SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERNATIONAL YOGA DAY AT CHANDIGARH ON JUNE 21, 2026.

‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026’ के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 21.06.2026, रविवारसमयः सुबह 6:10 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सर्वप्रथम मैं आप सभी को इस महत्वपूर्ण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

यदि हम इसके इतिहास पर दृष्टि डालें, तो वर्ष 2014 में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के सामने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। भारत के इस सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दर्शन को वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व समर्थन मिला और रिकॉर्ड 177 देशों की सहमति से 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित किया गया। 

21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और भारतीय परंपरा में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इसी कारण इस तिथि को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए चुना गया। वर्ष 2015 से शुरू हुआ यह सफर आज 2026 में अपनी 11वीं वर्षगांठ मना रहा है, और यह महज़ एक आयोजन न रहकर एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है।

मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस वर्ष के योग दिवस की थीम "Yoga for Healthy Ageing"  यानी ‘‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’’ रखी गई है। यह विषय आज के समय में बेहद प्रासंगिक है। योग किसी उम्र का मोहताज नहीं है; यह बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, जीवन के हर पड़ाव पर हमारी रीढ़ की हड्डी बनकर काम करता है। 

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की गतिशीलता और मानसिक शांति की आवश्यकता और अधिक हो जाती है। योग हमें केवल लंबी आयु जीना नहीं सिखाता, बल्कि उस आयु को गरिमा, गतिशीलता, स्वतंत्रता और मानसिक स्पष्टता के साथ जीना सिखाता है।

साथियो,

योग का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितनी हमारी सभ्यता। वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता, पतंजलि योगसूत्र और अनेक भारतीय ग्रंथों में योग का विस्तृत वर्णन मिलता है। महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित रूप प्रदान करते हुए कहा था, “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” यानी योग मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है।

योग भारत की प्राचीन ऋषि-परंपरा की अमूल्य देन है, जिसकी जड़ें हजारों वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता में निहित हैं। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का मानना है कि योग का विकास भारत में लगभग 3 हजार ईसा पूर्व हुआ था। सिंधु-सरस्वती सभ्यता से प्राप्त मुहरों और पुरातात्त्विक साक्ष्यों में योगासन की मुद्राएँ दिखाई देती हैं, जो यह प्रमाणित करती हैं कि उस काल में भी योग भारतीय जीवन और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अंग था।

‘योग’ शब्द संस्कृत शब्द ‘युज’ से बना है, जिसका अर्थ है, जोड़ना, एकता स्थापित करना या आत्मा का परम चेतना से मिलन। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली एक समग्र जीवन-पद्धति है। यह व्यक्ति को स्वयं से, प्रकृति से और व्यापक मानवता से जोड़ने का माध्यम है।

ऋग्वेद, उपनिषद, भगवद्गीता तथा महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों में योग के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, “योगः कर्मसु कौशलम्”, अर्थात् योग कर्मों में उत्कृष्टता और कुशलता का मार्ग है। वहीं योग को आत्म-अन्वेषण और आत्म-विकास की ऐसी यात्रा भी माना गया है, जो व्यक्ति को अपने सर्वोत्तम स्वरूप तक पहुँचाती है।

हमारे शास्त्रों में कहा गया है, “शरीरमाद्यम खलु धर्मसाधनम्” यानी स्वस्थ शरीर ही सभी कर्तव्यों और उद्देश्यों की पूर्ति का आधार है। इसी प्रकार एक अन्य प्रसिद्ध उक्ति है, “आरोग्यम परमम भाग्यम, स्वास्थ्यम सर्वार्थसाधनम्” यानी स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है और जीवन की सभी सफलताओं का आधार भी।

योग निस्संदेह मानवता को भारत का एक अनुपम उपहार है। योग के आसन, प्राणायाम, ध्यान, यम और नियम जैसे विभिन्न अंग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि व्यक्ति के भीतर अनुशासन, संयम, सह-अस्तित्व, करुणा और आत्मविश्वास जैसे गुणों का भी विकास करते हैं। योग हमें केवल स्वस्थ शरीर ही नहीं देता, बल्कि एक जागरूक, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।

आज योग भारत की सांस्कृतिक पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुका है। यह विश्व को शांति, स्वास्थ्य और समरसता का संदेश देने वाला ऐसा माध्यम है, जिसने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों की बाधाओं को पार कर सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया है। 

योग वास्तव में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय भावना का जीवंत स्वरूप है और मानव कल्याण का एक विश्वसनीय व चिरस्थायी मार्ग है।

आज जब पूरी दुनिया तनाव, चिंता, अवसाद, मोटापा, मधुमेह और अन्य जीवनशैली जनित रोगों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब योग एक सरल, सुलभ, किफायती और प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। यही कारण है कि योग की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है और विश्वभर में करोड़ों लोग इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।

आज विश्व के लगभग प्रत्येक देश में योग का अभ्यास किया जा रहा है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर लंदन, पेरिस, टोक्यो, सिडनी और अफ्रीका के अनेक देशों तक करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विश्व कल्याण की भावना का अद्भुत उदाहरण है।

साथियो,

मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि चण्डीगढ़ प्रशासन ने योग को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत लगभग 116 स्थानों पर योग गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जिनमें 68 सरकारी विद्यालय, 48 स्वास्थ्य संस्थान तथा आयुष आरोग्य मंदिर शामिल हैं। हमारा लक्ष्य वर्ष 2026 तक चण्डीगढ़ के सभी 107 सरकारी विद्यालयों तथा 63 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक योग सेवाओं का विस्तार करना है।

चण्डीगढ़ प्रशासन ने “योग 365” की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि योग केवल एक दिवस का आयोजन न होकर प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा बने।

हमारा उद्देश्य है कि शहर के प्रत्येक सेक्टर में कम से कम एक सक्रिय योग केन्द्र कार्यरत हो, जहाँ नागरिक नियमित रूप से योग का अभ्यास कर सकें।

आयुष विभाग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। वर्तमान में चण्डीगढ़ में 23 आयुर्वेदिक, 24 होम्योपैथिक तथा 2 यूनानी इकाइयों के माध्यम से निःशुल्क परामर्श एवं औषधि सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। 12 आयुष्मान आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

मुझे यह बताते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि सेक्टर-34 स्थित आयुष एकीकृत अस्पताल में ओ.पी.डी. सेवाएँ सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं तथा शीघ्र ही पंचकर्म, क्षारसूत्र एवं आईपीडी सेवाएँ भी प्रारम्भ की जाएँगी।

इसके अतिरिक्त सेक्टर-11 में आयुष डिस्पेंसरी के विस्तार भवन का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा नई स्वास्थ्य सेवाएँ जनता को समर्पित की जा चुकी हैं।

मुझे यह बताते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि चण्डीगढ़ प्रशासन द्वारा जी.एम.सी.एच.-32 के साउथ कैम्पस, सेक्टर-48 में एक नवीन आयुष विंग स्थापित किया गया है, जहाँ आयुर्वेदिक ओ.पी.डी., होम्योपैथिक ओ.पी.डी. तथा योग सेवाएँ प्रारम्भ की जा चुकी हैं। निकट भविष्य में यहाँ पंचकर्म चिकित्सा सेवाएँ भी आरम्भ की जाएँगी, जिससे नागरिकों को समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण आयुष स्वास्थ्य सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी।

इसके अतिरिक्त, चण्डीगढ़ प्रशासन द्वारा लगभग 21 करोड़ रूपये की लागत से आयुष्मान आरोग्य मंदिर एवं आयुष विभाग के प्रशासनिक भवन की स्थापना हेतु परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना न केवल आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी, बल्कि आयुष विभाग की प्रशासनिक एवं जनसेवा क्षमता को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

यह पहल चण्डीगढ़ को आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के एक उत्तम मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चण्डीगढ़ प्रशासन वरिष्ठ नागरिकों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। वयोमित्र, सुप्रजा, करुण्य तथा आयुर्विद्या जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं।

आने वाले समय में पंचकर्म केन्द्रों के विस्तार, प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल की स्थापना, आयुष शिक्षा संस्थान की स्थापना तथा मोटापा नियंत्रण कार्यक्रम जैसे अनेक महत्वाकांक्षी प्रयास चण्डीगढ़ को आयुष एवं योग के क्षेत्र में देश का अग्रणी केन्द्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

आयुष विभाग ने राजकीय बौद्धिक दिव्यांग-जन पुनर्वास संस्थान (GRIID) तथा सभी सरकारी स्कूलों को होम्योपैथिक फर्स्ट-एड किट वितरित करने की पहल करने की योजना बनाई है। इसका लक्ष्य स्कूल के बच्चों के लिए होम्योपैथिक किट प्रदान करके सुरक्षित और समय पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करना, साथ ही स्कूलों में आयुष आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ाना है।

आयुष विभाग की एक और पहल आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट्स है। इसमें एक आयुर्वेदिक टीम और एक होम्योपैथिक टीम सुबह और शाम ओपीडी सेवाएं और जागरूकता गतिविधियां चंडीगढ़ के ऐसे इलाके में प्रदान कर रही हैं जहाँ आयुष डिस्पेंसरी उपलब्ध नहीं हैं।

मैं इस अवसर पर आयुष विभाग, सभी योग प्रशिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों तथा उन सभी नागरिकों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ जिन्होंने योग को जन-आंदोलन बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

मैं आज इस मंच से चंडीगढ़ के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं से आह्वान करता हूँ किः

खुद को बदलो, तो यह संसार बदलेगा,

योग से हर नागरिक का विचार बदलेगा।

तंदुरुस्त होगी काया, शांत होगा मन,

जब हर घर में गूंजेगा योग का समर्पण।

आइए, इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएँगे, अपने परिवार एवं समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे तथा एक स्वस्थ, सक्षम और समृद्ध चण्डीगढ़ के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं आप सभी को पुनः अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!