SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 51ST CONVOCATION CEREMONY OF GURU NANAK DEV UNIVERSITY AT AMRITSAR ON 12.07.2026.

गुरू नानक देव विश्वविद्यालय के 51वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 12.07.2026, रविवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः अमृतसर

    

नमस्कार, सत श्री अकाल।

आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 51वें दीक्षांत समारोह में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। दीक्षांत समारोह केवल उपाधियाँ प्रदान करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार, उत्तरदायित्व और राष्ट्र-निर्माण की एक नई यात्रा का शुभारम्भ होता है। आज का दिन वर्षों की कठिन साधना, अनुशासन, परिश्रम और समर्पण का उत्सव है तथा प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन में एक नई दिशा और नए संकल्प का प्रतीक है।

मैं आज डिग्रियां और पदक प्राप्त करने वाले सभी 490 विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आज के इस दीक्षांत समारोह में 3 विद्यार्थियों को ‘चांसलर्स मेडल’, 37 मेधावियों को ‘मेमोरियल मेडल’, 90 शोधार्थियों को पी.एचडी. तथा 360 विद्यार्थियों को ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधियाँ सौंपी जा रही हैं।

आज आप जिस संस्थान से शिक्षा पूरी कर समाज में कदम रख रहे हैं, वह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, शोध और संस्कारों का एक ऐसा प्रकाश-स्तंभ है जिसने देश-दुनिया को अनगिनत प्रतिभाएं दी हैं।

इस प्रतिष्ठित संस्थान, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1969 में प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में की गई थी। यह केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं थी, बल्कि पंजाब तथा देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक विरासत को नई दिशा देने का राष्ट्रीय संकल्प था। पाँच दशकों से अधिक की अपनी गौरवपूर्ण यात्रा में इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, खेल, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करते हुए देश और विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

इस विश्वविद्यालय की स्थापना का मूल उद्देश्य सदैव गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान, मानवीय मूल्यों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करना रहा है। ज्ञान, चरित्र और सेवा की त्रिवेणी पर आधारित इसकी कार्यसंस्कृति ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता तथा वैश्विक सहयोग का एक सशक्त केंद्र बना दिया है। 

आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय देश के अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा सर्वोच्च A++  ग्रेड से मान्यता प्राप्त है तथा इसे यूजीसी की श्रेणी-1 विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल है। शिक्षा, शोध, नवाचार, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। इसके हजारों पूर्व विद्यार्थी आज भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में शिक्षा, उद्योग, प्रशासन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं।

वर्ष 2026 गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के लिए अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियों का वर्ष रहा है। विश्वविद्यालय ने 20 फरवरी 2026 को प्रथम विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित किया। डॉ. विक्रम साहनी ने ए.आई. सेंटर के लिए 1 करोड़ रुपये की अनुदान राशि की घोषणा की तथा सामाजिक सेवा के लिए ‘ए.आई. लंगर’ की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय ने ‘पंजाबी-फर्स्ट एजुकेशन, रिसर्च एंड गवर्नेंस पॉलिसी-2026’ लागू कर पंजाबी को अंग्रेज़ी के साथ शोध की भाषा का दर्जा दिया। 

MYAS&डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन एंड साइंसेज को नेशनल बेस्ट इंस्टीट्यूशन अवार्ड मिला, जबकि भौतिकी विभाग को राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रतिष्ठित अनुदान प्राप्त हुआ और विश्वविद्यालय देश के शीर्ष 23 संस्थानों में शामिल हुआ। 

विश्वविद्यालय ने जापान की होरिबा लिमिटेड से अंतरराष्ट्रीय उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान परियोजना प्राप्त की तथा वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग फॉर इनोवेशन की ‘‘यूनिवर्सिटी ब्रांड एंव प्रतिष्ठा’’ श्रेणी में विश्व में 78वां स्थान हासिल किया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विश्वविद्यालय 135 से अधिक ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र कार्यक्रम संचालित कर रहा है। रिमोट लर्निंग एवं रिमोट एम्प्लॉयबिलिटी की अवधारणा शुरू की गई। कुलपति ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में ए.आई, सुरक्षा एवं नैतिकता विषय पर विशिष्ट वक्ता के रूप में भाग लिया। 

विश्वविद्यालय को अनेक सम्मान प्राप्त हुए। कुलपति प्रो. करमजीत सिंह को ‘पंजाब रत्न पुरस्कार’ तथा ‘डॉ. महिंदर सिंह रंधावा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। शोधार्थी आंचल खन्ना ने ग्रीस में ‘बेस्ट पोस्टर अवार्ड’ जीता तथा संगीत विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार को ‘स्टेट अवार्ड’ प्रदान किया गया।

खेलों में विश्वविद्यालय ने खिलाड़ियों के लिए पहली बार डाइट मनी योजना शुरू की। ऐश्वर्या प्रताप सिंह तोमर ने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। विश्वविद्यालय ने ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी कैनोइंग एवं कायाकिंग प्रतियोगिता में ‘ओवरऑल जनरल चैंपियनशिप ट्रॉफी’ जीतते हुए 11 स्वर्ण और 9 रजत पदक हासिल किए।

देश का सर्वोच्च विश्वविद्यालयीय खेल सम्मान मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी रिकॉर्ड 25 बार प्राप्त करना इस बात का सशक्त प्रमाण है कि यह विश्वविद्यालय खेल उत्कृष्टता का भी एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

विश्वविद्यालय की छात्रा सिफ़त कौर समरा ने पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही, एसएसएफ वर्ल्ड कप 2025, अर्जेंटीना में स्वर्ण तथा म्यूनिख वर्ल्ड कप 2025, जर्मनी में कांस्य पदक जीतकर संस्थान को गौरवान्वित किया।

यह अत्यंत सराहनीय है कि वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय द्वारा सभी 34 दिव्यांग विद्यार्थियों को पूर्ण फीस माफी व छात्रवृत्ति, 316 गरीब व मेधावी विद्यार्थियों को 39.72 लाख रुपये की वित्तीय सहायता, तथा 1 हजार 84 जरूरतमंद विद्यार्थियों को फीस में छूट प्रदान कर यह सुनिश्चित किया गया है कि आर्थिक परिस्थितियाँ किसी भी छात्र की शिक्षा में बाधा न बनें।

यह भी उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय 100 पीएच.डी. शोधार्थियों को 8 हजार प्रतिमाह फेलोशिप प्रदान कर रहा है। 

इसके साथ ही, 'Earn While you Learn' योजना के अंतर्गत 48 विद्यार्थियों को पार्ट-टाईम रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

रोज़गार, शोध एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने ट्रस्ट ऑफ पीपल, नांदी फाउंडेशन, भारतीय सेना के सिख रेजिमेंटल सेंटर, दसवांधा सिंह एजुकेशनल एंड कल्चरल फाउंडेशन तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड (अमेरिका) सहित अनेक संस्थानों के साथ समझौते किए। 1 जनवरी 2026 से अब तक 82 कंपनियों ने 455 विद्यार्थियों को नियुक्ति दी।

पिछले पाँच महीनों में इस ने 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और व्याख्यान आयोजित किए, जिनमें ‘एस. नानक सिंह मेमोरियल लेक्चर’, ‘गल्ल पंजाब दीः साडी मिट्टी, साडी सोच, साडा भविष्य’ कॉन्क्लेव, गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम तथा भारतीय भाषा पुस्तक योजना पर राज्यस्तरीय कार्यशाला प्रमुख रहे। 

इन पहलों के माध्यम से विश्वविद्यालय ने शोध संस्कृति, उद्योग-अकादमिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, उद्यमिता आधारित शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन, भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक ए.आई. तथा सिख अध्ययन एवं वैश्विक शोध सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।

मैं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह जी, समस्त प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ, जिनके सामूहिक प्रयासों ने इस संस्थान को राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाई है। 

देवियो और सज्जनो,

हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि एक विश्वविद्यालय का दायित्व केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करना या उन्हें डिग्रियां बांटना मात्र नहीं होता। विश्वविद्यालय तो समाज की चेतना का निर्माता होता है। वह समाज को एक सही दिशा देता है, हमारी महान संस्कृति का संरक्षण करता है और नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच विकसित करता है। यही वे स्थान हैं जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है, सामाजिक समरसता का ताना-बाना बुना जाता है और देश के आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। संक्षेप में कहें, तो विश्वविद्यालय राष्ट्र की आत्मा को गढ़ने का काम करते हैं।

आज जब हम वैश्विक पटल पर देखते हैं, तो भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला राष्ट्र बनकर उभर रहा है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि हमारे विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षा, उच्च स्तरीय अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र बन जाएं, तो वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का हमारा संकल्प निश्चित रूप से सिद्ध होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी युगांतकारी परिवर्तन का सबसे बड़ा आधार है, जो हमारे युवाओं को वैश्विक नागरिक बनाने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।

इस मंच से, मैं गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से कुछ विशेष अपेक्षाएं रखता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह संस्थान न केवल देश में, बल्कि पूरे विश्व में उच्च स्तरीय शोध का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। यह भविष्य में ए.आई., डेटा विज्ञान, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान, कृषि नवाचार, भारतीय ज्ञान प्रणाली, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और वैश्विक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा तथा विकसित भारत 2047 के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

प्रिय विद्यार्थियों,

आज जबकि आप अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं, तो मैं चाहता हूं कि आप एक पल ठहरकर उन लोगों का स्मरण करें जिनके सहयोग से आपकी शिक्षण-यात्रा संभव हुई है। आपकी सफलता आपके कड़े परिश्रम का परिणाम है, किंतु इस सफलता में आपके माता-पिता का त्याग, आपके शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का योगदान भी शामिल है। 

इसलिए, आप सबकी जिम्मेदारी है कि आप समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे आप रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, आपकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।

याद रखिए, डिग्री आपकी योग्यता का प्रमाण हो सकती है, लेकिन आपका चरित्र ही आपकी वास्तविक पहचान बनेगा। आपकी ईमानदारी, आपकी संवेदनशीलता, आपका आचरण और राष्ट्रसेवा का आपका संकल्प ही आपको जीवन में महान बनाएगा। सफलता का अर्थ केवल उच्च वेतन प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ नागरिक और अच्छा इंसान बनना भी है।

आप ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जो अभूतपूर्व परिवर्तन और असीम संभावनाओं का युग है। ए.आई., डेटा साईंस, बायो-टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और डिजिटल नवाचार जैसी नई तकनीकें जीवन और कार्य के प्रत्येक क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में सीखने की प्रक्रिया केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रह सकती। वास्तव में, आजीवन सीखते रहने की प्रवृत्ति ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति होगी। 

अतीत की सफलताओं पर गर्व करने के साथ-साथ अब आगे देखने का समय है। इतिहास गवाह है कि परिवर्तन ही प्रकृति का शाश्वत नियम है। महान यूनानी दार्शनिक हेराक्लिटस ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति एक ही नदी में दो बार पैर नहीं रख सकता, क्योंकि न तो वह नदी वही रहती है और न ही वह व्यक्ति वही रहता है।’’

आज हम एक अभूतपूर्व तकनीकी क्रांति के युग में जी रहे हैं। जिस देश में कभी लैंडलाइन फोन होना एक बड़ी बात थी, आज वही भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाज़ार और डिजिटल शक्ति बनकर उभरा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें आज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। 

दुनिया की एक-छठाई आबादी वाले हमारे इस महान देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब आपके कंधों पर है। समय की मांग है कि आप इन आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, खुद को इनके अनुरूप ढालें और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

परिवर्तन से डरने के बजाय उसे अपनाएं, नए विचारों का स्वागत कीजिए, प्रयोग करने का साहस रखिए और हर अनुभव से कुछ नया सीखने का प्रयास कीजिए। जैसा कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, ‘‘बौद्धिक विकास जन्म से आरंभ होता है और जीवन के अंत तक समाप्त नहीं होता।’’

मेरा मानना है कि सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले हमारे युवा देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं तथा और अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

देवियो और सज्जनो,

आज का यह गौरवपूर्ण क्षण केवल विद्यार्थियों की उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के वर्षों के त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास का भी सम्मान है। इन उपाधियों के पीछे उनके अनगिनत संघर्ष, त्याग और प्रार्थनाएँ निहित हैं। इस अवसर पर मैं सभी माता-पिता को नमन करता हूँ, जिन्होंने अपने संस्कारों और समर्पण से राष्ट्र को योग्य, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक प्रदान किए हैं।

कहा गया है, ‘‘गुरु स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को प्रकाशमान करते हैं।’’ आज इन विद्यार्थियों की सफलता में उनके शिक्षकों का अथक परिश्रम, मार्गदर्शन और मूल्यपरक शिक्षा समान रूप से समाहित है। आपने केवल ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि चरित्र, विवेक और जीवन-दृष्टि का भी निर्माण किया है। आपके द्वारा गढ़े गए ये विद्यार्थी ही इस संस्थान और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

एक विद्यार्थी के व्यक्तित्व की नींव माता-पिता के संस्कारों पर और उसकी उड़ान शिक्षकों के ज्ञान पर आधारित होती है। आज यहाँ बैठे प्रत्येक विद्यार्थी की सफलता इन दोनों के संयुक्त समर्पण का परिणाम है। यही संस्कार और शिक्षा उन्हें जीवन में सही दिशा देंगे तथा राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों का सदैव स्मरण कराते रहेंगे।

इस अवसर पर मैं उद्योग जगत, पूर्व विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों तथा नागरिक समाज से भी आग्रह करता हूँ कि वे विश्वविद्यालयों के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। शिक्षा में किया गया निवेश वास्तव में राष्ट्र के भविष्य में किया गया निवेश होता है।

अंत में, मैं विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति, सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और इस भव्य समारोह को सफल बनाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को हार्दिक बधाई देता हूँ। 

मैं सभी उपाधिधारकों को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर करे कि आप जहाँ भी जाएँ, अपने विश्वविद्यालय, अपने प्रदेश और अपने देश का नाम रोशन करें।

आइए, आज गुरु नानक देव जी की इस पावन धरा पर, हम सब मिलकर यह अटूट संकल्प लें कि हम अपने ज्ञान, नवाचार, उच्च नैतिक मूल्यों और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से एक विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और मानवीय भारत का निर्माण करेंगे। 

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

जय हिन्द!

जय भारत!