SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF GOLDEN JUBILEE CELEBRATION OF THE ROTARY CLUB CHANDIGARH MIDTOWN IN CHANDIGARH ON JULY 1, 2026.

रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन के 50वें स्थापना समारोह के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 01.07.2026, बुधवारसमयः शाम 5:30 बजेस्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज इस ऐतिहासिक और अत्यंत गरिमापूर्ण अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है।

किसी भी संस्था या संगठन के लिए अपने सफर के 50 वर्ष पूरे करना एक बहुत बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि होती है। रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन आज अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। लेकिन, मैं यह मानता हूँ कि यह उत्सव केवल कैलेंडर के पन्नों पर दर्ज 50 वर्षों की संख्या का नहीं है। यह उत्सव है, पाँच दशकों के निरंतर पुरुषार्थ का, अटूट मित्रता का, निःस्वार्थ सेवा का और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के संकल्प का।

इस गौरवमयी यात्रा को अत्यंत सार्थक और सफल बनाने के लिए मैं रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन के वर्तमान और पूर्व, सभी सदस्यों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।

आज का यह अवसर एक और बेहद खास और गौरवपूर्ण वजह से हमारे दिलों को छू रहा है।

मैं श्रीमती रेनू चोपड़ा जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, जो आज रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन के 50वें अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल रही हैं। इसके साथ ही, मैं डॉ. रीता कालरा जी को भी हार्दिक बधाई देता हूँ, जो पूरे रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 का कुशल नेतृत्व कर रही हैं।

यह हम सभी के लिए अत्यंत गर्व की बात है कि इस स्वर्ण जयंती वर्ष में दो अत्यंत सक्षम, विदुषी और ऊर्जावान महिलाओं के हाथों में नेतृत्व की कमान है।

‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’’ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, जहाँ उनकी क्षमता को अवसर मिलता है, वहाँ प्रगति और समृद्धि का वास होता है।

मैं समझता हूं कि आज इन दोनों महिला लीडर्स का इस पद पर होना केवल रोटरी के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि देश के विकास में और संगठनों को नई दिशा देने में हमारी मातृशक्ति की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि आपकी दृष्टि, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता से यह वर्ष क्लब के इतिहास में सबसे यादगार और ऐतिहासिक वर्षों में से एक साबित होगा।

देवियो और सज्जनो,

जब हम निःस्वार्थ सेवा की बात करते हैं, तो रोटरी का नाम पूरी दुनिया में सबसे आगे आता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘सेवा परमो धर्मः’’ अर्थात, सेवा ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य और धर्म है। रोटरी इंटरनेशनल ने इसी प्राचीन भारतीय विचार को अपने वैश्विक सिद्धांत "Service Above Self" (स्वयं से ऊपर सेवा) के रूप में अपनाया है।

यदि हम रोटरी के इतिहास पर दृष्टि डालें, तो ज्ञात होता है कि 23 फरवरी 1905 को शिकागो के प्रतिष्ठित वकील श्री पॉल हैरिस और उनके साथियों द्वारा ‘रोटरी क्लब ऑफ शिकागो’ की स्थापना के रूप में बोया गया सेवा, मित्रता और मानवता का एक छोटा-सा बीज आज विश्वभर में फैला एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वह छोटा-सा बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बनकर विश्व के 200 से अधिक देशों और भौगोलिक क्षेत्रों में करोड़ों लोगों के जीवन में आशा, सेवा और परिवर्तन का संदेश पहुँचा रहा है।

रोटरी की शुरुआत इस सोच के साथ हुई थी कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर और प्रबुद्ध लोग एक साथ आएं, अपनी क्षमताओं को जोड़ें और दुनिया को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें। आज दुनिया का शायद ही कोई ऐसा कोना हो, जहाँ रोटरी ने अपनी सेवा की अमिट छाप न छोड़ी हो। यह संस्था वास्तव में हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति के महान आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम्” को साकार रूप प्रदान करती है।

रोटरी के संस्थापक पॉल हैरिस ने कहा था, “दुनिया हमें हमारे विचारों से नहीं, बल्कि हमारे कार्यों और उपलब्धियों से पहचानती है।” यह विचार आज भी रोटरी की कार्यसंस्कृति का मूल आधार है।

रोटरी ने सदैव बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन्हें समर्पण के साथ साकार किया है। पोलियो उन्मूलन अभियान इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। वर्ष 1979 में फिलीपींस में लाखों बच्चों के टीकाकरण से शुरू हुई यह पहल आज वैश्विक जनस्वास्थ्य के इतिहास की सबसे सफल अभियानों में से एक मानी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग से रोटरी ने विश्व के अधिकांश देशों को पोलियो-मुक्त बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।

देवियो और सज्जनो,

भारत में रोटरी के इतिहास की बात करें तो साल 1920 में कोलकाता में पहले रोटरी क्लब की स्थापना के साथ भारत में इस सेवा यात्रा की शुरुआत हुई थी। तब से लेकर आज तक, भारत के नवनिर्माण में और समाज को विभिन्न संकटों से उबारने में रोटरी की भूमिका अद्वितीय रही है।

आज भारत में रोटरी एक सशक्त सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के रूप में स्थापित हो चुका है। देश के 43 रोटरी डिस्ट्रिक्ट्स के अंतर्गत लगभग 4 हजार 700 क्लब और 1 लाख 70 हजार से अधिक सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। यह विशाल नेटवर्क ‘सेवा ही सर्वोपरि’ की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रेरक माध्यम बन चुका है। 

यदि हम रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 की बात करें, तो वर्ष 1980 में स्थापित यह डिस्ट्रिक्ट उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में अपनी सेवाओं का प्रभावी विस्तार किए हुए है। इस डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत 130 रोटरी क्लबों के माध्यम से लगभग 4 हजार 500 समर्पित रोटेरियन समाज सेवा के विविध क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

मुझे विशेष प्रसन्नता है कि रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 सेवा के क्षेत्र में अनेक अनुकरणीय परियोजनाओं के माध्यम से समाज में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित रोटरी ब्लड बैंक द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 8 हजार यूनिट रक्त एकत्रित कर जरूरतमंदों तक पहुँचाया जाता है। पीजीआई चंडीगढ़ और सेक्टर-32 हॉस्पिटल स्थित रोटरी सराय मरीजों के परिजनों को किफायती आवास सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।

इसके साथ ही, डिस्ट्रिक्ट के व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र युवाओं एवं महिलाओं को होम केयर नर्सिंग, कंप्यूटर एवं अन्य रोजगार परक कौशलों का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं। पानीपत के डायलिसिस केन्द्र, अम्बाला का रोटरी अस्पताल तथा पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में संचालित डायग्नोस्टिक लैब, नेत्र चिकित्सा एवं टीकाकरण केन्द्र समाज के कमजोर वर्गों तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचा रहे हैं। शिमला स्थित रोटरी धर्मशाला भी सेवा और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

ये सभी परियोजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 ने "Service Above Self" के अपने आदर्श को व्यवहार में उतारते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और मानवीय सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और स्थायी विरासत का निर्माण किया है। 

और वहीं यदि रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन की बात करें तो वर्ष 1977 में स्थापित इस क्लब ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, युवा विकास और सामुदायिक सेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करते हुए क्षेत्र के अग्रणी रोटरी क्लबों में अपनी पहचान बनाई है।

क्लब द्वारा नियमित रूप से निःशुल्क चिकित्सा एवं रक्तदान शिविर, सरकारी विद्यालयों को आधारभूत सुविधाएँ, पुस्तकें एवं डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराना, वंचित वर्गों के लिए साक्षरता एवं कौशल विकास कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों की सहायता जैसे अनेक सेवा कार्य किए जा रहे हैं।

साथ ही, रोटरी यूथ लीडरशिप अवार्ड, इंटरैक्ट और रोटरैक्ट जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा-भाव को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। ये सभी प्रयास रोटरी के आदर्श वाक्य "Service Above Self" को सार्थक रूप से चरितार्थ करते हैं।

देवियो और सज्जनो,

जब हम समाज सेवा या परोपकार की बात करते हैं, तो भारत के लिए यह कोई आधुनिक अवधारणा या पश्चिम से आया हुआ विचार नहीं है। सेवा और परोपकार हमारी संस्कृति के डीएनए में है, हमारी रगों में है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने हज़ारों साल पहले उद्घोष किया था, 

‘‘अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्।

परोपकारः पुण्याय पापाय परपीड़नम्।।’’

अर्थात, महर्षि वेदव्यास ने अठारह पुराणों में केवल दो ही मुख्य बातें कही हैं, दूसरों का उपकार (सेवा) करने से पुण्य मिलता है और दूसरों को पीड़ा देने से पाप।

हमारी सनातन संस्कृति ने हमें सिखाया है कि ‘‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’’। भारत का इतिहास ऐसे महान परोपकारी और दानवीरों के उदाहरणों से भरा पड़ा है जिन्होंने समाज और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

जब सृष्टि की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए वज्र बनाने की आवश्यकता हुई, तो महर्षि दधीचि ने बिना किसी संकोच के जन-कल्याण के लिए अपनी जीती-जागती देह की हड्डियाँ दान कर दीं। यह परोपकार की पराकाष्ठा है।राजा बलि ने अपना सर्वस्व दान कर दिया, तो वहीं महाभारत के महानायक अंगराज कर्ण ने अपने प्राणों की रक्षा करने वाले कवच और कुंडल भी द्वार पर आए याचक को सौंप दिए।

अकाल के समय स्वयं चालीस दिनों तक भूखे रहने के बाद, जब राजा रंतिदेव के सामने भोजन आया, तो उन्होंने अपने हिस्से का भोजन और पानी द्वार पर आए एक भूखे और प्यासे व्यक्ति को दे दिया और कहा कि मुझे संसार के वैभव की चाह नहीं है, मैं केवल तड़पते हुए प्राणियों के दुखों का नाश चाहता हूँ।

यह हमारी वह विरासत है जहाँ वृक्ष स्वयं अपना फल नहीं खाते, नदियाँ अपना पानी स्वयं नहीं पीतीं, वे परमार्थ के लिए जीती हैं।

देवियो और सज्जनो,

राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त यह है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उदय हो। जब तक हमारा कोई एक भाई या बहन पीछे छूटा हुआ है, तब तक हम संपूर्ण राष्ट्र के रूप में पूर्ण रूप से विकसित होने का दावा नहीं कर सकते।

स्वामी विवेकानंद जी ने एक बहुत सुंदर बात कही थी, जिसे आज हमें अपने जीवन का मंत्र बनाना होगा। उन्होंने कहा था, ‘‘दरिद्र देवो भव, मूर्ख देवो भव।’’ अर्थात् जो दरिद्र है, जो अशिक्षित है, जो शोषित है, वह साक्षात ईश्वर का रूप है। उसकी सेवा करना ही मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में जाकर पूजा करने से कहीं बढ़कर है।

आज समाज में जो हमारे वंचित, शोषित, जनजातीय और आर्थिक रूप से कमजोर भाई-बहन हैं, उन्हें केवल हमारी सहानुभूति की आवश्यकता नहीं है, उन्हें हमारे ‘सहयोग’ और ‘समान अवसरों’ की आवश्यकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना ही वास्तविक समाज सेवा है।

हम सौभाग्यशाली हैं कि हम आज उस कालखंड में जी रहे हैं जिसे हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘अमृत काल’ कहा है। आज भारत ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के एक भव्य संकल्प को लेकर आगे बढ़ रहा है।

लेकिन याद रखिए, राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की योजनाओं, सड़कों, पुलों या बड़ी इमारतों से नहीं होता। राष्ट्र का निर्माण उसकी जनता के चरित्र, उसकी संवेदनशीलता और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से होता है।

मैं विशेषकर यहाँ उपस्थित युवा पीढ़ी से कहना चाहता हूँ कि आज आपके पास डिजिटल क्रांति की शक्ति है, आधुनिक शिक्षा के पंख हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग जैसी तकनीकें हैं। लेकिन इस आधुनिकता के साथ-साथ आपके भीतर मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का होना भी उतना ही अनिवार्य है।

तकनीक का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए होना चाहिए। जब हमारा कोई युवा गाँव की किसी समस्या को हल करने के लिए कोई नया स्टार्टअप शुरू करता है, जब वह किसी गरीब बच्चे को पढ़ाने के लिए समय निकालता है, जब वह पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसी मुहिम से जुड़ता है, तो वह सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा होता है।

आज के समय में हम अक्सर अपने ‘अधिकारों’ की बात तो बहुत मुखर होकर करते हैं, लेकिन अपने ‘कर्तव्यों’ को भूल जाते हैं। एक आदर्श समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव अधिकारों से ज्यादा कर्तव्यों पर टिकी होती है। हमारे भारत का संविधान भी हमें हमारे मौलिक कर्तव्यों की याद दिलाता है।

यदि हम अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं, यदि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हैं, यदि हम अपने परिवेश को स्वच्छ रख रहे हैं और पानी की एक-एक बूंद बचा रहे हैं, तो यह भी समाज सेवा का और देश भक्ति का एक रूप है। देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर बंदूक उठाने का नाम नहीं है, अपने समाज को सुंदर, व्यसन-मुक्त और शिक्षित बनाना भी सबसे बड़ी देशभक्ति है।

हमें अपने समाज को सामाजिक कुरीतियों, जैसे, नशे की लत और भेदभाव से मुक्त कराना होगा। एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज ही एक समर्थ राष्ट्र का आधार बन सकता है।

आज जब भारत विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, तब रोटरी जैसे संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार नीतियाँ बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना कोई भी परिवर्तन पूर्ण नहीं हो सकता। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को जमीन पर उतारने में रोटरी जैसे संगठनों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मैं यह भी कहना चाहूँगा कि सेवा का आनंद सबसे बड़ा आनंद है। जब किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आती है, जब किसी बच्चे को पढ़ाई का अवसर मिलता है, जब किसी रोगी को समय पर सहायता मिलती है, जब किसी परिवार को संकट में सहारा मिलता है, तब सेवा करने वाले को जो संतोष मिलता है, वह किसी भी पद, प्रतिष्ठा या पुरस्कार से बड़ा होता है।

आज इस 50वें वर्ष के अवसर पर रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन को अपने अतीत पर गर्व करना चाहिए, वर्तमान को संकल्प का समय मानना चाहिए और भविष्य को और अधिक सेवा, नवाचार और समर्पण से भरना चाहिए।

मैं श्रीमती रेनू चोपड़ा जी और उनकी पूरी टीम को एक सफल, रचनात्मक और यादगार कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं डॉ. रीता कालरा जी को भी रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 के नेतृत्व के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में रोटरी सेवा, संवेदना और सामाजिक परिवर्तन की नई मिसाल प्रस्तुत करेगा।

अंत में, मैं रोटरी परिवार से यही कहना चाहूँगा कि जहाँ सेवा है, वहाँ संवेदना है। जहाँ संवेदना है, वहाँ समाज में विश्वास है। और जहाँ विश्वास है, वहाँ परिवर्तन अवश्य संभव है।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने जीवन, अपने समय और अपनी क्षमता का एक हिस्सा समाज के लिए समर्पित करेंगे। यही सच्ची मानवता है, यही सच्ची राष्ट्र सेवा है और यही त्वजंतल की आत्मा है।

रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन को 50 वर्ष पूर्ण होने पर पुनः हार्दिक बधाई।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिंद!

जय भारत!