SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FIRST ANNUAL DAY CELEBRATION OF CHANDIGARH CITIZENS FOUNDATION AT CHANDIGARH ON AUGUST 1, 2026.
- by Admin
- 2026-08-01 20:30
चंडीगढ़ सिटिज़न फाउंडेशन के वार्षिक दिवस समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 01.08.2026, शनिवार समयः शाम 6:30 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज, चंडीगढ़ सिटीजंस फाउंडेशन के इस प्रथम वार्षिक समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है। वार्षिक समारोह आत्ममंथन, उपलब्धियों के मूल्यांकन, सहयोगियों के प्रति आभार और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का एक अवसर होता है।
मैं चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन के अध्यक्ष, पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक जी, संस्था के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, स्वयंसेवकों तथा सहयोगी संस्थाओं को इस अवसर पर हार्दिक बधाई देता हूँ। आप लोगों ने एक वर्ष के भीतर इस संस्था को समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाले एक सशक्त जनमंच के रूप में विकसित करने का सफल प्रयास किया है।
हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के जाने-माने निवासियों द्वारा वर्ष 2025 में स्थापित चंडीगढ़ सिटिज़न्स फ़ाउंडेशन ने बहुत कम समय में नागरिक सहभागिता, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विरासत, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर सार्थक पहल की है।
विशेष रूप से चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से विद्यालयी विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए प्रारंभ किया गया ‘प्रोजेक्ट साथी’ एक संवेदनशील और दूरदर्शी प्रयास है। साथ ही, इसके द्वारा ‘प्रोजेक्ट सेवा’ के अंतर्गत सेक्टर 27 में अकेले रह रहे 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल भी की जाती है।
PGIMER के सहयोग से Basic Life Support & Emergency Response Programme, अनुभवी विशेषज्ञों को युवाओं से जोड़ने वाला Mentorship Programme तथा स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की पहल अत्यंत प्रशंसनीय है।
अपनी गतिविधियों को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए फाउंडेशन ने 12 विषय-आधारित फोकस समूहों का गठन किया है। इनमें समूह स्वास्थ्य एवं कल्याण; राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय विषय; संगीत, साहित्य, दृश्य एवं मंचीय कलाएँ; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; सचेत नेतृत्व एवं व्यवसाय; आर्थिक विकास एवं सतत प्रगति; सतत शहरी विकास; शहरी नियोजन, डिज़ाइन एवं वास्तुकला; पर्यटन; शिक्षा; खेल; तथा महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
यह फाउंडेशन 200 से अधिक प्रेरित एवं अनुभवी पेशेवर स्वयंसेवकों से युक्त है, जो विभिन्न विषयों से संबंधित कार्यक्रमों और गतिविधियों के क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से सहभागिता निभा रहे हैं।
देवियो और सज्जनो,
पिछले एक वर्ष में मुझे चण्डीगढ़ सिटिज़न्स फ़ाउंडेशन की यात्रा को निकट से देखने का अवसर मिला है। मुझे प्रोजेक्ट ‘प्रोजेक्ट साथी’ के शुभारंभ में सहभागी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं उस कार्यक्रम में भी उपस्थित रहा, जिसमें भारतीय आधुनिकतावादी वास्तुकारों एवं योजनाकारों को सम्मानित किया गया। हाल ही में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भी फ़ाउंडेशन के साथ हमारे वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को नमन करने का अवसर मिला।
मैं ‘प्रोजेक्ट सेवा’ का भी साक्षी रहा हूँ। इसके अतिरिक्त, फ़ाउंडेशन की पुस्तक चर्चाएँ, जन-व्याख्यान, हेरिटेज वॉक, कला प्रदर्शनियाँ, वैज्ञानिक संवाद, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा विभिन्न फ़ोकस ग्रुप्स की गतिविधियाँ ट्राइसिटी में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को गति दे रही हैं और शासन के प्रयासों की प्रभावी पूरक बन रही हैं।
यह जानकर प्रसन्नता है कि चण्डीगढ़ सिटिज़न्स फ़ाउंडेशन चण्डीगढ़ के निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर इस ऐतिहासिक पड़ाव का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहा है। यह विकसित भारत के आदर्श मॉडल के रूप में चण्डीगढ़ की पहचान को और सशक्त करने का सुनहरा अवसर है।
सरकार विकास की रूपरेखा तैयार करती है, लेकिन चण्डीगढ़ सिटिज़न्स फ़ाउंडेशन जैसे संगठन विशेषज्ञता, स्वयंसेवा और जनभागीदारी को जोड़कर विकास को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हैं।
देवियो और सज्जनो,
चण्डीगढ़ भारत के सबसे सुंदर, सुव्यवस्थित और दूरदर्शी नगरों में से एक है। यह आधुनिक भारत की योजनाबद्ध नगरीय विकास की अनूठा मिसाल है। विश्वविख्यात वास्तुकार ली कार्बूज़ियर ने जिस दृष्टि के साथ इस शहर की कल्पना की थी, उसका मूल उद्देश्य केवल भवनों का निर्माण नहीं था, बल्कि ऐसा शहर बनाना था जहाँ मनुष्य प्रकृति, संस्कृति और आधुनिकता के साथ संतुलन बनाकर जीवन जी सके।
यहां की चौड़ी सड़कें, हरित पट्टियाँ, सेक्टर आधारित नियोजन, सुखना झील, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, रॉक गार्डन, रोज़ गार्डन, सार्वजनिक उद्यान और स्वच्छ वातावरण इस शहर की पहचान हैं। यहाँ लगभग 1900 से अधिक पार्क एवं हरित क्षेत्र हैं जो इसे देश के सबसे हरित नगरों में स्थान दिलाते हैं।
यह शहर शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, प्रशासन, संस्कृति, खेल और नवाचार का भी महत्वपूर्ण केन्द्र है। पंजाब विश्वविद्यालय, पीजीआईएमईआर, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनेक संस्थाएँ चण्डीगढ़ को ज्ञान की राजधानी के रूप में स्थापित करती हैं।
यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि हाल ही में 17 जुलाई को चंडीगढ़ दौरे के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि “चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत के लिए विकास का एक आदर्श मॉडल है।” इस गौरवपूर्ण पहचान को बनाए रखने के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से निरंतर परिश्रम करना होगा।
देवियो और सज्जनो,
आज विकास की चर्चा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रह गई है। वास्तविक विकास वह है जहाँ अवसर सबके लिए हों, सम्मान सबको मिले, शिक्षा सब तक पहुँचे, स्वास्थ्य सबको उपलब्ध हो, महिलाएँ सुरक्षित व सशक्त हों, युवा नवाचार करें, वरिष्ठ नागरिक सम्मानपूर्वक जी सकें, दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनें, और समाज का कोई भी वर्ग विकास से वंचित न रहे।
यही समावेशी विकास का वास्तविक स्वरूप है, जिसमें विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और कोई भी पीछे न छूटे। मुझे प्रसन्नता है कि चण्डीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन अपने विविध कार्यक्रमों और सेवा-भावना के माध्यम से इसी समावेशी एवं संतुलित विकास की अवधारणा को साकार करने का सार्थक प्रयास कर रहा है।
देवियो और सज्जनो,
किसी समाज की आर्थिक समृद्धि महत्वपूर्ण है, किन्तु उसकी सांस्कृतिक समृद्धि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण होती है। कला हमें संवेदनशील बनाती है। साहित्य हमें सोचने की शक्ति देता है। संगीत हमें जोड़ता है। संस्कृति हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। और विरासत हमें भविष्य की दिशा दिखाती है।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने लिखा था, ‘‘जहाँ मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊँचा हो, वही सच्ची स्वतंत्रता है।’’ ऐसा समाज तभी बन सकता है जब कला, संस्कृति और शिक्षा का संरक्षण समान रूप से हो।
साथियो,
आज हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां तकनीकी विकास तो तेजी से हो रहा है, लेकिन समाज में अलगाव, पर्यावरण की चिंताएं, और स्वास्थ्य से जुड़ी नई चुनौतियां भी उभर रही हैं। एक प्रशासक के रूप में, मैं हमेशा यह मानता हूँ कि सरकारें नीतियां बना सकती हैं, आधारभूत ढांचा खड़ा कर सकती हैं, लेकिन समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन नागरिकों के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
आज जब हम एक स्वस्थ समाज की बात करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी युवा पीढ़ी नशे जैसी कुरीतियों से पूरी तरह मुक्त हो। एक ‘नशामुक्त समाज’ ही प्रगतिशील समाज हो सकता है। इसी तरह, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, और सौर ऊर्जा को अपनाकर ‘सस्टेनेबल लिविंग’ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
देवियो और सज्जनो,
भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है। हमारी सबसे बड़ी पूँजी हमारे युवा हैं। आज का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला भी बन रहा है। स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ग्रीन इनोवेशन, सामाजिक उद्यमिता, और अनुसंधान भारत की नई पहचान बन रहे हैं।
मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि सपने केवल देखिए नहीं, उन्हें पूरा करने का साहस भी रखिए। असफलता से मत डरिए। हर असफलता सफलता की तैयारी होती है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे, ‘‘सपना वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह है जो आपको सोने न दे।’’
देवियो और सज्जनो,
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘‘विकसित भारत 2047’’ का जो संकल्प देश के सामने रखा है, वह केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं है। यह 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है। विकसित भारत का अर्थ है, विकसित अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय शिक्षा, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पर्यावरण, नवाचार आधारित उद्योग, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व, और जिम्मेदार नागरिकता।
‘विकसित भारत’ की इमारत चार प्रमुख स्तंभों पर खड़ी होगी, हमारी युवा शक्ति, हमारी मातृशक्ति, हमारे अन्नदाता, और हमारे समाज का गरीब व वंचित वर्ग। जब चंडीगढ़ सिटीजंस फाउंडेशन समावेशी विकास की बात करता है, तो वह सीधे तौर पर ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ जाता है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’, इस मंत्र में जो ‘सबका प्रयास’ है, वह चंडीगढ़ सिटीजंस फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के माध्यम से ही धरातल पर उतरता है।
यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर समाज के लिए प्रतिदिन एक सकारात्मक कार्य करने का संकल्प ले, तो विकसित भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से शीघ्र प्राप्त होगा।
साथियो,
मुझे प्रसन्नता है कि चण्डीगढ़ प्रशासन नागरिक सहभागिता को विकास का आधार बना रहा है। स्मार्ट शहरी प्रबंधन, डिजिटल सेवाएँ, स्वच्छता अभियान, हरित परिवहन, महिला सुरक्षा, स्टार्टअप प्रोत्साहन, शिक्षा सुधार, सतत विकास, जनभागीदारी आधारित योजनाएँ, और सुशासन की अनेक पहलें चण्डीगढ़ को भविष्य के आदर्श शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
लेकिन किसी भी योजना की सफलता तभी संभव है जब समाज स्वयं उसका सहभागी बने। इसीलिए चण्डीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
देवियो और सज्जनो,
भारतीय संस्कृति ने हमें सिखाया है, ‘‘नर सेवा ही नारायण सेवा है।’’ जब हम बिना किसी अपेक्षा के समाज के लिए कार्य करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण करते हैं। एक दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। एक वृक्ष स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया देता है। एक नदी स्वयं बहकर सबकी प्यास बुझाती है। इसी प्रकार एक जागरूक नागरिक अपने जीवन से समाज को दिशा देता है।
आज आवश्यकता है कि हम ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर बढ़ें। मेरी सड़क, मेरा पार्क, मेरी झील, मेरा विद्यालय, मेरा शहर, यह भाव प्रत्येक नागरिक के मन में उत्पन्न होना चाहिए। जब नागरिक सार्वजनिक संपत्ति को अपनी संपत्ति समझने लगते हैं, तभी शहर वास्तव में सुंदर बनता है।
जब नागरिक किसी दूसरे व्यक्ति की समस्या को अपनी समस्या समझने लगते हैं, तभी समाज संवेदनशील बनता है। और जब नागरिक राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखते हैं, तभी देश विकसित और महान बनता है।
मैं चण्डीगढ़ के प्रत्येक नागरिक से आग्रह करता हूँ कि अपने शहर को स्वच्छ रखें। पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं। सामाजिक समरसता को मजबूत करें। वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करें। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करें। युवाओं को सकारात्मक दिशा दें। संस्कृति और विरासत के संरक्षण में भागीदार बनें। समाज के वंचित वर्गों के साथ खड़े हों। और अपने शहर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
मैं आज इस अवसर पर चंडीगढ़ सिटीजंस फाउंडेशन से जुड़े हर उस व्यक्ति का हृदय से अभिनंदन करता हूँ, जो अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर समाज को कुछ वापस देने का पुनीत कार्य कर रहा है। आप सभी समाज के सच्चे प्रहरी हैं।
अंत में, मैं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन ओजस्वी और प्रेरणादायक पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा, जो हमें सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का संदेश देती हैं:
‘‘बाधाएं आती हैं आएं,
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा!’’
आइए, हम सब कदम से कदम मिलाकर चलें। हम सब मिलकर चंडीगढ़ को न केवल ‘सिटी ब्यूटीफुल’ बनाएं, बल्कि इसे ‘सिटी सस्टेनेबल’, ‘सिटी प्रोग्रेसिव’, और देश का सबसे बेहतरीन और समावेशी शहर बनाएं।
मुझे विश्वास है कि चंडीगढ़ सिटीजंस फाउंडेशन आने वाले वर्षों में विकास, संस्कृति और सामाजिक समरसता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। आपके इस प्रथम वार्षिक समारोह की ढेरों बधाइयां और भविष्य के सभी प्रयासों के लिए मेरी अनंत शुभकामनाएं।
बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द! जय भारत!