SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CBSE NORTH ZONE 2 CRICKET TOURNAMNET 2026 WAS INAUGURATED AT DAV SENIOR SECONDARY SCHOOL, SECTOR 8, CHANDIGARH ON AUGUST 8, 2026.
- by Admin
- 2026-08-08 12:55
‘सीबीएसई नॉर्थ ज़ोन-2 क्रिकेट टूर्नामेंट 2026’ के शुभारंभ पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 08.08.2026, शनिवार समयः सुबह 10:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लाहौर), सेक्टर 8-सी, चंडीगढ़ द्वारा सीबीएसई के तत्वावधान में आयोजित ‘सीबीएसई नॉर्थ ज़ोन-2 क्रिकेट टूर्नामेंट 2026’ के उद्घाटन अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता, सम्मान और गौरव का विषय है।
मैं डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति, विद्यालय प्रबंधन, सी.बी.एस.ई., आयोजन समिति, शिक्षकों, कर्मचारियों को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। इतने बड़े स्तर पर प्रतियोगिता का सफल आयोजन अपने आप में एक सराहनीय उपलब्धि है।
मुझे बताया गया है कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तर क्षेत्र-2 (चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख) के विभिन्न विद्यालयों से लगभग 3 हजार खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 बालक वर्ग तथा अंडर-17 और अंडर-19 बालिका वर्ग में आयोजित होने वाले मुकाबले प्रतिभा, अनुशासन, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेल भावना का भव्य उत्सव सिद्ध होंगे।
इस आयोजन की मेजबानी एक ऐसी संस्था कर रही है, जिसकी जड़ें भारतीय शिक्षा के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी हुई हैं। मुझे यह जानकर भी सुखद आश्चर्य हुआ कि कपिल देव और एम.एस. धोनी जैसे महान क्रिकेट खिलाड़ी भी डी.ए.वी. संस्थानों की ही देन रहे हैं।
इसके अलावा मुझे ज्ञात हुअ है कि इस प्रतिष्ठित विद्यालय के प्रधानाचार्य, डॉ. सुनील कुमार स्वयं ‘एशियन हैंडबॉल चैंपियनशिप’ में स्वर्ण पदक विजेता हैं। इसके साथ ही, शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें ‘स्टेट अवार्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
डीएवी अर्थात् ‘दयानंद एंग्लो वैदिक’ आंदोलन का उद्देश्य आधुनिक ज्ञान और भारतीय वैदिक मूल्यों का समन्वय करते हुए ऐसी शिक्षा प्रदान करना था, जो विद्यार्थियों को जीविका अर्जित करने योग्य सहित चरित्रवान, राष्ट्रभक्त, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और सेवाभावी नागरिक बनाए।
आधिकारिक इतिहास के अनुसार, दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी का गठन 1885 में हुआ तथा महर्षि दयानंद सरस्वती की स्मृति में पहला दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल 1 जून, 1886 को लाहौर में स्थापित किया गया।
इसके प्रथम अवैतनिक प्रधानाध्यापक युवा लाला हंसराज, जो आगे चलकर महात्मा हंसराज के नाम से प्रसिद्ध हुए, ने सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
लगभग 140 वर्षों की अपनी यात्रा में यह देश के सबसे बड़े गैर-सरकारी शैक्षणिक नेटवर्कों में से एक बन चुका है। आज डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति 900 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, व्यावसायिक एवं अनुसंधान संस्थानों का संचालन कर रही है। डीएवी की शिक्षा-दृष्टि स्पष्ट है, ज्ञान के साथ अनुशासन, योग्यता के साथ संवेदना और सफलता के साथ राष्ट्रसेवा।
इसी गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लाहौर) चंडीगढ़ करता है। यह विद्यालय भारत के इतिहास, विभाजन की पीड़ा और पुनर्निर्माण की अदम्य भावना का जीवंत प्रतीक है। आधिकारिक इतिहास के अनुसार, 1886 में लाहौर में स्थापित प्रथम डीएवी विद्यालय की परंपरा को 19 अप्रैल, 1955 को चंडीगढ़ में पुनः स्थापित किया गया। आज यह विद्यालय उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
इसके नाम के साथ जुड़ा ‘लाहौर’ केवल एक भौगोलिक स्मृति नहीं, बल्कि उस शिक्षा-परंपरा की निरंतरता का प्रतीक है, जिसे विभाजन जैसी ऐतिहासिक त्रासदी भी समाप्त नहीं कर सकी। स्थान बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन ज्ञान, चरित्र और राष्ट्रसेवा का संकल्प नहीं बदला।
मुझे प्रसन्नता है कि यही ऐतिहासिक विद्यालय आज सी.बी.एस.ई. की इस विशाल क्षेत्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। सी.बी.एस.ई. की क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने का एक व्यापक मंच प्रदान करती हैं। इन आयोजनों से विभिन्न पृष्ठभूमियों के छात्र एकजुट होकर टीम भावना, विविधता का सम्मान और स्वस्थ सामाजिक कौशल सीखते हैं।
इन प्रतियोगिताओं में अंडर-14 और अंडर-17 वर्ग के खिलाड़ी जहाँ अपने खेल की नींव व तकनीक को मजबूत करते हैं, वहीं अंडर-19 के युवा भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए स्वयं को तैयार करते हैं। अंततः इन खेलों का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल चैंपियन ढूँढना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक खिलाड़ी को एक अनुशासित, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
इस टूर्नामेंट की जो बात मुझे सबसे अधिक प्रभावित कर रही है, वह है हमारी बेटियों की शानदार भागीदारी। यहाँ लड़कों के अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 मुकाबलों के साथ-साथ, अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणियों में हमारी बेटियां भी क्रिकेट के मैदान में अपना जौहर दिखाने के लिए तैयार हैं।
आज भारत की बेटियां हर वर्जना को तोड़ रही हैं। हमारी महिला क्रिकेट टीम और हरमनप्रीत कौर एवं स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में भारत का परचम लहराया है।
भारतीय महिला क्रिकेट ने संघर्ष, समर्पण और निरंतर प्रयास से उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वर्ष 1973 में महिला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्थापना, 1976 में पहला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय टेस्ट और 2006 में महिला क्रिकेट का बीसीसीआई में समावेश, ये सभी इसके विकास के महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं।
हाल के वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेटरों ने नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। वर्ष 2025 में भारत ने अपना पहला आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप जीता तथा जुलाई 2026 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के विरुद्ध ऐतिहासिक टेस्ट विजय दर्ज की। इन उपलब्धियों ने देश की लाखों बालिकाओं को अपने सपनों को साकार करने का नया आत्मविश्वास दिया है।
यहाँ उपस्थित सभी बालिकाओं से मैं कहना चाहूँगा कि यह मैदान आपका है, यह आसमान आपका है। खेल के मैदान में आप जो आत्मविश्वास हासिल करेंगी, वह जीवन की हर पिच पर आपको ‘नॉट आउट’ रखेगा।
देवियो और सज्जनो,
खेल केवल जीत-हार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन हैं। वे शरीर को स्वस्थ, मन को अनुशासित और व्यक्तित्व को संतुलित बनाते हैं। खेल हमें लक्ष्य निर्धारित करना, कठिन परिश्रम, नियमों का सम्मान, दबाव में धैर्य और असफलता के बाद पुनः प्रयास करना सिखाते हैं।
कक्षा में विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करता है, जबकि खेल का मैदान उसे उस ज्ञान को जीवन-मूल्यों में बदलना सिखाता है। यहाँ वह समझता है कि व्यक्तिगत प्रतिभा महत्वपूर्ण है, लेकिन टीम की सफलता सहयोग, विश्वास और साझा जिम्मेदारी पर आधारित होती है।
क्रिकेट विशेष रूप से हमें जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है। बल्लेबाज को प्रत्येक गेंद पर नया निर्णय लेना पड़ता है। गेंदबाज को असफल गेंद के बाद तुरंत अपनी रणनीति सुधारनी होती है। फील्डर को हर क्षण सजग रहना पड़ता है और कप्तान को पूरी टीम की क्षमताओं के अनुसार निर्णय लेने होते हैं। ठीक इसी प्रकार जीवन में भी परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं और सफलता उन्हीं को मिलती है जो सजग, धैर्यवान तथा परिवर्तन के लिए तैयार रहते हैं।
इन गुणों के साथ-साथ क्रिकेट हमें साहस, टीम भावना और संघर्षशीलता का महत्व भी समझाता है। पिच पर तेज़ गेंदबाज़ का सामना करता बल्लेबाज़ हमें चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने की प्रेरणा देता है। वहीं यह खेल बताता है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण सामूहिक प्रयास होती है और असफलता के बाद फिर से उठ खड़े होने का संकल्प ही वास्तविक विजय का आधार बनता है।
शायद इसीलिए कहा गया है, “मैदान पर केवल रन नहीं बनते, चरित्र भी बनता है; केवल विकेट नहीं गिरते, अहंकार भी टूटता है; और केवल विजेता नहीं चुना जाता, एक बेहतर मनुष्य भी तैयार होता है।”
साथियो,
भारत में क्रिकेट महज़ एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा गहरा जुनून है जो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक समूचे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोता है। भारतीय क्रिकेट की यह व्यवस्थित और ऐतिहासिक यात्रा वर्ष 1928 में ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड’ (बीसीसीआई) की स्थापना के साथ एक नई दिशा में अग्रसर हुई थी।
भारत ने 1932 में लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट मैच सी.के. नायडू की कप्तानी में खेला। 1951-52 में इंग्लैंड के विरुद्ध पहली टेस्ट विजय और 1967-68 में न्यूजीलैंड के विरुद्ध पहली विदेशी टेस्ट शृंखला जीत हासिल हुई। वर्ष 1983 की विश्व कप विजय ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाई दी और 1987 में भारत ने इंग्लैंड से बाहर आयोजित पहले क्रिकेट विश्व कप की सह-मेजबानी की।
इस गौरवशाली यात्रा के पीछे स्कूलों, स्थानीय मैदानों, प्रशिक्षकों और परिवारों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने की यात्रा विद्यालय के मैदान, नियमित अभ्यास, अनुशासन और निरंतर संघर्ष से ही शुरू होती है। इसलिए विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताएँ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निखारने और प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट का अनुभव देने की आधारशिला हैं।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज मैं आपसे केवल क्रिकेट की नहीं, बल्कि जीवन की बात करना चाहता हूँ। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।’’ अर्थात् सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि विनम्रता, संस्कार और श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करती है। विद्यालय वही स्थान है जहाँ भविष्य का भारत तैयार होता है। यहीं से केवल डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक और खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक भी निकलते हैं।
इसीलिए शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। कक्षा हमें ज्ञान देती है, जबकि खेल का मैदान अनुशासन, समय का मूल्य, टीम भावना और असफलता के बाद पुनः उठ खड़े होने का साहस सिखाता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल देती है।
मुझे प्रसन्नता है कि डीएवी संस्थान महर्षि दयानन्द सरस्वती के आदर्शों से प्रेरित होकर आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का भी समान रूप से संवर्धन कर रहे हैं।
प्रिय खिलाड़ियों,
क्रिकेट केवल बल्ले और गेंद का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन, विश्वास और टीम भावना का खेल है। एक बल्लेबाज़ शतक बना सकता है, लेकिन जीत पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से ही मिलती है। जीवन भी ऐसा ही है। हमारी सफलता में माता-पिता का विश्वास, शिक्षकों का मार्गदर्शन, प्रशिक्षकों का परिश्रम और साथियों का सहयोग समान रूप से जुड़ा होता है।
भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था, ‘‘सपने वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते।’’ और स्वामी विवेकानन्द का प्रेरक संदेश है, ‘‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।’’ ये संदेश खेल के मैदान में भी उतने ही सार्थक हैं। जो खिलाड़ी नियमित अभ्यास करता है, अपनी गलतियों से सीखता है और हार से निराश होने के बजाय उससे प्रेरणा लेता है, वही अंततः सफलता प्राप्त करता है।
मैदान पर उतरते समय सदैव याद रखिए कि स्कोरबोर्ड केवल आपके रन और विकेट दर्ज करेगा, लेकिन आपका अनुशासन, व्यवहार और चरित्र जीवनभर याद रखा जाएगा। प्रतिद्वंदी का सम्मान कीजिए, अंपायर के निर्णय को स्वीकार कीजिए, साथियों का उत्साह बढ़ाइए, जीत में विनम्र और हार में धैर्यवान रहिए, यही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।
आज के अनेक महान क्रिकेटरों ने अपनी यात्रा ऐसी ही विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं से प्रारंभ की थी। संभव है कि इस मैदान पर उपस्थित कोई खिलाड़ी भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व करे। लेकिन मैं आपसे इतना अवश्य कहूँगा कि भारत का अच्छा खिलाड़ी बनना गौरव की बात है, पर भारत का अच्छा नागरिक बनना उससे भी बड़ा गौरव है।
आज जब आप मैदान पर कदम रखें, तो याद रखें कि आप उस राष्ट्र की गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसके खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि कोई भी शिखर हमारी पहुँच से दूर नहीं है।
अभी हाल ही में सम्पन्न हुए ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। हमारे मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक जीते, जबकि भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक हासिल किया। नीरज चोपड़ा, गुलवीर सिंह, शर्मिला धानकर और दिलीप गावित जैसे खिलाड़ियों ने भी एथलेटिक्स और पैरा खेलों में देश को गौरवान्वित किया।
विशेष रूप से, भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से आठ स्वर्ण महिला खिलाड़ियों ने जीते, जो भारतीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती शक्ति को दर्शाता है। ये उपलब्धियां हमें सिखाती हैं कि हर सुबह का कठिन अभ्यास, हर संघर्ष और हर असफलता हमें सफलता के मंच के और करीब ले जाती है। इसलिए स्वयं पर विश्वास रखें, दृढ़ संकल्प के साथ खेलें और भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
प्रिय विद्यार्थियो,
यहां मैं एक और महत्वपूर्ण बात कहना चाहूंगा कि खेल और नशा एक-दूसरे के पूर्णतः विपरीत हैं। खेल शरीर को शक्ति, मन को स्पष्टता और जीवन को उद्देश्य देता है, जबकि नशा स्वास्थ्य, निर्णय-क्षमता और भविष्य को कमजोर करता है। एक खिलाड़ी की सबसे बड़ी पूंजी उसका स्वस्थ शरीर, अनुशासित जीवन और एकाग्र मन है। वास्तविक सफलता किसी कृत्रिम साधन से नहीं, बल्कि नियमित अभ्यास, संतुलित आहार, पर्याप्त विश्राम और दृढ़ इच्छाशक्ति से प्राप्त होती है।
मैं प्रत्येक खिलाड़ी से आग्रह करता हूँ, नशे को नहीं, खेल को चुनिए। गलत संगति को नहीं, अच्छी टीम को चुनिए। क्षणिक आकर्षण को नहीं, अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को चुनिए। याद रखिए, “जो युवा अपने शरीर का सम्मान करता है, वही अपने सपनों का सम्मान करता है; और जो अपने सपनों की रक्षा करता है, वही राष्ट्र के भविष्य की रक्षा करता है।”
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि जीतने की इच्छा रखो, परंतु जीत से पहले चरित्र को रखो। ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करो, परंतु अपने मूल्यों को उससे भी ऊँचा रखो।
मैं डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लाहौर), सेक्टर 8-सी, चंडीगढ़ को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ तथा सीबीएसई, आयोजन समिति, निर्णायकों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों, अभिभावकों और सभी सहयोगियों का अभिनंदन करता हूँ।
सभी खिलाड़ियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। आप स्वस्थ रहें, अनुशासित रहें, नशे से दूर रहें और अपने खेल, शिक्षा तथा चरित्र से परिवार, विद्यालय, चंडीगढ़ और भारत का नाम रोशन करें।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं सीबीएसई नॉर्थ ज़ोन-2 क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 के विधिवत उद्घाटन की घोषणा करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!