SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CHARTERED ACCOUNTANT DIWAS AT ZIRAKPUR ON JULY 1, 2026.
- by Admin
- 2026-07-01 21:25
‘चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 01.07.2026, बुधवार समयः शाम 8:30 बजे स्थानः जीरकपुर
नमस्कार!
आज 1 जुलाई के इस ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। सबसे पहले, मैं देश और समाज के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत रखने वाले आप सभी कर्मयोगियों को ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस’ की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।
मैं ICAI Branch (The Institute of Chartered Accountants of India) के अध्यक्ष सी.ए. साहिल गर्ग जी, सी.ए. प्रतीक पुरी जी, सी.ए. शुभम मोंगा जी एवं पूरी शाखा की टीम का हृदय से धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के इस विशेष अवसर पर आमंत्रित किया। आप सभी के स्नेह, सम्मान और आत्मीय स्वागत के लिए में आपका आभारी हूँ।
आज आप सभी के बीच आकर मुझे वास्तव में बहुत प्रसन्नता हो रही है। यह केवल एक समारोह नहीं है, बल्कि उस प्रतिष्ठित पेशे का उत्सव है, जिसने वर्षों से देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हर वर्ष 1 जुलाई का दिन हम चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन हमें वर्ष 1949 की याद दिलाता है, जब भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI)की स्थापना हुई थी। तब से लेकर आज तक इसने देश को लाखों ऐसे प्रोफेशनल्स दिए हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान, ईमानदारी और मेहनत से भारत की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जब भी किसी व्यवसाय, उद्योग या संस्था की बात होती है, तो उसके पीछे एक सी.ए. की मेहनत, समझ और जिम्मेदारी भी होती है। चाहे वित्तीय योजना हो, कर-निर्धारण हो, ऑडिट हो, कॉर्पोरेट गवर्नेंस हो या अनुपालन, हर क्षेत्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक मजबूत और विश्वसनीय भूमिका निभाते हैं।
देवियों और सज्जनों,
जब हम भारत के नव-निर्माण की बात करते हैं, तो हमें इतिहास के पन्नों को भी पलटना होगा। 1 जुलाई 1949, यानी हमारा संविधान पूरी तरह लागू होने और देश के गणतंत्र बनने से भी पहले, भारतीय संसद द्वारा एक विशेष कानून ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट, 1949’ पास करके इस सम्मानित संस्थान (ICAI) की स्थापना की गई थी।
इसके पीछे हमारे दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माताओं का एक बहुत बड़ा उद्देश्य था। स्वतंत्रता के बाद भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा था। देश को औद्योगिक रूप से प्रगति करनी थी, बुनियादी ढांचे का निर्माण करना था और वैश्विक पटल पर अपनी आर्थिक साख बनानी थी।
इस भारी जिम्मेदारी को निभाने के लिए एक ऐसे स्वतंत्र, स्वायत्त और अत्यंत अनुशासित संस्थान की आवश्यकता थी, जो देश में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा की नींव रख सके।
आज मुझे यह कहते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि पिछले सात दशकों से अधिक के सफर में भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान ने न केवल उन उम्मीदों को पूरा किया है, बल्कि आज यह दुनिया के सबसे बड़े लेखा निकायों में से एक है।
देवियो और सज्जनो,
हमारे प्राचीन भारतीय दर्शन और अर्थशास्त्र में वित्तीय प्रबंधन को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। महान नीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र के प्रणेता आचार्य चाणक्य ने कहा था, ‘‘कोषमूलो हि दण्डः।’’ अर्थात, किसी भी राज्य या राष्ट्र की शक्ति और सुरक्षा उसके मजबूत कोष यानी अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर टिकी होती है।
और इस कोष की रक्षा, इसका सही नियोजन और इसे पारदर्शी बनाए रखने का दायित्व यदि किसी के कंधों पर है, तो वह हमारे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स हैं। आप केवल खातों की जांच नहीं करते, बल्कि आप देश के वित्तीय प्रहरी हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट केवल वित्तीय विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था के विश्वसनीय प्रहरी और भरोसे के सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं।
आप सरकार, उद्योग जगत, निवेशकों और करदाताओं के बीच विश्वास का सेतु बनकर कार्य करते हैं। आपकी विशेषज्ञता केवल खातों का मिलान नहीं करती, बल्कि आर्थिक व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को भी सुदृढ़ करती है।
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सी.ए. बिरादरी के महत्व को रेखांकित करते हुए एक बहुत ऐतिहासिक बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘‘देश के प्रधानमंत्री की वो ताकत नहीं है, जो ताकत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के हस्ताक्षर में होती है। आपका हस्ताक्षर सत्यता और भरोसे की गवाही देता है। कंपनी बड़ी हो या छोटी, आप जिस अकाउंट पर हस्ताक्षर कर देते हैं, उस पर सरकार भी भरोसा करती है और देश के लोग भी भरोसा करते हैं, क्योंकि आपकी एक सही ‘साइन’ देश की अर्थव्यवस्था को सही दिशा देती है और गलतियों को रोकती है।’’
यह आपके पेशे की ताकत है, यह आपकी साख है। समाज और सरकार आपकी रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। इस भरोसे को बनाए रखना और इसे और मजबूत करना आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
अक्सर कहा जाता है कि किसी संस्था की वास्तविक मजबूती उसकी बैलेंस शीट से नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता से मापी जाती है। उस विश्वसनीयता के निर्माण में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट केवल आय-व्यय का हिसाब रखने वाला व्यक्ति नहीं होता। वह किसी भी संस्था का वित्तीय सलाहकार, जोखिम विश्लेषक, अनुपालन विशेषज्ञ, रणनीतिक मार्गदर्शक और सबसे बढ़कर, विश्वास का संरक्षक होता है।
आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अत्यंत जटिल होती जा रही है, तब वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, सुशासन और उत्तरदायित्व की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
देवियों और सज्जनों,
आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। हम सब मिलकर ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के एक भव्य संकल्प को साकार करने में जुटे हैं। आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इस आर्थिक महाक्रांति में आपकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उद्योगों और व्यापार जगत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बनाए रखना, कर अनुपालन को सरल और सुदृढ़ करना तथा देश में निवेश के माहौल को सुरक्षित बनाना, यह सब आपके मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं है।
आज हमारे देश के युवा नए-नए स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। लघु और मध्यम उद्योग हमारे विकास का पहिया हैं। इन नए उद्यमियों को सही वित्तीय रास्ता दिखाना, उन्हें आर्थिक कुप्रबंधन से बचाना और एक मेंटर के रूप में उनका हाथ थामना, सी.ए. समुदाय का एक बड़ा सामाजिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
‘‘चलना है तो ऐसे चलो कि निशान बन जाएं,
काम करो तो ऐसा करो कि पहचान बन जाए।’’
आपके पेशेवर ज्ञान का लाभ जब देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यापारी या उद्यमी को मिलेगा, तभी हमारा विकास समावेशी होगा।
मैं यहाँ उपस्थित सी.ए. सदस्यों से विशेष रूप से कहना चाहता हूँ।
सी.ए. की परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए जिस कड़े परिश्रम, अनुशासन और रातों की नींद का त्याग करना पड़ता है, वह सराहनीय है।
जब कोई विद्यार्थी कठिन परिश्रम और समर्पण के बल पर चार्टर्ड अकाउंटेंट बनता है, तो समाज उसे केवल एक डिग्रीधारी पेशेवर के रूप में नहीं, बल्कि ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और पेशेवर नैतिकता के प्रतीक के रूप में देखता है। आईसीएआई का ध्येय वाक्य उपनिषद से लिया गया है, ‘‘य एष सुप्तेषु जागर्ति।’’ अर्थात, जो सोए हुए लोगों के बीच भी हमेशा जागता रहता है, सतर्क रहता है।
साथियो,
आज हमें यह तय करना होगा कि हम इस महान राष्ट्र को क्या सौंपने जा रहे हैं। देश में अगाध आशा और आकांक्षाएं लेकर बैठे हुए कोटि-कोटि नौजवानों के सुनहरे भविष्य के लिए हम क्या भूमिका निभाएंगे? क्या हम देश को एक पूर्णतः पारदर्शी और भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था देने में अपनी सक्रिय भूमिका नहीं निभा सकते?
हमारा आकलन इस बात से नहीं होना चाहिए, न ही हमें यह हिसाब-किताब लगाना चाहिए कि हमने कितने लोगों को टैक्स देने से बचा लिया। बल्कि हमारा गौरव इस बात में होना चाहिए कि हमने कितने अधिक से अधिक नागरिकों को ईमानदारी से टैक्स देकर देश के विकास की मुख्य धारा में जुड़ने और एक स्वाभिमानी जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। फैसला पूरी तरह आपके हाथों में है।
मैं चाहूँगा कि आज आप स्वयं के लिए कुछ बड़े लक्ष्य निर्धारित करें। आप यह तय करें कि कितने लोगों को ईमानदारी से टैक्स चुकाने की मुख्य धारा में लेकर आएंगे? इस लक्ष्य का एक ठोस आंकड़ा तय होना चाहिए, और इस विज़न को आपसे बेहतर भला कौन समझ सकता है?
इसके साथ ही, हमें इस बात पर भी गंभीरता से विचार करना होगा कि हम अपने प्रोफेशन में आधुनिक तकनीक और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे बढ़ाएं। आज के इस डिजिटल युग में, ‘इंसटीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ के क्षेत्र में फॉरेंसिक साइंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक हो चुकी है। इस नई विधा को कैसे अपनाया जाए, कैसे इसे और सुदृढ़ किया जाए, इससे जुड़े लक्ष्य भी हमें आज ही तय करने होंगे ताकि हमारा यह संस्थान राष्ट्र-निर्माण में अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का लोहा मनवा सके।
साथियो,
आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी अर्थव्यस्था लगातार मजबूत हो रही है, नए-नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, स्टार्टअप्स आगे बढ़ रहे हैं और डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो रहा है। ऐसे समय में सी.ए. की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आपकी सलाह, आपकी निशेषज्ञता और आपकी ईमानदारी देश की आर्थिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाती है।
आज का समय नई तकनीकों का समय है। तकनीक बदल सकती है लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदलती, और वह है विश्वास। सी.ए. की सबसे बड़ी पहचान उनका ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और पेशेवर नैतिकता हैं। यही मूल्य इस पेशे को समाज में विशेष सम्मान दिलाते हैं। ज्ञान के साथ-साथ आपके भीतर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का होना अनिवार्य है।
मैं यहाँ उपस्थित सभी युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से यह भी कहना चाहूँगा कि आपने एक ऐसे पेशे को चुना है, जिसमें चुनौतियाँ भी हैं और अपार संभावनाएँ भी। मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना आपको निश्चित रूप से सफलता दिलाएगी। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में आप सभी देश के श्रेष्ठ पेशेवर के रूप में अपनी पहचान बनाएँगे।
मैं भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI) की भी सराहना करता हूँ, जो केवल अच्छे सी.ए. ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और नैतिक पेशेवर तैयार करने का कार्य कर रही है। शिक्षा, कौशल विकास, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में इसका योगदान वास्तव में सराहनीय है।
आज इस अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि हम अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करेंगे तथा भारत को एक मजबूत, विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देंगे।
एक बार फिर, मैं ICAI Branch के अध्यक्ष महोदय, पूरी आयोजन समिति और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स परिवार को इस शानदार आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
मैं सभी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विद्यार्थियों और उनके परिवारों को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस की हार्दिक शुभकामिाएूँ देता हूँ।
आप सभी स्वस्थ रहें, सफल रहें और इसी प्रकार देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहें।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिंद! जय भारत!