SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 29TH DEATH ANNIVERSARY OF REVEREND GURUDEV SHRI PREM SUKH JI MAHARAJ SAHIBM AT LUDHIANA ON AUGUST 16, 2026.

गुरुदेव श्री प्रेमसुख महाराज साहब जी के पुण्य स्मृति दिवस पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 16.08.2026, रविवारसमयःसुबह 11:00 बजेस्थानः लुधियाना

 

आप सभी को मेरा सादर नमस्कार!

आज का यह अवसर आध्यात्मिक श्रद्धा, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और युवा जागरण, इन चारों भावनाओं का एक अद्भुत संगम है। पूज्य गुरुदेव श्री प्रेमसुख जी महाराज साहब के 29वें पुण्य स्मृति दिवस के पावन अवसर पर मैं उनके श्रीचरणों में अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उन्हें शत-शत नमन करता हूं। मैं बहुत ही भाग्यशाली हूं जो मुझे पूज्य गुरुदेव जी की सद्प्रेरणा एवं विमल जैन जी के प्रयास से इस कार्यक्रम में आने का शुभ अवसर मिला।

मुझे प्रसन्नता है कि इस पुण्य अवसर को केवल स्मरण का दिवस बनाकर सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे 2900 सामायिक और 2 लाख 90 हजार जाप के आध्यात्मिक संकल्प, “नशामुक्त-युवा जागरण” संकल्प समारोह तथा गुरु गुणगान महोत्सव के रूप में समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के कल्याण से जोड़ा गया है। और इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है हमारा राष्ट्रीय पर्व, ‘स्वतंत्रता दिवस’।

इस पावन अवसर पर मैं आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। आज हम उन असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं, जिनके त्याग, तपस्या और बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सिर ऊंचा करके जी रहे हैं।

साथियो,

एक ओर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को विदेशी शासन की बेड़ियों से मुक्त कराया, तो दूसरी ओर हमारे संतों और महापुरुषों ने सदैव मनुष्य को क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, हिंसा और व्यसन की आंतरिक गुलामी से मुक्त होने का मार्ग दिखाया। इसलिए आज के इस आयोजन का संदेश अत्यंत गहरा है, देश को मिली स्वतंत्रता की रक्षा तभी सार्थक होगी, जब हमारा मन भी बुरी आदतों और व्यसनों से स्वतंत्र होगा।

हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो सकते हैं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकते हैं, अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हो सकते हैं; लेकिन यदि हमारा मन किसी नशे का गुलाम हो जाए, तो हमारी स्वतंत्रता अधूरी रह जाती है। इसीलिए आज स्वतंत्रता के पावन पर्व पर नशामुक्त जीवन का संकल्प लेना राष्ट्र के प्रति एक महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है।

मुझे पता चला है गुरुदेव श्री आलोक मुनि जी महाराज साहब एवं श्री अमन मुनि जी महाराज साहब पिछले 2 वर्षों से इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नशे से मुक्त होने का संकल्प करवा रहे हैं। 

बंधुओं,

महापुरुषों की पुण्य स्मृति मनाने का वास्तविक अर्थ केवल उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करना या उनका स्मरण करना नहीं है। सच्ची श्रद्धांजलि तब होती है, जब उनके आदर्श हमारे जीवन और व्यवहार में दिखाई दें।

पूज्य गुरुदेव श्री प्रेमसुख जी महाराज साहब का स्मरण हमें संयम, आत्मानुशासन, सदाचार, सेवा, करुणा और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मैं मानता हूं कि संत शरीर से हमारे बीच न रहें, तो भी उनके विचार समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं; उनकी वाणी समय से परे जाकर आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकाश देती रहती है।

आज सैकड़ों लोगों द्वारा सामायिक और जाप का जो संकल्प लिया गया है, वह केवल धार्मिक साधना नहीं, बल्कि सामूहिक आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है।

जैन परंपरा में सामायिक समता, आत्मचिंतन और अंतर्मन की शांति का अभ्यास है। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में, जब व्यक्ति बाहर की उपलब्धियों के पीछे दौड़ते-दौड़ते अपने भीतर की शांति खो देता है, तब सामायिक का संदेश हमें स्वयं से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

हम प्रतिदिन कुछ समय अपने भीतर झांकें, अपने विचारों को देखें, अपने व्यवहार का मूल्यांकन करें और यह विचार करें कि हमने किसी को दुःख तो नहीं दिया, यह स्वयं में एक महान साधना है।

साथियो,

जैन दर्शन ने विश्व को अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांत, सत्य और संयम जैसे शाश्वत मूल्य प्रदान किए हैं। जैन दर्शन का प्रसिद्ध सूत्र है, “परस्परोपग्रहो जीवानाम्” अर्थात, जीव एक-दूसरे के सहयोगी हैं। यह छोटा-सा सूत्र पूरे मानव समाज के लिए बहुत बड़ा संदेश रखता है। हम अकेले नहीं जी सकते। हमारा जीवन एक-दूसरे से जुड़ा है। इसलिए हमारा आचरण भी ऐसा होना चाहिए, जिससे स्वयं का और दूसरों का कल्याण हो।

भगवान महावीर जी की शिक्षाओं में आत्मसंयम को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। जैन दर्शन का सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का मार्ग हमें यह सिखाता है कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, सही ज्ञान का सही आचरण में उतरना आवश्यक है।

आज नशामुक्ति के संदर्भ में यह शिक्षा विशेष रूप से प्रासंगिक है। हर व्यक्ति जानता है कि नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन केवल यह जानकारी पर्याप्त नहीं है। उस जानकारी को व्यवहार में बदलना, गलत प्रस्ताव को ‘नहीं’ कहना और कठिन परिस्थिति में भी आत्मसंयम बनाए रखना, यही वास्तविक चरित्र की परीक्षा है।

मेरा मानना है कि मन को जीत लेने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में विजेता है। किसी दूसरे पर विजय प्राप्त करना आसान हो सकता है; स्वयं की कमजोरियों, इच्छाओं और व्यसनों पर विजय प्राप्त करना कहीं बड़ा पराक्रम है।

मेरे प्रिय पंजाबवासियो,

आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर मैं पंजाब की इस वीर भूमि को नमन करता हूँ। पंजाब केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है; यह भारत का हृदय है, भारत की धड़कन है। यह वह भूमि है जहाँ गुरुओं ने मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम में चाहे शहीद-ए-आजम भगत सिंह हों, लाला लाजपत राय हों या करतार सिंह सराभा, पंजाब के सपूतों ने भारत माता की बेड़ियों को काटने के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे चूम लिए थे।

पंजाब के बारे में किसी ने सच ही कहा है, ‘‘पंजाब की मिट्टी में महक है बलिदानों की, यहाँ की हवाओं में गूंज है गुरुओं के फरमानों की।’’

जिस पंजाब ने देश को अनाज देकर आत्मनिर्भर बनाया, जिस पंजाब ने सीमाओं पर अपनी छाती अड़ाकर देश की रक्षा की, आज उस पंजाब के सामने नशा एक चुनौती बनकर खड़ा है।

हम राजनैतिक रूप से स्वतंत्र हो गए हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में व्यसनों और बुराइयों से स्वतंत्र हुए हैं? आज हमारे सामने सबसे बड़ा शत्रु सीमा पार नहीं, बल्कि हमारे समाज के भीतर ‘नशे’ के रूप में बैठा है।

यह देखकर हृदय अत्यंत व्यथित होता है कि हमारे जिस युवा की भुजाओं में देश का भविष्य संवारने की ताकत होनी चाहिए, वह नशे की जंजीरों में जकड़ता जा रहा है। इसीलिए, इस स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित यह ‘नशा मुक्त - युवा जागरण संकल्प समारोह’ समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

युवाओं, याद रखो, स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, ‘‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।’’

मेरे प्रिय युवा साथियो,

आप भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। आपके सपनों में भारत का भविष्य और आपकी ऊर्जा में समाज को बदलने की क्षमता निहित है। इसलिए आपका स्वास्थ्य, आपका चरित्र और आपका भविष्य केवल आपका व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि परिवार, समाज, पंजाब और पूरे राष्ट्र से जुड़ा हुआ है।

नशा किसी व्यक्ति के जीवन में अचानक सब कुछ नहीं छीनता। वह धीरे-धीरे आदत, फिर आवश्यकता और अंततः निर्भरता बन जाता है। यह स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है तथा कई बार व्यक्ति को अपराध और हिंसा की ओर भी धकेल देता है।

इसलिए नशे से बचाव का सबसे प्रभावी समय पहली बार से पहले है। मैं अपने प्रत्येक युवा से कहना चाहता हूं, पहली बार ही ‘ना’ कहिए, क्योंकि एक मजबूत ‘ना’ आपके पूरे भविष्य की रक्षा कर सकता है।

जब कोई आपको नशे की ओर आकर्षित करे, तो अपने माता-पिता के सपनों, अपने शिक्षकों के विश्वास और अपने भविष्य के उस खिलाड़ी, वैज्ञानिक, डॉक्टर, सैनिक, उद्यमी या अधिकारी को याद कीजिए, जो आपके भीतर छिपा है। स्वयं से कहिए, ‘‘मेरा जीवन किसी नशे से बड़ा है, मेरे सपने किसी क्षणिक आकर्षण से बड़े हैं और मेरा भविष्य मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।’’

अपने जीवन में नशा नहीं निशाना, व्यसन नहीं व्यायाम, निराशा नहीं नई आशा और गलत संगति नहीं सकारात्मक मित्रता चुनिए। खेल, पुस्तकालय, कौशल, संगीत, साहित्य और सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों से जुड़कर अपनी ऊर्जा को सही दिशा दीजिए।

साथियो, यदि कोई व्यक्ति पहले से नशे की समस्या से जूझ रहा है, तो उसे तिरस्कार नहीं, सहयोग की आवश्यकता है। नशे से लड़ना है, नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति से नहीं। हमें उसे उपचार, परामर्श और पुनर्वास की ओर प्रेरित करना होगा। मैं परिवारों से भी आग्रह करता हूं कि वे बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। 

कई बार एक संवेदनशील बातचीत किसी युवा को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकती है। शिक्षकों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और खेल संस्थाओं को भी इस जन-अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

देवियो एवं सज्जनो,

स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का नहीं, बल्कि कर्तव्य का भी पर्व है। तिरंगा हमें साहस, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की प्रेरणा देता है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाई; अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश को नशे, अशिक्षा, हिंसा, भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों से मुक्त बनाने में अपना योगदान दें।

देशभक्ति केवल नारों से नहीं, बल्कि आचरण से सिद्ध होती है। एक युवा स्वयं को नशे से बचाता है, विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़ाई करता है, नागरिक पर्यावरण की रक्षा करता है और परिवार अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देता है, यही सच्चा राष्ट्र निर्माण है।

भारत की सभी महान आध्यात्मिक परंपराएं संयम, सेवा, करुणा और कर्तव्य का संदेश देती हैं। इन सभी का मूल उद्देश्य मनुष्य को बेहतर बनाना और समाज के कल्याण के लिए प्रेरित करना है। युवा नशामुक्ति को आध्यात्मिक जागरण से जोड़ना इसी महान परंपरा का श्रेष्ठ उदाहरण है।

मेरे प्रिय युवा साथियो,

आज पूज्य गुरुदेव श्री प्रेमसुख जी महाराज साहब के 29वें पुण्य स्मृति दिवस और स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी इससे बचाने का प्रयास करेंगे, अपने जीवन को अनुशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करेंगे तथा नशे से संघर्ष कर रहे लोगों को उपचार और सहयोग के लिए प्रेरित करेंगे।

यदि यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प अपने साथ एक और व्यक्ति तक पहुंचा दे, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बन जाएगा। याद रखिए, एक दीपक पूरे संसार का अंधकार दूर नहीं कर सकता, लेकिन अपने आसपास अंधकार को रहने भी नहीं देता। आप वही दीपक बनिए।

पूज्य गुरुदेव की सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों में नहीं, बल्कि संयमपूर्ण जीवन, सेवा, सदाचार और किसी एक युवा को नशे से बचाने के संकल्प में निहित है। 2900 सामायिक और 2 लाख 90 हजार जाप का यह संकल्प जब युवा जागरण और नशामुक्ति के अभियान से जुड़ता है, तब अध्यात्म सामाजिक परिवर्तन की शक्ति बन जाता है।

अंत में, आइए तीन संकल्प लेकर जाएं, आत्मसंयम का संकल्प, नशामुक्त समाज का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प।

‘‘गुरु का ज्ञान हो जीवन का प्रकाश,

संयम बने हमारे मन का विश्वास।

नशे से मुक्त हो हर युवा, हर परिवार,

यही हो गुरुदेव को सच्चा नमस्कार।’’

एक बार पुनः मैं पूज्य गुरुदेव श्री प्रेमसुख जी महाराज साहब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं तथा इस गुरु गुणगान महोत्सव, सामायिक-जाप अनुष्ठान एवं नशामुक्त युवा जागरण संकल्प समारोह के सफल आयोजन के लिए एस. एस. जैन सभा, मंडी मुल्लापुर दाखा एवं चातुर्मास समिति 2026 के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, सहयोगियों और स्वयंसेवकों को हार्दिक बधाई देता हूं।

मुझे विशेष प्रसन्नता है कि आपने इस मंच को किसी एक धर्म, संस्था या विचार तक सीमित न रखते हुए सभी धर्मगुरुओं, सामाजिक संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को समान सम्मान के साथ आमंत्रित किया है। यहां न धर्म के नाम पर कोई पक्ष-विपक्ष है और न ही राजनीति के आधार पर कोई भेद; यहां केवल मानवता, सद्भाव, सेवा और समाजहित की भावना दिखाई देती है। यही भारत की वास्तविक शक्ति है और यही हमारी सांस्कृतिक परंपरा का सार भी है। 

ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं, आपसी विश्वास बढ़ाते हैं और यह संदेश देते हैं कि “धर्म हमें बांटने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने और सेवा की भावना जगाने के लिए है।” मुझे विश्वास है कि आपका यह प्रयास सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और युवा जागरण के संदेश को और अधिक प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाएगा। मेरी कामना है कि यहां से उठी नशामुक्ति की यह प्रेरणा पंजाब ही नहीं, पूरे देश में जन-जागरण का स्वर बने।

आइए, हम सब मिलकर उद्घोष करें, नशा छोड़ो-जीवन जोड़ो! संयम अपनाओ-भविष्य सजाओ! ‘नशामुक्त युवा-सशक्त पंजाब! सशक्त पंजाब-विकसित भारत!

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द! जय भारत!