SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY CELEBRATION OF LAGHU UDYOG BHARATI AT DERABASSI ON 11.07.2026.
- by Admin
- 2026-07-11 13:50
लघु उद्योग भारती, डेराबस्सी के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर
राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन
दिनांकः 11.07.2026, शनिवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः डेराबस्सी
नमस्कार!
आज लघु उद्योग भारती, डेराबस्सी के स्थापना दिवस समारोह के इस अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले मैं लघु उद्योग भारती, डेराबस्सी के समस्त पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और यहाँ के उद्योगपतियों को इस स्थापना दिवस की हृदय से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
मुझे ज्ञात हुआ है कि अखिल भारतीय लघु उद्योग भारती की स्थापना 25 अप्रैल 1994 को इस दूरदर्शी विचार के साथ हुई थी कि देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को एक सशक्त, राष्ट्रवादी और रचनात्मक मंच प्रदान किया जाए। अपने प्रारम्भिक चरण में मात्र 12 सदस्यों के साथ आरम्भ हुई यह यात्रा आज निरंतर विस्तार पाते हुए 70 हजार से अधिक उद्यमियों के विशाल परिवार का रूप ले चुकी है।
लघु उद्योग भारती केवल उद्योगों के हितों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करता, बल्कि स्वदेशी उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को सशक्त बनाना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना तथा भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना इसका प्रमुख उद्देश्य रहा है।
संगठन ने सदैव यह विश्वास व्यक्त किया है कि भारत की आर्थिक प्रगति की वास्तविक शक्ति केवल बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नहीं, बल्कि देश के गाँवों, कस्बों और शहरों में कार्यरत लाखों सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों की कर्मनिष्ठा, नवाचार और उद्यमशीलता में निहित है।
अगर मैं लघु उद्योग भारती, पंजाब की बात करूं तो वर्ष 1994 में अपनी स्थापना के बाद से ही इसने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने और छोटे उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने में एक युगांतरकारी कार्य किया है। पिछले तीन दशकों से अधिक के इस गौरवशाली सफर में, इस संगठन ने पंजाब के कोने-कोने में फैले हमारे लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमियों की समस्याओं को न केवल सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया है, बल्कि उनके समाधान के लिए एक मजबूत सेतु का काम भी किया है।
मुझे यह जानकर अत्यंत गर्व की अनुभूति हो रही है कि 1994 में कुछ गिने-चुने राष्ट्रभक्त उद्यमियों के साथ शुरू हुआ यह कारवां आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है और आज पूरे पंजाब में इसके लगभग 2 हजार से अधिक सक्रिय सदस्य हैं, जो दिन-रात राज्य के औद्योगिक विकास में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।
मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ है कि लघु उद्योग भारती की डेराबस्सी इकाई की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। पिछले महज कुछ वर्षों के छोटे से सफर में ही, अपनी कर्मठता के बल पर आज इस इकाई ने 150 से अधिक सक्रिय सदस्यों का एक मजबूत और सशक्त परिवार खड़ा कर लिया है। डेराबस्सी पंजाब का एक बेहद महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल कॉरिडोर है, और यहाँ के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों ने क्षेत्र के विकास को एक नई गति दी है। आपकी इसी अटूट ऊर्जा और एकजुटता को रेखांकित करते हुए एक प्रसिद्ध कवि की दो पंक्तियाँ मुझे याद आती हैं:
‘‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’
लघु उद्योग भारती, डेराबस्सी ने इन वर्षों में ‘‘उद्योग हित - राष्ट्र हित’’ के मूल मंत्र को जमीनी स्तर पर चरितार्थ करते हुए स्थानीय एमएसएमई सेक्टर को न केवल एक सशक्त आवाज दी है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं।
भारतीय संस्कृति में उद्योग और श्रम को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखा गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।’’ अर्थात् केवल कल्पनाओं से नहीं, बल्कि निरंतर परिश्रम और उद्यम से ही कार्य सिद्ध होते हैं। यही संदेश लघु उद्योग भारती के कार्य का भी मूल आधार है।
प्रिय उद्यमियों,
आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इस विकास यात्रा के केंद्र में यदि कोई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तो वह है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र। यह क्षेत्र केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका, नवाचार, क्षेत्रीय संतुलित विकास तथा सामाजिक समृद्धि का आधार है।
आज भारत की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र देश के विनिर्माण उत्पादन में लगभग 35.4 प्रतिशत, कुल निर्यात में 48.58 प्रतिशत तथा जीडीपी में 31.1 प्रतिशत का उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
देशभर में 7.47 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ संचालित हैं, जो 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर न केवल आर्थिक विकास को सशक्त बना रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण, नवाचार को बढ़ावा देने और करोड़ों परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए लक्षित नीतिगत कदमों से छोटे उद्योगों के लिए ऋण की उपलब्धता आसान हुई है, उन्हें मजबूत कानूनी सुरक्षा उपाय मिले हैं और व्यापार करने की सुगमता में व्यापक सुधार हुआ है।
आज ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमियों को सीधे बाजार तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं, ‘ट्रेड्स’ (TReDS) के माध्यम से उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी हो रही हैं, और ‘समाधान’ पोर्टल के जरिए उनके समय पर भुगतान की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जो मंत्र दिया है, उसकी सबसे मजबूत नींव एम.एस.एम.ई. क्षेत्र ही है। आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आयात कम करना नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रतिभा, स्थानीय उत्पादन, स्थानीय कौशल और स्थानीय नवाचार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है। ‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की यात्रा में लघु उद्योगों की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
आज दुनिया आपूर्ति श्रृंखलाओं के नए स्वरूप की ओर बढ़ रही है। वैश्विक कंपनियाँ विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण साझेदारों की तलाश कर रही हैं। यह भारत के लिए एक स्वर्णिम अवसर है।
यदि हमारे सूक्ष्म और लघु उद्योग गुणवत्ता, तकनीक, डिजिटलीकरण और नवाचार को अपनाएँ, तो वे न केवल देश की आवश्यकताओं की पूर्ति करेंगे, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएँगे।
मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि आज भारत का युवा नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, ई-कॉमर्स और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों ने उद्यमिता की नई संभावनाएँ खोली हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि पारंपरिक उद्योग भी नई तकनीकों को अपनाएँ और युवा उद्यमियों के अनुभव तथा वरिष्ठ उद्योगपतियों के मार्गदर्शन का प्रभावी समन्वय स्थापित हो।
स्वामी विवेकानन्द ने कहा था, ‘‘एक विचार को अपना जीवन बना लो; उसी के बारे में सोचो, उसी का सपना देखो और उसी पर कार्य करो।’’ यही संदेश प्रत्येक उद्यमी के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। उद्योग केवल पूँजी से नहीं चलते; वे विश्वास, ईमानदारी, गुणवत्ता, अनुशासन और निरंतर नवाचार से आगे बढ़ते हैं।
आज आवश्यकता केवल उद्योग स्थापित करने की नहीं, बल्कि ऐसे उद्योग विकसित करने की है जो पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी हों, ऊर्जा दक्ष हों, डिजिटल हों, गुणवत्ता-आधारित हों और वैश्विक मानकों के अनुरूप हों। भविष्य उसी का होगा जो परिवर्तन को स्वीकार करेगा और निरंतर सीखने की संस्कृति अपनाएगा।
प्रिय साथियो,
आज भारत की विकास यात्रा में एमएसएमई केवल आर्थिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि वे ‘विकसित भारत 2047’ के सशक्त आधार स्तंभ हैं। यह अत्यंत संतोष का विषय है कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में इस क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि देश में उद्यमिता की नई संस्कृति विकसित हुई है और लाखों युवाओं ने नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने का मार्ग चुना है।
मुझे प्रसन्नता है कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 24 हजार 560 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। साथ ही, सरकार ने एमएसएमई को ‘चैम्पियन एमएसएमई’ बनाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।
विशेष रूप से 10 हजार करोड़ के ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ की स्थापना का निर्णय ऐसे उद्यमों को नई ऊर्जा देगा जो राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
आज सरकार की सोच केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमों को विचार से लेकर वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने की है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और पी.एम. गति शक्ति जैसी अनेक पहलें परस्पर एक-दूसरे को सशक्त बना रही हैं।
प्रिय उद्यमियों,
आज विश्व अर्थव्यवस्था तीव्र गति से बदल रही है। Artificial Intelligence, Industry 4.0, Robotics, Internet of Things, 3D Printing, Green Manufacturing और Digital Supply Chains विनिर्माण क्षेत्र का स्वरूप बदल रहे हैं। यदि हमारे उद्योग समय के साथ स्वयं को नहीं बदलेंगे तो प्रतिस्पर्धा कठिन होती जाएगी। इसलिए आज आवश्यकता केवल मशीनें बदलने की नहीं, बल्कि मानसिकता बदलने की है।
मैं अक्सर कहता हूँ, ‘‘तकनीक आपको सक्षम बना सकती है, लेकिन गुणवत्ता, ईमानदारी और विश्वसनीयता ही आपको सफल बनाती है।’’ इसी प्रकार, प्रतिस्पर्धा से मत डरिए; प्रतिस्पर्धा ही उत्कृष्टता को जन्म देती है।
अब आवश्यकता है कि हम Design in India, Innovate in India, Manufacture in India और Brand India की दिशा में आगे बढ़ें। केवल उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं है; हमें ऐसे उत्पाद बनाने होंगे जो गुणवत्ता, विश्वसनीयता और नवाचार के कारण वैश्विक बाज़ार में भारतीय पहचान बनें।
हमारे युवा उद्यमियों के लिए भी यह समय अत्यंत अनुकूल है। आज यदि किसी युवा के पास अच्छा विचार, परिश्रम और संकल्प है तो सरकार की अनेक योजनाएँ उसे उद्यम स्थापित करने में सहयोग देने के लिए उपलब्ध हैं। मैं युवाओं से कहता हूं कि जो अवसर की प्रतीक्षा करते हैं, वे सफल हो सकते हैं; लेकिन जो अवसर का सृजन करते हैं, वही इतिहास बनाते हैं।
आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हाल के आँकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था ने लगभग 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक क्षमता, नीतिगत स्थिरता और उद्यमियों के परिश्रम का प्रमाण है।
पंजाब के पास कृषि-आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, रक्षा विनिर्माण, खेल सामग्री, वस्त्र, चिकित्सा उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और स्टार्टअप आधारित विनिर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता है। इसके लिए उद्योग, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। नवाचार और अनुसंधान को उद्योगों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि पंजाब के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता प्रमाणन, अनुसंधान, डिजिटल परिवर्तन, हरित विनिर्माण और निर्यातोन्मुख उत्पादन को अपनाएँ, तो पंजाब एक बार पुनः देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में अपना विशिष्ट स्थान स्थापित करेगा।
प्रिय साथियो,
भारत की सांस्कृतिक परंपरा में व्यापार और उद्योग को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि लोककल्याण का माध्यम माना गया है। हमारे यहाँ कहा गया है, ‘‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।’’ एक उद्योग की वास्तविक सफलता केवल उसके लाभ में नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र की समृद्धि में उसके योगदान से आँकी जाती है।
आज कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। मैं लघु उद्योगों से भी आग्रह करूँगा कि वे अपनी क्षमता के अनुसार शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में योगदान दें। समाज से प्राप्त संसाधनों का प्रतिदान करना हम सभी का कर्तव्य है।
प्रिय उद्यमियों,
विश्व आज हरित अर्थव्यवस्था और सतत विकास की ओर बढ़ रहा है। भविष्य का उद्योग वही होगा जो ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रतिबद्ध होगा। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसकी प्राप्ति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मैं पंजाब के उद्योगों से आग्रह करता हूँ कि वे स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाकर भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए खुद को तैयार करें।
मैं इस अवसर पर लघु उद्योग भारती को बधाई देता हूँ, जिसने छोटे उद्यमियों की आवाज़ को सशक्त बनाया, उद्योगों की समस्याओं को रचनात्मक ढंग से सरकार तक पहुँचाया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। मुझे विश्वास है कि यह संगठन आगे भी भारतीय उद्योग जगत का प्रभावशाली प्रतिनिधि बना रहेगा।
मुझे विश्वास है कि पंजाब के उद्यमी अपनी मेहनत, नवाचार और राष्ट्रभक्ति के बल पर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे तथा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के अभियान में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
अंत में, मैं लघु उद्योग भारती के संस्थापकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ तथा सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और उद्यमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आइए, हम सब मिलकर स्वदेशी, गुणवत्ता, नवाचार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा को अपने उद्योगों का मूल मंत्र बनाते हुए पंजाब को उद्योग एवं उद्यमिता का अग्रणी केंद्र तथा भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें।
इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ मैं आप सभी को स्थापना दिवस की पुनः हार्दिक बधाई देता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!