SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INAUGURATING AYUSH INTEGRATED HOSPITAL IN SECTOR 34, CHANDIGARH AND GOVERNMENT AYUSH DISPENSARY IN SECTOR 11 AT CHANDIGARH ON AUGUST 4, 2026.
- by Admin
- 2026-08-04 14:50
आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल एवं राजकीय आयुष औषधालय उद्घाटन पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 04.08.2026, मंगलवार समयः सुबह 11:30 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज का दिन चंडीगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ’’आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल, सेक्टर-34’’ के उद्घाटन के साथ चंडीगढ़ को अपना पहला ऐसा समेकित अस्पताल प्राप्त हो रहा है, जहाँ आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग एवं आधुनिक चिकित्सा से जुड़ी सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
इसी दिशा में सेक्टर-11 स्थित ‘‘राजकीय आयुष औषधालय’’ की स्थापना भी नागरिकों को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगा।
आज आरंभ की जा रही ये स्वास्थ्य सुविधाएँ केवल नए चिकित्सा संस्थानों का उद्घाटन नहीं है। यह स्वास्थ्य सेवा की उस व्यापक और भविष्यमुखी सोच का शुभारंभ है, जिसमें बीमारी होने के बाद उपचार करने के साथ-साथ रोगों की रोकथाम, संतुलित जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक सक्रियता तथा समग्र कल्याण पर समान रूप से बल दिया जाता है।
हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा में कहा गया है, ’’शरीरमाद्यम खलु धर्मसाधनम।’’ अर्थात स्वस्थ शरीर ही हमारे सभी कर्तव्यों और जीवन के उद्देश्यों की पूर्ति का प्रथम साधन है। यदि व्यक्ति स्वस्थ है, तभी वह अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकता है।
आज इस अस्पताल को जनता को समर्पित करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह अस्पताल चंडीगढ़ के नागरिकों को उपचार के विविध विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक, अनुशासित और उत्तरदायी बनने के लिए भी प्रेरित करेगा।
देवियो और सज्जनो,
स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों का अभाव नहीं है। वास्तविक स्वास्थ्य का अर्थ है, शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से संतुलित, सामाजिक रूप से सक्रिय और भावनात्मक रूप से प्रसन्न जीवन।
आधुनिक जीवनशैली ने हमें अनेक सुविधाएँ दी हैं, लेकिन इसके साथ नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं। शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित भोजन, तनाव, अपर्याप्त नींद, प्रदूषण, तंबाकू और नशे का सेवन, अत्यधिक स्क्रीन टाइम तथा अनियमित दिनचर्या के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग, मानसिक तनाव और अन्य गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों और दवाइयों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। हमें ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो नागरिक को स्वस्थ रहने की कला भी सिखाए। हमें उपचार की व्यवस्था के साथ-साथ रोकथाम की संस्कृति को मजबूत करना होगा। इसी उद्देश्य से आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल में आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग, वेलनेस तथा आधुनिक चिकित्सा को एक समन्वित व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह पहल भारत सरकार के ’’समग्र स्वास्थ्य-समग्र उपचार’’ के दृष्टिकोण तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ’’“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास”’’ के संकल्प को आगे बढ़ाती है।
प्रधानमंत्री जी ने स्वास्थ्य को केवल बीमारी के इलाज का विषय न मानकर स्वच्छता, पोषण, योग, फिटनेस, सुरक्षित पेयजल, पर्यावरण, समय पर जांच, सस्ती दवाइयों और आर्थिक सुरक्षा से जोड़ा है। यही समग्र दृष्टिकोण एक स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण का आधार है।
साथियो,
चंडीगढ़ उत्तर भारत का एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहाँ ’’पीजीआईएमईआर’’, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल सेक्टर-32, राजकीय बहु-विशेषता अस्पताल सेक्टर-16, सिविल अस्पताल मनीमाजरा तथा प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थानों का सशक्त नेटवर्क उपलब्ध है। चंडीगढ़ के अस्पताल केवल स्थानीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और देश के अन्य क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं। इस कारण हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
चंडीगढ़ प्रशासन गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है। सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का निरंतर विस्तार हुआ है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, टीबी उन्मूलन, वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से आम नागरिकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आज उद्घाटित यह आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल इन्हीं प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
देवियो और सज्जनो,
स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं है; यह किसी भी राष्ट्र की प्रगति, उत्पादकता और समृद्धि का आधार है। यही कारण है कि भारत की प्राचीन परंपरा में स्वास्थ्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
जब दुनिया के कई हिस्से सभ्यता के शुरुआती चरण में थे, तब हमारी धरती पर महर्षि सुश्रुत और महर्षि चरक जैसे महान चिकित्सक मौजूद थे। महर्षि सुश्रुत को पूरी दुनिया आज ‘सर्जरी का जनक’ मानती है। सुश्रुत संहिता में सैंकड़ों प्रकार की शल्य चिकित्सा और सर्जिकल उपकरणों का जो वर्णन है, वह आज भी आधुनिक विज्ञान के लिए शोध का विषय है।
हमारी आयुर्वेद की महान परंपरा ने हमेशा रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य पर जोर दिया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व यह उद्घोष किया था, ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।’’
भारत ने पूरी दुनिया को आयुर्वेद, योग और समग्र चिकित्सा पद्धति की अमूल्य विरासत दी। आज जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अत्याधुनिक तकनीकों के साथ आगे बढ़ रहा है, तब भी पूरी दुनिया भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और योग की ओर आकर्षित हो रही है।
आज जब मैं इस अस्पताल को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि यह हमारी उसी प्राचीन खोजपरक सोच और आधुनिक विज्ञान का एक शानदार और सफल संगम है।
देवियो और सज्जनो,
आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। यह व्यक्ति के रोग के साथ-साथ उसकी प्रकृति, आहार, दिनचर्या, मानसिक स्थिति और जीवनशैली को भी ध्यान में रखता है।
इसका मूल उद्देश्य है, “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम, आतुरस्य विकार प्रशमनम च्।” अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी का उपचार करना। यह सिद्धांत आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य की रोकथाम और उपचार की समन्वित सोच से पूरी तरह मेल खाता है।
योग भी भारत की विश्व को दी गई अनमोल देन है। योग, प्राणायाम और ध्यान शरीर, मन एवं विचारों में संतुलन स्थापित करते हैं तथा तनाव और जीवनशैली संबंधी रोगों से बचाव में सहायक होते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता मिलना हमारी ज्ञान-परंपरा के प्रति वैश्विक सम्मान का प्रतीक है।
होम्योपैथी भी देश में व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली चिकित्सा पद्धति है। इस अस्पताल में इसकी सेवाएँ प्रशिक्षित चिकित्सकों, उचित जांच, मानक उपचार और आवश्यक रेफरल व्यवस्था के साथ उपलब्ध होंगी।
समेकित चिकित्सा का अर्थ उपचार पद्धतियों को बिना वैज्ञानिक मूल्यांकन के मिलाना नहीं, बल्कि मरीज की आवश्यकता, सुरक्षा, उपलब्ध चिकित्सकीय प्रमाण और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उचित उपचार प्रदान करना है। आपातकालीन एवं गंभीर स्थितियों में आधुनिक चिकित्सा की भूमिका निर्णायक है, जबकि रोगों की रोकथाम, जीवनशैली सुधार, योग, पुनर्वास और वेलनेस में आयुष सेवाएँ उपयोगी सहयोग दे सकती हैं। इसलिए इस अस्पताल की सफलता का आधार होगा, ’’समन्वय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मरीज की सुरक्षा और प्रमाण-आधारित निर्णय।’’
साथियो,
मुझे खुशी है कि ’आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल, सेक्टर-34’ में आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के तहत विशेषज्ञ ओपीडी, दीर्घकालिक रोगों के प्रबंधन, बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष परामर्श, त्वचा संबंधी समस्याओं, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श तथा जीवनशैली सुधार से जुड़ी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
आवश्यकता के अनुसार योग विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा के चिकित्सकों के साथ समन्वय स्थापित कर मरीज के लिए व्यापक उपचार योजना तैयार की जा सकेगी।
यहाँ 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएँ, औषधालय, योग एवं वेलनेस सेवाएँ, पंचकर्म, वृद्धजन स्वास्थ्य सेवाएँ, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण तथा गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता हो रही है कि इस अस्पताल में क्षारसूत्र विशेषज्ञ की भी नियुक्ति की गई है। क्षारसूत्र आयुर्वेद की एक वैज्ञानिक एवं प्रमाणित पैरासर्जिकल तकनीक है, जिसके माध्यम से भगन्दर (फिस्टुला), अर्श (बवासीर), गुदाचीर (फिशर) तथा अन्य एनोरेक्टल रोगों का प्रभावी उपचार किया जाता है।
एक ही परिसर में विभिन्न सेवाओं की उपलब्धता से नागरिकों को अलग-अलग संस्थानों में जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे उनका समय और संसाधन बचेंगे व उपचार दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
वहीं यदि ‘राजकीय आयुष औषधालय’ सेक्टर-11’ में आयुर्वेद और होम्योपैथी की ओपीडी सेवाओं के माध्यम से अनुभवी चिकित्सकों द्वारा परामर्श एवं उपचार प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को रोगों की रोकथाम, संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या और बेहतर जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जाएगा। मुझे विश्वास है कि यह औषधालय क्षेत्र के नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
मैं अपेक्षा करता हूँ कि इन दोनों चिकित्सा संस्थानों में मरीज की गरिमा, स्वच्छता, पारदर्शिता, समयबद्ध सेवा और संवेदनशील व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
किसी अस्पताल की वास्तविक पहचान केवल उसके भवन और उपकरणों से नहीं, बल्कि वहाँ कार्यरत चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के सेवाभाव से होती है। रोगी को उपचार के साथ करुणा, सहयोग और विश्वास भी चाहिए, क्योंकि, “चिकित्सा रोग का उपचार करती है, जबकि संवेदना रोगी को स्वस्थ होने का विश्वास देती है।”
देवियो और सज्जनो,
हमारे समाज में डॉक्टरों का स्थान अत्यंत सम्माननीय रहा है। भारतीय संस्कृति में चिकित्सक को “धरती का भगवान” कहा गया है, क्योंकि वह केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि जीवन बचाने का कार्य करता है। मैं आज यहाँ उपस्थित सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को नमन करता हूँ। आपका कार्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।
महात्मा गांधी जी ने कहा था, “स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोना और चाँदी नहीं।” इसी सोच के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं।
वर्ष 2014 तक जहाँ देश में केवल 7 एम्स थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहाँ 387 मेडिकल कॉलेज थे, अब 808 हो गए हैं जो 109 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 141 प्रतिशत वृद्धि के साथ एमबीबीएस सीटें 51 हजार 348 से बढ़कर 1 लाख 23 हजार 700 हो गई हैं और 144 प्रतिशत वृद्धि के साथ पीजी सीटें 31 हजार 185 से बढ़कर 76 हजार 174 तक पहुंची हैं।
स्वास्थ्य बजट में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2014 में यह 33 हजार 278 करोड़ रूपये था, जो अब बढ़कर 1 लाख 6 हजार 530 करोड़ रूपये हो गया है जो 220 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
इसके अलावा, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती, समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं।
आज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना है।
इसके अंतर्गत अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं तथा 1,80,435 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के अंतर्गत 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से लगभग 90 करोड़ करोड़ नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान की जा चुकी है। इसी प्रकार, देशभर में 1 लाख 86 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही, मिशन इंद्रधनुष, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा आदि जैसी पहलों ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता व पारदर्शिता को नई दिशा प्रदान की है।
इन सभी पहलों का उद्देश्य स्पष्ट है, देश के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण, किफायती और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा ‘स्वस्थ भारत, विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करना।
देवियो एवं सज्जनो,
मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता है कि आज इस अवसर पर एक विशाल निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श, जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन तथा औषधियों का वितरण किया जा रहा है। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
स्वस्थ समाज के निर्माण की जिम्मेदारी केवल सरकार और चिकित्सकों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। हमें नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, नशामुक्त जीवन, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच तथा योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। स्वस्थ जीवन संयोग से नहीं, बल्कि अनुशासन, जागरूकता और निरंतर प्रयास से प्राप्त होता है।
मैं युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे नशे से दूर रहें, प्रमाणित स्वास्थ्य जानकारी को बढ़ावा दें तथा रक्तदान, अंगदान, टीबी उन्मूलन, स्वच्छता, योग और पोषण जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें।
साथियो,
विकसित भारत का निर्माण स्वस्थ भारत के बिना संभव नहीं है। हमारा लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें गरीब को उपचार के खर्च का भय न हो, महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, बच्चों को पोषण एवं टीकाकरण, बुजुर्गों को सम्मानपूर्ण देखभाल और दिव्यांगजनों को सुगम स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हों।
स्वस्थ भारत वही होगा, जहाँ उपचार के साथ रोकथाम, तकनीक के साथ संवेदना, आधुनिक विज्ञान के साथ पारंपरिक ज्ञान और सरकारी प्रयासों के साथ जनभागीदारी का समन्वय हो। आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल और राजकीय आयुष औषधालय इसी सोच का प्रतीक है।
यहां के चिकित्सकों और कर्मचारियों से मेरी अपेक्षा है कि वे सेवा में संवेदना, उपचार में गुणवत्ता और व्यवस्था में पारदर्शिता के तीन मूल मंत्र अपनाएं। मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, सरल भाषा में परामर्श, गोपनीयता, सुरक्षा और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित की जाए। वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देते हुए प्रभावी रेफरल, डिजिटल रिकॉर्ड, संक्रमण नियंत्रण और शिकायत निवारण की मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल और राजकीय आयुष औषधालय आने वाले वर्षों में समेकित स्वास्थ्य सेवाओं का श्रेष्ठ केंद्र बनेंगे और चंडीगढ़ सहित पूरे क्षेत्र के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ व समग्र स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करेंगे।
मैं चंडीगढ़ प्रशासन के आयुष, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभागों सहित इस परियोजना से जुड़े सभी चिकित्सकों, अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देता हूँ।
आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जहाँ स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचें।
इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ, मैं आयुष इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल, सेक्टर-34, और ‘राजकीय आयुष औषधालय सेक्टर-11 चंडीगढ़ को जनसाधारण को समर्पित करता हूँ। ये संस्थान सेवा, संवेदना, गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य का आदर्श केंद्र बनें, इसी कामना के साथ आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!