SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF SECOND CONVOCATION CEREMONY OF PLAKSHA UNIVERSITY AT MOHALI ON JULY 25, 2026.
- by Admin
- 2026-07-25 12:45
प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के द्वितीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 25.07.2026, शनिवार समयः सुबह 10:30 बजे स्थानः मोहाली
नमस्कार!
आज, प्लाक्षा विश्वविद्यालय के मोहाली परिसर में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। आज का यह द्वितीय दीक्षांत समारोह आप छात्रों के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मैं आज इस विशेष अवसर पर हमारे बीच पधारे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, माननीय श्री राम नाथ कोविंद जी का अपनी और से तथा पूरे पंजाब की ओर से हृदय से अभिनंदन करता हूँ।
माननीय कोविंद जी ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन रहकर न केवल राष्ट्र की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि अपने सरल स्वभाव, शांत व्यक्तित्व और प्रभावशाली नेतृत्व से लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और समावेशिता को सुदृढ़ करने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। महोदय, आज आपकी यह गरिमामयी उपस्थिति हम सभी के लिए, और विशेषकर यहाँ बैठे इन युवा विद्यार्थियों के लिए, एक अत्यंत प्रेरणादायी क्षण है।
मैं आज इस विशेष अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले सभी 90 विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ। मैं आपके माता-पिता और शिक्षकों को भी विशेष रूप से शुभकामनाएँ देता हूँ, क्योंकि आपकी उपलब्धियों के पीछे उनके सपने, उनका परिश्रम, उनकी प्रार्थनाएँ और अनेक अनकहे त्याग जुड़े हुए हैं।
आज बी.टेक. की डिग्री पाने वाले छात्रों में 50 छात्र ‘कंप्यूटर साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’, 30 छात्र ‘डेटा साइंस, इकोनॉमिक्स एंड बिज़नेस’, 4 छात्र ‘रोबोटिक्स ऑटोनॉमस सिस्टम्स’ और 6 छात्र ‘बायोलॉजिकल सिस्टम इंजीनियरिंग’ जैसी भविष्योन्मुखी विधाओं के शामिल हैं।
देवियो और सज्जनो,
मोहाली में स्थित यह प्लाक्षा विश्वविद्यालय आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का प्रतीक बन चुका है। यह संस्थान ‘तकनीकी शिक्षा में परिवर्तन’, ‘विषयों की सीमाओं से परे अनुसंधान को बढ़ावा’, और ‘नवाचार व उद्यमिता का प्रोत्साहन’ के तीन सशक्त स्तंभों पर आधारित है।
मुझे यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि यहाँ पढ़ाई की शुरुआत से ही इंजीनियरिंग के साथ-साथ कला, डिज़ाइन और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर विशेष बल दिया जाता है।
यह संस्थान वैश्विक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। प्लाक्षा को अमेरिका की शीर्ष यूनिवर्सिटीज़ जैसे यूसी बर्कले (UC Berkeley), पर्ड्यू (Purdue), यूसी सैन डिएगो (UC San Diego), यूपेन (UPenn), कॉर्नेल (Cornell) तथा भारत के प्रतिष्ठित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस’ (IISc) बेंगलुरु का सहयोग प्राप्त है।
यहाँ 80 प्रतिशत से अधिक संकाय सदस्य अंतरराष्ट्रीय अनुभव से समृद्ध हैं, जो छात्रों को एक वैश्विक दृष्टिकोण से युक्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
मुझे यह भी बताया गया है कि यहाँ अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अनुसंधान केंद्र हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इनमें ए.आई. लैब, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, और रोबोटिक्स-आईओटी (IoT) लैब जैसी नवीनतम सुविधाएं शामिल हैं।
सबसे बड़ी बात जो मेरे हृदय को छू गई, वह यह है कि इस संस्थान में 70 प्रतिशत से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है और अब तक कुल 53 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है।
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई है कि इस विश्वविद्यालय के पहले ग्रेजुएट बैच ने शीर्ष संस्थानों और प्रतिष्ठित कंपनियों में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हासिल किया है। इतना ही नहीं, इनमें से 20 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने उच्च शिक्षा और गहन शोध के मार्ग को चुना है, जो संस्थान की मजबूत अकादमिक नींव को दर्शाता है।
उद्यमिता के क्षेत्र में भी इस संस्थान की उपलब्धियां असाधारण हैं। प्लाक्षा के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने मिलकर अब तक 23 एलुमनाई स्टार्टअप्स स्थापित किए हैं और 15 से अधिक सक्रिय छात्र स्टार्टअप आइडियाज पर काम कर रहे हैं।
मुझे यह जानकर विशेष गर्व हुआ कि इनमें से कुछ वित्त-पोषित उद्यम मानसिक स्वास्थ्य और श्रवण दोष जैसी गंभीर मानवीय समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, और उनके इस कार्य के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘फोर्ब्स 30 अंडर 30’ सूची में भी शामिल किया गया है।
मैं मानता हूँ कि प्लाक्षा एक ऐसा शिक्षा का मॉडल है, जो न केवल अकादमिक रूप से अत्यंत समृद्ध है, बल्कि यह नए भारत के निर्माण के लिए हमारे युवाओं को एक सशक्त नेतृत्व प्रदान करने के लिए भी कटिबद्ध है।
साथियो,
भारतीय परंपरा में दीक्षांत का अर्थ शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन के एक नए चरण के लिए दीक्षा प्राप्त करना है। प्राचीन भारतीय गुरुकुलों में शिक्षा पूर्ण होने पर गुरु अपने शिष्यों से कहते थे, “सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः।” अर्थात् सत्य बोलो, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलो तथा अध्ययन और आत्मविकास से कभी विमुख मत होओ।
यही संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। विश्वविद्यालय से प्राप्त उपाधि आपके ज्ञान का प्रमाण है, लेकिन आपका आचरण, आपकी संवेदनशीलता और समाज के प्रति आपका योगदान ही आपकी वास्तविक शिक्षा का प्रमाण बनेगा।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज आप केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियाँ लेकर इस विश्वविद्यालय से विदा हो रहे हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य को विवेकवान, संवेदनशील, उत्तरदायी और समाज के प्रति समर्पित नागरिक बनाना है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, ‘‘शिक्षा मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।’’ आपकी डिग्री अवसरों के द्वार खोल सकती है, परंतु आपका ज्ञान, चरित्र और ईमानदारी ही आपकी वास्तविक पहचान बनाएंगे। ज्ञान आपको सक्षम बनाता है, कौशल प्रतिस्पर्धी बनाता है, किंतु चरित्र आपको विश्वसनीय बनाता है।
आज विश्व ए.आई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और डिजिटल प्रौद्योगिकी के नए युग में प्रवेश कर चुका है। इन तकनीकों से मानव जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आएंगे, किंतु तकनीक तभी सार्थक होगी जब उसका उपयोग मानवता, नैतिकता और समाज के कल्याण के लिए किया जाए। भविष्य के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का दायित्व केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वह मानव गरिमा, समानता, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व के अनुरूप हो।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को नवाचार, अनुसंधान, कौशल, उद्यमिता और बहुविषयक शिक्षा की नई दिशा प्रदान की है। यह नीति विद्यार्थियों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि ज्ञान का सृजनकर्ता, नवाचारकर्ता और रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रेरित करती है। मुझे प्रसन्नता है कि प्लाक्षा विश्वविद्यालय अपनी बहुविषयक और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस दृष्टि को प्रभावी रूप से आगे बढ़ा रहा है।
विश्वविद्यालयों की वास्तविक पहचान उनकी इमारतों से नहीं, बल्कि उनके शोध, नवाचार और समाजोपयोगी समाधानों से होती है। आज आवश्यकता ऐसे अनुसंधान की है जो कृषि, जल संरक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण, ग्रामीण विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसी राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। मुझे विश्वास है कि प्लाक्षा विश्वविद्यालय पंजाब तथा देश की आवश्यकताओं से जुड़े शोध और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज भारत स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध कराए हैं। किंतु उद्यमिता का वास्तविक अर्थ केवल सफल कंपनी बनाना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान करना, रोजगार सृजित करना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।
हमारा राष्ट्रीय संकल्प है कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जाए। विकसित भारत केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य, वैज्ञानिक सोच, समावेशी विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय से परिपूर्ण राष्ट्र होगा। इस लक्ष्य की प्राप्ति में आज के विद्यार्थी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आप जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, सदैव यह सोचें कि आपके ज्ञान और कर्म से भारत को क्या लाभ होगा।
साथियो,
भारत ज्ञान और अनुसंधान की प्राचीन भूमि रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने अनेक शताब्दियों तक विश्व को शिक्षा और ज्ञान की दिशा दिखाई। आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और अनेक भारतीय मनीषियों ने गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, धातु विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आज आवश्यकता अतीत के गौरव का केवल स्मरण करने की नहीं, बल्कि उसी वैज्ञानिक जिज्ञासा और ज्ञान-साधना को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करने की है। हमें परंपरा और प्रौद्योगिकी में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। भारत का मार्ग दोनों के समन्वय का मार्ग है।
हमें ए.आई. में आगे बढ़ना है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं को नहीं खोना है। हमें वैश्विक बनना है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना है। हमें आधुनिकता को अपनाना है, लेकिन प्रकृति और संस्कृति का सम्मान भी बनाए रखना है। जड़ें जितनी गहरी होंगी, उड़ान उतनी ही ऊँची होगी।
मैं आप सभी से पाँच संकल्प लेने का आग्रह करता हूँ, पहला, आजीवन सीखते रहें, दूसरा, असफलताओं से न घबराएँ, तीसरा, ईमानदारी से कभी समझौता न करें, चौथ, समाज को अपने ज्ञान का प्रतिफल अवश्य दें और पाँचवां, राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखें। यही संकल्प आपको सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक आदर्श नागरिक भी बनाएंगे और विकसित भारत के निर्माण में आपकी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
आदरणीय शिक्षको,
किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति उसकी इमारतें नहीं, बल्कि उसके शिक्षक होते हैं। एक श्रेष्ठ शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देता, बल्कि जिज्ञासा, आत्मविश्वास, नैतिकता और चरित्र का निर्माण करता है। आचार्य चाणक्य ने कहा था, ‘‘शिक्षक कभी साधारण नहीं होता; निर्माण और प्रलय उसकी गोद में पलते हैं।’’
आज के शिक्षक की भूमिका और अधिक व्यापक हो गई है। सूचना विद्यार्थी के मोबाइल फोन पर उपलब्ध है, लेकिन उस सूचना को ज्ञान में, ज्ञान को विवेक में और विवेक को जिम्मेदार कर्म में बदलने के लिए शिक्षक का मार्गदर्शन आवश्यक है।
मैं शिक्षकों से आग्रह करता हूँ कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और प्लेसमेंट के लिए तैयार न करें। उन्हें अनिश्चितता का सामना करने, नैतिक निर्णय लेने, टीम में कार्य करने, संवाद स्थापित करने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने के लिए तैयार करें। उन्हें गलतियाँ करने और प्रयोग करने की स्वतंत्रता दें। उनके प्रश्नों को प्रोत्साहित करें। प्रत्येक विद्यार्थी की अलग क्षमता को पहचानें। कभी-कभी शिक्षक का एक विश्वासपूर्ण वाक्य विद्यार्थी के पूरे जीवन की दिशा बदल देता है।
आदरणीय अभिभावकगण,
आज की यह उपलब्धि जितनी विद्यार्थियों की है, उतनी ही आपकी भी है। आपके त्याग, विश्वास और मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है। अब उन्हें संरक्षण के साथ-साथ विश्वास और स्वतंत्रता भी दें।
उनकी तुलना दूसरों से न करें, बल्कि उन्हें अपने सपनों का अनुसरण करने, असफलताओं से सीखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दें। उन्हें केवल सफलता नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, चरित्र, स्वास्थ्य और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का महत्व भी सिखाएँ।
मित्रों,
आज जब हम ‘नए भारत’ की बात करते हैं, तो उसका सबसे सशक्त आधार हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि पिछले एक दशक में भारत की शिक्षा व्यवस्था ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व छलांग लगाई है।
वर्ष 2014-15 में जहाँ देश में लगभग 51 हजार उच्च शिक्षण संस्थान थे, वहीं जून 2025 तक यह संख्या बढ़कर 70 हजार को पार कर गई है। आज हमारे पास 23 IIT, 21 IIM और 20 AIIMS का एक मजबूत नेटवर्क है। इतना ही नहीं, भारत की ज्ञान-परंपरा अब सीमाओं को लांघकर ग्लोबल हो रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण ज़ांज़ीबार और अबू धाबी में स्थापित हो रहे हमारे अंतर्राष्ट्रीय IIT परिसर हैं। आज हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक युवा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो एक नए और आकांक्षी भारत की तस्वीर है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इस पूरी व्यवस्था में एक नई ऊर्जा फूंक दी है। आज ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ और करोड़ों ‘अपार’ आईडी के माध्यम से छात्रों को यह आज़ादी मिल रही है कि वे अपनी गति से पढ़ें। लचीली प्रवेश और निकास व्यवस्था ने शिक्षा को छात्रों के अनुकूल बना दिया है।
मैं प्लाक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की इस बात के लिए विशेष सराहना करता हूँ कि आप जिस ‘इंडस्ट्री-एकेडेमिया इंटीग्रेशन’ (उद्योग और शिक्षा के तालमेल) की बात करते हैं, वही भारत सरकार का भी विजन है। UGC और AICTE द्वारा शुरू की गई ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ (PoP) पहल और तकनीकी संस्थानों के लिए ‘मेरिट’ (MERITE) योजना इसी दिशा में उठाए गए क्रांतिकारी कदम हैं, ताकि क्लासरूम की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहकर वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सके। देश में शोध और अनुसंधान को नई ऊंचाइयां देने के लिए ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) की स्थापना की गई है।
आज उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के तहत 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दी गई है और जल्द ही विदेशी विश्वविद्यालयों के 15 कैंपस हमारी धरती पर, जिनमें गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ भी शामिल है, खुलने जा रहे हैं।
मेरे युवा साथियों, सरकार ने नीतियां बना दी हैं, रास्ते खोल दिए हैं और भारत को एक ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने का मंच तैयार कर दिया है। अब यह आपके यानी हमारे ‘फ्यूचर-रेडी वर्कफोर्स’ के कंधों पर है कि आप अपने नवाचार और अपनी प्रतिभा से इस देश की वास्तविक क्षमता को दुनिया के सामने सिद्ध करें।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज से जीवन ही आपका वास्तविक विश्वविद्यालय होगा, आपके निर्णय आपकी परीक्षा होंगे, आपका चरित्र आपकी उत्तर-पुस्तिका होगा और समाज पर आपका प्रभाव आपका परिणाम होगा। बड़े सपने देखिए, लेकिन विनम्र बने रहिए; वैश्विक सफलता प्राप्त कीजिए, किंतु अपनी भारतीय पहचान और मानवीय मूल्यों को कभी मत भूलिए। तकनीक का विकास कीजिए, पर उसके केंद्र में सदैव मानवता को रखिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वयं को खोजने का सर्वोत्तम मार्ग दूसरों की सेवा है; इसलिए अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कीजिए।
आज उपाधि प्राप्त करते समय स्वयं से तीन प्रश्न अवश्य पूछिए कि मैं किस समस्या का समाधान करूँगा? मैं किसके जीवन को बेहतर बनाऊँगा? और मेरे योगदान को समाज किस रूप में याद करेगा? मेरी कामना है कि आप जहाँ भी जाएँ, उत्कृष्टता, ईमानदारी और संवेदनशीलता की पहचान बनें; आपका ज्ञान देश की शक्ति बने, आपका नवाचार मानवता की सेवा करे, आपका चरित्र समाज के लिए प्रेरणा बने और आपकी उपलब्धियाँ विकसित भारत की आधारशिला सिद्ध हों।
अंत में, मैं उपनिषद् की इस मंगलकामना के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँछ
‘‘असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।’’
अर्थात, हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और सीमितता से अमर ज्ञान की ओर ले चलें।
एक बार फिर से सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा प्लाक्षा विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!