SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF SAMVEDNA -2 AWARDS CEREMONY ORGANISED BY NIFA AT CHANDIGARH ON AUGUST 18, 2026.

निफा द्वारा आयोजित ‘संवेदना-2 सम्मान समारोह’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 18.08.2026, मंगलवारसमयः दोपहर 12:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज ‘नेशनल इंटिग्रेटिड फोरम ऑफ आर्टिस्ट्स एंड एक्टिविस्ट्स’ (निफा) द्वारा आयोजित इस ‘संवेदना’ पुरस्कार समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आज का यह समारोह हमें यह स्मरण कराता है कि समाज केवल अधिकारों और सुविधाओं से नहीं बनता; समाज एक-दूसरे के प्रति संवेदना, सेवा, सहयोग और जिम्मेदारी से बनता है।

यह खुशी की बात है कि सामाजिक संस्था ‘निफा’ द्वारा आज चंडीगढ़ की उन समाजसेवी संस्थाओं और युवा समाज सेवियों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने ‘संवेदना’ राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के तहत रक्तदान शिविर आयोजित कर रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मैं आज इस मंच से सम्मानित होने वाले सभी 80 समाजसेवियों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अपनी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। आपकी सराहनीय सेवाएँ समाज के अन्य लोगों, विशेषकर युवाओं को भी सेवा और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

साथियो,

मुझे बताया गया है कि श्री प्रितपाल पन्नू जी द्वारा वर्ष 2000 में स्थापित निफा ने सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ रक्तदान, सामाजिक जागरूकता और युवा सहभागिता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। संगठन का ‘संवेदना’ अभियान इसी सोच का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

‘संवेदना’ शब्द अपने आप में बहुत गहरा अर्थ रखता है। संवेदना का अर्थ है, दूसरे के दर्द को महसूस करना। लेकिन केवल किसी के दर्द को महसूस करना पर्याप्त नहीं है। संवेदना तब सार्थक होती है, जब वह सेवा में बदलती है। यदि किसी अस्पताल में रक्त की आवश्यकता है और हम रक्तदान के लिए आगे आते हैं, यह संवेदना है। यदि किसी जरूरतमंद परिवार की सहायता के लिए हम अपना समय देते हैं, यह संवेदना है। यदि किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद के लिए हम आगे बढ़ते हैं, यह संवेदना है। यदि हम किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए अपना रक्त देते हैं, यह संवेदना का सर्वोच्च रूप है।

इसलिए मैं कहूँगा, संवेदना वह भावना है जो हमें दूसरे के दर्द से जोड़ती है, और सेवा वह शक्ति है जो उस दर्द को कम करने का प्रयास करती है।

देवियो एवं सज्जनो,

यह हमारे लिए हर्ष और गर्व का विषय है कि निफा की सामाजिक गतिविधियों के लिए भारत सरकार द्वारा भी उन्हे राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही 6 बार गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज करवा कर संस्था ने देश और समाज का गौरव बढ़ाया है।

निफा द्वारा वर्ष 2021 में आयोजित संवेदना-1 के अंतर्गत एक ही दिन में देशभर में 1 हजार 476 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए और 97 हजार 744 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। इस अभियान को National Blood Transfusion Council, Indian Red Cross Society, National Integrated Medical Association तथा अन्य संस्थाओं का सहयोग मिला और तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से इसका उद्घाटन किया था।

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में जब रक्त की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियाँ सामने आई थीं, तो उस समय निफा ने लगभग 1500 रक्तदान शिविर आयोजित करके न केवल एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि हजारों बहुमूल्य जीवन बचाकर मानवता की सच्ची सेवा की।

वहीं, संवेदना-2 के अंतर्गत वर्ष 2025 में देशभर में 2 हजार 400 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 1.5 लाख यूनिट रक्त एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया। अभियान को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवसों से जोड़ा गया और प्रत्येक दिन को इन अमर शहीदों की स्मृति को समर्पित करने की परिकल्पना की गई थी।

इन दोनो अभियानों में केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के युवाओं व सामाजिक संस्थाओं ने निफा चंडीगढ़ के प्रधान श्री राकेश सांगर के संयोजन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया और संवेदना प्रथम व द्वितिय भाग में बड़ी संख्या में रक्त दान शिविर आयोजित हुए।

साथियो,

चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है, लेकिन एक सच्चाई आज भी कायम है कि रक्त का निर्माण किसी फैक्ट्री में नहीं हो सकता। यह केवल एक स्वस्थ व्यक्ति से जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। इसलिए रक्तदान केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली मानवीय जिम्मेदारी है।

हम जानते हैं कि दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव संबंधी जटिलताओं, कैंसर, थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और अनेक अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे समय में अस्पताल में उपलब्ध रक्त किसी परिवार के लिए आशा की अंतिम किरण बन सकता है। एक यूनिट रक्त किसी के लिए केवल रक्त नहीं होता, वह किसी के लिए जीवन की एक नई संभावना होता है। इसीलिए रक्तदान के महत्व को समाज में व्यापक रूप से समझाना आवश्यक है।

साथियो,

रक्त की सबसे सुंदर विशेषता यह है कि रक्त किसी की जाति नहीं पूछता। रक्त किसी का धर्म नहीं पूछता। रक्त किसी का क्षेत्र नहीं पूछता। रक्त केवल मानव शरीर में जाकर यह कहता है, “मैं जीवन बचाने आया हूँ।”

जब हम किसी अनजान व्यक्ति के लिए रक्तदान करते हैं, तब वास्तव में हम मानवता के सबसे मूल सिद्धांत को स्वीकार करते हैं, हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसीलिए रक्तदान सामाजिक समरसता का भी एक शक्तिशाली माध्यम है। एक रक्तदाता और एक रक्त-प्राप्तकर्ता एक-दूसरे को जानते भी नहीं हो सकते, लेकिन उनके बीच रक्त का रिश्ता बन जाता है। और यह रिश्ता किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र का नहीं होता। यह केवल मानवता का रिश्ता होता है। 

साथियो,

हमारे देश की सभ्यता में दान, सेवा और परोपकार की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है। महर्षि दधीचि ने इंद्र के आग्रह पर अपनी अस्थियाँ तक दान कर दीं, जिनसे वज्र का निर्माण हुआ। राजा शिवि ने कबूतर की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस तक तराजू पर रख दिया। भगवान श्री राम द्वारा राज-पाठ के त्याग से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के महान बलिदान तक, भारत की धरती ने सेवा, त्याग और राष्ट्रधर्म की अनगिनत गाथाएँ देखी हैं।

हमारी गुरु परंपरा हमें सेवा और परोपकार का संदेश देती है। हमारे संतों और महापुरुषों ने मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया। इसलिए रक्तदान हमारे लिए कोई बाहरी विचार नहीं है। यह हमारी अपनी सभ्यता की उसी महान परंपरा का आधुनिक रूप है। आज किसी जरूरतमंद के लिए रक्त देना भी उसी दान-परंपरा को आगे बढ़ाना है।

श्रीमद्भगवद्गीता में लिखा है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” यह संदेश हमें सिखाता है कि हमारा अधिकार कर्म पर है, फल पर नहीं। रक्तदान और समाजसेवा का भी यही भाव है। हम सेवा इसलिए नहीं करते कि हमें पहचान मिले; हम सेवा इसलिए करते हैं क्योंकि किसी जीवन की रक्षा हमारा मानवीय कर्तव्य है। सम्मान हमें प्रसन्न करता है, लेकिन कर्तव्य हमें निरंतर आगे बढ़ाता है।

साथियो,

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। हमारे पास विशाल युवा शक्ति है। यदि यह युवा शक्ति केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य के निर्माण में लगेगी, तो देश आगे बढ़ेगा। लेकिन यदि यही युवा शक्ति व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपना जीवन-मूल्य बना लेगी, तो भारत की प्रगति कई गुना तेज होगी।

मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ कि अपने सपने बड़े रखिए, लेकिन अपने दिल को उससे भी बड़ा रखिए। करियर बनाइए, लेकिन चरित्र भी बनाइए। सफलता प्राप्त कीजिए, लेकिन समाज के लिए भी कुछ कीजिए। ज्ञान अर्जित कीजिए, लेकिन उस ज्ञान का उपयोग किसी के जीवन को बेहतर बनाने में कीजिए। और याद रखिए, जिस सफलता में समाज का हित शामिल हो, वही सफलता सबसे अधिक सार्थक होती है।

आज समाज के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं। इनमें नशा एक गंभीर चुनौती है, विशेषकर युवाओं के भविष्य के लिए। हमें अपने युवाओं को नशे और नकारात्मकता से दूर रखते हुए उन्हें खेल, शिक्षा, कौशल, कला, संस्कृति और समाजसेवा से जोड़ना होगा।

जब कोई युवा रक्तदान करता है, किसी सामाजिक अभियान में स्वयंसेवक बनता है, किसी जरूरतमंद की सहायता करता है या किसी सकारात्मक अभियान का हिस्सा बनता है, तो वह केवल एक काम नहीं कर रहा होता, वह अपने भीतर जिम्मेदारी और नेतृत्व की भावना विकसित कर रहा होता है।

इसलिए मैं निफा जैसी संस्थाओं से भी आग्रह करता हूँ कि वे युवाओं को सामाजिक सेवा के ऐसे अभियानों से लगातार जोड़ती रहें। युवा हाथ केवल भविष्य बनाने के लिए नहीं हैं; वे आज किसी का जीवन बचाने के लिए भी आगे बढ़ सकते हैं।

साथियो,

मैं रक्तदान के महत्व को रेखांकित करना चाहता हूँ। किसी घर में जब अचानक रक्त की आवश्यकता पड़ती है, तब परिवार को रक्त की एक-एक बूंद का महत्व समझ में आता है। किसी अस्पताल में किसी मरीज के परिजन रक्त की तलाश में भटकते हैं, तब उन्हें एहसास होता है कि समाज का एक स्वैच्छिक रक्तदाता उनके लिए कितना बड़ा सहारा हो सकता है। इसीलिए हमें रक्तदान को केवल संकट के समय की आवश्यकता नहीं, बल्कि नियमित सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए।

यदि हर स्वस्थ नागरिक समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करे, तो रक्त की उपलब्धता को मजबूत किया जा सकता है। और जिस दिन देश का कोई परिवार केवल रक्त की कमी के कारण अपने प्रियजन को न खोए, उस दिन हम वास्तव में संवेदना के इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता देखेंगे।

मेरे प्यारे युवाओं और समाजसेवियो,

जीवन में सफलता पाने के अनेक रास्ते हैं। लेकिन समाज को कुछ देकर सफलता पाने का आनंद सबसे अलग है। याद रखिए, आपके पास धन कम हो सकता है, समय कम हो सकता है, साधन कम हो सकते हैं; लेकिन सेवा करने की इच्छा कभी कम नहीं होनी चाहिए। और, एक छोटा-सा नेक कार्य, किसी दूसरे के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

मत सोचिए कि मैं अकेला क्या कर सकता हूँ। इतिहास में बड़े परिवर्तन अक्सर एक व्यक्ति के छोटे-से संकल्प से शुरू हुए हैं। एक व्यक्ति रक्तदान करता है, दूसरा प्रेरित होता है। दूसरा तीसरे को प्रेरित करता है। और धीरे-धीरे एक अभियान आंदोलन बन जाता है। यही संवेदना की शक्ति है।

आज जब हम विकसित भारत के संकल्प की बात करते हैं, तो हमें यह भी समझना होगा कि विकसित भारत केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी ढाँचे से नहीं बनेगा। विकसित भारत संवेदनशील नागरिकों से बनेगा। ऐसे नागरिक जो अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें। ऐसे युवा जो केवल अपने करियर की चिंता न करें, बल्कि समाज की चिंता भी करें। ऐसे संगठन जो केवल अपने सदस्यों के लिए नहीं, बल्कि व्यापक समाज के लिए काम करें। और ऐसे लोग जो किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए बिना किसी स्वार्थ के अपना रक्त देने को तैयार हों। यही नागरिक चेतना और सामाजिक पूँजी किसी राष्ट्र को वास्तव में मजबूत बनाती है।

देवियो एवं सज्जनो,

आज का यह समारोह हमें एक बहुत सरल लेकिन बहुत गहरा संदेश देता है, मानवता सबसे बड़ा धर्म है। सेवा सबसे बड़ा संकल्प है। और किसी के जीवन को बचाना सबसे बड़ा पुण्य है। 

मैं निफा के संस्थापक अध्यक्ष श्री प्रीतपाल सिंह पन्नू जी और उनकी पूरी टीम को इस सराहनीय पहल के लिए बधाई देता हूँ। 

मैं निफा की राष्ट्रीय टीम, चंडीगढ़ शाखा, सभी सहयोगी संस्थाओं, स्वयंसेवकों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और विशेष रूप से सभी रक्तदाताओं का अभिनंदन करता हूँ।

आज सम्मान प्राप्त करने वाले सभी समाजसेवी संगठनों, युवाओं और स्वयंसेवकों को मेरी हार्दिक बधाई।

आपका कार्य समाज के लिए प्रेरणा है। आपकी सेवा किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। आपके प्रयास समाज में विश्वास पैदा करते हैं। आपके प्रयास मानवता को मजबूत करते हैं। और आपके प्रयास भारत की सामाजिक शक्ति को बढ़ाते हैं। 

आइए, आज हम यह संकल्प लेकर जाएँ कि जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ हम खड़े होंगे। जहाँ पीड़ा होगी, वहाँ संवेदना होगी। जहाँ निराशा होगी, वहाँ आशा जगाएँगे। और जहाँ किसी जीवन को बचाने का अवसर मिलेगा, वहाँ हम अपना योगदान देने से पीछे नहीं हटेंगे।

अंत में मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ, रक्त की एक बूंद किसी के लिए जीवन है, आपकी संवेदना किसी के लिए आशा है, और आपकी सेवा किसी परिवार के लिए पूरी दुनिया है।

आइए, हम सब मिलकर ऐसी भारत-भूमि का निर्माण करें जहाँ कोई व्यक्ति सहायता के लिए अकेला न हो, जहाँ समाज अपने जरूरतमंद सदस्यों के साथ खड़ा हो और जहाँ युवा शक्ति सेवा और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बने।

इसी भावना के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!