SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF HONOURING 11 TALENTED CANDIDATES SELECTED IN THE CIVIL SERVICES EXAMINATION 2025 ORGANISED BY SANKALP AT CHANDIGARH ON AUGUST 1, 2026.
- by Admin
- 2026-08-01 17:35
’संकल्प प्रतिभा सम्मान समारोह’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 01.08.2026, शनिवार समयः शाम 4:30 बजे स्थानः पंजाब लोक भवन
नमस्कार!
आज का यह अवसर अत्यंत गर्व, प्रसन्नता और संतोष का अवसर है। संकल्प के मार्गदर्शन में कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ निश्चय के बल पर देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं एवं अन्य प्रशासनिक सेवाओं में चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित करने के इस गरिमामय समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है।
मैं आज सम्मानित हो रहे सभी 14 सफल अभ्यर्थियों, उनके माता-पिता, परिवारजनों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को हृदय से बधाई देता हूँ। किसी भी अभ्यर्थी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती। उसके पीछे माता-पिता का त्याग, परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन, मित्रों का प्रोत्साहन और स्वयं अभ्यर्थी की वर्षों की तपस्या होती है।
मुझे बताया गया है कि आज जिन प्रतिभावान अभ्यर्थियों का यहाँ सम्मान किया गया है, उनमें से 10 होनहार युवाओं का यू.पी.एस.सी. में चयन हो चुका है। साथ ही, 3 युवाओं ने पंजाब और 1 युवा ने हरियाणा सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा पास की है और वे अब साक्षात्कार की तैयारी कर रहे हैं। मेरी ओर से उन्हें अग्रिम शुभकामनाएँ हैं, और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे ये चारों बच्चे भी अपने साक्षात्कार में शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त कर जल्द ही एक अधिकारी के रूप में समाज की सेवा करते हुए दिखाई देंगे।
साथियो,
सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक माना जाता है। यह परीक्षा केवल ज्ञान, स्मरण-शक्ति अथवा पाठ्यक्रम की समझ की परीक्षा नहीं है। यह धैर्य, आत्मानुशासन, समय-प्रबंधन, मानसिक दृढ़ता, निर्णय क्षमता और निरंतरता की भी परीक्षा है।
हम सभी जानते हैं कि राष्ट्र निर्माण में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सिविल सेवकों को सिद्धांतवादी होना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए दूरदृष्टि होनी चाहिए कि सरकार की नीतियों के परिणाम आम आदमी तक अवश्य पहुँचें।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, वर्ष 1986 में दिल्ली में संकल्प संस्थान की स्थापना की गई थी। इसके बाद, 2007 में संस्थान की चंडीगढ़ शाखा अस्तित्व में आई, ताकि उत्तरी भारत के प्रतिभावान उम्मीदवारों को देश की प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने हेतु प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके।
अब तक इस शाखा से मार्गदर्शन प्राप्त कर कुल 149 प्रतिभावान उम्मीदवारों ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), पंजाब लोक सेवा आयोग ; (PPSC), हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (HPAS) की कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है।
साथियो,
‘संकल्प’ केवल इस संस्था का नाम नहीं है, बल्कि यह एक जीवन-दर्शन भी है। संकल्प का अर्थ है, अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहना, कठिनाइयों के सामने हार न मानना और अपने ज्ञान एवं क्षमता को समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समर्पित करना।
पिछले लगभग 35 वर्षों में संकल्प ने शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में जो श्रेष्ठ कार्य किया है, वह वास्तव में अनुकरणीय है। इस संस्था ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को केवल नौकरी प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि युवाओं में राष्ट्रबोध, कर्तव्यनिष्ठा, सामाजिक संवेदनशीलता और नैतिक नेतृत्व विकसित करने का भी प्रयास किया है।
संकल्प की एक और विशेषता अत्यंत प्रशंसनीय है। यह संस्थान बिना किसी जाति, धर्म, क्षेत्र अथवा सामाजिक भेदभाव के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता है। आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग तथा आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना समाज के प्रति इसकी संवेदनशीलता को प्रकट करता है।
शिक्षा के माध्यम से समान अवसर उपलब्ध कराने का यह प्रयास सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना को सशक्त करता है। जब किसी साधनहीन लेकिन प्रतिभाशाली युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो केवल उसका जीवन नहीं बदलता, बल्कि उसका परिवार, उसका समाज और आने वाली पीढ़ियाँ भी बदलती हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था, “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” शिक्षा व्यक्ति को रोजगार योग्य बनाने सहित उसे अपने अधिकारों, कर्तव्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का बोध भी कराती है। संकल्प द्वारा किया जा रहा कार्य इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टि का उदाहरण है।
मुझे यह भी बताया गया है कि संस्थान ने अब 12वीं कक्षा के बाद ही विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ने की नई पहल प्रारंभ की है। यह एक दूरदर्शी पहल है। सिविल सेवा की तैयारी केवल परीक्षा से एक या दो वर्ष पहले प्रारंभ होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए व्यापक अध्ययन, तार्किक सोच, अभिव्यक्ति की क्षमता, सामाजिक जागरूकता, संवैधानिक समझ और व्यक्तित्व निर्माण की आवश्यकता होती है।
साथियो,
मुझे आज इस बात का संतोष है कि आज हमारे बीच ट्राइसिटी के विभिन्न विद्यालयों से आए मेधावी विद्यार्थी उपस्थित हैं। जब विद्यालयों के विद्यार्थी सफल अधिकारियों के संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों को प्रत्यक्ष रूप से देखते और सुनते हैं, तो उनके भीतर भी बड़े सपने देखने का साहस उत्पन्न होता है।
आज यहाँ उपस्थित विद्यार्थी संभवतः अभी अपने जीवन की दिशा तय कर रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने की कोई आयु नहीं होती, लेकिन जितनी जल्दी लक्ष्य स्पष्ट हो जाए, उतनी ही तैयारी व्यवस्थित हो सकती है।
आप सिविल सेवक बनें, वैज्ञानिक बनें, शिक्षक बनें, चिकित्सक बनें, उद्यमी बनें, खिलाड़ी बनें अथवा किसी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ें, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप जो भी कार्य करें, उसमें श्रेष्ठता, ईमानदारी और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव हो।
मेरे युवा साथियो,
आज सम्मानित हो रहे सभी अधिकारी केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता का उत्सव नहीं मना रहे हैं। आप समाज के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत भी हैं। आपकी सफलता उन अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाती है कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
लेकिन मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूँ कि चयन आपकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है। परीक्षा उत्तीर्ण करना कठिन है, लेकिन जनता के विश्वास पर खरा उतरना उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण है। एक सिविल सेवक के पास पद, अधिकार और संसाधन होते हैं, लेकिन इन सबसे बड़ी उसकी जिम्मेदारी होती है।
उसके एक निर्णय से किसी गाँव में पानी पहुँच सकता है, किसी बच्चे को विद्यालय मिल सकता है, किसी रोगी को उपचार प्राप्त हो सकता है, किसी किसान को सहायता मिल सकती है और किसी पीड़ित व्यक्ति को न्याय प्राप्त हो सकता है। सिविल सेवक शासन और नागरिक के बीच सबसे महत्वपूर्ण सेतु होते हैं। सरकार की योजनाएँ कागज पर बनती हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करने का उत्तरदायित्व प्रशासनिक अधिकारियों पर होता है।
जनता सरकार का मूल्यांकन घोषणाओं से नहीं, बल्कि अपने दैनिक अनुभवों से करती है। किसी कार्यालय में उसका काम समय पर हुआ या नहीं, उसकी शिकायत सुनी गई या नहीं, उसे सम्मान मिला या नहीं और योजना का लाभ सही समय पर पहुँचा या नहीं, इन्हीं अनुभवों से सुशासन की पहचान बनती है।
इसलिए प्रशासन का पहला सिद्धांत होना चाहिए, नागरिक सर्वोपरि। एक सिविल सेवक को सदैव यह याद रखना चाहिए कि उसके कार्यालय में आने वाला व्यक्ति केवल एक फाइल, आवेदन संख्या अथवा प्रकरण नहीं है। वह एक नागरिक है, जिसकी अपनी समस्या, आशा और गरिमा है।
महात्मा गांधी ने प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया था कि जब भी किसी निर्णय को लेकर संदेह हो, तो सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति का चेहरा याद करें और विचार करें कि आपके निर्णय से उसके जीवन में कोई सुधार आएगा या नहीं। यह विचार आज भी प्रशासन के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। सिविल सेवा का वास्तविक अर्थ सत्ता का प्रयोग नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है।
साथियो,
भारत आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य एक समृद्ध, आत्मनिर्भर, आधुनिक, समावेशी और विश्व का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनना है।
विकसित भारत का निर्माण केवल बड़े उद्योगों, आधुनिक सड़कों, डिजिटल तकनीक अथवा बढ़ती अर्थव्यवस्था से नहीं होगा। विकसित भारत वह होगा, जहाँ प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा, न्याय और सम्मान प्राप्त हो। विकसित भारत वह होगा, जहाँ किसान समृद्ध हो, युवा कौशलयुक्त हो, महिला सशक्त हो, गरीब आत्मनिर्भर हो, गाँव सुविधासंपन्न हों और शहर स्वच्छ, सुरक्षित तथा सुगम हों।
विकसित भारत के निर्माण में सिविल सेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको नीतियों को परिणामों में, योजनाओं को जनकल्याण में और शासन को जनविश्वास में परिवर्तित करना है। आने वाले समय में प्रशासनिक अधिकारियों को गरीबी, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन, जल संकट, शहरीकरण, साइबर अपराध, नशीले पदार्थों, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक असमानता जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करना होगा।
इसके साथ ही ए.आई, डिजिटल गवर्नेंस, डेटा विश्लेषण, ड्रोन तकनीक और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियाँ प्रशासन की कार्यप्रणाली को तेजी से बदल रही हैं। भविष्य का सिविल सेवक वही सफल होगा, जो तकनीक का उपयोग करे, लेकिन शासन में मानवीय संवेदना को कभी कम न होने दे।
तकनीक प्रशासन को तेज बना सकती है, डेटा निर्णयों को बेहतर बना सकता है और ऑनलाइन व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ा सकती है; लेकिन किसी पीड़ित नागरिक की बात सहानुभूति से सुनने का कार्य केवल एक संवेदनशील अधिकारी ही कर सकता है।
आपको नवाचार को अपनाना होगा। प्रशासन में यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक समस्या का समाधान केवल पुराने नियमों और परंपरागत तरीकों से ही किया जाए। कानून और नियमों की मर्यादा में रहते हुए नए प्रयोग, स्थानीय समाधान और जनभागीदारी आधारित मॉडल विकसित किए जाने चाहिए।
विकसित भारत के लिए हमें ‘रूल ऑफ लॉ’ के साथ ‘रोल ऑफ कम्पैशन’ अर्थात कानून के साथ करुणा की भी आवश्यकता है। प्रशासन कठोर हो सकता है, लेकिन असंवेदनशील नहीं। नियम समान रूप से लागू होने चाहिए, लेकिन कमजोर, पीड़ित और वंचित व्यक्ति की परिस्थितियों को समझना भी आवश्यक है।
हमारे संविधान की प्रस्तावना हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का मार्ग दिखाती है। एक सिविल सेवक इन संवैधानिक मूल्यों का संरक्षक होता है। आपके निर्णय राजनीतिक, व्यक्तिगत अथवा सामाजिक पूर्वाग्रहों से मुक्त और पूर्णतः निष्पक्ष होने चाहिए।
आप जिस क्षेत्र में भी कार्य करें, वहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। सार्वजनिक जीवन में विश्वास अर्जित करने में वर्षों लगते हैं, लेकिन उसे खोने में केवल एक गलत निर्णय पर्याप्त होता है।
लाल बहादुर शास्त्री जी ने कहा था, “देश के प्रति निष्ठा अन्य सभी निष्ठाओं से पहले आती है।” सिविल सेवक के लिए यह विचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। पद बदल सकते हैं, स्थानांतरण हो सकते हैं और परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन संविधान, राष्ट्र और जनता के प्रति आपकी निष्ठा कभी नहीं बदलनी चाहिए।
आज सम्मानित हो रहे अधिकारियों से मैं विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि आप अपने पद को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनता द्वारा आपको सौंपे गए विश्वास के रूप में देखें। आपके कार्यालय के द्वार आम नागरिकों के लिए खुले रहने चाहिए। अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। टीम को साथ लेकर चलें, क्योंकि कोई भी अधिकारी अकेले प्रशासन नहीं चला सकता।
अच्छा नेतृत्व आदेश देने में नहीं, बल्कि अपनी टीम को प्रेरित करने, उसकी क्षमता पहचानने और उसे जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का अवसर देने में है। एक प्रशासनिक अधिकारी को संवेदनशील श्रोता भी होना चाहिए। कई बार किसी नागरिक की आधी समस्या केवल इसलिए हल हो जाती है, क्योंकि किसी अधिकारी ने उसकी बात धैर्यपूर्वक और सम्मान के साथ सुन ली।
मेरे युवा मित्रो,
सफलता प्राप्त करने के बाद विनम्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ज्ञान के साथ अहंकार नहीं, विनम्रता आनी चाहिए। पद के साथ दूरी नहीं, जनता के साथ जुड़ाव बढ़ना चाहिए। अधिकार के साथ कठोरता नहीं, उत्तरदायित्व की भावना विकसित होनी चाहिए।
जीवन में निरंतर सीखते रहिए। जिस दिन व्यक्ति यह मान लेता है कि वह सब कुछ जानता है, उसी दिन उसकी प्रगति रुक जाती है। समाज, तकनीक और प्रशासनिक चुनौतियाँ निरंतर बदलती रहती हैं। इसलिए एक अधिकारी को आजीवन विद्यार्थी बने रहना चाहिए।
अपनी सफलता के बाद उन लोगों को मत भूलिए, जिन्होंने आपके संघर्ष के दिनों में आपका साथ दिया। अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहिए। कृतज्ञता व्यक्ति को जमीन से जोड़े रखती है।
आप भविष्य में स्वयं भी किसी प्रतिभाशाली लेकिन संसाधनहीन अभ्यर्थी के मार्गदर्शक बनें। आपने जो सहयोग प्राप्त किया है, उसे समाज को लौटाना भी आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
और हाँ, सबसे महत्वपूर्ण बात, आज देश और विशेषकर पंजाब जिस नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, उसका समाधान अंततः आप जैसे युवा, दृढ़-संकल्पित और संवेदनशील प्रशासकों की कार्यशैली पर ही निर्भर करेगा। आपको इस चुनौती को केवल एक प्रशासनिक ड्यूटी नहीं, बल्कि एक ‘मिशन’ के रूप में लेना होगा, ताकि हम अपने युवाओं और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकें।
मैं संकल्प परिवार से भी आग्रह करूँगा कि वह आने वाले समय में ग्रामीण, सीमावर्ती और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों के अधिक से अधिक प्रतिभाशाली युवाओं तक पहुँचे। डिजिटल माध्यमों, ऑनलाइन मार्गदर्शन, पुस्तकालयों, छात्रवृत्तियों, मेंटरशिप कार्यक्रमों और सफल अधिकारियों के संवाद के माध्यम से तैयारी के अवसरों को और व्यापक बनाया जा सकता है।
संकल्प के पूर्व विद्यार्थियों और सफल अधिकारियों का एक मजबूत मेंटर नेटवर्क भी विकसित किया जा सकता है। प्रत्येक सफल अधिकारी कुछ अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करे, तो ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा की यह श्रृंखला निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि संकल्प परिवार निरंतर इसी प्रकार समाज और राष्ट्र की सेवा करता रहे। इसके सभी शिक्षकों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को शक्ति, ऊर्जा और सफलता प्राप्त हो तथा यह संस्थान आने वाले वर्षों में और अधिक प्रतिभाशाली, संवेदनशील एवं राष्ट्रनिष्ठ अधिकारियों का निर्माण करता रहे।
इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ मैं आज सम्मानित सभी अधिकारियों, मुख्य परीक्षा में सम्मिलित अभ्यर्थियों और उपस्थित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि अपने ज्ञान, क्षमता और परिश्रम का उपयोग केवल व्यक्तिगत प्रगति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की उन्नति के लिए करेंगे।
आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!