SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THE ANNUAL INSTALLATION CEREMONY OF THE ROTARY CHANDIGARH CLUB ON 09.07.2026.

रोटरी चंडीगढ़ क्लब के ‘वार्षिक पदग्रहण समारोह’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 09.07.2026,  गुरूवारसमयः शाम 6:30 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज रोटरी चंडीगढ़ क्लब के इस ‘वार्षिक पदग्रहण समारोह’ में शामिल होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था या जिम्मेदारी के हस्तांतरण का दिन नहीं है, बल्कि यह परोपकार, सेवा और समर्पण के एक नए संकल्प का उत्सव है। 

सबसे पहले, मैं रोटरी चंडीगढ़ क्लब की नव-निर्वाचित अध्यक्ष टीना विर्क और नई टीम को इस महान संगठन का नेतृत्व संभालने के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, निवर्तमान अध्यक्ष आभा जोशी शर्मा और पूरी टीम को भी बधाई देता हूं जिन्होंने बीते वर्ष में समाज सेवा के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।

मुझे पता है कि 1 जुलाई को, रोटरी का पूरा नेतृत्व, ऊपर से नीचे तक, एक वर्ष की अवधि के भीतर अच्छा करने के लिए उनके जनादेश के साथ बदल जाता है।

मैं समझता हूं कि आज का यह आयोजन न केवल एक संस्था के नेतृत्व परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि सेवा, प्रतिबद्धता और सामाजिक सरोकार के उस महान उद्देश्य का उत्सव भी है, जिसकी नींव रोटरी इंटरनेशनल ने रखी थी।

रोटरी सिर्फ एक संस्था नहीं है, यह एक आंदोलन है, एक ऐसा आंदोलन जो "Service Above Self"अर्थात ‘‘स्वयं से ऊपर सेवा’’ के सिद्धांत पर आधारित है। 

रोटरी की प्रेरणादायक यात्रा एक व्यक्ति की दूरदृष्टि और मानवीय जुड़ाव की भावना से प्रारंभ हुई, वे थे श्री पॉल हैरिस। शिकागो के एक प्रतिष्ठित वकील, जिन्होंने 23 फरवरी 1905 को ‘रोटरी क्लब ऑफ शिकागो’ की स्थापना इस उद्देश्य से की कि विभिन्न व्यवसायों और पृष्ठभूमियों से जुड़े पेशेवर एक साझा मंच पर आकर न केवल विचारों का आदान-प्रदान कर सकें, बल्कि आपसी विश्वास, सहयोग और दीर्घकालिक, सार्थक मित्रताओं का सशक्त तानाबाना भी बुन सकें।

समय के साथ, रोटरी की दृष्टि और पहुँच मानवता की सेवा तक विस्तृत होती गई। इसके सदस्यों ने अपने-अपने समुदायों में और वैश्विक स्तर पर असंख्य चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में वर्षों से अद्भुत कार्य किया है।

जैसा कि रोटरी के महान संस्थापक श्री पॉल हैरिस ने कहा थाः ‘‘रोटरी हमारे लिए चाहे जो भी मायने रखता हो, दुनिया हमें हमेशा हमारे कार्यों और हमारी उपलब्धियों के आधार पर ही पहचानेगी।’’

यह विचार आज भी पूरी मजबूती के साथ जीवित है। रोटरी एक सच्चा अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना के मात्र 16 वर्षों के भीतर इसके क्लब छह महाद्वीपों तक फैल चुके थे। आज यह संगठन एक विशाल वटवृक्ष बनकर विश्व के 200 से अधिक देशों और भौगोलिक क्षेत्रों में करोड़ों लोगों के जीवन में आशा, सेवा और परिवर्तन का संदेश पहुँचा रहा है।

रोटरी ने सदैव बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन्हें समर्पण के साथ साकार किया है। पोलियो उन्मूलन अभियान इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। वर्ष 1979 में फिलीपींस में लाखों बच्चों के टीकाकरण से शुरू हुई यह पहल आज वैश्विक जनस्वास्थ्य के इतिहास की सबसे सफल अभियानों में से एक मानी जाती है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग से रोटरी ने विश्व के अधिकांश देशों को पोलियो-मुक्त बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है। 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय प्रमाणन आयोग द्वारा भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो-मुक्त राष्ट्र घोषित किया गया।

यह न केवल रोटरी की सेवा भावना का प्रमाण है, बल्कि उस वैश्विक एकजुटता और निरंतर प्रयास का भी परिचायक है जो एक बेहतर, सुरक्षित और समावेशी विश्व के निर्माण की दिशा में कार्यरत है।

देवियो और सज्जनो,

भारत में रोटरी के इतिहास की बात करें तो साल 1920 में कोलकाता में पहले रोटरी क्लब की स्थापना के साथ भारत में इस सेवा यात्रा की शुरुआत हुई थी। तब से लेकर आज तक, भारत के नवनिर्माण में और समाज को विभिन्न संकटों से उबारने में रोटरी की भूमिका अद्वितीय रही है।

आज भारत में रोटरी एक सशक्त सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के रूप में स्थापित हो चुका है। देश के 43 रोटरी डिस्ट्रिक्ट्स के अंतर्गत लगभग 4 हजार 700 क्लब और 1 लाख 70 हजार से अधिक सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। यह विशाल नेटवर्क ‘सेवा ही सर्वोपरि’ की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रेरक माध्यम बन चुका है।

हमारा सौभाग्य है कि जब वर्ष 1958 में चंडीगढ़ एक आधुनिक शहर के रूप में आकार ले रहा था, उसी समय रोटरी क्लब चंडीगढ़ की स्थापना भी हुई। तब से लेकर आज तक इस क्लब ने निस्वार्थ सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों की एक अनूठी परंपरा स्थापित की है। पिछले लगभग सात दशकों में आपने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं, वे वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायी हैं।

मुझे क्लब द्वारा संचालित अनेक जनकल्याणकारी परियोजनाओं के बारे में जानने का अवसर मिला। वर्ष 1960 के दशक में शहर को फ्यूनरल वैन (अंतिम यात्रा वाहन) उपलब्ध कराने जैसी संवेदनशील पहल से लेकर पीजीआई रोटरी सराय का निर्माण, बाल भवन में इंटरनेशनल डॉल्स म्यूज़ियम की स्थापना, रोटरी व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत तथा ब्लड बैंक सोसायटी के सहयोग से ब्लड बैंक की स्थापना जैसी अनेक परियोजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि रोटरी केवल सेवा की बात नहीं करती, बल्कि उसे धरातल पर साकार भी करती है।

विशेष रूप से मैं रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व विश्व अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार साबू और श्रीमती उषा साबू के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मानवीय दृष्टिकोण की सराहना करना चाहूँगा। उन्होंने ऐसे अनेक सेवा प्रकल्पों की परिकल्पना की, जिनका लाभ केवल भारत ही नहीं बल्कि अनेक देशों के लोगों को भी मिला। विशेषकर अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा परियोजनाओं तथा हार्टलाइन जैसी पहल ने असंख्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को जीवन का नया अवसर प्रदान किया है। 

प्रिय साथियो,

मैं जब भी रोटरी क्लब के किसी आयोजन में उपस्थित होता हूँ, तो मेरे मन में एक विशेष आनंद की अनुभूति होती है। आप रोटेरियन्स समाज और लोगों के जीवन में आशाएं और खुशियां लाने का कार्य करते हैं। आपके सेवाभाव, समर्पण और जनकल्याण के प्रति निष्ठा को मैं नमन करता हूँ।

रोटेरियन्स द्वारा किए गए समाजोपयोगी कार्यों से मैं भली-भांति परिचित हूँ। चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, स्वच्छता हो या पर्यावरण संरक्षण, हर क्षेत्र में आपकी उपस्थिति प्रेरणा देने वाली रही है। सेवाभाव आपके लिए केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली है।

हम बुद्ध की, महावीर की, महात्मा गांधी की भूमि से हैं, उन्होंने अपने कर्मों से दिखाया कि दूसरों के लिए जीना ही सच्ची मानवता है। रोटरी उन्हीं आदर्शों का जीवंत उदाहरण है।

भारत की सभ्यता हजारों वर्षों से ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ के महान विचार को आत्मसात किए हुए है। हमारे लिए सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है। इसलिए सेवा हमारे लिए कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति है; कोई अभियान नहीं, बल्कि जीवन शैली है।

महात्मा गांधी ने कहा था, ‘‘स्वयं को पाने का सर्वोत्तम मार्ग है, स्वयं को दूसरों की सेवा में खो देना।’’ यह वाक्य जीवन का शाश्वत सत्य है। जब व्यक्ति समाज के लिए जीना प्रारम्भ करता है, तभी उसका अपना जीवन भी अधिक सार्थक और पूर्ण बनता है।

सेवा का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं है। सेवा का अर्थ है, किसी व्यक्ति के जीवन में आशा का संचार करना, उसके आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करना और उसे सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना। किसी भूखे को भोजन देना महान कार्य है, किन्तु उसे आत्मनिर्भर बनाने का अवसर देना उससे भी बड़ा कार्य है। किसी रोगी का उपचार कराना आवश्यक है, किन्तु ऐसा समाज बनाना जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सके, उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है।

इसीलिए भारतीय चिंतन परंपरा ने दान को केवल वस्तुओं के वितरण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ज्ञान, संस्कार, समय, श्रम और संवेदनशीलता को भी श्रेष्ठ दान माना है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘विद्या दानम सर्वश्रेष्ठम्।’’ अर्थात् ज्ञान का दान सर्वोच्च दान है, क्योंकि इससे व्यक्ति केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि अपना सम्पूर्ण भविष्य बदल सकता है।

भारतीय संस्कृति ने सदैव हमें यह सिखाया है कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है, जब उसका अस्तित्व दूसरों के जीवन में प्रकाश, आशा और विश्वास का संचार करे। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘परोपकाराय सताम विभूतयः।’’ अर्थात् सज्जनों की सम्पत्ति और सामर्थ्य सदैव परोपकार के लिए होती है।

जब हम किसी पीड़ित के आँसू पोंछते हैं, किसी रोगी को उपचार उपलब्ध कराते हैं, किसी निर्धन बालक को शिक्षा देते हैं अथवा किसी परिवार के जीवन में आशा का दीप जलाते हैं, तब हम केवल सामाजिक सेवा नहीं करते, बल्कि मानवता की सर्वोच्च साधना करते हैं।

आज जब संसार जलवायु परिवर्तन, असमानता, स्वास्थ्य संकट, मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन और नैतिक मूल्यों जैसी अनेक चुनौतियों के क्षरण का सामना कर रहा है, तब रोटरी जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकारें योजनाएँ बना सकती हैं, संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं, लेकिन समाज में विश्वास, संवेदना और जनभागीदारी का वातावरण स्वयंसेवी संगठन ही निर्मित करते हैं।

भारत के विकास की यात्रा में भी सरकार और समाज दोनों की सहभागिता अनिवार्य है। विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं होगा; इसके लिए उद्योग, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाएँ, युवा, महिलाएँ और प्रत्येक जागरूक नागरिक को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी। रोटरी जैसे संगठन इस जनभागीदारी की सबसे प्रभावी कड़ी हैं।

देवियो और सज्जनो,

कोई भी राष्ट्र तभी महान और समृद्ध बन सकता है, जब उसके नागरिक व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य और नैतिक धर्म मानें। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता है और दूसरों के कल्याण को भी अपनी जिम्मेदारी समझता है, तभी एक सशक्त, समृद्ध और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

मेरा मानना है कि हमारे जैसे विशाल और विविधतापूर्ण समाज में रोटरी जैसी संस्थाएँ वास्तव में समाज की अमूल्य धरोहर हैं। सरकार अपनी योजनाओं और संसाधनों के माध्यम से विकास का कार्य करती है, लेकिन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने, उसकी पीड़ा को समझने और तत्काल मानवीय सहयोग प्रदान करने में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रोटरी ने हमेशा इसी भावना के साथ कार्य किया है।

आज जब भारत ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, तब रोटरी जैसे सेवा-समर्पित संगठनों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार के प्रयास तभी व्यापक जन-आंदोलन का रूप लेते हैं, जब उनमें समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है। 

मैं रोटरी परिवार से आग्रह करता हूँ कि वह अपने सेवा कार्यों का दायरा और अधिक विस्तृत करे, विशेषकर ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों तक अपनी पहुँच बनाए। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति और युवा नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में सरकारी प्रयासों के सहभागी बनते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन का नेतृत्व करें। साथ ही, युवाओं में सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व की भावना जागृत कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ का सक्रिय सहभागी बनाएं।

आप सभी रोटेरियनों की संगठन क्षमता, संसाधनों का प्रभावी उपयोग, चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने की प्रतिबद्धता तथा निःस्वार्थ सेवा की भावना वास्तव में प्रशंसनीय है। ऐसे समर्पित नागरिक किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यह हमारे लिए भी गर्व का विषय है कि समाज में ऐसे सेवाभावी संगठन और समर्पित रोटेरियन हैं, जिन पर आवश्यकता पड़ने पर सदैव विश्वास किया जा सकता है।

मैं आप सभी रोटेरियनों का हृदय से अभिनंदन करता हूँ कि आपने सेवा, करुणा और मानवीय मूल्यों के माध्यम से समाज में आशा, विश्वास, प्रसन्नता और शांति का वातावरण निर्मित किया है। आपकी निस्वार्थ सेवा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मैं मानता हूँ कि यह पदग्रहण समारोह केवल नेतृत्व परिवर्तन का अवसर नहीं है, बल्कि सेवा की उस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जो मानव गरिमा, करुणा, संवेदनशीलता और सहानुभूति को सर्वोच्च स्थान देती है। यही रोटरी की वास्तविक पहचान है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति भी है।

अंत में, मैं नव-निर्वाचित नेतृत्व, रोटरी क्लब चंडीगढ़ के प्रत्येक सदस्य तथा पूरे रोटरी परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपने सेवा-कार्य, नेतृत्व और समर्पण से न केवल चंडीगढ़ और भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में आशा, सहयोग और मानवता का संदेश फैलाते रहेंगे।

आप सभी को उज्ज्वल एवं सफल रोटरी वर्ष के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!