SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FELICITATION CEREMONY ORGANISED BY SANKALP LUDHIANA FOR SUCCESSFUL CIVIL SERVICES EXAMINATION CANDIDATES AT LUDHIANA ON 22.06.2026.

संकल्प लुधियाना द्वारा सिविल सेवा परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों हेतु आयोजित ‘सम्मान समारोह’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 22.06.2026, रविवारसमयः सुबह 11:30 बजेस्थानः लुधियाना

    

नमस्कार!

यह मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि आज मैं उन 21 प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित करने हेतु इस समारोह में उपस्थित हूं, जिन्होंने कठिन परिश्रम, संकल्प और समर्पण के साथ वर्ष 2025-26 के लिए देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

मैं आप सभी सम्मानित अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। आप सभी ने केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि अपने प्रदेश और पूरे देश का मान बढ़ाया है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि जब वर्ष 1986 में श्री संतोष तनेजा जी और उनके कुछ दूरदर्शी साथियों ने दिल्ली में ‘समकल्प’ की स्थापना की थी, तब उनका मूल उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाना नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र निर्माण’ की भावना से प्रेरित नेतृत्व तैयार करना था। दिल्ली इस शैक्षिक आंदोलन का केंद्र अवश्य रही, लेकिन वर्ष 2011 में पंजाब में इसकी स्थापना के साथ इस दूरदर्शी पहल का एक महत्वपूर्ण अध्याय प्रारम्भ हुआ। 

इसके माध्यम से मूल्य-आधारित, उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण सिविल सेवा मार्गदर्शन को पंजाब के युवाओं के द्वार तक पहुँचाया गया। यह केवल एक संस्थान का विस्तार नहीं था, बल्कि पंजाब की युवा प्रतिभाओं को राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च मंचों तक पहुँचाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। श्री नरेन्द्र मित्तल जी के नेतृत्व में आज संकल्प आईएएस पंजाब के अनेक युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का सशक्त माध्यम बन चुका है।

मुझे बताया गया है कि संकल्प के समर्पित सदस्य न केवल कक्षा में बैठाकर विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं, बल्कि उन्हें कक्षा शिक्षण, पुस्तकालय, साक्षात्कार मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराते हैं। संस्था के कार्यकर्ता तन-मन-धन से इस लक्ष्य में जुटे हैं कि प्रत्येक विद्यार्थी को उसके सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक संबल प्राप्त हो।

यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि संकल्प से मार्गदर्शन प्राप्त करके अब तक 7 हजार 5 सौ से अधिक अभ्यर्थी आज देशभर में विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत हैं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। इनमें से लगभग 250 अभ्यर्थी पंजाब के इस प्रतिष्ठित संस्थान से ही हैं।

साथियो,

भारत की प्रशासनिक सेवाएँ केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम हैं। सिविल सेवक सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं। वे नीतियों को धरातल पर उतारते हैं, विकास योजनाओं को गति देते हैं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की सेवाएँ पहुँचाने का कार्य करते हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा को भारत का ‘स्टील फ्रेम’ कहा था। स्वतंत्रता के बाद भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को एक सूत्र में बाँधने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में सिविल सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

आज सम्मानित होने वाले सभी युवा अधिकारी उसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

साथियो,

सिविल सेवा परीक्षा केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होती। यह व्यक्तित्व, धैर्य, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और समाज के प्रति संवेदनशीलता की भी परीक्षा होती है। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल बुद्धिमत्ता पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए निरंतर परिश्रम, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन और कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पण आवश्यक होता है।

मैं अक्सर युवाओं से कहता हूँ कि सफलता और असफलता जीवन की यात्रा के दो पड़ाव हैं, मंजिल नहीं। जो व्यक्ति असफलता से सीखता है और आगे बढ़ता है, वही अंततः सफलता प्राप्त करता है।

मेरे युवा साथियो, 

आज आपकी आंखों में जो चमक है, उसे देखकर मुझे भारत का भविष्य अत्यंत सुरक्षित दिखाई दे रहा है। यूपीएससी की परीक्षा पास करना एक असाधारण उपलब्धि है, लेकिन याद रखिएगा, सिविल सेवा में चयन आपकी यात्रा का अंत नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र सेवा की एक बहुत बड़ी और उत्तरदायी यात्रा की शुरुआत है।

अब आपके कंधों पर लाल बत्ती या रसूख का बोझ नहीं, बल्कि इस देश के अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक की उम्मीदों का बोझ होने वाला है। जब आप फील्ड में जाएंगे, तो आपके पास नीतियां बदलने, न्याय दिलाने और किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान लाने की असीम शक्ति होगी।

महान दार्शनिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा था, ‘‘प्रशासन केवल फाइलों का प्रबंधन नहीं है, यह इंसानों के कल्याण की कला है।’’

आपकी कलम में वो ताकत होनी चाहिए जो बिना किसी भेदभाव के, पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ समाज के दबे-कुचले वर्गों का उत्थान कर सके। याद रखिएगा, एक सच्चा लोक सेवक वही है जो दफ्तर के बंद कमरों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को महसूस करता है।

प्रिय युवा साथियो,

आज का युग अवसरों का युग है। भारत विश्व की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, स्टार्टअप, डिजिटल नवाचार, रक्षा और अवसंरचना के क्षेत्र में देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत आज विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। यह केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प है जो समृद्ध, आत्मनिर्भर, समावेशी, नवाचारी और नैतिक मूल्यों से युक्त हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सिविल सेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

आप वह सौभाग्यशाली पीढ़ी हैं जो इस ‘विकसित भारत’ के निर्माण की रीढ़ बनने जा रही हैं। अगले 20-25 सालों तक जब आप देश के अलग-अलग जिलों में नीति निर्धारण और क्रियान्वयन का नेतृत्व करेंगे, तब आपके फैसलों से ही तय होगा कि भारत वैश्विक पटल पर किस ऊंचाई पर बैठेगा। चाहे वो डिजिटल गवर्नेंस हो, कृषि सुधार हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा व्यवस्था, आपको लकीर का फकीर बनने के बजाय इनोवेटिव सोचना होगा।

आपको केवल योजनाओं को लागू नहीं करना है, बल्कि जनता का विश्वास भी अर्जित करना है। आपको केवल प्रशासन नहीं चलाना है, बल्कि संवेदनशील शासन का उदाहरण प्रस्तुत करना है।

महात्मा गांधी ने कहा था, ‘‘स्वयं को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है, स्वयं को दूसरों की सेवा में समर्पित कर देना।’’ सिविल सेवा का मूल भाव भी यही है, जनसेवा।

साथियो,

आज से आपकी वास्तविक परीक्षा प्रारंभ होती है। अब आपको निर्णय लेने होंगे, चुनौतियों का सामना करना होगा और लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले कार्य करने होंगे।

याद रखिए, किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी शक्ति उसका पद नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता होती है। एक अच्छा अधिकारी वह नहीं जो केवल नियमों का पालन करवाए, बल्कि वह है जो नियमों के भीतर रहते हुए लोगों की समस्याओं का समाधान खोजे। एक अच्छा अधिकारी वह है जो कार्यालय की फाइलों के साथ-साथ लोगों की भावनाओं को भी समझे।

साथियो,

पंजाब की धरती गुरुओं, पीरों और शहीदों की धरती है, जिसने हमेशा देश को संकटों से उबारा है। आज पंजाब को एक और मोर्चे पर आपकी जरूरत है। हमारे युवाओं को नशे और भटकाव के जाल से निकालकर रचनात्मकता की ओर मोड़ना है।

मैं आज मंच पर बैठे इन 21 सफल अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि आप पंजाब के युवाओं के लिए ‘रोल मॉडल’ हैं। आपकी यह सफलता पंजाब के गांवों और कस्बों में बैठे उन हज़ारों युवाओं को यह संदेश देगी कि यदि इरादे मजबूत हों, तो पंजाब का युवा बिना किसी बैसाखी के दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।

युवाओं को प्रेरित करते हुए स्वामी विवेकानंद जी की ये पंक्तियां हमेशा याद रखिएगा, ‘‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।’’ आप सभी ने इस मंत्र को जिया है, और अब आपको दूसरों के जीवन में दीपक जलाना है।

देवियो और सज्जनो,

पंजाब की धरती ने देश को सैनिक, किसान, खिलाड़ी, उद्योगपति और प्रशासक दिए हैं। यह वीरता, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति की धरती है। आज आवश्यकता है कि पंजाब के अधिक से अधिक युवा प्रशासनिक सेवाओं में आएँ और देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

मुझे विश्वास है कि आज सम्मानित हो रहे ये युवा अभ्यर्थी आने वाले समय में अपने कार्य, चरित्र और नेतृत्व से पंजाब तथा देश का नाम रोशन करेंगे। आपकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और अनेक युवाओं को बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का साहस देगी।

अंत में, मैं पुनः संकल्प आईएएस, लुधियाना को इस प्रेरणादायी आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। सभी 21 नवनियुक्त अधिकारियों को उनके उज्ज्वल, ईमानदार और यशस्वी कार्यकाल की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए मैं अपनी बात को इन पंक्तियों के साथ विराम देता हूं:

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अभी तो तुमने मुट्ठी भर ज़मीन है नापी,

आगे सारा आसमान है बाकी ।

सत्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़िए, पंजाब का और पूरे देश का नाम रोशन कीजिए।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!