SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF MOTHERS AGAINST DRUGS – THE DECISIVE ROLE OF MOTHERS AGAINST DRUGS ORGANISED BY PUNJAB LIT FOUNDATION AND THE EDUCATION DEPARTMENT IN SECTOR 18, CHANDI

‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ कार्यक्रम के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 07.08.2026, शुक्रवारसमयः दोपहर 12:00 बजे

स्थानः चंडीगढ़

 

नमस्कार!

आज ‘पंजाब लिट फाउंडेशन’ के अत्यंत महत्वपूर्ण जन-अभियान ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ अर्थात् ‘नशे के विरुद्ध माताएँ’ के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए गहरे संतोष, दायित्व-बोध और आशा का विषय है।

मैं समझता हूं कि यह केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं है। यह पंजाब की आत्मा को बचाने का संकल्प है। यह हमारे बच्चों की मुस्कान, हमारे युवाओं के सपनों, हमारे परिवारों की खुशहाली और पंजाब के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है।

मैं इस दूरदर्शी पहल के लिए पंजाब लिट फाउंडेशन के सह-संस्थापकों, श्री खुशवंत सिंह और श्रीमती सना कौशल सहित इससे जुड़े सभी विशेषज्ञों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और माताओं को हार्दिक बधाई देता हूँ।

पंजाब लिट फाउंडेशन की जड़ें होशियारपुर की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। होशियारपुर लिट सोसायटी को व्यापक स्वरूप देते हुए इसे पंजाब लिट फाउंडेशन में परिवर्तित किया गया। यह गैर-लाभकारी संस्था रचनात्मकता, ज्ञान-आधारित विमर्श और पंजाब की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ‘पढ़दा पंजाब, वधदा पंजाब’, रचनात्मक लेखन कार्यशालाएँ और 2 मोबाइल पुस्तकालय जैसी गतिविधियाँ भी इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा रही हैं।

यह अत्यंत सराहनीय है कि साहित्य को समर्पित संस्था ने स्वयं को केवल पुस्तकों, गोष्ठियों और साहित्यिक उत्सवों तक सीमित नहीं रखा। इसने पंजाब के सामने उपस्थित एक गंभीर सामाजिक चुनौती को पहचाना और कलम के साथ-साथ जनचेतना को भी परिवर्तन का माध्यम बनाया।

वास्तव में साहित्य का उद्देश्य केवल अच्छे शब्द लिखना नहीं है। साहित्य का सर्वोच्च उद्देश्य मनुष्य और समाज को बेहतर बनाना है। जब कोई लेखक अपने अध्ययन-कक्ष से निकलकर समाज की पीड़ा के बीच जाता है, लोगों से संवाद करता है और किसी समस्या के समाधान के लिए जन-आंदोलन खड़ा करता है, तब उसकी लेखनी वास्तविक अर्थों में लोक-कल्याण का साधन बनती है।

श्री खुशवंत सिंह एक मशहूर लेखक, समाज सेवक और नई सोच वाले इंसान के रूप में जाने जाते हैं। आज के समय में साहित्य की दुनिया में उनका बहुत बड़ा नाम है। उन्होंने अब तक छह शानदार किताबें लिखी हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अखबारों में लेख लिखने, संपादक और ‘पंजाब के राज्य सूचना आयुक्त’ जैसी बड़ी जिम्मेदारियां भी बहुत अच्छे से निभाई हैं।

पंजाब के सबसे बड़े साहित्यिक कार्यक्रम ‘होशियारपुर लिट फेस्ट’ को उनका पूरा साथ मिला है, जिससे पता चलता है कि वे अपने राज्य पंजाब में अच्छे विचारों और साहित्य को कितना बढ़ावा देना चाहते हैं।

देवियो और सज्जनो,

जब श्री खुशवंत सिंह ने न्यू चंडीगढ़ से शहीद भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां तक लगभग 100 किलोमीटर लंबी ‘द पीपल्स वॉक अगेंस्ट ड्रग्स’ की शुरुआत की थी, तो कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन उस पदयात्रा में जिस तरह से माताओं और महिलाओं ने भाग लिया, उनके सवालों और उनकी आंखों की पीड़ा ने ही इस ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ अभियान की नींव रखी। सितंबर 2024 में होशियारपुर के बुल्लोवाल से शुरू हुई यह पहल आज एक जन-आंदोलन बन चुकी है। 

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि इस फाउंडेशन ने पिछले दो वर्षों में 8 हजार से अधिक माताओं को नशे के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित और जागरूक किया है। यह कोई साधारण कार्य नहीं है; हर जागरूक माँ का अर्थ है, एक बचाया गया बच्चा।

साथियो,

पंजाब कोई साधारण भूमि नहीं है। यह गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और शूरवीरों की पवित्र धरती है। श्री गुरु नानक देव जी ने इसी धरती से मानवता, समानता और कर्म का संदेश पूरी दुनिया को दिया। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए खालसा पंथ की साजना की। यह वो पंजाब है जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की सबसे अधिक आहुति दी है, चाहे वह जलियांवाला बाग हो, या फिर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का सर्वोच्च बलिदान।

इतिहास गवाह है कि जब भी देश की सीमाओं पर कोई आंच आई है, तो इसी पंजाब के गठीले सीनों ने दुश्मनों की गोलियां सबसे पहले खाई हैं। पंजाब का अर्थ ही शौर्य, साहस, परिश्रम और कभी न हार मानने वाली हिम्मत है।

परंतु आज, हमारा वही शूरवीर पंजाब एक अलग तरह की जंग लड़ रहा है। यह जंग सरहदों पर नहीं, बल्कि हमारे घरों, हमारे गांवों, स्कूलों और हमारे शहरों की गलियों में लड़ी जा रही है। यह नशों के खिलाफ एक भयानक युद्ध है, जो हमारी युवा पीढ़ी को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा है।  आज एक अदृश्य दुश्मन हमारे बच्चों की नसों में ज़हर घोल रहा है। यह अब केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं रह गया है, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को खो देने का एक डरावना सच बन चुका है। 

इस गंभीर संकट की घड़ी में सबसे बड़ी ढाल कौन बन सकता है? इसका जवाब बहुत स्पष्ट है, ‘एक माँ’। प्रसिद्ध अमेरिकी विचारक ‘राल्फ वाल्डो एमर्सन’ ने एक बार कहा था, ‘‘मनुष्य वैसा ही है, जैसा उसकी माँ ने उसे बनाया है।’’ (Men are what their mothers made them)A 

यदि कोई माँ अपने बच्चे के संस्कारों, व्यवहार और जीवनशैली के प्रति सजग रहे, तो वह नशे रूपी इस दानव और अपने बच्चे के बीच सबसे मजबूत सुरक्षा-कवच बन सकती है। एक माँ को अपने बच्चे और इस विनाशकारी प्रवृत्ति के बीच की पहली दीवार बनना होगा। यदि माँ जागरूक होगी, तो कोई भी बुरी शक्ति उसके बच्चे को अपनी गिरफ्त में नहीं ले सकेगी।

यह भूमिका पंजाब की माताओं के लिए कोई नई नहीं है। यह धरती केवल वीरों की ही नहीं, बल्कि ऐसी महान माताओं की भी रही है जिन्होंने केवल बच्चों को जन्म नहीं दिया, बल्कि पीढ़ियों को मूल्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। पंजाब की संस्कृति और इतिहास में मातृशक्ति का योगदान सदैव प्रेरणादायी रहा है।

माता खीवी जी की सेवा और लंगर की परंपरा हमें समानता, करुणा और निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है। माता गुजरी जी का अद्भुत धैर्य और आध्यात्मिक दृढ़ता हमें यह सिखाती है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। वहीं माई भागो जी का अद्वितीय साहस इस सत्य का प्रतीक है कि जब समाज संकट में हो, तो पंजाब की नारी केवल प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर नेतृत्व करती है। श्री मुक्तसर साहिब से जुड़ा उनका गौरवशाली इतिहास पंजाब की महिला शक्ति, वीरता और त्याग का अमर अध्याय है।

श्री गुरु नानक देव जी ने नारी की गरिमा का उद्घोष करते हुए कहा है, ‘‘सो क्यों मंदा आखिए जित जम्मे राजान’’ अर्थात जिस नारी से राजाओं का जन्म होता है, उसे निम्न कैसे कहा जा सकता है?

आज पंजाब की नारी शक्ति प्रदेश के भविष्य की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ खड़ी है। जिस माँ ने अपने बच्चों को साहस, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के संस्कार दिए हैं, वही उन्हें नशे के विरुद्ध संघर्ष करने की शक्ति भी दे सकती है। उसकी सजगता संकट को समय रहते पहचान सकती है और उसका स्नेहपूर्ण संवाद उपचार तथा पुनर्वास की शुरुआत बन सकता है।

मैं पंजाब की सभी माताओं से कहना चाहता हूँ कि आप असहाय नहीं हैं। आपकी सजगता समाज की सुरक्षा बन सकती है। आपका स्नेहपूर्ण संवाद किसी भटके हुए बच्चे के उपचार और पुनर्वास की शुरुआत बन सकता है। आपका साहस केवल एक बच्चे ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को बचा सकता है। और मुझे पूर्ण विश्वास है कि जब पंजाब की माताएँ एकजुट होकर इस अभियान का नेतृत्व करेंगी, तब नशे का कोई भी नेटवर्क उनकी सामूहिक शक्ति से अधिक शक्तिशाली सिद्ध नहीं हो सकेगा।

साथियो,

आज नशे की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवस्था और युवा भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसकी गंभीरता को समझते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नशे के विरुद्ध संघर्ष को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। अभी हाल ही में उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ और ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प के अनुरूप देशभर में ‘नशा मुक्त युवा के लिए विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को जागरूक करना, उन्हें स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए प्रेरित करना तथा नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है।

राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे इन्हीं प्रयासों को पंजाब में निर्णायक और व्यापक गति प्रदान करते हुए राज्य सरकार ने 1 मार्च, 2025 को ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान प्रारंभ किया। इस अभियान के अंतर्गत अब तक 54 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज कर लगभग 72 हजार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान 3,448 किलोग्राम हेरोइन, 42 टन चूरा-पोस्त और 59 लाख से अधिक नशीली गोलियाँ जब्त की गई हैं। सीमा पार तस्करी को विफल करते हुए 483 ड्रोन मार गिराए गए, जिनसे 755 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। तस्करों के आर्थिक नेटवर्क पर प्रहार करते हुए 357 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति कुर्क, 362 अवैध निर्माण ध्वस्त और 21 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। वैज्ञानिक जाँच और डिजिटल साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग से न्यायालयों में 89 प्रतिशत दोषसिद्धि दर हासिल हुई है, जो देश में सर्वाधिक है।

यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। ‘सेफ पंजाब’ व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से जनता से 47 हजार से अधिक सूचनाएँ प्राप्त हुई हैं, जबकि 1 लाख 82 हजार से अधिक युवाओं को नशामुक्ति एवं ओओएटी केंद्रों के माध्यम से उपचार और पुनर्वास से जोड़ा गया है।

इसके बावजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी संसदीय स्थायी समिति का हालिया आकलन स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है। लगभग 3 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में करीब 66 लाख लोग किसी न किसी रूप में नशे की गिरफ्त में बताए गए हैं। इनमें लगभग 21.36 लाख लोग ओपिओइड का सेवन करते हैं और करीब 6.97 लाख बच्चे इससे प्रभावित हैं। समिति ने सरकारी नशामुक्ति केंद्रों में मात्र 1.5 प्रतिशत सुधार दर पर भी चिंता व्यक्त की है। ये तथ्य स्पष्ट करते हैं कि नशे का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि रोकथाम, जन-जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और संवेदनशील जनस्वास्थ्य दृष्टिकोण से ही संभव है।

देवियो और सज्जनो,

आज संघर्ष का स्वरूप बदल गया है। नशे का खतरा खुले मैदान में दिखाई नहीं देता। यह कभी गलत मित्रता, कभी तनाव से मुक्ति के झूठे वादे और कभी क्षणिक आनंद के भ्रम के रूप में युवाओं के जीवन में प्रवेश करता है। इसलिए इस लड़ाई में प्रत्येक घर एक सुरक्षा-सीमा, प्रत्येक विद्यालय एक जागरूकता-केंद्र और प्रत्येक खेल का मैदान एक मजबूत रक्षा-कवच है। शिक्षक, चिकित्सक, पुलिसकर्मी, अभिभावक और सामाजिक संस्थाएँ इस संघर्ष के प्रहरी हैं, जबकि सजग माँ इसकी प्रथम चेतावनी और सबसे सशक्त प्रेरणा बन सकती है।

इस संघर्ष के हथियार घृणा और हिंसा नहीं, बल्कि जागरूकता, शिक्षा, संवाद, खेल, कौशल, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग होंगे। हमें नशा बेचने वालों के विरुद्ध कठोर होना है, लेकिन नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रहना है। उसे अपराधी या परिवार की बदनामी समझकर दूर करने के बजाय उपचार और सुधार का अवसर देना होगा।

कई परिवार सामाजिक संकोच और बदनामी के भय से समस्या को छिपाते रहते हैं। इससे उपचार में देरी होती है और स्थिति गंभीर बन जाती है। मैं प्रत्येक परिवार से आग्रह करता हूं कि समय रहते प्रशिक्षित विशेषज्ञों और प्रमाणित संस्थानों की सहायता लें। उपचार का उद्देश्य केवल नशा छुड़ाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को स्वस्थ, सम्मानजनक और उद्देश्यपूर्ण जीवन में पुनः स्थापित करना है।

पुनर्वास की यात्रा में परिवार, विशेषकर माँ की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। माँ को प्रेम और अनुशासन के बीच संतुलन बनाते हुए बच्चे को उपचार पूरा करने, परामर्श लेने, स्वस्थ संगति अपनाने तथा शिक्षा, कौशल या रोजगार से दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। 

 

जो युवा नशे से बाहर आ चुका है, उसे जीवनभर उसके अतीत से नहीं आँका जाना चाहिए। उसे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान का अवसर मिलना चाहिए। स्वस्थ होकर लौटे युवा की कहानी दूसरों के लिए आशा और परिवर्तन का प्रभावशाली संदेश बन सकती है। एक सुधरा हुआ जीवन केवल एक व्यक्ति की विजय नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की विजय है।

साथियो,

नशे से प्रभावित परिवारों में माताएँ अक्सर मानसिक तनाव, अपराध-बोध और सामाजिक अकेलेपन से भी गुजरती हैं। उन्हें स्वयं को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। इस समस्या के अनेक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। माताओं को भी परामर्श, सहायता समूह और परिवार के सहयोग की आवश्यकता होती है। बच्चों की सुरक्षा और परवरिश केवल माँ का नहीं, माता-पिता दोनों तथा पूरे परिवार का साझा दायित्व है।

विद्यालयों की भूमिका भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। वे केवल परीक्षा और अंक देने के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और जीवन-मूल्यों के निर्माण के संस्थान हैं। विद्यार्थियों को वैज्ञानिक और आयु-अनुकूल जानकारी दी जानी चाहिए तथा उन्हें साथियों के दबाव का सामना करने, तनाव का स्वस्थ प्रबंधन करने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता माँगने का साहस सिखाया जाना चाहिए। खेल, कला, साहित्य, परामर्श और जीवन-कौशल कार्यक्रम बच्चों को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।

पंजाब की धार्मिक और सामाजिक संस्थाएँ, पंचायतें, युवा क्लब और स्वयंसेवी संगठन भी इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनका कार्य केवल नशे की निंदा करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को उपचार तक पहुँचाना, पुनर्वास में सहयोग देना और स्वस्थ होकर लौटे व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक समाज से जोड़ना भी होना चाहिए। किसी परिवार की समस्या को अफवाह या उपहास का विषय नहीं, बल्कि सहयोग और समाधान का अवसर बनाया जाना चाहिए।

 

मेरे प्यारे युवा साथियो, 

कोई भी नशा आपको स्वतंत्र नहीं बनाता; वह धीरे-धीरे आपके निर्णय, स्वास्थ्य, संबंध और भविष्य पर अधिकार कर लेता है। सच्ची शक्ति नशे का सेवन करने में नहीं, बल्कि उसके दबाव को अस्वीकार करने में है। सच्ची मित्रता वह है जो आपको जोखिम से बचाए और सही राह पर चलने का साहस दे। परीक्षा, रोजगार या जीवन की किसी असफलता को अंत न समझें। सहायता माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता का प्रमाण है।

याद रखिए, “क्षणिक नशा कुछ समय के लिए वास्तविकता भुला सकता है, लेकिन परिश्रम, साहस और सही मार्गदर्शन वास्तविकता को बदल सकते हैं।”

आज आवश्यकता है कि ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ अभियान पंजाब के प्रत्येक जिले, ब्लॉक, गाँव और विद्यालय तक पहुँचे। माताओं को सरल भाषा में प्रमाणित जानकारी, व्यवहारिक प्रशिक्षण और निकटतम उपचार सेवाओं का स्पष्ट मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। शिक्षकों, चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, पंचायतों, धार्मिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों का एक मजबूत सहयोगी नेटवर्क विकसित किया जाए। मीडिया भी सनसनी के बजाय उपचार, पुनर्वास और आशा का संदेश प्रसारित करे।

आइए, हम ऐसी सामाजिक संस्कृति बनाएँ जिसमें परिवार बच्चों से खुलकर संवाद करें, नशे की समस्या को छिपाया न जाए, उपचार लेने में संकोच न हो और स्वस्थ होकर लौटे व्यक्ति को समाज खुले मन से स्वीकार करे। हर विद्यालय जागरूकता का केंद्र बने, हर गाँव सामुदायिक संवाद करे और हर परिवार अपने बच्चों को खेल, शिक्षा, कौशल और सेवा से जोड़े।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि जिस घर में संवाद का दीप जलता है, वहाँ नशे का अंधकार अधिक समय तक नहीं टिक सकता। जिस बच्चे को परिवार का विश्वास मिलता है, वह संकट में भी सही राह खोज सकता है। और जिस प्रदेश की माताएँ जागृत एवं संगठित हो जाएँ, उसके भविष्य को कोई शक्ति पराजित नहीं कर सकती।

आइए, हम मिलकर ऐसा पंजाब बनाएँ जहाँ खेतों में फसलें लहलहाएँ, युवाओं के हाथों में पुस्तकें, औजार और खेल का सामान हो तथा माताओं की आँखों में चिंता के आँसू नहीं, अपने बच्चों की उपलब्धियों का गर्व हो। मेरी कामना है कि ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ केवल एक कार्यक्रम न रहकर पंजाब की मातृशक्ति का ऐतिहासिक जन-आंदोलन बने।

इस अवसर पर मैं पंजाब लिट फाउंडेशन की सह-संस्थापक श्रीमती सना कौशल का विशेष उल्लेख करना चाहूँगा। उन्होंने गहरी मातृ-संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए पंजाब की मातृशक्ति को प्रदेश के भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट करने का सराहनीय प्रयास किया है। 

यहाँ उपस्थित सभी माताओं से मैं यह कहना चाहूँगा कि आप खुद को कभी कमज़ोर मत समझिए। नशे का सौदागर कितना भी ताकतवर क्यों न हो, वह एक माँ के दृढ़ संकल्प के आगे नहीं टिक सकता। आपको समाज के डर से अपनी आवाज़ दबाने की या इस विषय पर बात करने में संकोच करने की ज़रूरत नहीं है।

उठो माताओं, अब तुम्हें ही रणचंडी बनना होगा,

नशे के इस अंधकार में, तुम्हें ही सूरज बनना होगा।

तुम्हारे आंचल में पलती है कल की नई सुबह,

अपने बच्चों की खातिर, अब तुम्हें ही ढाल बनना होगा।

माँ जागेगी तो परिवार बचेगा, परिवार जागेगा तो समाज बचेगा और समाज जागेगा तो पंजाब नशामुक्त बनेगा।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि माताओं की शक्ति हमारे पंजाब को फिर से उसी ‘रंगले पंजाब’ में बदल देगी, जिसकी कल्पना हमारे गुरुओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!