SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INAUGURATION OF COCOON HOSPITAL CHANDIGARH ON JULY 18, 2026.

कोकून हॉस्पिटल, चंडीगढ़ के उद्घाटन अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः18.07.2026, शनिवारसमयः दोपहर 1:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ के चिकित्सा ढांचे में एक और शानदार अध्याय जुड़ने जा रहा है। आर.जे. कॉर्प. द्वारा स्थापित इस अत्याधुनिक ‘कोकून अस्पताल’ के उद्घाटन समारोह में आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। 

एक प्रशासक और एक नागरिक के रूप में, जब भी मैं समाज में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होते देखता हूँ, तो मन को एक असीम संतोष मिलता है। मैं इस उत्कृष्ट और जन-कल्याणकारी पहल के लिए आर.जे. कॉर्प. के पूरे प्रबंधन को अपनी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

मुझे बताया गया है कि इस अस्पताल के लिए भूमि और ढांचा श्री विनोद मित्तल जी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व वाले सी.एफ.एम. ग्रुप द्वारा उपलब्ध कराया गया है। वहीं, इस अस्पताल का संपूर्ण डिज़ाइनिंग, लेआउट, इन्टिरीअर, एवम मेडकल इक्विप्मन्ट आर.जे. कॉर्प. द्वारा किया गया है। इस अस्पताल का प्रबंधन और संचालन आर.जे. कॉर्प. द्वारा किया जाएगा।

मुझे अस्पताल प्रबंधन द्वारा अवगत कराया गया है कि 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से निर्मित यह 8 मंजिला भव्य कोकून अस्पताल, 47 बिस्तरों की क्षमता और विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरणों से पूर्णतः सुसज्जित है। यहाँ उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक तकनीक और सहूलियतें निश्चित रूप से इसे उत्तर भारत के सबसे आधुनिक और उत्कृष्ट अस्पतालों की श्रेणी में लाकर खड़ा करती हैं।

सुविधाओं के साथ-साथ, किसी भी अस्पताल की असली ताकत वहां के स्वास्थ्यकर्मी होते हैं। मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि इस अस्पताल में देश के उच्च कोटि के चिकित्सकों, अनुभवी नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों सहित 200 से अधिक पेशेवरों की एक समर्पित टीम अपनी सेवाएँ प्रदान करेगी। यह न केवल चंडीगढ़ के स्वास्थ्य ढांचे को मज़बूती देगा, बल्कि यह रोज़गार सृजन और मानव सेवा का भी एक बेहतरीन संगम है।

वहीं यदि आर.जे. कॉर्प की बात करें तो यह श्री रवि कांत जयपुरिया जी द्वारा स्थापित भारत के प्रमुख बहुराष्ट्रीय व्यापारिक समूहों में से एक है। इसकी व्यावसायिक शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जबकि वर्ष 1991 में पेप्सिको के साथ बॉटलिंग साझेदारी और देवयानी इंटरनेशनल की स्थापना इसके विकास के महत्वपूर्ण पड़ाव बने। 

वर्ष 1995 में स्थापित इसकी प्रमुख सहायक कंपनी वरुण बेवरेजेस आज अमेरिका के बाहर पेप्सिको के सबसे बड़े बॉटलिंग साझेदारों में शामिल है तथा भारत के साथ दक्षिण एशिया और घाना व तंजानिया सहित कई अफ्रीकी देशों में कार्यरत है।

देवयानी इंटरनेशनल भारत में यम! ब्रांड्स की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी के रूप में केएफसी, पिज्जा हट, कोस्टा कॉफी और TWG Tea के सैकड़ों आउटलेट संचालित कर रही है। खाद्य एवं पेय क्षेत्र के अलावा समूह ने मेदांता में निवेश, डीपीएस सोसाइटी के सहयोग से गुड़गांव और जयपुर में शिक्षण संस्थानों की स्थापना तथा क्रीमबेल के माध्यम से डेयरी कारोबार में भी विस्तार किया है।

‘कोला किंग’ के नाम से प्रसिद्ध श्री रवि कांत जयपुरिया के तीन दशकों से अधिक के अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व ने समूह की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान को मान्यता देते हुए पेप्सिको ने उन्हें वर्ष 1997 में ‘इंटरनेशनल बॉटलर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

देवियो और सज्जनो,

मुझे बताया गया है कि आज हमने यहां जिस ‘कोकून अस्पताल’ का उद्घाटन किया है, वह आर.जे. कॉर्प. का दूसरा ‘कोकून अस्पताल’ है। जबकि इसके द्वारा पहले से ही जयपुर में पिछले 13 वर्षों से ‘कोकून अस्पताल’ का संचालन किया जा रहा है। उत्तम चिकित्सा सेवाओं, संवेदनशील देखभाल और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ यह 27 बिस्तरों वाला संस्थान अब तक अपने ओपीडी के माध्यम से 2 लाख से अधिक मरीजों को सेवाएँ प्रदान कर चुका है।

मातृत्व और शिशु देखभाल में इस संस्थान का अनुभव विशाल है। अब तक यहाँ 20 हज़ार से अधिक सुरक्षित प्रसव और 10 हज़ार से अधिक सफल स्त्री-रोग सर्जरियां की जा चुकी हैं। यहाँ के अत्याधुनिक ‘लेवल-3 एनआईसीयू (NICU)में 550 ग्राम से भी कम वजन वाले अति-संवेदनशील नवजातों को नया जीवन मिला है।

अब अपने राष्ट्रीय विस्तार के अंतर्गत लखनऊ और गुवाहाटी में नई परियोजनाओं के साथ-साथ चंडीगढ़ में इस नए अस्पताल की स्थापना कर यह संस्थान मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की अपनी परंपरा को उत्तर भारत तक विस्तार दे रहा है।

हर्ष का विषय है कि संस्था द्वारा देश के 11 अन्य प्रमुख शहरों में भी ऐसे अत्याधुनिक ‘कोकून अस्पताल’ स्थापित करने का एक विस्तृत और महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

मुझे यह जानकर अत्यंत संतोष है कि ‘कोकून अस्पताल’ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘व्यापक देखभाल मॉडल’ पर कार्य कर रहा है। परिवार नियोजन से लेकर गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल और महिलाओं के सम्पूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ी सभी विशेष चिकित्सा सेवाओं को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। 

मुझे पूर्ण विश्वास है कि अपने इसी सेवा-भाव और सुविधाओं के निरंतर विस्तार के साथ, यह अस्पताल चंडीगढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों के परिवारों को विश्वस्तरीय, आधुनिक और मानवीय स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

देवियो और सज्जनो,

किसी भी स्वस्थ व सशक्त समाज की नींव एक स्वस्थ माँ और स्वस्थ शिशु पर ही टिकी होती है। जब हम मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम केवल दो जिंदगियों को बचाने की बात नहीं कर रहे होते, बल्कि हम अपने राष्ट्र के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने की बात कर रहे होते हैं। एक पुरानी कहावत है कि ‘जब आप एक माँ को स्वस्थ रखते हैं, तो आप पूरे परिवार को जीवनदान देते हैं।’

माँ बनना एक स्त्री के जीवन का सबसे सुखद, लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव होता है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से लेकर, शिशु के जन्म और उसके जीवन के पहले 2-3 वर्षों तक, माँ और बच्चे को बेहतरीन और सुरक्षित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। 

चिकित्सा विज्ञान भी यह मानता है कि यदि इस शुरुआती चरण में माँ और नवजात शिशु को सही पोषण, सुरक्षित प्रसव और आधुनिक चिकित्सा मिल जाए, तो वह बच्चा जीवन भर कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहता है और उसका मानसिक एवं शारीरिक विकास बहुत तेज़ी से होता है।

मुझे यह जानकर अत्यंत संतोष है कि ‘कोकून अस्पताल’ का मुख्य ध्येय इसी मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा को विश्वस्तरीय और मानवीय बनाना है। प्रकृति में जिस प्रकार एक ‘कोकून’ (सुरक्षा कवच) अपने भीतर पल रहे नए और कोमल जीवन को हर बाहरी खतरे से बचाता है, ठीक उसी तरह मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह अस्पताल हर गर्भवती माँ और नवजात शिशु को एक सुरक्षित, तनाव-मुक्त, संक्रमण-रहित और वात्सल्य से भरा वातावरण प्रदान करेगा।

देवियो और सज्जनो,

चंडीगढ़ ने हमेशा सुनियोजित विकास, संस्थागत श्रेष्ठता और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवा की भावना का प्रतिनिधित्व किया है। भारत के सबसे प्रगतिशील और सुनियोजित शहरों में से एक के रूप में, इसने लगातार शिक्षा, प्रशासन, शहरी विकास और स्वास्थ्य सेवा में नए मानदंड स्थापित किए हैं।

पी.जी.आई.एम.ई.आर. और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेक्टर-32 सहित शहर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों ने पिछले कई वर्षों से उल्लेखनीय समर्पण के साथ न केवल इस क्षेत्र की, बल्कि पूरे राष्ट्र की सेवा की है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा की दिशा में उनका योगदान सर्वोच्च प्रशंसा और सम्मान का पात्र है।

इसके साथ ही, यह भी सच है कि बढ़ती आबादी, स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती मांगों और बीमारियों के बदलते स्वरूप के कारण, आज सुलभता और समय पर इलाज प्रमुख प्राथमिकताएं बन गई हैं। एक बढ़ते हुए शहर को न केवल मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यकता होती है, बल्कि एक जिम्मेदार और सक्षम निजी स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे की भी जरूरत होती है।

एक ‘विकसित भारत’ के लिए एक ‘स्वस्थ भारत’ का होना आवश्यक है, और मजबूत स्वास्थ्य संस्थान उस दृष्टिकोण के केंद्र में हैं। इसी संदर्भ में आज का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

देवियो और सज्जनो,

स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं है; यह किसी भी राष्ट्र की प्रगति, उत्पादकता और समृद्धि का आधार है। यही कारण है कि भारत की प्राचीन परंपरा में स्वास्थ्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

जब दुनिया के कई हिस्से सभ्यता के शुरुआती चरण में थे, तब हमारी धरती पर महर्षि सुश्रुत और महर्षि चरक जैसे महान चिकित्सक मौजूद थे। महर्षि सुश्रुत को पूरी दुनिया आज ‘सर्जरी का जनक’ मानती है। सुश्रुत संहिता में सैंकड़ों प्रकार की शल्य चिकित्सा और सर्जिकल उपकरणों का जो वर्णन है, वह आज भी आधुनिक विज्ञान के लिए शोध का विषय है।

हमारी आयुर्वेद की महान परंपरा ने हमेशा रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य पर जोर दिया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व यह उद्घोष किया था, ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।’’

भारत ने पूरी दुनिया को आयुर्वेद, योग और समग्र चिकित्सा पद्धति की अमूल्य विरासत दी। आज जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अत्याधुनिक तकनीकों के साथ आगे बढ़ रहा है, तब भी पूरी दुनिया भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और योग की ओर आकर्षित हो रही है।

आज जब मैं इस अस्पताल को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि यह हमारी उसी प्राचीन खोजपरक सोच और आधुनिक विज्ञान का एक शानदार और सफल संगम है।

देवियो और सज्जनो,

हमारे समाज में डॉक्टरों का स्थान अत्यंत सम्माननीय रहा है। भारतीय संस्कृति में चिकित्सक को “धरती का भगवान” कहा गया है, क्योंकि वह केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि जीवन बचाने का कार्य करता है।

कोविड महामारी के कठिन समय में हमने देखा कि कैसे हमारे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मानवता की सेवा की। जब पूरी दुनिया भय और अनिश्चितता से जूझ रही थी, तब हमारे स्वास्थ्य योद्धा आशा और साहस का प्रतीक बनकर सामने आए।

मैं आज यहाँ उपस्थित सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को हृदय से नमन करता हूँ। आपका कार्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

महात्मा गांधी जी ने कहा था, “स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोना और चाँदी नहीं।” इसी सोच के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं।

वर्ष 2014 तक जहाँ देश में केवल 7 एम्स थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहाँ 387 मेडिकल कॉलेज थे, अब 808 हो गए हैं जो 109 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 141 प्रतिशत वृद्धि के साथ एमबीबीएस सीटें 51 हजार 348 से बढ़कर 1 लाख 23 हजार 700 हो गई हैं और 144 प्रतिशत वृद्धि के साथ पीजी सीटें 31 हजार 185 से बढ़कर 76 हजार 174 तक पहुंची हैं। इससे न केवल चिकित्सकों की संख्या बढ़ी है, बल्कि देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच भी सशक्त हुई है।

स्वास्थ्य बजट में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2014 में यह 33 हजार 278 करोड़ रूपये था, जो अब बढ़कर 1 लाख 6 हजार 530 करोड़ रूपये हो गया है जो 220 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। ये आँकड़े भारत को एक स्वस्थ, सशक्त और समावेशी राष्ट्र बनाने के हमारे साझा संकल्प का जीवंत प्रमाण हैं।

इसके अलावा, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती, समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं। आज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं तथा 1,80,435 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के अंतर्गत 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से लगभग 90 करोड़ करोड़ नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान की जा चुकी है। इसी प्रकार, देशभर में 1 लाख 86 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही, मिशन इंद्रधनुष, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा आदि जैसी पहलों ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता और पारदर्शिता को नई दिशा प्रदान की है।

इन सभी पहलों का उद्देश्य स्पष्ट है, देश के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण, किफायती और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा ‘स्वस्थ भारत, विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करना।

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा निवेश है। यदि शरीर स्वस्थ है, मन सकारात्मक है और जीवन अनुशासित है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, “एक मजबूत शरीर और मजबूत मन ही महान कार्य कर सकता है।”

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ, नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दें। विशेष रूप से चंडीगढ़ और पंजाब जैसे राज्य में हमें नशामुक्त और स्वस्थ युवा पीढ़ी के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

मेरा मानना है कि जो संस्थान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में निवेश करते हैं, वे न केवल चिकित्सा देखभाल में योगदान देते हैं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, चिकित्सा उत्कृष्टता, अनुसंधान और क्षेत्र के समग्र विकास में भी अपना योगदान देते हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि कोकून हॉस्पिटल इसी भावना के साथ समाज की सेवा करेगा और चंडीगढ़ को एक अग्रणी स्वास्थ्य सेवा गंतव्य के रूप में मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

मैं आशा करता हूँ कि कोकून हॉस्पिटल, चंडीगढ़ आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं, अनुसंधान और मानवीय देखभाल के माध्यम से इस क्षेत्र के स्वास्थ्य परिदृश्य को और सशक्त बनाएगा तथा अधिक से अधिक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान देगा।

मैं एक बार पुनः श्री रवि कांत जैपुरिया जी, सुश्री देवयानी जैपुरिया जी, और कोकून हॉस्पिटल की पूरी टीम को इस शुभारंभ के लिए हार्दिक बधाई एवं भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।

आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द! 

जय भारत!