SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF VAN MAHOTSAV AT CHANDIGARH ON 10.07.2026.

‘वन महोत्सव 2026’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 10.07.2026, शुक्रवारसमयः सुबह 8:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

आप सभी को सुप्रभात।

आज ‘वन महोत्सव 2026’ के शुभारंभ के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह प्रकृति की रक्षा, जैव विविधता के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित एवं स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने के हमारे सामूहिक संकल्प का उत्सव है।

वन महोत्सव केवल एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं है। यह एक जन आंदोलन है, जो प्रत्येक नागरिक को प्रकृति का संरक्षक बनने के लिए प्रेरित करता है। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, वायु गुणवत्ता में सुधार लाने, जैव विविधता के संरक्षण तथा हमारे शहर की पर्यावरणीय क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियो, 

आज के इस महोत्सव के महत्व को समझने के लिए हमें इसके गौरवशाली इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि इस ‘पेड़ों के त्योहार’ की शुरुआत कैसे हुई थी।

भारत में वन महोत्सव की नींव वर्ष 1950 में हमारे देश के तत्कालीन कृषि एवं खाद्य मंत्री और महान पर्यावरण प्रेमी, डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जी ने रखी थी। उस समय उन्होंने यह भाँप लिया था कि आधुनिक विकास की अंधी दौड़ में कहीं जंगल न उजड़ जाएं। उनका उद्देश्य केवल कुछ पौधे रोपकर औपचारिकता पूरी करना नहीं था; बल्कि जनमानस के मन में पेड़ों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और चेतना जगाना था।

श्री मुंशी जी कहा करते थे कि ‘‘वृक्षों का अर्थ है जल, जल से गेहूँ और रोटी उपजती है, और रोटी से ही जीवन चलता है और टिकता है।’’ आज 76 वर्षों के बाद भी, उनकी वह दूरदर्शी सोच हमारे लिए एक संजीवनी का काम कर रही है। वन महोत्सव आज एक जन-आंदोलन बन चुका है, जो हमें याद दिलाता है कि यदि जंगल सुरक्षित हैं, तो ही जीवन सुरक्षित है।

साथियो,

चंडीगढ़ सदैव ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम से जाना जाता रहा है। इस शहर के अद्भुत ग्रीन कवर और व्यवस्थित भूनिर्माण की मज़बूत नींव रखने में चंडीगढ़ के पूर्व मुख्य आयुक्त डॉ. मोहिंदर सिंह रंधावा जी का अविस्मरणीय योगदान रहा है। 

उनकी दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि चंडीगढ़ आज प्रकृति और वास्तुकला का एक अनूठा संगम बन पाया है। आज मुझे यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि डॉ. रंधावा जी की उस महान विरासत को आगे बढ़ाते हुए, आधुनिक वैज्ञानिक योजना, समर्पित क्रियान्वयन तथा जनसहभागिता के माध्यम से यह शहर सतत शहरी हरित विकास के क्षेत्र में भारत के उत्कृष्ट उदाहरणों में निरंतर उभर रहा है।

साथियो,

भारत की वन संपदा हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश का कुल वन क्षेत्र 7 लाख 15 हजार 343 वर्ग किलोमीटर, अर्थात् देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.76 प्रतिशत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से मध्य प्रदेश (77,073 वर्ग किमी), अरूणाचल प्रदेश (65,882 वर्ग किमी) और छत्तीसगढ़ (55,812 वर्ग किमी) सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले राज्य हैं।

इसके अलावा, भारत का मैंग्रोव क्षेत्र लगभग 4,992 वर्ग किलोमीटर  है, जो मुख्य रूप से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में स्थित है। साथ ही, देश में 106 राष्ट्रीय उद्यान, 573 वन्यजीव अभयारण्य, 115 संरक्षण रिज़र्व और 220 सामुदायिक रिज़र्व हमारी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवनों के संरक्षण के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता के सशक्त प्रमाण हैं।

वैश्विक स्तर पर भी भारत की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्स असेसमेंट 2025 के अनुसार कुल वन क्षेत्र के आधार पर भारत विश्व में 9वें स्थान पर पहुंच गया है। शुद्ध वार्षिक वन क्षत्र वृद्धि के मामले में भारत ने लगातार तीसरा स्थान बनाए रखा है। इसके साथ ही 2021-2025 के दौरान भारतीय वन प्रतिवर्ष लगभग 150 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्साइड का अवशोषण कर विश्व के 5वें सबसे बड़े कार्बन सिंक के रूप में उभरे हैं।

आज विश्व का कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 अरब हेक्टेयर है, जो पृथ्वी के कुल भू-भाग का लगभग 32 प्रतिशत है। यह भी संतोष का विषय है कि वैश्विक स्तर पर शुद्ध वन हानि की वार्षिक दर 1990-2000 के 10.7 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 2015-2025 के दौरान 4.12 मिलियन हेक्टेयर रह गई है, जो वन संरक्षण के प्रति बढ़ती वैश्विक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है।

किन्तु वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियाँ अभी भी गंभीर बनी हुई हैं। एक अध्ययन के अनुसार, विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 15 अरब पेड़ नष्ट हो जाते हैं, अर्थात प्रत्येक सेकंड लगभग 475 पेड़। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन की गंभीरता को स्पष्ट करती है।

ऐसे समय में वन महोत्सव-2025 केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन है। यह अभियान अधिक से अधिक वृक्षारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश देता है, ताकि हम प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हुए भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भविष्य सुनिश्चित कर सकें।

देवियो और सज्जनो,

भारतीय संस्कृति में वृक्ष केवल प्रकृति का अंग नहीं, बल्कि जीवन और देवत्व के प्रतीक माने गए हैं। हमारे वेदों और पुराणों में पीपल, बरगद, नीम और तुलसी जैसे वृक्षों को आध्यात्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

हमारी परंपरा पंचमहाभूत, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश के संतुलन पर आधारित है, और इस संतुलन की रक्षा में वृक्षों तथा वनों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। प्राचीन भारत की पंचवटी परंपरा इसी प्रकृति-सम्मत जीवन-दृष्टि का सशक्त प्रतीक रही है।

वृक्ष केवल हमें प्राणवायु प्रदान नहीं करते, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘‘प्रकृति सबसे बड़ी गुरु है। जो उससे सीखना जानता है, वही जीवन का वास्तविक ज्ञान प्राप्त करता है।’’ यह संदेश हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर सतत और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

साथियो,

वृक्षारोपण के माध्यम से हम न केवल वनों की संख्या बढ़ाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और संतुलित पर्यावरण का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। यह उत्सव हमें सिखाता है कि जैसे माँ अपने बच्चों की देखभाल करती है, वैसे ही हमें भी अपनी धरती माँ की चिंता करनी चाहिए।

आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं, तो वन महोत्सव हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी, कि हम जागरूक बनें, जिम्मेदारी लें और हरित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। इसलिए, वन महोत्सव को एक सतत आंदोलन के रूप में अपनाएँ, जहाँ हर नागरिक, हर बच्चा, हर संस्था यह प्रण ले कि ‘‘एक पेड़ लगाना, एक जीवन बचाना है।’’

देवियो और सज्जनो,

पिछले वर्ष, वन महोत्सव 2025 के शुभारंभ के दौरान, चंडीगढ़ प्रशासन के मार्गदर्शन में शहर के 318 स्थानों पर 1 लाख 17 हजार 836 पौधे लगाकर चंडीगढ़ ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा एक-दिवसीय वृक्षारोपण अभियान संचालित किया। वर्ष भर में 5 लाख 76 हजार 221 पौधों के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष, 6 लाख 64 हजार 133 पौधे पूरे शहर में लगाए गए।

उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि हमारे प्रयास केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहे। किसी भी वृक्षारोपण कार्यक्रम की सफलता पौधों के जीवित रहने तथा उनके स्वस्थ विकास पर निर्भर करती है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि अंतर-विभागीय निगरानी समितियों द्वारा इन पौधारोपण कार्यों की वैज्ञानिक निगरानी की गई तथा नवंबर 2025 और मार्च 2026 में उनका मूल्यांकन किया गया।

सभी सहभागी विभागों में पौधों की कुल जीवित रहने की दर 79 प्रतिशत दर्ज की गई, जो गुणवत्तापूर्ण वृक्षारोपण एवं सतत रखरखाव के प्रति सभी क्रियान्वयन एजेंसियों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 

वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं स्थल चयन की उपयोगिता के आधार पर इस वर्ष के वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए 4 लाख 10 हजार 725 पौधों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि इस वर्ष संख्यात्मक लक्ष्य को व्यावहारिक रूप से निर्धारित किया गया है, किंतु मुख्य ध्यान गुणवत्तापूर्ण वृक्षारोपण, उपयुक्त स्थानीय प्रजातियों के चयन, वैज्ञानिक स्थल चयन, बेहतर जीवित रहने की दर तथा दीर्घकालिक रखरखाव पर रहेगा, ताकि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा भविष्य में एक स्वस्थ वृक्ष बन सके।

इन सतत प्रयासों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा जारी नवीनतम इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में चंडीगढ़ का ग्रीन कवर 38.04 प्रतिशत था, जो वर्ष 2026 में बढ़कर प्रभावशाली 51.54 प्रतिशत हो गया है। केवल पिछले तीन वर्षों में ही यह 2023 के 45.63 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 51.54 प्रतिशत हो गया है। 

भविष्य के वृक्षारोपण कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिए चंडीगढ़ ने बॉटनिकल गार्डन एवं दरिया में दो आधुनिक हाई-टेक नर्सरियाँ स्थापित की हैं। प्रत्येक नर्सरी में जलवायु नियंत्रित तथा उन्नत ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष एक लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार करने की क्षमता है। मुझे इस वर्ष के प्रारंभ में बॉटनिकल गार्डन स्थित हाई-टेक नर्सरी का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था और मुझे विश्वास है कि ये सुविधाएँ स्वस्थ एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधों के उत्पादन की हमारी क्षमता को मजबूत करेंगी।

मित्रों,

पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं है। इसमें हमारे वेट्लैंड, वन्यजीवों तथा प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण भी शामिल है।

मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि सुखना वेट्लैंड को रामसर स्थल  घोषित किए जाने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण प्रगति कर चुका है। चंडीगढ़ वेट्लैंड अथॉरिटी की स्वीकृति के पश्चात यह प्रस्ताव भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया, जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय विचारार्थ स्विट्ज़रलैंड स्थित रामसर सचिवालय को भेज दिया है। यह चंडीगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय धरोहरों में से एक को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में हमारा निवेश भी अत्यंत उत्साहजनक है। मैं शिक्षा विभाग एवं वन विभाग को राष्ट्रीय हरित कोर कार्यक्रम के अंतर्गत सभी 204 विद्यालयों का ईको-क्लबों तथा सभी 21 महाविद्यालयों का पर्यावरण समितियों के अंतर्गत शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए बधाई देता हूँ। 

मेरा मानना है कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का साथ-साथ चलना आवश्यक है। इस संदर्भ में मैं चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति की सराहना करता हूँ, जिसने वैधानिक पर्यावरणीय स्वीकृतियों के प्रोसेसिंग समय को 120 दिनों से घटाकर ऑरेंज एवं रेड श्रेणी के उद्योगों के लिए अधिकतम केवल 21 कार्य दिवस कर दिया है। यह महत्वपूर्ण सुधार पारदर्शिता, दक्षता तथा निवेशकों के विश्वास को सुदृढ़ करता है।

मैं चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति को देश का पहला संघ राज्य क्षेत्र बनने पर भी बधाई देता हूँ, जिसने ग्रीन श्रेणी के उद्योगों के लिए शून्य-दिवसीय स्वीकृति प्रणाली प्रारंभ कर ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित किया है, साथ ही उच्च पर्यावरणीय मानकों को भी बनाए रखा है।

देवियो और सज्जनो,

हमारे सतत पर्यावरणीय प्रयासों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2025 के दौरान चंडीगढ़ की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वायु गुणवत्ता सूचकांक अधिकांश समय ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रहा तथा गंभीर प्रदूषण की घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है। यह सुधार राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के समन्वित क्रियान्वयन तथा सभी संबंधित विभागों के समर्पित प्रयासों से संभव हो पाया है।

इस प्रगति को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त हुई है। दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2024 में चंडीगढ़ की रैंकिंग 27वें स्थान पर थी, जो स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में उल्लेखनीय रूप से सुधरकर 8वें स्थान पर पहुँच गई है। यह उपलब्धि प्रत्येक नागरिक के लिए स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

भविष्य की ओर देखते हुए, चंडीगढ़ एक और दूरदर्शी पहल के रूप में ‘सिटी फॉरेस्ट’ के विकास की दिशा में अग्रसर है। इस परियोजना की परिकल्पना प्रकृति-आधारित शिक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा सतत पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। इसमें नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, पक्षी अवलोकन क्षेत्र, बाँस कैनोपी वॉक, प्रकृति पथ, साइक्लिंग ट्रैक, अवलोकन मंच, मुक्ताकाशी रंगमंच, ध्यान स्थल तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल आगंतुक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। मुझे विश्वास है कि यह सिटी फॉरेस्ट पर्यावरण जागरूकता, जैव विविधता संरक्षण तथा उत्तरदायी पर्यावरण पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

प्रिय मित्रों,

डड्डू माजरा डम्पिंग ग्राउंड पर वर्षों से संचित लेगेसी अपशिष्ट का सफलतापूर्वक वैज्ञानिक उपचार किया गया है। इस परिवर्तनकारी पहल को जनभागीदारी एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बनाने के उद्देश्य से इस स्थल को विशेष रूप से चयनित किया गया है। 

मुझे डड्डू माजरा से वन महोत्सव का शुभारंभ करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। वर्तमान वर्ष के वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत यहाँ 18 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जिनमें बोगनवेलिया, विभिन्न प्रजातियों के बाँस, रंग-बिरंगे पुष्पीय पौधे, सुगंधित पौधे तथा अन्य उपयुक्त हरित प्रजातियाँ शामिल हैं। यह हरित विकास न केवल इस क्षेत्र की पर्यावरणीय गुणवत्ता और सौंदर्य में वृद्धि करेगा, बल्कि इसे शहरी पर्यावरण पुनर्स्थापन एवं सतत विकास का एक उत्कृष्ट मॉडल भी बनाएगा।

जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि, प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। आज लगाया गया प्रत्येक वृक्ष स्वच्छ वायु, बेहतर जनस्वास्थ्य, भूजल संरक्षण, वन्यजीवों के आवास तथा जलवायु अनुकूलता में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

इस अवसर पर मैं चंडीगढ़ के प्रत्येक निवासी से आग्रह करता हूँ कि वे इस वर्ष के वृक्षारोपण अभियान में पूरे उत्साह के साथ भाग लें। आइए, हम केवल वृक्ष ही न लगाएँ, बल्कि उनकी तब तक देखभाल भी करें जब तक वे मजबूत एवं आत्मनिर्भर न बन जाएँ। वन महोत्सव की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या में नहीं, बल्कि उन वृक्षों की संख्या में निहित है जो आने वाले दशकों तक फलते-फूलते रहें।

मैं पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग, चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति, नगर निगम, इंजीनियरिंग विभाग, शैक्षणिक संस्थानों, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, स्वयंसेवी संगठनों, पर्यावरण समूहों तथा प्रत्येक नागरिक की सराहना करता हूँ, जिन्होंने चंडीगढ़ को देश के सबसे हरित एवं स्वच्छ शहरों में से एक बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आइए, हम सब मिलकर ऐसे चंडीगढ़ के निर्माण की दिशा में कार्य करते रहें जो अधिक हरित, अधिक स्वच्छ, अधिक स्वस्थ तथा अधिक सुदृढ़ हो, एक ऐसा शहर जिसे आने वाली पीढ़ियाँ गर्व के साथ विरासत में प्राप्त करें।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं वन महोत्सव 2026 वृक्षारोपण अभियान का औपचारिक शुभारंभ करता हूँ तथा इस महान अभियान की सफलता के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

आइए, प्रत्येक नागरिक एक वृक्ष लगाए, एक वृक्ष का पालन-पोषण करे और एक वृक्ष की रक्षा करे, क्योंकि जब हम प्रकृति की रक्षा करते हैं, तब प्रकृति हमारी रक्षा करती है।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!