SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF LAKE TO LAKE MARATHON 2026 AT CHANDIGARH ON AUGUST 16, 2026.
- by Admin
- 2026-08-16 08:35
‘लेक टू लेक अल्ट्रा मैराथन 2026’ के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 16.08.2026, रविवार समयः सुबह 3:50 बजे स्थानः चंडीगढ़
सुप्रभात!
आज प्रातः इतनी सुबह, जब अधिकांश शहर अभी नींद में है, आप सभी यहाँ ऊर्जा, उत्साह, संकल्प और जुनून के साथ उपस्थित हैं। यह दृश्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि जिस व्यक्ति के भीतर कोई लक्ष्य और उसे प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प हो, उसके लिए समय और परिस्थितियाँ कभी बाधा नहीं बनतीं।
मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि मुझे आज ’’लेक टू लेक अल्ट्रा मैराथन 2026’’ के फ्लैग-ऑफ के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होने का अवसर मिला है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित यह अल्ट्रा मैराथन हमारे लिए विशेष है, क्योंकि यह हमें याद दिलाती है कि जिस तरह राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है, उसी तरह एक लंबी दौड़ भी कदम-दर-कदम आगे बढ़ने का नाम है।
मैं इस शानदार आयोजन के लिए आयोजकों, सभी सहयोगी संस्थाओं और देशभर से यहां पहुंचे प्रत्येक धावक का हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
मुझे खुशी है कि आज देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 550 धावक 30, 55 और 75 किलोमीटर की अलग-अलग श्रेणियों में इस चुनौतीपूर्ण दौड़ का हिस्सा बन रहे हैं। इनमें 50 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए विशेष श्रेणी भी है। यह अपने आप में प्रेरणादायक संदेश है कि फिटनेस, ऊर्जा और कुछ नया करने का जुनून उम्र का मोहताज नहीं होता।
आज की इस मैराथन का मार्ग भी अपने आप में बेहद अद्भुत है। चंडीगढ़ के न्यू लेक, सेक्टर-42 से शुरू होकर यह दौड़ पंचकूला जिले की मोरनी पहाड़ियों में स्थित टिक्कर ताल तक जाएगी, जहाँ बड़ा ताल और छोटा ताल जैसी प्राकृतिक झीलों का अनुपम सौंदर्य आप सभी का स्वागत करेगा।
प्रिय धावको,
किंवदंती के अनुसार, फिडीपीडिस नामक वीर सैनिक ने मैराथन से एथेंस तक दौड़कर यूनानी सेना की विजय का संदेश पहुँचाया। लगभग 42 किलोमीटर की इस ऐतिहासिक दौड़ ने साहस, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय धैर्य की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। इसी स्मृति में लंबी दूरी की इस दौड़ को ‘मैराथन’ कहा जाने लगा।
आज मैराथन केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास और स्वयं को चुनौती देने का उत्सव है। विश्वभर में हर वर्ष सैकड़ों मैराथन आयोजित होते हैं, जिनमें लाखों लोग स्वास्थ्य, फिटनेस और सामाजिक सहभागिता जैसे उद्देश्यों से भाग लेते हैं।
भारत में भी मैराथन संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और इसने फिटनेस तथा स्वस्थ जीवनशैली को जन-आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय चंडीगढ़ मैराथन ने चंडीगढ़ को एक फिट, अनुशासित तथा वैश्विक खेल-नक्शे पर उभरते शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
साथियो,
आज की इस मैराथन की 30, 55 और 75 किलोमीटर की दूरी को पूरी करना केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं है। यहाँ आपको अपने शरीर की सीमाओं को समझना होगा। अपनी ऊर्जा को नियंत्रित करना होगा। अपने मन को मजबूत रखना होगा। थकान से मुकाबला करना होगा। और सबसे महत्वपूर्ण, उस क्षण भी आगे बढ़ते रहना होगा, जब शरीर आपसे रुक जाने के लिए कह रहा हो। यही कारण है कि ‘लेक टू लेक अल्ट्र मैराथन’ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मानवीय इच्छाशक्ति और धैर्य का उत्सव है।
मेरा मानना है कि दौड़ना केवल एक खेल नहीं है; यह जीवन का एक सुंदर दर्शन भी है। जब हम दौड़ते हैं, तो हमें यह समझ आता है कि मंजिल एक ही कदम में प्राप्त नहीं होती। मंजिल छोटे-छोटे कदमों से प्राप्त होती है। इसी तरह जीवन में भी बड़ी उपलब्धियाँ एक दिन में नहीं मिलतीं। हर दिन थोड़ा प्रयास, हर दिन थोड़ा अनुशासन, हर दिन थोड़ी मेहनत, और हर दिन अपने लक्ष्य की ओर एक कदम, यही अंततः सफलता तक पहुँचाता है।
इसलिए मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ कि गति कम हो सकती है, लेकिन दिशा सही होनी चाहिए; कदम छोटे हो सकते हैं, लेकिन रुकने नहीं चाहिए। क्योंकि दौड़ में महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप कितनी तेजी से दौड़ते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी यात्रा पूरी करते हैं।
साथियो,
हम सदियों से सुनते आ रहे हैं, ‘चरैवेति, चरैवेति’, अर्थात् चलते रहो, निरंतर आगे बढ़ते रहो। क्योंकि जीवन का पर्याय ही गति है, ठहराव नहीं। ठहरा हुआ पानी हो या ठहरा हुआ जीवन, दोनों अपनी जीवंतता खो देते हैं। इसलिए जब तक हमारी साँसें चल रही हैं, हमारे कदम भी आगे बढ़ते रहने चाहिए, चाहे रास्ता कितना ही कठिन क्यों न हो।
और जब जीवन के इस दर्शन को खेल के मैदान में उतारें, तो मैराथन से बेहतर उदाहरण शायद ही कोई हो। मैराथन केवल कुछ किलोमीटर की दौड़ नहीं है; यह मानवीय दृढ़ता, धैर्य और प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय का प्रतीक है।
मैराथन हमें सिखाती है कि वास्तविक चुनौती दूसरों को पीछे छोड़ने की नहीं, बल्कि अपनी सीमाओं को पीछे छोड़ने की है। एक धावक अपने पैरों से कम और अपने संकल्प, हौसले और दिल से अधिक दौड़ता है। दौड़ना केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक तपस्या भी है। यह हमें आलस्य, थकान, भय और अपनी सीमाओं पर विजय प्राप्त करना सिखाती है।
साथियो,
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जब मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, स्वास्थ्य हमारा सबसे बड़ा धन है। ऐसे में इस मैराथन जैसे आयोजन फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की भावना को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए हमें बच्चों और युवाओं को शुरू से ही खेलों से जोड़ना होगा। विद्यालयों में खेल का महत्व बढ़ाना होगा। परिवारों में शरीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करना होगा। और समाज में ऐसी खेल संस्कृति विकसित करनी होगी जिसमें व्यायाम और फिटनेस जीवन का सामान्य हिस्सा बने। क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
खेल का महत्व केवल शरीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। खेल हमें सिखाता है, जीत में विनम्र रहना, हार में निराश न होना, प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना, नियमों का पालन करना, टीम के साथ काम करना, और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना। इसीलिए खेल वास्तव में चरित्र निर्माण का माध्यम है।
मैं कहता हूँ, खेल का मैदान हमें केवल जीतना नहीं सिखाता; वह हमें हार के बाद फिर उठकर खड़ा होना सिखाता है। और यही जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है।
साथियो
आज की यह दौड़ हमें प्रकृति के बहुत करीब लेकर जा रही है। लेकिन जब हम प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते हैं, तो उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है।
इसलिए मैं सभी प्रतिभागियों और आयोजकों से आग्रह करता हूँ कि हम यह सुनिश्चित करें कि हमारी गतिविधियों से पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुँचे। जिस प्रकृति के बीच हम दौड़ रहे हैं, उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उसी सुंदरता के साथ सुरक्षित रखना हमारा दायित्व है।
मैं इस आयोजन को केवल "Run through Nature" नहीं, बल्कि "Run for Nature” की भावना से देखने का आग्रह करता हूँ। हम प्लास्टिक वेस्ट को कम करें। कचरा निर्धारित स्थानों पर डालें। जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें। और इस मार्ग की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखें।
मेरे प्यारे युवा साथियो,
आज आपके सामने अवसरों की कोई कमी नहीं है। लेकिन इसके साथ-साथ आपके सामने अनेक ध्यान भटकाने वाली चुनौतियाँ भी हैं। आपके हाथ में आधुनिक तकनीक है। आपके सामने सामाजिक माध्यमों की दुनिया है। आपके पास जानकारी और ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं। लेकिन जानकारी को उपलब्धि में बदलने के लिए अनुशासन आवश्यक है।
मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि अपने शरीर को मजबूत बनाइए। अपने मन को मजबूत बनाइए। अपनी आदतों को सकारात्मक बनाइए। खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनाइए। और नशे व अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों से स्वयं भी दूर रहें तथा अपने मित्रों को भी दूर रखने के लिए प्रेरित करें। जो युवा खेल के मैदान से जुड़ता है, वह जीवन में अनेक गलत रास्तों से स्वयं को बचा सकता है।
खेल केवल शरीर को स्वस्थ नहीं रखता; यह हमें समय का सदुपयोग, अनुशासन, आत्मसंयम, टीम भावना और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता भी सिखाता है। इसीलिए मैं चाहता हूँ कि हमारे युवा केवल खेलों को देखें नहीं, बल्कि खेलों में भाग लें। दर्शक बनने से अधिक महत्वपूर्ण है खिलाड़ी बनना।
आज मैं सभी प्रतिभागियों से कहना चाहता हूँ कि पुरस्कार मंच तक केवल कुछ लोग पहुँचेंगे। लेकिन अंतिम लक्ष्य-रेखा तक पहुँचने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में विजेता होगा। क्योंकि उसने अपने भीतर की शंका को हराया होगा। उसने अपने शरीर की थकान पर नियंत्रण पाया होगा। उसने कठिन परिस्थितियों को स्वीकार किया होगा। और उसने खुद को यह साबित किया होगा कि मैं अपनी सोच से अधिक सक्षम हूँ।
इसलिए आज मेरी शुभकामना केवल यह नहीं है कि आप दौड़ जीतें। मेरी शुभकामना है कि आप इस यात्रा के दौरान अपने भीतर के सर्वश्रेष्ठ रूप को खोजें और एक अधिक मजबूत, अनुशासित और आत्मविश्वासी व्यक्ति बनकर लौटें। याद रखिए, वास्तविक विजय केवल पदक जीतने में नहीं, बल्कि अपनी क्षमता की नई सीमा खोजने में है।
साथियो,
आज भारत में खेलों के प्रति एक नया उत्साह दिखाई दे रहा है। हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। खेलों को प्रोत्साहन, प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार और युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन एक सशक्त खेल राष्ट्र बनने के लिए केवल उच्च स्तर के खिलाड़ियों का होना पर्याप्त नहीं है।
हमें व्यापक जनभागीदारी वाली खेल संस्कृति विकसित करनी होगी। हर बच्चा कोई न कोई खेल खेले। हर युवा अपनी दिनचर्या में शारीरिक सक्रियता को स्थान दे। हर परिवार स्वास्थ्य और फिटनेस को महत्व दे। हर शहर में दौड़, साइकिलिंग और अन्य बाहरी खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।
और हर परिवार में यह भावना विकसित हो कि खेल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि स्वस्थ और बेहतर जीवन में निवेश है। लेक टू लेक अल्ट्रा जैसे आयोजन इसी व्यापक खेल संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेरे प्यारे धावको,
आज जब कुछ ही क्षणों में इस शानदार लेक टू लेक अल्ट्रा मैराथन 2026 का ध्वजारंभ होगा, तो यह केवल एक दौड़ की शुरुआत नहीं होगी। यह सैकड़ों सपनों की शुरुआत होगी। यह सैकड़ों व्यक्तिगत चुनौतियों की शुरुआत होगी। यह आत्मविश्वास और दृढ़ता की एक नई यात्रा की शुरुआत होगी। और यह चंडीगढ़ से मोरनी तक खेल, साहस, प्रकृति और मानवीय क्षमता के उत्सव की शुरुआत होगी।
मैं सभी प्रतिभागियों से कहना चाहता हूँ कि अपनी गति पर विश्वास रखिए। अपनी तैयारी पर विश्वास रखिए। अपने शरीर और मन की क्षमता पर विश्वास रखिए। और सबसे बढ़कर, अपने संकल्प पर विश्वास रखिए। आप सभी सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें और अपनी-अपनी अंतिम लक्ष्य-रेखा तक सफलतापूर्वक पहुँचें।
अंत में, मैं एक बार फिर से आयोजकों, सभी सहयोगी संस्थाओं, देशभर से यहां पहुंचे धावकों और इस आयोजन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को हार्दिक बधाई देता हूँ।
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस के उत्सव की भावना से जुड़ रहे हैं, तो इस दौड़ को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें। इसे हम अपने सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनाएं।
आइए, हम देश के लिए दौड़ें। एकता के लिए दौड़ें। स्वस्थ भारत के लिए दौड़ें। फिट भारत के लिए दौड़ें। पर्यावरण संरक्षण के लिए दौड़ें। और एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लिए दौड़ें।
मुझे विश्वास है कि लेक टू लेक अल्ट्रा मैराथन 2026 आने वाले वर्षों में और भी व्यापक पहचान बनाएगी और चंडीगढ़ को खेल, स्वास्थ्य, साहसिक पर्यटन और बाहरी खेल गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देगी।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएँ जहाँ स्वस्थ जीवनशैली हमारी आदत हो, जहाँ खेल हमारी संस्कृति का हिस्सा हो, जहाँ प्रकृति के प्रति सम्मान हमारी जिम्मेदारी हो, जहाँ युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी पूँजी हो, और जहाँ दृढ़ संकल्प के साथ प्रत्येक व्यक्ति अपनी सीमाओं को चुनौती देने का साहस रखता हो।
इसी संदेश और शुभकामना के साथ मैं लेक टू लेक अल्ट्रा मैराथन 2026 के सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
आपकी दौड़ सफल हो, आपका संकल्प मजबूत हो, आपकी यात्रा सुरक्षित हो, और आपकी अंतिम लक्ष्य-रेखा आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि बने।
आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!