SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THE SILVER JUBILEE CELEBRATIONS OF JAIN PUBLIC SCHOOL AT DERABASSI ON 11.07.2026.
- by Admin
- 2026-07-11 12:45
जैन पब्लिक स्कूल की रजत जयंती समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 11.07.2026, शनिवार समयः सुबह 10:30 बजे स्थानः डेराबस्सी
नमस्कार!
आज भगवान महावीर जैन पब्लिक स्कूल, डेराबस्सी के रजत जयंती समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक संतोष का अनुभव हो रहा है।
मैं सबसे पहले श्री महावीर एजुकेशन सोसाइटी तथा विद्यालय परिवार को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए अपनी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। किसी भी संस्था के जीवन में 25 वर्ष केवल समय का एक पड़ाव नहीं होते, बल्कि वे संघर्ष, संकल्प, सेवा, संस्कार और सफलता की एक प्रेरणादायी यात्रा के प्रतीक होते हैं।
आज का यह समारोह केवल एक विद्यालय की वर्षगाँठ नहीं है, बल्कि उस विश्वास, उस तपस्या और उस सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्सव है जिसने हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का कार्य किया है।
देवियो और सज्जनो,
शिक्षा के क्षेत्र में समाज की भागीदारी भारत की प्राचीन परंपरा रही है। गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विद्यालयों तक समाज ने सदैव शिक्षा को सर्वोच्च दान माना है। इसी भावना के साथ श्री महावीर एजुकेशन सोसाइटी ने शिक्षा को सेवा का माध्यम बनाया।
पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री जितेन्द्र मुनि जी महाराज के आशीर्वाद से वर्ष 2002 में भगवान महावीर जैन पब्लिक स्कूल की स्थापना लगभग 400 विद्यार्थियों के साथ इस उद्देश्य से की गई कि डेराबस्सी और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। आज यह विद्यालय एक प्रतिष्ठित सह-शिक्षा, अंग्रेज़ी माध्यम, वरिष्ठ माध्यमिक संस्थान के रूप में स्थापित है।
इस गौरवपूर्ण यात्रा में 25 फ़रवरी 2025 का दिन भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर जुड़ा, जब विद्यालय परिसर में लगभग 2,000 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम का शिलान्यास आगमज्ञाता उपाध्याय भगवान श्री जितेन्द्र मुनि जी महाराज के पावन करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। यह ऑडिटोरियम विद्यालय की दूरदर्शी सोच, उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के निर्माण तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।
मुझे यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता और संतोष का अनुभव हो रहा है कि आज इस भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह भवन ज्ञान, संस्कृति, नवाचार, सृजनशीलता और व्यक्तित्व विकास का ऐसा प्रेरणादायी केंद्र बनेगा, जहाँ से भविष्य के अनेक प्रतिभाशाली और संस्कारित नागरिक राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
साथियो,
जब मैं श्री महावीर एजुकेशन सोसाइटी के इतिहास और इसके सेवा कार्यों को देखता हूँ, तो मेरा मस्तक आदर से झुक जाता है। इस सोसाइटी का केवल एक ही परम मिशन रहा है, ‘ज्ञान दान, महादान’। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि विद्या का दान दुनिया के सभी दानों में सर्वोपरि है, क्योंकि धन खर्च करने से घटता है, लेकिन ज्ञान बांटने से बढ़ता है।
श्री महावीर एजुकेशन सोसायटी केवल शिक्षा प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समाज कल्याण की एक प्रेरक परंपरा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जैन दर्शन पर आधारित नैतिक मूल्यों, गौ सेवा, स्वास्थ्य सेवा तथा कौशल विकास के माध्यम से यह संस्था समाज और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।
आज सोसायटी के तीन शिक्षण संस्थान, लॉर्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल, डेराबस्सी, ए.ए.आर. जैन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा एस.एस. जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवार रहे हैं। यहाँ के अनेक विद्यार्थी चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर देश की सेवा कर रहे हैं।
संस्थान के एक प्रतिभाशाली छात्र ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक एम्स, नई दिल्ली में प्रवेश प्राप्त किया। यह उपलब्धि संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का भी प्रमाण है।
साथ ही, वर्ष 2007 में स्थापित गौशाला, भगवान ऋषभदेव जैन चैरिटेबल डायग्नोस्टिक सेंटर तथा 2,000 क्षमता वाला आर्य सुधर्मास्वामी सभागार समाजसेवा और सांस्कृतिक चेतना के सशक्त केंद्र बन चुके हैं।
सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि यह समूचा कार्य ‘न लाभ, न हानि’ के आदर्श पर निःस्वार्थ सेवा-भाव से संचालित हो रहा है। इसके लिए मैं सोसायटी के प्रबंधन, प्राचार्य, शिक्षकों एवं समस्त सहयोगियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
इसके साथ ही, प्रबंधन समिति की जो दूरदर्शी सोच मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह है इनका आने वाला महान लक्ष्य, एक ही परिसर में स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की उच्च स्तरीय शिक्षा की सुविधा प्रदान करना।
यह अपने आप में एक क्रांतिकारी कदम है! जब यह लक्ष्य पूरी तरह साकार होगा, तो हमारे बच्चों को के.जी. से लेकर पी.जी. और रिसर्च तक की पढ़ाई के लिए कहीं बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। एक ही प्रांगण में, एक ही छत के नीचे, जैन दर्शन के पवित्र संस्कारों की छांव में हमारे बच्चे बड़े होंगे, पढ़ेंगे और देश के सर्वोच्च शिखरों तक पहुँचेंगे।
मैं प्रबंधन समिति के इस अद्भुत विजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपका यह संकल्प शीघ्र ही सिद्ध हो।
प्रिय साथियों,
भारतीय संस्कृति में शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘सा विद्या या विमुक्तये।’’ अर्थात् वही विद्या है जो मनुष्य को अज्ञान, भय, संकीर्णता और बंधनों से मुक्त करे। शिक्षा का उद्देश्य केवल बुद्धि का विकास नहीं, बल्कि व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण है। ऐसी शिक्षा ही समाज और राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।
आज जब हम भगवान महावीर के नाम से जुड़े इस संस्थान में उपस्थित हैं, तब उनके जीवन-दर्शन का स्मरण स्वाभाविक है। भगवान महावीर ने संसार को पाँच महान सिद्धांत दिए, अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह। यदि आज का युवा इन पाँच मूल्यों को अपने जीवन में उतार ले, तो वह न केवल सफल नागरिक बनेगा बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान भी बनेगा।
भगवान महावीर ने कहा था, ‘‘नाणस्स सारमायारो।’’ अर्थात् ज्ञान का वास्तविक सार आचरण है। केवल पुस्तकों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है; ज्ञान तभी सार्थक है जब वह व्यवहार में दिखाई दे।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज का युग ए.आई, रोबोटिक्स, क्वांटम कम्प्यूटिंग, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल तकनीक का युग है। लेकिन याद रखिए, तकनीक आपको दक्ष और बुद्धिमान बना सकती है, किंतु महानता केवल नैतिक मूल्यों, संस्कारों और श्रेष्ठ चरित्र से ही प्राप्त होती है। यदि आपके पास ज्ञान है, लेकिन विनम्रता नहीं है, तो वह ज्ञान अधूरा है।
यदि आपके पास सफलता है, लेकिन संवेदनशीलता नहीं है, तो वह सफलता समाज के लिए उपयोगी नहीं बन सकती। मैं चाहता हूँ कि इस विद्यालय का प्रत्येक विद्यार्थी केवल अंक प्राप्त करने वाला छात्र न बने, बल्कि ऐसा नागरिक बने जो समाज में परिवर्तन का वाहक बने।
प्रिय विद्यार्थियों,
जीवन में प्रतियोगिता से मत डरिए। संघर्ष से मत घबराइए। याद रखिए, सफलता कभी संयोग से नहीं मिलती; वह सतत परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच का परिणाम होती है। असफलता अंत नहीं होती। वह सफलता की तैयारी होती है।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे, ‘‘ सपने वे नहीं होते जो आप सोते समय देखते हैं; सपने वे होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।’’ बड़े सपने देखिए। बड़े लक्ष्य निर्धारित कीजिए। लेकिन उन सपनों को पूरा करने के लिए उतनी ही मेहनत भी कीजिए।
प्रिय छात्र-छात्राओं,
मोबाइल फोन आपका साधन होना चाहिए, आपका स्वामी नहीं। सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान अर्जित करने के लिए कीजिए, समय नष्ट करने के लिए नहीं। अपने समय का सर्वोत्तम निवेश पुस्तकों, प्रयोगशालाओं, खेल के मैदानों, संगीत, साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों में कीजिए। याद रखिए, जो विद्यार्थी समय का सम्मान करता है, समय भी उसी को सम्मान देता है।
प्रिय शिक्षकों,
राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा दायित्व आपके कंधों पर है। एक शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, वह पीढ़ियाँ गढ़ता है। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों को उत्तर नहीं देता; वह उन्हें सही प्रश्न पूछना सिखाता है।
भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तक, शिक्षक को राष्ट्र की आत्मा का निर्माता माना गया है। मुझे प्रसन्नता है कि यह विद्यालय केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी विशेष बल देता है।
मैं आप सभी शिक्षकों से आग्रह करता हूँ कि बच्चों में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जिज्ञासा, नवाचार, करुणा और नेतृत्व क्षमता का भी विकास करें। क्योंकि आने वाला भारत केवल डिग्रीधारियों से नहीं, बल्कि विचारवान नागरिकों से बनेगा।
प्रिय अभिभावकों,
बच्चों की पहली पाठशाला घर होता है। विद्यालय और परिवार यदि एक ही दिशा में कार्य करें, तो कोई भी शक्ति बच्चे को उत्कृष्ट बनने से नहीं रोक सकती। आज के समय में बच्चों को सबसे अधिक आवश्यकता महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि आपके समय, विश्वास और संवाद की है। उनकी तुलना किसी और से मत कीजिए।
हर बच्चा अद्वितीय है। किसी में विज्ञान की प्रतिभा होती है, किसी में संगीत की, किसी में खेल की, किसी में साहित्य की और किसी में नेतृत्व की। हमारा दायित्व है कि हम उनकी क्षमता को पहचानें, न कि केवल अंकतालिका को।
साथियो,
भारत आज एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को अधिक समावेशी, बहु-विषयक, कौशल-आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो नवाचार करें, उद्यमिता अपनाएँ, समाज के प्रति संवेदनशील हों, पर्यावरण की रक्षा करें, संविधान के मूल्यों का सम्मान करें, और भारत को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। यदि इस शक्ति को सही दिशा, सही शिक्षा और सही संस्कार मिल जाएँ, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
मैं विशेष रूप से विद्यार्थियों से कहना चाहता हूँ कि अपने जीवन में तीन बातों को कभी मत छोड़िए, सीखना, मेहनत करना और अच्छा इंसान बने रहना। ज्ञान आपको ऊँचाई देगा। चरित्र आपको सम्मान देगा। और सेवा आपको अमर बना देगी।
महात्मा गांधी ने कहा था, ‘‘आप स्वयं वह परिवर्तन बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।’’ इसी भावना के साथ प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बने।
आज इस रजत जयंती के अवसर पर हम केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव न मनाएँ, बल्कि भविष्य के लिए भी एक नया संकल्प लें कि यह विद्यालय अगले पच्चीस वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व और उत्कृष्टता का ऐसा केंद्र बने, जिसकी पहचान केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हो।
मैं भगवान महावीर से प्रार्थना करता हूँ कि वे इस विद्यालय, श्री महावीर एजुकेशन सोसायटी, इसके सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को निरंतर प्रगति, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करें।
अपनी बात का समापन मैं भगवान महावीर के इस प्रेरक संदेश के साथ करना चाहूँगा, ‘‘स्वयं पर विजय प्राप्त करना हजारों युद्ध जीतने से भी बड़ी उपलब्धि है।’’
और अंत में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन प्रेरक पंक्तियों के साथ,
‘‘मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है।’’
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि ज्ञान, संस्कार, सेवा और नवाचार के माध्यम से एक ऐसे भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे जो समृद्ध, सशक्त, संवेदनशील और विकसित हो।
आप सभी को एक बार फिर से रजत जयंती समारोह की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!