SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF SUN FOUNDATION’S CONVOCATION AND JOB OFFER LETTER DISTRIBUTION CEREMONY AT LUDHIANA ON 16.07.2026.

सन फाउंडेशन के दीक्षांत एवं रोज़गार पत्र वितरण समारोह पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 16.07.2026, गुरूवारसमयः सुबह 11:30 बजेस्थानः लुधियाना

 

नमस्कार!

आज पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना के इस शानदार प्रांगण में उपस्थित होकर मुझे जो प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। आज हम केवल 1 हजार युवाओं को उनकी डिग्रियां नहीं सौंप रहे हैं, बल्कि उनके हाथों में उनके उज्ज्वल भविष्य का प्रमाण, यानी रोज़गार पत्र भी एक साथ दे रहे हैं। शिक्षा और रोज़गार का ऐसा अद्भुत संगम समाज के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत है।

आज जिन विद्यार्थियों को डिग्रियाँ और नियुक्ति-पत्र प्रदान किए जा गये हैं, उन्होंने उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक आधुनिक एवं रोजगार-परक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनमें जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (नर्सिंग), सीएनसी ऑपरेटर एवं प्रोग्रामर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट (ब्यूटीशियन), ग्राफिक डिज़ाइनर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कमी शेफ, बैक ऑफिस एसोसिएट (वित्तीय सेवाएँ), इलेक्ट्रिक वाहन सेवा तकनीशियन, ऑफिस ऑपरेशन एग्जीक्यूटिव (मानव संसाधन एवं पेरोल), मोटर एवं कंट्रोलर रिपेयरिंग तकनीशियन (इलेक्ट्रिशियन) जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। 

अक्सर हम देखते हैं कि युवा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से डिग्रियां प्राप्त करने के बाद रोज़गार की तलाश में वर्षों भटकते हैं। लेकिन आज इस केंद्र ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि शिक्षा को ‘कौशल’ और ‘उद्योगों की मांग’ के साथ जोड़ दिया जाए, तो युवाओं को काम मांगने वाला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

‘‘हुनर किसी रियासत का मोहताज नहीं होता, जिसके हाथों में कौशल है, वही अपने मुकद्दर का सिकंदर होता है।’’

आज इन युवाओं के चेहरों पर मैं जो आत्मविश्वास की चमक देख रहा हूँ, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब युवा को सही दिशा, आधुनिक प्रशिक्षण और अवसर मिलता है, तो वह किसी भी चुनौती को पार कर सकता है।

मैं समझता हूँ कि आज यहाँ केवल 1 हजार युवाओं को नियुक्ति-पत्र नहीं मिल रहे, बल्कि 1 हजार परिवारों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद प्रवेश कर रही है।

हमारे शास्त्रों में कहा गया है, “योगः कर्मसु कौशलम्।” अर्थात् कर्म में कुशलता ही योग है। यह छोटा-सा वाक्य कौशल विकास का संपूर्ण दर्शन प्रस्तुत करता है। केवल कार्य करना पर्याप्त नहीं है; कार्य को ज्ञान, दक्षता, अनुशासन, गुणवत्ता और समर्पण के साथ करना ही वास्तविक कौशल है।

हमारी भारतीय परम्परा में श्रम को सदैव सम्मान दिया गया है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प और तकनीकी दक्षता का प्रतीक माना गया है। हमारे कारीगरों, लोहारों, बढ़इयों, बुनकरों, कुम्हारों, किसानों और शिल्पकारों ने अपने हुनर से भारत की सभ्यता को समृद्ध बनाया है।

भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा भी केवल पुस्तकीय ज्ञान पर आधारित नहीं थी। उसमें जीवनोपयोगी शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्य के माध्यम से सीखने को विशेष महत्व दिया जाता था।

श्री गुरु नानक देव जी ने हमें “किरत करो, नाम जपो और वंड छको” का संदेश दिया। ‘किरत करो’ का अर्थ है, ईमानदारी, मेहनत और स्वाभिमान के साथ आजीविका अर्जित करना। आज इस मंच पर खड़े हमारे युवा उसी ‘किरत’ की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं।

देवियो और सज्जनो,

इन युवाओं की अभूतपूर्व सफलता के पीछे जिस संस्था का समर्पण और विज़न है, उसकी सराहना करना आज अत्यंत आवश्यक है। मैं सन फाउंडेशन और विशेष रूप से इसके संस्थापक पद्मश्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी जी के सेवा-भाव को साधुवाद देता हूँ। वर्ष 1998 में स्थापित यह फाउंडेशन पिछले लगभग तीन दशकों से समाज के वंचित, गरीब और ज़रूरतमंद वर्गों, विशेषकर हमारी बेटियों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के भगीरथ प्रयास में जुटा हुआ है।

सन फाउंडेशन आज लाखों लोगों के जीवन में आशा का दीप बन चुकी है। इस संस्था ने कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, नशा मुक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। देशभर में 25 हजार से अधिक लोगों के जीवन को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाने का कार्य अत्यंत सराहनीय है।

मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई कि लुधियाना का यह मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, जो कभी वर्षों तक निष्क्रिय और खाली पड़ा था, आज एक विश्वस्तरीय कौशल केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। 

डॉ. साहनी जी ने अपनी व्यक्तिगत पूंजी से लगभग 2.5 करोड़ का निवेश कर इसे आधुनिक प्रयोगशालाओं और अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी, एग्री-स्किल्स, फैशन डिजाइनिंग, नर्सिंग, सीएनसी प्रोग्रामिंग, वेल्डिंग और अन्य आधुनिक पाठ्यक्रम पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, डॉ. साहनी जी ने आईटीआई लुधियाना को भी अपनाकर उसके आधुनिकीकरण के लिए अपने सांसद निधि से 2 करोड़ रूपये तथा व्यक्तिगत रूप से 70 लाख रूपये का योगदान दिया है। रोबोटिक वेल्डिंग, 3-डी प्रिंटिंग, डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम और अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित यह परिसर आज उत्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ कौशल परिसरों में गिना जा रहा है। आज यह पंजाब के युवाओं के लिए आशा, अवसर और परिवर्तन का केंद्र बन चुका है।

मेरे युवा साथियो,

आज का युग केवल डिग्री का नहीं, बल्कि कौशल का युग है। दुनिया तेजी से बदल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएं और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की मांग निरंतर बढ़ रही है।

आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारी यह विशाल युवा आबादी हमारे देश की असली ताकत तभी बन सकती है, जब हमारे युवाओं के पास कौशल और आधुनिक तकनीक का ज्ञान हो।

जो कार्य कुछ वर्ष पहले हाथों से किए जाते थे, वे आज स्वचालित मशीनों के माध्यम से हो रहे हैं। जो व्यवसाय पहले स्थानीय बाजार तक सीमित थे, वे आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँच रहे हैं। इस परिवर्तन से डरने की आवश्यकता नहीं है; इसके लिए स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने युवाओं को “स्किल, री-स्किल और अप-स्किल” का मंत्र दिया है। इसका अर्थ है, पहले कोई उपयोगी कौशल सीखिए, बदलती तकनीक के अनुसार अपने कौशल को नया रूप दीजिए और निरंतर अपनी दक्षता को उच्च स्तर पर ले जाइए।

अब वह समय समाप्त हो रहा है जब कोई व्यक्ति एक बार प्रशिक्षण लेकर जीवनभर उसी ज्ञान के आधार पर काम कर सकता था। भविष्य उसी का है जो निरंतर सीखता है, नई तकनीक को अपनाता है और समय की आवश्यकता के अनुसार स्वयं को बदलता है।

डिग्री आपको एक अवसर तक पहुँचा सकती है, लेकिन कौशल आपको उस अवसर का सर्वोत्तम उपयोग करना सिखाता है। ज्ञान हमें बताता है कि क्या करना है; कौशल हमें सिखाता है कि उसे सही ढंग से कैसे करना है।

आज उद्योगों को केवल शैक्षणिक योग्यता रखने वाले युवाओं की आवश्यकता नहीं है। उन्हें ऐसे युवाओं की जरूरत है जो पहले दिन से काम समझ सकें, मशीनों को सुरक्षित ढंग से चला सकें, समस्याओं का समाधान कर सकें, टीम में कार्य कर सकें और गुणवत्ता के मानकों का पालन कर सकें। 

देवियो और सज्जनो,

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने कौशल विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है। वर्ष 2014 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की स्थापना तथा वर्ष 2015 में स्किल इंडिया मिशन का शुभारंभ इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। 

वर्तमान स्किल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और जन शिक्षण संस्थान योजना को एकीकृत रूप से लागू किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में इन योजनाओं के माध्यम से 35 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया। PMKVY 4.0 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना युवाओं को उद्योगों में कार्य करते हुए सीखने और आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करती है। मैं लुधियाना के उद्योगों से आग्रह करता हूँ कि वे अधिक से अधिक अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएँ, ताकि युवाओं को अनुभव और उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिल सके।

जन शिक्षण संस्थान योजना महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक समुदाय आधारित कौशल प्रशिक्षण पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जबकि ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ प्रशिक्षण, प्रमाणन, रोजगार और अप्रेंटिसशिप के अवसरों को एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध करा रहा है।

पारंपरिक कारीगरों के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को प्रशिक्षण, प्रशिक्षण अवधि का मानदेय, 15,000 तक टूलकिट सहायता, रियायती ऋण, डिजिटल लेनदेन और विपणन सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

वहीं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत पात्र सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को बिना गारंटी 20 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत अप्रैल 2026 तक 57.79 करोड़ ऋणों के माध्यम से लगभग 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।

साथ ही स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलें युवाओं को रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भी सामान्य शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर समन्वय पर बल दिया है।

देवियो और सज्जनो,

पंजाब की धरती मेहनत, साहस और उद्यमशीलता के लिए जानी जाती है। पंजाब के किसानों ने देश को खाद्यान्न सुरक्षा दी। पंजाब के जवानों ने सीमाओं पर देश की रक्षा की। पंजाब के उद्यमियों ने देश और विदेश में अपनी पहचान बनाई।

अब समय है कि पंजाब अपनी कुशल युवा शक्ति के माध्यम से भारत को विनिर्माण, आधुनिक कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी, आतिथ्य, हरित ऊर्जा और उन्नत औद्योगिक उत्पादन में भी नई दिशा प्रदान करे।

हमारा प्रयास होना चाहिए कि पंजाब का युवा अवसरों के अभाव में निराश न हो। उसे रोजगार के लिए मजबूरी में अपना घर और प्रदेश न छोड़ना पड़े। वह अपने ही राज्य में सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सके, उद्यम स्थापित कर सके और पंजाब की प्रगति में भागीदार बन सके। 

पंजाब के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और सेवा केंद्रों में स्थानीय युवाओं के कौशल को उद्योग की मांग के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

हमें प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय कौशल मानचित्रण करना चाहिए कि किस जिले में कौन-से उद्योग हैं, आने वाले वर्षों में किन कार्यों की मांग बढ़ेगी और युवाओं को किन तकनीकों का प्रशिक्षण देना होगा।

प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम उद्योगों के परामर्श से नियमित रूप से बदले जाने चाहिए। मशीन और तकनीक बदल जाने के बाद भी यदि पाठ्यक्रम पुराने रहें, तो प्रशिक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।

मेरा सुझाव है कि मल्टी-स्किल डेवलपमेंट सेंटर एक मजबूत उद्योग सलाहकार परिषद बनाए, जिसमें विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हों। यह परिषद प्रत्येक छह महीने में पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण उपकरण, रोजगार की मांग और विद्यार्थियों के प्रदर्शन की समीक्षा करे।

संस्थान को केवल यह नहीं देखना चाहिए कि कितने विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण पूरा किया। उसे यह भी जानना चाहिए कि छह महीने और एक वर्ष बाद वे कहाँ कार्य कर रहे हैं, उनकी आय में कितना सुधार हुआ, कितनों ने अपना उद्यम शुरू किया और नियोक्ता उनके प्रदर्शन से कितने संतुष्ट हैं। 

प्रिय विद्यार्थियो,

आज से आपके जीवन की एक नई यात्रा प्रारम्भ हो रही है। इस यात्रा में मैं आपसे कुछ बातें विशेष रूप से कहना चाहता हूँ। सबसे पहले, अपने काम के प्रति ईमानदार रहिए। दूसरा, समय का सम्मान कीजिए। तीसरा, सुरक्षा नियमों की कभी उपेक्षा मत कीजिए। चौथा, निरंतर सीखते रहिए। पाँचवाँ, अपनी कमाई का सही प्रबंधन करना सीखिए। छठा, नशे से सदैव दूर रहिए। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि व्यक्ति के हुनर, परिवार, आय और भविष्य को भी नष्ट करता है। कौशल युवा को उद्देश्य देता है, रोजगार उसे आत्मसम्मान देता है और अनुशासन उसे नशे तथा अन्य सामाजिक बुराइयों से बचाता है।

मैं अक्सर कहता हूँ, “जिन हाथों में हुनर और औजार होते हैं, उन हाथों में नशे के लिए कोई स्थान नहीं होता।” पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए कानून और प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा, खेल, कौशल और रोजगार के अवसर भी आवश्यक हैं।

युवा जब प्रशिक्षण, रोजगार या उद्यमिता से जुड़ेगा, जब उसे अपने भविष्य का स्पष्ट मार्ग दिखाई देगा और जब परिवार तथा समाज उसका मार्गदर्शन करेंगे, तभी हम नशे की चुनौती पर स्थायी विजय प्राप्त कर सकेंगे।

देवियो और सज्जनो,

आज का यह समारोह हमें विश्वास दिलाता है कि सही प्रशिक्षण, सामाजिक प्रतिबद्धता और उद्योगों के सहयोग से बेरोजगारी को रोजगार तथा निराशा को आत्मविश्वास में बदला जा सकता है।

आज यहाँ वितरित किए गये प्रमाण-पत्र और नियुक्ति-पत्र विकसित एवं आत्मनिर्भर पंजाब की दिशा में 1 हजार मजबूत कदम हैं।

मैं पुनः सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मैं आपके उज्ज्वल, सफल और सम्मानपूर्ण भविष्य की कामना करता हूँ। मैं आपके माता-पिता, प्रशिक्षकों और उन सभी संस्थाओं एवं उद्योगों को भी बधाई देता हूँ, जिन्होंने आपकी इस यात्रा को संभव बनाया।

मैं पद्मश्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी जी और सन फाउंडेशन की पूरी टीम को इस प्रेरणादायी पहल के लिए साधुवाद देता हूँ।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि मल्टी-स्किल डेवलपमेंट सेंटर, लुधियाना भविष्य में भी हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह दिखाता रहेगा तथा पंजाब के कौशल विकास में एक आदर्श संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी युवा को अवसर के अभाव में पीछे नहीं रहने देंगे; प्रत्येक हाथ को हुनर, प्रत्येक हुनर को सम्मान और प्रत्येक योग्य युवा को रोजगार या उद्यमिता का अवसर उपलब्ध कराने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।

अंत में, मैं अपने युवा साथियों से केवल इतना कहना चाहता हूँ कि हुनर को अपनी शक्ति बनाइए, मेहनत को अपनी पहचान बनाइए, ईमानदारी को अपना चरित्र बनाइए, और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाइए।

आप आगे बढ़ेंगे, तो आपका परिवार आगे बढ़ेगा। आपका परिवार आगे बढ़ेगा, तो पंजाब आगे बढ़ेगा। और जब पंजाब आगे बढ़ेगा, तो भारत का विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ मैं आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!