SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FELICITATION CEREMONY FOR MERITORIOUS STUDENTS, PRINCIPALS AND INDIA SKILLS COMPETITION MEDALISTS AT CHANDIGARH ON AUGUST 4, 2026.
- by Admin
- 2026-08-04 18:50
मेधावी छात्रों, प्रिंसिपलों तथा इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के पदक विजेताओं के सम्मान समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 04.08.2026, मंगलवार समयः शाम 4:30 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
आज का यह अवसर चंडीगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का दिन है। हम यहाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं, बल्कि अपने युवाओं के ज्ञान, कौशल, परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास को सम्मानित करने के लिए भी उपस्थित हैं।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि आज हम 90 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले 512 मेधावी विद्यार्थियों (126 10वीं, 386 12वीं) और 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम प्राप्त करने वाले विद्यालयों के 35 प्रधानाचार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय इंडियास्किल्स प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 18 प्रतिभाशाली युवाओं को भी सम्मानित कर रहे हैं।
मैं सभी 512 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। आपने अपने परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से यह सफलता प्राप्त की है। आपकी उपलब्धि केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके उज्ज्वल भविष्य, परिवार के गौरव और चंडीगढ़ की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का प्रमाण है।
मैं उन 35 प्रधानाचार्यों का भी विशेष अभिनंदन करता हूँ, जिनके नेतृत्व में उनके विद्यालयों ने शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम प्राप्त किया है। यह सफलता प्रभावी नेतृत्व, शिक्षकों के समर्पण, विद्यार्थियों के परिश्रम, नियमित मार्गदर्शन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है। आपने यह सिद्ध किया है कि स्पष्ट लक्ष्य, सामूहिक उत्तरदायित्व और प्रत्येक विद्यार्थी पर व्यक्तिगत ध्यान देकर बेहतरीन परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय इंडियास्किल्स प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सभी 18 प्रतिभाशाली युवाओं को भी मेरी हार्दिक बधाई। आपने वेब टेक्नोलॉजीज, विजुअल मर्चेंडाइजिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियल कंट्रोल, मेकाट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस, कुकिंग तथा अन्य आधुनिक कौशल क्षेत्रों में अपनी दक्षता सिद्ध कर चंडीगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
मुझे बताया गया है कि इंडियास्किल्स, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा आयोजित देश की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता है। यह प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करने तथा वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान करती है।
मार्च 2026 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 600 से अधिक प्रतिभागियों ने 63 कौशल विधाओं में भाग लिया। चंडीगढ़ के युवाओं ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर 1 स्वर्ण, 1 रजत और 3 उत्कृष्टता पदक प्राप्त कर पूरे शहर को गौरवान्वित किया।
इससे पहले क्षेत्रीय इंडियास्किल्स प्रतियोगिता-2026 में भी चंडीगढ़ के 66 प्रतिभागियों ने 30 कौशल विधाओं में भाग लेकर 5 स्वर्ण, 6 रजत, 11 कांस्य और 13 उत्कृष्टता पदक अर्जित किए। मैं इस सफलता के लिए चंडीगढ़ कौशल विकास मिशन, तकनीकी शिक्षा विभाग तथा सभी नौ सहभागी संस्थानों के योगदान की सराहना करता हूँ। उनके समन्वित प्रयासों, निरंतर प्रशिक्षण और प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप ही आज राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं के सभी पदक विजेताओं में से 18 प्रतिभाशाली विजेताओं को सम्मानित करने का गौरव हमें प्राप्त हो रहा है।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है; ज्ञान के साथ कौशल, तकनीक के साथ रचनात्मकता और निरंतर सीखने की इच्छा भी आवश्यक है। व्यावहारिक कौशल से युक्त युवा रोजगार पाने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखता है। कौशल हाथों को सामर्थ्य, मस्तिष्क को आत्मविश्वास और सपनों को दिशा देता है।
चंडीगढ़ के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही विज्ञान, तकनीक, व्यावसायिक शिक्षा, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ा जाना चाहिए। विद्यालयों, कौशल संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से उन्हें प्रयोगशालाओं, इंटर्नशिप और वास्तविक कार्यस्थलों का अनुभव मिलना चाहिए।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का “स्किल, री-स्किल और अप-स्किल” का मंत्र आज अत्यंत प्रासंगिक है। मुझे विश्वास है कि इंडियास्किल्स के हमारे विजेता भविष्य में वर्ल्डस्किल्स सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का गौरव बढ़ाएँगे।
साथियो,
क्योंकि आज का यह अवसर शिक्षा से जुड़ा है तो हम अपने शिक्षकों को कैसे भूल सकते हैं। मैं अपने सभी शिक्षकों को भी नमन करता हूँ। एक शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, वह विद्यार्थियों के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानता है। वह निराश विद्यार्थी को आशा देता है, संकोची विद्यार्थी को आत्मविश्वास देता है और जिज्ञासु विद्यार्थी को नई उड़ान देता है। कहा गया है, “एक अच्छा शिक्षक पाठ पढ़ाता है, लेकिन एक महान शिक्षक जीवन की दिशा दिखाता है।” आज सम्मानित हो रहे विद्यार्थियों की यह सफलता इन्हीं शिक्षकों द्वारा दिखाई गई सही दिशा का प्रतिफल है।
मैं चंडीगढ़ प्रशासन के स्कूल शिक्षा विभाग की भी सराहना करता हूँ, जिसने प्रभावी शैक्षणिक योजनाओं, सुनियोजित पुनरावृत्ति कार्यक्रमों, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और निरंतर निगरानी के द्वारा इस परिवर्तन को संभव बनाया है।
देवियो और सज्जनो,
इस वर्ष चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों ने वास्तव में एक नया इतिहास रचा है। सीबीएसई कक्षा 10 की मुख्य परीक्षा में सरकारी विद्यालयों का कुल पास प्रतिशत पिछले वर्ष के 81.18 प्रतिशत से बढ़कर 88.25 प्रतिशत हो गया, जो 7.07 प्रतिशत अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि है।
लेकिन सफलता की कहानी यहीं समाप्त नहीं हुई। हमारे शिक्षकों ने किसी भी विद्यार्थी को पीछे नहीं छोड़ने का संकल्प लिया। विशेष मार्गदर्शन, अतिरिक्त कक्षाओं, नियमित मूल्यांकन, व्यक्तिगत सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन के माध्यम से 639 और विद्यार्थियों ने दूसरी बोर्ड परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
इसके परिणामस्वरूप कुल पास पर्सेंटेज बढ़कर 95.02 प्रतिशत हो गया। यह इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षक अपने विद्यार्थियों पर विश्वास करते हैं, तो विद्यार्थी भी स्वयं पर विश्वास करना सीख जाते हैं।
अब अच्छा प्रदर्शन केवल कुछ विद्यालयों तक सीमित नहीं रहा है। आज 35 सरकारी विद्यालयों ने शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त किया है। यह केवल एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालय निरंतर श्रेष्ठता के केन्द्र बनते जा रहे हैं।
इन उपलब्धियों के पीछे हमारे शिक्षकों का असाधारण समर्पण है। वे शिक्षक जो विद्यालय के बाद भी बच्चों के साथ रुके। वे शिक्षक जिन्होंने अभिभावकों से लगातार संपर्क बनाए रखा। वे शिक्षक जिन्होंने अतिरिक्त कक्षाएँ लगाईं। और वे शिक्षक जिन्होंने निराश विद्यार्थियों में भी आत्मविश्वास जगाया।
मैं विशेष रूप से यह उल्लेख करना चाहूँगा कि चंडीगढ़ देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहाँ सभी सरकारी विद्यालय सीबीएसई से संबद्ध हैं। इसलिए चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों के परिणामों की तुलना सीधे निजी विद्यालयों से होती है। मुझे गर्व है कि हमारे सरकारी विद्यालय आज निजी विद्यालयों के समकक्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज की यह सफलता आपकी कड़ी मेहनत, रातों की नींद त्यागने और आपके फोकस का परिणाम है। मैं जानता हूँ कि आप में से कई बच्चों ने सीमित संसाधनों और कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद यह मुकाम हासिल किया है।
जब भी आपको लगे कि परिस्थितियाँ आपके अनुकूल नहीं हैं, तो भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी के बचपन को याद कर लेना।
डॉ. कलाम का जन्म रामेश्वरम के एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक नाविक थे। कलाम जी को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनकी पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके। लेकिन उस छोटी सी उम्र में उन्होंने हार नहीं मानी। वे सुबह जल्दी उठकर रामेश्वरम रेलवे स्टेशन जाते, वहाँ से अखबारों के बंडल उठाते और घूम-घूम कर अखबार बांटते थे। अखबार बेचकर जो चंद पैसे मिलते, उससे वे अपनी स्कूल की फीस भरते थे और अपनी पढ़ाई पूरी करते थे।
सुविधाओं के उस घोर अभाव के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर भारत के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रम की नींव रखी और देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे। यह डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी के अथक संघर्षों की ही सफलता है कि कभी अखबार बेचने वाले एक निर्धन बालक को, एक दिन स्वयं अखबारों की सुर्खियाँ बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसलिए बच्चों, याद रखना, तुम्हारी वर्तमान परिस्थितियाँ कभी भी तुम्हारे भविष्य की ऊंचाइयों को तय नहीं कर सकतीं।
तुम्हारे लिए मैं इन पंक्तियों का उल्लेख करना चाहूँगा, ‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’
आज आपको मिलने वाले ये सम्मान-पत्र आपकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हैं। आने वाले वर्षों में भारत को संवेदनशील डॉक्टर, प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, नवाचारी उद्यमी, ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी, समर्पित शिक्षक, जिम्मेदार नागरिक और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता होगी। मुझे विश्वास है कि ऐसे अनेक भविष्य के राष्ट्रनिर्माता आज इसी सभागार में उपस्थित हैं।
जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी इस राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हमेशा याद रखिए, बिना डर के सपने देखिए। बिना सीमा के सीखिए। ईमानदारी से परिश्रम कीजिए। और विनम्रता के साथ समाज एवं राष्ट्र की सेवा कीजिए। सफलता आपको पहचान दिलाती है, लेकिन आपका चरित्र आपको सम्मान दिलाता है।
साथियो,
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को ज्ञान, कौशल, नवाचार, खेल, कला, मूल्यों और रोजगार से जोड़ते हुए समग्र विकास की नई दिशा दी है। इसका उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी तैयार करना नहीं, बल्कि जिज्ञासु, रचनात्मक, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शिक्षा और कौशल को विकसित भारत-2047 की आधारशिला माना गया है। पीएम श्री स्कूल, निपुण भारत मिशन, पीएम ई-विद्या, दीक्षा, ‘समग्र शिक्षा अभियान’, कौशल-आधारित शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, इंटर्नशिप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षण तथा भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकों जैसी पहलें विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रही हैं।
चंडीगढ़ में कुल 111 सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें 43 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, 55 उच्च विद्यालय, 10 माध्यमिक विद्यालय और 3 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं, और जिनमें 1 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। हमारा उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक सरकारी विद्यालय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं, सुरक्षित वातावरण, खेल, कला, कौशल और नवाचार का उत्तम केंद्र बनाना है।
आदरणीय प्रधानाचार्यजनों
प्रधानाचार्य केवल प्रशासनिक अधकारी नहीं, बल्कि विद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति और गुणवत्ता के निर्माता होते हैं। उनका नेतृत्व ही विद्यालय की दिशा और उपलब्धियों को निर्धारित करता है। शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने वाले प्रधानाचार्यों ने सिद्ध किया है कि प्रभावी नेतृत्व का आधार अनुशासन, प्रेरणा, सतत संवाद और प्रत्येक विद्यार्थी के प्रति संवेदनशीलता है।
मैं सभी प्रधानाचार्यों से आग्रह करता हूँ कि वे केवल मेधावी विद्यार्थियों पर ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में पीछे रह गए, पारिवारिक कठिनाइयों का सामना कर रहे तथा आत्मविश्वास की कमी महसूस करने वाले विद्यार्थियों पर भी विशेष ध्यान दें। किसी विद्यालय की वास्तविक सफलता उसके सर्वोच्च अंकों से नहीं, बल्कि सबसे कमजोर विद्यार्थी की प्रगति से मापी जानी चाहिए। विद्यालय ऐसा हो जहाँ बच्चे निडर होकर प्रश्न पूछें, सीखें और आगे बढ़ें।
मेरे सम्मानित शिक्षकगण,
आप केवल शिक्षक नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। आधुनिक तकनीक शिक्षा को सरल बना सकती है, किन्तु प्रेरणा, संस्कार, चरित्र और मानवीय मूल्यों का निर्माण केवल शिक्षक ही कर सकता है।
आज आवश्यकता है कि शिक्षक नई शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल-आधारित शिक्षा तथा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों से निरंतर स्वयं को अपडेट रखें। प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता और शैली अलग होती है; इसलिए शिक्षा भी संवेदनशील और विद्यार्थी-केंद्रित होनी चाहिए।
मैं आपसे विशेष आग्रह करता हूँ कि बच्चों को केवल उत्तर याद न कराएँ, बल्कि प्रश्न पूछने, जिज्ञासा विकसित करने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करें। यही शिक्षा उन्हें भविष्य का सक्षम, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाएगी।
विद्यार्थियो,
जीवन में हमेशा शत-प्रतिशत परिणाम नहीं मिलते। कभी-कभी पूरी मेहनत के बाद भी हमारी अपेक्षा के अनुरूप सफलता नहीं मिलती। ऐसे समय में निराश होने के बजाय स्वयं से तीन प्रश्न पूछें, मैंने क्या अच्छा किया? मुझसे कहाँ कमी रह गई? अगले प्रयास में मैं क्या बेहतर कर सकता हूँ?
असफलता हमारे मूल्य का निर्णय नहीं करती। वह केवल यह बताती है कि हमारी तैयारी या पद्धति में सुधार की आवश्यकता है।
एक परीक्षा में कम अंक आने का अर्थ यह नहीं कि विद्यार्थी में प्रतिभा नहीं है। प्रत्येक बच्चे की विशेष क्षमता होती है। कोई गणित में अच्छा होता है, कोई खेल में, कोई कला में, कोई लेखन में, कोई नेतृत्व में और कोई लोगों की समस्याएँ समझने में। शिक्षा व्यवस्था का दायित्व है कि वह प्रत्येक बच्चे की उस विशिष्ट क्षमता की पहचान करे।
याद रखिए, “हार तब नहीं होती जब हम गिरते हैं; हार तब होती है जब हम उठने से इनकार कर देते हैं।”
मोबाइल और इंटरनेट ज्ञान के अच्छे साधन हैं, लेकिन उनका अनियंत्रित उपयोग समय और एकाग्रता को नष्ट कर सकता है। तकनीक का उपयोग अपने विकास के लिए करें, स्वयं को उसका दास न बनने दें।
मेरा विश्वास है कि आगे चलकर आपमें से कोई नई दवा का आविष्कार करेगा, कोई जलवायु परिवर्तन का समाधान खोजेगा, कोई नई तकनीक विकसित करेगा, कोई गाँवों की शिक्षा में सुधार करेगा और कोई खेल के मैदान में तिरंगा ऊँचा करेगा। अपने सपनों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें। यह भी सोचें कि आपका ज्ञान समाज और राष्ट्र के काम कैसे आ सकता है।
याद रखिए “परिस्थितियाँ आपकी शुरुआत तय कर सकती हैं, लेकिन आपकी मंजिल आपके संकल्प और परिश्रम से तय होती है।”
अपने संबोधन के अंत में मैं एक बार फिर शिक्षा विभाग, सभी विद्यार्थियों प्रधानाचार्यों, इंडियास्किल्स प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं, समर्पित शिक्षकों तथा अभिभावकों का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ, जिन्होंने इस सफलता में सच्चे भागीदार की भूमिका निभाई है।
आप सभी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकारी विद्यालय केवल सफल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी नागरिक और जिम्मेदार राष्ट्रनिर्माता भी तैयार कर रहे हैं।
मैं आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई देता हूँ तथा आपके उज्ज्वल, सफल और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण भविष्य की मंगलकामना करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!