SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERNATIONAL DAY AGAINST DRUG ABUSE AND ILLICIT TRAFFICKING AN ANTI DRUG OATH AND ADMINISTERED ALONG WITH THE MAYOR, COUNCILLORS, OFFICIALS AND EMPLOY

‘अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी विरोधी दिवस’ पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 27.06.2026, शनिवारसमयः सुबह 11:30 बजेस्थानः चंडीगढ़

 

नमस्कार!

आज ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी विरोधी दिवस 2026’ के इस अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर, चंडीगढ़ नगर निगम के इस गरिमापूर्ण सदन को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का अहसास हो रहा है।

यह सदन केवल चंडीगढ़ की नीतियों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह हमारे शहर के लाखों परिवारों की उम्मीदों, उनके सपनों और उनके सुरक्षित भविष्य का संरक्षक है। इसलिए, जब हम इस सम्मानित सदन में बैठते हैं, तो हमारा यह दायित्व बनता है कि हम अपने ‘द सिटी ब्यूटीफुल’ को अंदर से खोखला करने वाली सबसे बड़ी सामाजिक बुराई, ‘नशे’ के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध का शंखनाद करें।

आज जब हम ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस-2026’ के अवसर पर एकत्रित हुए हैं, तो यह केवल एक दिवस मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के सामने उपस्थित एक गंभीर चुनौती पर सामूहिक चिंतन और संकल्प का अवसर भी है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1987 में इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था, ताकि विश्व समुदाय मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उनकी अवैध तस्करी के विरुद्ध एकजुट होकर प्रभावी प्रयास कर सके।

तब से लेकर आज तक यह दिवस हमें निरंतर यह स्मरण कराता है कि नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति, परिवार या देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है, जो समाज के स्वास्थ्य, सुरक्षा, विकास और मानवीय मूल्यों को प्रभावित करती है।

आज का यह दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम न केवल नशे और अवैध तस्करी के विरुद्ध आवाज़ उठाएँगे, बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए भी कार्य करें जहाँ प्रत्येक युवा को स्वस्थ, सुरक्षित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो। यही एक सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला है।

मित्रों,

चंडीगढ़ केवल भारत का पहला आधुनिक नियोजित शहर नहीं है; यह हमारी सुंदरता, हमारी संस्कृति, हमारी उच्च साक्षरता और हमारी जीवंत ऊर्जा का प्रतीक है। हमारा ‘द सिटी ब्यूटीफुल’ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक आदर्श शहर के रूप में जाना जाता है। आज हमें बंद कमरों की तारीफों से बाहर निकलकर हकीकत का सामना करना होगा। 

नशे का जाल हमारे स्कूलों, कॉलेजों और बस्तियों तक अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा है। सिंथेटिक ड्रग्स से लेकर पारंपरिक नशीले पदार्थों तक, अवैध तस्करी के सौदागर हमारे युवाओं की रगों में मौत का जहर घोलकर मुनाफा कमा रहे हैं। 

चंडीगढ़ की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हम पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े हैं, जिससे अवैध तस्करी का खतरा और बढ़ जाता है। अगर आज इस सदन ने, जनप्रतिनिधियों ने और प्रशासन ने मिलकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।

 

जब चंडीगढ़ का कोई एक युवा नशे की गिरफ्त में आता है, तो केवल एक व्यक्ति नहीं हारता। वहाँ एक माँ के सपने टूटते हैं, एक पिता की बूढ़ी लाठी कमजोर होती है, हमारा समाज पीछे छूटता है और यह राष्ट्र अपनी अमूल्य युवा शक्ति का एक हिस्सा खो देता है। नशा वह दीमक है जो हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता है, युवाओं की मेधा को निगल जाता है और समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देता है। हमें इस दीमक को चंडीगढ़ की जड़ों में लगने नहीं देना है।

इस मंच से मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि नशा केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, यह कानून-व्यवस्था से कहीं बढ़कर हमारे अस्तित्व, हमारी संस्कृति और हमारे भविष्य पर सीधा हमला है।

हमारा लक्ष्य केवल नशे के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक संस्कृति विकसित करना है जिसमें युवा नशे की ओर आकर्षित ही न हों।

हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहाँ खेल को प्रोत्साहन मिले, योग और ध्यान को अपनाया जाए, कौशल विकास को बढ़ावा मिले, स्वयंसेवा और सामुदायिक नेतृत्व को सम्मान मिले, और युवा अपने जीवन में उद्देश्य तथा दिशा प्राप्त करें।

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि नगर निगम समाज के सबसे निकट कार्य करने वाली लोकतांत्रिक संस्था है। इसलिए नशामुक्ति अभियान में नगर निगम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मैं नगर निगम से आग्रह करता हूँ किः

  • प्रत्येक वार्ड में नियमित नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ। 
  • सामुदायिक केन्द्रों में परामर्श एवं काउंसलिंग सत्र चलाए जाएँ।
  • युवाओं के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार किया जाए। 
  • विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को अभियान से जोड़ा जाए।
  • महिला मंडलों, युवा क्लबों और स्वयंसेवी संगठनों को सक्रिय भागीदार बनाया जाए।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

हमें इस सत्य को खुले मन से स्वीकार करना होगा कि किसी भी अभियान की सफलता केवल सरकारी प्रयासों या कानूनों से संभव नहीं होती। हमारा परिवार बच्चे की पहली पाठशाला है, हमारे माता-पिता उसके पहले शिक्षक हैं और हमारा यह समाज उसका पहला संरक्षक है। इसलिए, इस जंग को जीतने के लिए हमें सबसे पहले अपने घरों और मोहल्लों में अपने बच्चों और युवाओं के साथ संवाद को बढ़ाना होगा।

हमें उन्हें केवल किताबी ढंग से यह नहीं बताना है कि नशा गलत है, बल्कि हमें उन्हें यह महसूस कराना होगा कि जीवन का वास्तविक आनंद और उत्साह क्या है! हमें उन्हें सिखाना होगा कि खेल के मैदान पर पसीना बहाकर मिली जीत का आनंद क्या होता है, किसी जरूरतमंद की सेवा करने से मिलने वाला असीम संतोष क्या है, ज्ञान की प्राप्ति और परिश्रम से हासिल की गई सफलता का गौरव क्या होता है, और समाज के लिए एक उपयोगी नागरिक बनने की असली खुशी क्या है। 

जब हमारा युवा इस वास्तविक और सकारात्मक उत्साह को पहचान लेगा, तो वह नशे के हर दिखावटी और आत्मघाती आकर्षण को खुद-ब-खुद ठुकरा देगा।

साथियो,

जब हम नशामुक्त चंडीगढ़ की बात करते हैं, तो यह केवल एक स्थानीय या प्रशासनिक लक्ष्य नहीं है। यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प से सीधे जुड़ा हुआ है। एक ‘विकसित भारत’ का निर्माण ‘विकसित चंडीगढ़’ के बिना अधूरा है, और ‘विकसित चंडीगढ़’ तब तक संभव नहीं है जब तक हम ‘नशामुक्त चंडीगढ़’ के लक्ष्य को हासिल नहीं कर लेते। किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की ऊर्जा, स्वास्थ्य और उत्पादकता पर निर्भर करती है। 

एक स्वस्थ और जागरूक युवा एक सक्षम परिवार का निर्माण करता है; सक्षम परिवार मिलकर एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण करते हैं; और एक मजबूत समाज ही एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र की आधारशिला बनता है। इसलिए नशामुक्ति का अभियान केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण अभियान है।

महात्मा गांधी जी ने कहा था, “आप स्वयं वह परिवर्तन बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” यदि हम एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें स्वयं भी जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनना होगा। समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझे और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे, “सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।” हमारे युवाओं के सपने इतने बड़े, इतने ऊँचे और इतने प्रेरणादायी होने चाहिए कि नशे जैसी बुराइयों के लिए उनके जीवन में कोई स्थान ही न बचे। 

जब युवा अपने लक्ष्य, शिक्षा, कौशल, नवाचार, खेल और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित होंगे, तब वे न केवल अपना भविष्य संवारेंगे, बल्कि एक सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। यही नशामुक्त चंडीगढ़ और विकसित भारत की दिशा में हमारी सबसे बड़ी शक्ति और आशा है।

हालांकि प्रशासन पुलिस के जरिए ड्रग तस्करों पर नकेल कस रहा है, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स मुस्तैदी से काम कर रही है, और हम सीमाओं पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। लेकिन कानून और पुलिस केवल ‘सप्लाई’ को रोक सकते हैं; नशे की ‘डिमांड’ को खत्म करने का काम केवल समाज और हमारे जनप्रतिनिधि ही कर सकते हैं।

सदन के सभी माननीय पार्षद सीधे जनता से जुड़े हैं। आप अपने-अपने वार्ड के मार्गदर्शक हैं। मैं आज इस सदन के माध्यम से नगर निगम से आह्वान करता हूँ कि इस अभियान को एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप दिया जाए।

नशामुक्त चंडीगढ़ के लक्ष्य को साकार करने के लिए आवश्यक है कि यह अभियान वार्ड स्तर तक पहुँचे। प्रत्येक वार्ड में ‘नशामुक्त वार्ड समितियों’ का गठन किया जाए, जो स्थानीय युवाओं के व्यवहार, गतिविधियों और समस्याओं पर संवेदनशील दृष्टि रखें तथा उनके परिवारों को समय-समय पर जागरूक और मार्गदर्शित करें।

नगर निगम के कम्युनिटी सेंटर्स को भी इस अभियान का सक्रिय केंद्र बनाया जा सकता है। इन केंद्रों में युवाओं के लिए नियमित रूप से योग, खेल, काउंसलिंग सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और व्यक्तित्व विकास गतिविधियों का आयोजन किया जाए, ताकि उनकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगे और वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें।

इसके साथ ही नगर निगम के सफाई कर्मचारी व अन्य स्टाफ इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि वे बस्तियों, कॉलोनियों और मोहल्लों की जमीनी हकीकत से सबसे अधिक परिचित होते हैं। उन्हें संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ ‘जागरूकता दूत’ के रूप में जोड़ा जाए, ताकि वे नशे से संबंधित जोखिमों की समय पर जानकारी देने और समाज में जागरूकता फैलाने में सहयोग कर सकें।

साथियो,

हमें अपनी रणनीति में एक बात बहुत साफ रखनी होगी। जो लोग नशे का व्यापार करते हैं, जो तस्कर हैं, वे अपराधी हैं और उनके साथ चंडीगढ़ प्रशासन पूरी सख्ती से, बिना किसी रहम के निपटेगा। लेकिन जो युवा अनजाने में या किसी तनाव के कारण नशे की लत का शिकार हो गए हैं, वे अपराधी नहीं, वे पीड़ित हैं। वे बीमार हैं और उन्हें हमारे तिरस्कार की नहीं, बल्कि हमारे प्यार, चिकित्सा और सामाजिक सहयोग की जरूरत है।

हमें चंडीगढ़ में काउंसलिंग और रीहैबिलिटेशन के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना होगा। नगर निगम को समाज कल्याण विभाग के साथ मिलकर ऐसे युवाओं को कौशल विकास से जोड़ना चाहिए ताकि ठीक होने के बाद वे मुख्यधारा में लौट सकें और स्वाभिमान के साथ अपनी आजीविका कमा सकें।

 

‘‘लत से नफरत करो, लती से नहीं। गिरा हुआ इंसान भी उठ सकता है, बशर्ते समाज उसे थामने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाए।’’

आइए आज इस पवित्र सदन में, दलीय राजनीति से ऊपर उठकर, चंडीगढ़ के नागरिकों के भविष्य की खातिर एक ऐतिहासिक संकल्प लें। आइए शपथ लें कि हम अपने-अपने स्तर पर, अपने वार्डों में, अपने दफ्तरों में और अपने घरों में नशे के खिलाफ एक शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाएंगे।

चंडीगढ़ को देश का पहला पूरी तरह से ‘नशामुक्त केंद्र शासित प्रदेश’ बनाना हमारा साझा लक्ष्य होना चाहिए। जब चंडीगढ़ नशामुक्त होगा, तभी हमारा भारत विकसित होगा।

मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है,

पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

आइए, अपने मजबूत हौसलों से चंडीगढ़ के युवाओं को एक नई और सुरक्षित उड़ान दें।

आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!