियों द्वारा कक्षा 10वीं के 25 मेधावी विद्यार्थियों को नई साइकिलें प्रदान करना एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है। इस समावेशी भावना को निरंतर बनाए रखने की आपकी प्रतिबद्धता अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है।
देवियो और सज्जनो,
आज जब हम यहाँ इस शानदार आयोजन में एकत्रित हुए हैं, तो हमें सितंबर 1984 में एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित ‘ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ के उस गौरवशाली इतिहास और उसकी यात्रा को भी याद करना चाहिए, जो भारतीय साइकिल उद्योग के विकास का पर्याय रही है।
यह केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह दशकों के उस संघर्ष, समर्पण और विज़न का प्रतीक है जिसने भारत को साइकिल निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाई है।
एक समय था जब हमारा देश साइकिल और उसके छोटे-छोटे पुर्जों के लिए भी आयात पर निर्भर हुआ करता था। लेकिन एकमा की स्थापना और इसके दूरदर्शी सदस्यों के सामूहिक प्रयासों ने उस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। इस संस्था के कुशल मार्गदर्शन में, हमारे उद्यमियों ने अपनी मेहनत से भारत को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े साइकिल उत्पादक देश के रूप में स्थापित किया है। यह यात्रा पारंपरिक साइकिलों से शुरू होकर, आज आधुनिक माउंटेन बाइक्स, गियर वाली साइकिलों और अत्याधुनिक ई-बाइक्स तक पहुँच चुकी है, जो बदलते समय के साथ खुद को ढालने की आपकी क्षमता को दर्शाती है।
अगर हम एकमा के मुख्य उद्देश्यों की बात करें, तो इसका लक्ष्य केवल कारखानों में उत्पादन बढ़ाना नहीं है। यह संस्था भारतीय साइकिल उद्योग को तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार के साथ नीतियों के निर्माण में एक सेतु का काम करना, उत्पादन में उच्चतम गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना, और ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड के तहत निर्यात को बढ़ावा देना, इसके मूल विज़न का हिस्सा रहा है।
इसके साथ ही, यह संस्था समाज में स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी साइकिलिंग को एक जन-आंदोलन बनाने की दिशा में काम कर रही है। आज इस मंच से मैं एकमा की इस पूरी टीम और इससे जुड़े हर एक सदस्य की सराहना करता हूँ, जिन्होंने भारतीय साइकिल उद्योग को एक मजबूत और आत्मनिर्भर पहचान दी है।
देवियो और सज्जनो,
पंजाब की पहचान केवल कृषि और वीरता तक सीमित नहीं है। यह राज्य दशकों से देश के औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। हमारा यह लुधियाना शहर केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश के औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र है। अपनी मजबूत औद्योगिक विरासत, उद्यमशीलता की भावना और विनिर्माण क्षमता के कारण इसे लंबे समय से ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है।
यदि हरित क्रांति ने पंजाब को कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई, तो लुधियाना के साइकिल उद्योग ने राज्य को औद्योगिक मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। लुधियाना को देश की ‘साइकिल राजधानी’ कहा जाता है, क्योंकि भारत में निर्मित लगभग 90 प्रतिशत साइकिलों का उत्पादन यहीं होता है। लगभग 4 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ से अधिक साइकिलों का निर्माण करते हैं। यही कारण है कि भारत आज चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल निर्माता देश है। इस उद्योग से लगभग 5 लाख लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
यह भी गर्व का विषय है कि हीरो साइकिल्स और एवन साइकिल्स जैसी विश्वविख्यात कंपनियाँ लुधियाना से संचालित होकर भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का परचम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लहरा रही हैं।
लुधियाना शहर ने हमें साइकिल उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों सहित और भी बहुत से उद्योगपति दिए हैं जिन्होंने देश-विदेश में राज्य का नाम रोशन किया है। इनमें भारती एंटरप्राइज़िस के संस्थापक श्री सुनील भारती मित्तल, ट्राईडेंट ग्रुप के संस्थापक श्री राजिंदर गुप्ता, हीरो साइकिल्स के संस्थापक स्व. श्री ओम प्रकाश मुंजाल जी, वर्धमान ग्रुप के संस्थापक श्री एस.पी. ओसवाल, एवन साइकिल्स के अध्यक्ष ओंकार सिंह पाहवा जी शामिल हैं। इसके अलावा यहां पर क्रैमिका, किट्टी और बॉन ब्रेड जैसी कंपनियां भी स्थापित हैं।
लुधियाना की सफलता यह सिद्ध करती है कि जब परिश्रम, नवाचार और उद्यमशीलता एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो वे न केवल उद्योगों का निर्माण करते हैं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।
साथियो,
साइकलिंग परिवहन का सबसे सरल, सुलभ और लोकतांत्रिक माध्यम है। पैदल चलने के बाद यह यात्रा का सबसे सहज और प्रभावी साधन है। यह भारत सरकार के LiFE (Lifestyle For Environment) मिशन की भावना के पूर्णतः अनुरूप है, जो हमें सतत भविष्य हेतु जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
पिछले दो सौ वर्षों में, मोटर चालित परिवहन के वर्चस्व के बावजूद, साइकिल ने अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता बनाए रखी है। आज वैश्विक स्तर पर साइकलिंग का पुनरुत्थान हो रहा है, जिसका कारण इसके स्वास्थ्य, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ हैं।
ग्रामीण भारत में करोड़ों लोगों के लिए साइकिल केवल एक वाहन नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। यह बच्चों को स्कूल, श्रमिकों को रोजगार, किसानों को बाजार और परिवारों को अवसरों से जोड़ती है। यह गतिशीलता, पहुंच और आत्मसम्मान को बढ़ाकर जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि साइकिल चलाना न केवल आवागमन का एक साधन है, बल्कि यह एक बेहद स्वस्थ और कम खर्च वाला व्यायाम भी है। आज के समय में, जहाँ एक तरफ मोटर गाड़ियाँ प्रदूषण बढ़ा रही हैं, वहीं साइकिल हमारे पर्यावरण के लिए एक सच्चे वरदान की तरह है।
आज की आधुनिक लेकिन शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली ने कई गंभीर बीमारियों को जन्म दिया है। ऐसे में नियमित रूप से साइकिल चलाना, इस निष्क्रिय जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने का सबसे बेहतरीन और कारगर उपाय है।
लेकिन, इन फायदों के बावजूद, आज हम समाज में एक चिंताजनक विरोधाभास देख रहे हैं। जैसे-जैसे लोगों के आय के स्तर में वृद्धि हुई है और मोटर चालित वाहनों, विशेषकर दोपहिया वाहनों, को खरीदना आसान हुआ है, वैसे-वैसे साइकिल के उपयोग में एक दुर्भाग्यपूर्ण गिरावट आई है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण हमारे शहरों में ‘सुरक्षित साइकिलिंग बुनियादी ढांचे’ का अभाव भी रहा है, जिससे लोग साइकिल चलाते हुए खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते।
विशेषकर हमारे शहरी क्षेत्रों का हाल यह है कि जिन छोटी दूरियों की यात्राओं को हम आसानी से साइकिल द्वारा तय कर सकते थे, आज उनके लिए भी लोग कारों और मोटरसाइकिलों पर निर्भर हो गए हैं। गली के नुक्कड़ तक जाना हो या पास के बाज़ार तक, मोटर वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रवृत्ति ने न केवल हमारी सड़कों पर ट्रैफिक और प्रदूषण को बढ़ाया है, बल्कि हमारी सेहत को भी नुकसान पहुँचाया है।
एक समाज के रूप में और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के रूप में, यह हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम इस सोच को बदलें। हमें लोगों को फिर से साइकिल की ओर मोड़ना होगा और इसे एक मजबूरी का नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट और स्वस्थ जीवनशैली’ का प्रतीक बनाना होगा।
मुझे चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर आप सभी से यह साझा करते हुए गर्व हो रहा है कि इस दिशा में चंडीगढ़ एक मिसाल प्रस्तुत करता है। यहाँ 200 किलोमीटर से अधिक का समर्पित साइकिल ट्रैक नेटवर्क उपलब्ध है और उत्तर भारत का सबसे बड़ा पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम भी शहरवासियों को प्रदान किया गया है। यही कारण है कि चंडीगढ़ को निस्संदेह एक साइकिल-अनुकूल शहर कहा जा सकता है।
भारत सरकार के ‘स्मार्ट सिटीज मिशन’ के अंतर्गत शुरू की गई ‘साइकिल्स 4 चेंज’ और ‘स्ट्रीट्स 4 पीपल’ जैसी पहलें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इनका उद्देश्य शहरों को अधिक सुरक्षित, सुगम और साइकिल तथा पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाना है। सुरक्षित साइकिल ट्रैक, नो-कार ज़ोन और पैदल यात्री-अनुकूल सड़कों के माध्यम से इन अभियानों ने सतत एवं हरित परिवहन को नई दिशा दी है।
साइकिल उद्योग के लिए यह एक बड़ा अवसर है, क्योंकि जैसे-जैसे शहर अधिक साइकिल-अनुकूल बनेंगे, वैसे-वैसे साइकिलों की मांग और उपयोग भी बढ़ेगा।
इससे न केवल उद्योग को नई गति मिलेगी, बल्कि प्रदूषण कम करने और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। मैं उद्योग जगत से आग्रह करता हूँ कि वह इन पहलों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभाए।
देवियो और सज्जनो,
आज दुनिया एक बेहद कठिन और परिवर्तनशील दौर से गुजर रही है। मध्य-पूर्व में चल रहे हालिया भू-राजनीतिक तनावों और संघर्ष ने विश्व स्तर पर एक गंभीर ईंधन संकट को जन्म दिया है। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं हर देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में साइकिल उद्योग की प्रासंगिकता कहीं अधिक बढ़ जाती है। साइकिल केवल परिवहन का एक साधन नहीं है; यह इस वैश्विक ऊर्जा संकट के खिलाफ एक सशक्त, किफायती और शून्य-ईंधन वाला समाधान है। ई-साइकिल और पारंपरिक साइकिलों को अपनाना आज समय की माँग बन गया है।
मित्रो,
भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ लगातार भारत की आर्थिक क्षमता और विकास की संभावनाओं को स्वीकार कर रही हैं। विनिर्माण, डिजिटल नवाचार, स्टार्ट-अप्स, बुनियादी ढाँचा और कौशल विकास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लिया है। यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, उद्योग, उद्यमी, वैज्ञानिक और युवा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारा उद्योग जगत वैश्विक प्रतिस्पर्धा, नवाचार, गुणवत्ता और स्थिरता के नए मानक स्थापित करेगा।
साथियो,
भारत सरकार ने उद्योगों और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। ‘मेक इन इंडिया अभियान’ ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है। ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ ने घरेलू उत्पादन, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दी है। ‘स्टार्ट-अप इंडिया पहल’ के माध्यम से लाखों युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। आज भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में शामिल है।
पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना, जी.ई.एम. पोर्टल और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस सुधारों ने उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। इन पहलों का लाभ साइकिल उद्योग सहित सभी विनिर्माण क्षेत्रों को मिल रहा है।
साइकिल उद्योग को आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकारों को नए कंपोनेंट्स हेतु पीएलआई योजना, अनिवार्य क्वालिटी मानक, DPIIT द्वारा ’बाइसिकल डेवलपमेंट काउंसिल’ का पुनर्गठन और सुरक्षित साइकिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना चाहिए। ये कदम हमारी मैन्युफैक्चरिंग तकनीक को अपग्रेड करने, उत्पादों की सुरक्षा व गुणवत्ता सुधारने और इस पूरे सेक्टर में बड़े नीतिगत बदलाव लाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
मैं यहाँ उपस्थित सभी उद्योगपतियों से पर्यावरण संरक्षण के विषय पर भी बात करना चाहूँगा। बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन आज हमारे सामने सबसे बड़ा संकट है। महात्मा गांधी जी ने स्पष्ट रूप से कहा था, ‘‘प्रकृति के पास सभी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।’’
एक जिम्मेदार उद्योग के तौर पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम ‘ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग’ को अपनाएं। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि अपने कारखानों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सौर ऊर्जा का उपयोग करने और कचरा प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठाएं। हमारा आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब वह सस्टेनेबल हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण छोड़ कर जाए।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि विशेषकर वर्तमान ऊर्जा संकट के समय, हम प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि-विशेष रूप से पैदल चलने और साइकलिंग के लिए समर्पित करेंगे। इससे न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
अंत में, मैं एक बार फिर आज के सभी पुरस्कार विजेताओं को, अपने आइडियाज़ से बाज़ार में क्रांति ला रहे स्टार्टअप्स को, और इस शानदार आयोजन के लिए एकमा के सभी पदाधिकारियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं अपनी बात इन प्रेरक पंक्तियों के साथ समाप्त करना चाहूँगाः
‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’
अपने हौसलों को उड़ान दीजिए, नए कीर्तिमान स्थापित कीजिए और देश को आत्मनिर्भर बनाने के इस महायज्ञ में अपना अमूल्य योगदान देते रहिए।
धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत।