SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION STONE FOR A MODERN COMMUNITY CENTER AT CHANDIGARH ON AUGUST 12, 2026.

सेक्टर 29 में सामुदायिक केन्द्र के शिलान्यास के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 12.08.2026,  बुधवारसमयः सुबह 6:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

 

नमस्कार!

आज सेक्टर 29 में इस आधुनिक और भव्य सामुदायिक केंद्र की आधारशिला रखते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। मैं इस अवसर पर नगर निगम चण्डीगढ़, इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, इंजीनियरों, वास्तुविदों, जनप्रतिनिधियों और विशेष रूप से क्षेत्र के निवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।

किसी भवन की आधारशिला रखना देखने में एक निर्माण कार्य की शुरुआत भर लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। आज हम केवल ईंट, सीमेंट और कंक्रीट से बनने वाली एक इमारत की नींव नहीं रख रहे हैं; हम सामुदायिक जीवन, सामाजिक सहभागिता, आपसी सद्भाव और नागरिक जुड़ाव के एक नए केन्द्र की नींव रख रहे हैं।

मेरी दृष्टि में, किसी शहर की वास्तविक पहचान केवल उसकी चैड़ी सड़कों और सुंदर इमारतों से नहीं होती; उसकी असली पहचान इस बात से होती है कि वहां लोगों के मिलने, जुड़ने, संवाद करने और एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनने के कितने अवसर उपलब्ध हैं। 

इसी दृष्टि से सामुदायिक केन्द्र किसी भी आधुनिक शहर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचा है।

मुझे बताया गया है कि यहाँ जो पुराना सामुदायिक केंद्र था, उसका निर्माण आज से लगभग चार दशक पहले, 1986 के आसपास हुआ था। इतने सालों तक उस इमारत ने आप सभी की सेवा की, लेकिन समय के साथ और लगातार उपयोग के कारण वह काफी जर्जर हो चुकी थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, आज हम एक नए और आधुनिक भवन की नींव रख रहे हैं।

अब जो नया सामुदायिक केंद्र यहाँ बनने जा रहा है, वह 29,440 वर्ग फुट के एक विशाल भूखंड पर तैयार किया जाएगा। यह एक शानदार तीन मंजिला (Ground+2) इमारत होगी। इसका कुल कवर्ड एरिया 17,006 वर्ग फुट होगा, जिसमें 8,511 वर्ग फुट में ग्राउंड फ्लोर, 3,968 वर्ग फुट में पहली मंजिल और 4,527 वर्ग फुट में दूसरी मंजिल का निर्माण किया जाएगा। यहां 6,600 वर्ग फुट का एक सुविधाजनक पार्किंग एरिया भी बनाया जा रहा है।

इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर लगभग 7 करोड़ 84 लाख रुपये (7,84,67,378/-) की लागत आएगी। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस काम को 12 जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नए सामुदायिक केंद्र की रूपरेखा पूरी तरह से आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतरीन जन सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि यह सेक्टर 29 के निवासियों की आज की और आने वाले कल की सभी जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर सके। 

देवियो और सज्जनो,

किसी भी शहर के विकास, उसकी सुंदरता और वहां के नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में नगर निगम की भूमिका सबसे अहम होती है। नगर निगम हमारे लोकतंत्र की वह पहली सीढ़ी है, जो सीधे तौर पर जनता से जुड़ी होती है।

आपके घर के बाहर की साफ-सफाई हो, पीने का शुद्ध पानी हो, जगमगाती स्ट्रीट लाइट्स हों, या बच्चों के खेलने के लिए हरे-भरे पार्क हों, ये सभी सुविधाएँ सुनिश्चित करना एक नगर निगम का ही दायित्व है। शहर की धड़कन सही से चलती रहे, यह जिम्मेदारी हमारे पार्षदों और निगम अधिकारियों के कंधों पर होती है।

अगर हम चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास पर नजर डालें, तो 1994 में इसके गठन के बाद से इसने एक लंबा और शानदार सफर तय किया है। ‘सिटी ब्यूटीफुल’ को सच में सुंदर बनाए रखने में, इसके पर्यावरण को हरा-भरा रखने में और इसे एक आधुनिक ‘स्मार्ट सिटी’ में बदलने में चंडीगढ़ नगर निगम का योगदान अतुलनीय रहा है।

चण्डीगढ़ स्वयं आधुनिक भारत के नगर नियोजन की एक विशिष्ट पहचान है। स्वतंत्रता के बाद इस शहर की कल्पना एक नए और आधुनिक भारत की आकांक्षाओं के प्रतीक के रूप में की गई थी। चण्डीगढ़ शहर को ली कार्बूज़ियर और उनकी टीम ने योजनाबद्ध रूप दिया और इसकी मूल योजना में ‘सेक्टर’ को एक self-sufficient neighbourhood unit के रूप में देखा गया, जहां दुकानों, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, मनोरंजन तथा सामुदायिक जीवन के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध हों। 

इसलिए सेक्टर-29 में सामुदायिक केन्द्र की स्थापना केवल एक नई सुविधा जोड़ना नहीं है; यह चण्डीगढ़ के मूल नियोजन दर्शन को आगे बढ़ाने का भी प्रयास है। चण्डीगढ़ के ‘‘मूल सिद्धांत’’ में भी शहर को ऐसी जगह के रूप में परिकल्पित किया गया था जहां नागरिक पूर्ण और सामंजस्यपूर्ण जीवन जी सकें।

आज बदलते समय के साथ शहरों की आवश्यकताएं भी बदल रही हैं। परिवार छोटे हुए हैं, जीवन की गति तेज हुई है और डिजिटल माध्यमों ने लोगों को आभासी रूप से तो बहुत करीब ला दिया है, लेकिन कई बार सामाजिक रूप से दूर भी किया है। ऐसे समय में सामुदायिक केन्द्रों की भूमिका और बढ़ जाती है।

यहां बच्चे और युवा एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे; वरिष्ठ नागरिक सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे; महिलाएं प्रशिक्षण, जागरूकता और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेंगी; विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां हो सकेंगी; स्थानीय नागरिक मिलकर अपने क्षेत्र की समस्याओं और समाधान पर विचार कर सकेंगे।

अर्थात् यह भवन केवल एक ‘सामुदायिक केंद्र’ बनकर न रह जाए, बल्कि सही मायनों में यह एक ‘सामुदायिक जुड़ाव केंद्र’ बनना चाहिए, जहाँ लोग एक-दूसरे से दिल से जुड़ सकें।

मैं विशेष रूप से कहना चाहूंगा कि सामुदायिक केन्द्र को केवल विवाह, समारोह या सामाजिक कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध भवन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आज के समय में इसे बहुउद्देश्यीय नागरिक सुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां बच्चों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों, सभी को समान सुविधा और अपनापन मिले।

इस भवन में दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए ढलानयुक्त मार्ग, सुगम शौचालय तथा बाधारहित आवागमन की व्यवस्था हो। साथ ही, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वायु संचार, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री को, जहां तक संभव हो, प्रोत्साहित किया जाए। इसके उपयोग, उपलब्धता और शुल्क से संबंधित व्यवस्थाएं भी पारदर्शी और तकनीक-सक्षम हों।

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि यह भवन समुदाय के सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपलब्ध हो। क्योंकि सार्वजनिक संपत्ति तभी वास्तव में सार्वजनिक बनती है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग उसमें अपना अधिकार और अपनापन महसूस करे।

मैं चाहता हूं कि यह केन्द्र गतिविधियों का जीवंत मंच बने। वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, योग और सामाजिक संवाद; महिलाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार और डिजिटल साक्षरता; युवाओं के लिए रोजगार मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता, खेल, साइबर सुरक्षा और नशामुक्ति; तथा बच्चों के लिए पठन-पाठन, रचनात्मक और पर्यावरण संबंधी गतिविधियां यहां आयोजित की जा सकें।

मेरे युवा साथियो, 

इस केन्द्र की वास्तविक सफलता तब होगी, जब आप इसे अपना समझेंगे। आप केवल इसके उपयोगकर्ता न बनें, बल्कि इसके कार्यक्रमों के सहभागी और प्रेरक भी बनें। स्वच्छता अभियान चलाएं, वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ें, बच्चों के लिए पठन कार्यक्रम आयोजित करें, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, साइबर सुरक्षा और नशामुक्ति जैसे अभियानों में योगदान दें।

मैं समझता हूं कि युवा वह नहीं जो केवल भविष्य की प्रतीक्षा करे; युवा वह है जो अपने हाथों से भविष्य का निर्माण करे। हमारे सामुदायिक केन्द्र युवा शक्ति को जनसेवा से जोड़ने के मंच बन सकते हैं।

साथियो,

कोई भी नगर निगम अकेले किसी शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित नहीं बना सकता। इसके लिए प्रशासन के साथ नागरिक अनुशासन और जनभागीदारी आवश्यक है। इसलिए हमें “मेरा शहर, मेरी जिम्मेदारी” की भावना अपनानी होगी। यह सड़क, यह पार्क, यह सामुदायिक केन्द्र और यह शहर हम सबका है; इसकी देखभाल भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

वर्ष 2014 में प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत मिशन-शहरी ने शहरी स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। इसके अगले चरण स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 में कचरा-मुक्त शहरों और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया है।

स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। एक स्वच्छ शहर के लिए सक्षम नगर निगम, जिम्मेदार नागरिक और निरंतर जनभागीदारी, तीनों आवश्यक हैं। हमें घर से ही गीले और सूखे कचरे को अलग करने, एकल उपयोग प्लास्टिक से बचने और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की आदत विकसित करनी होगी। मैं चाहूंगा कि यह सामुदायिक केन्द्र भी स्वच्छता और न्यूनतम अपशिष्ट के आदर्श के रूप में विकसित हो।

चण्डीगढ़ की सुंदरता उसकी हरियाली से भी जुड़ी है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती शहरी आवश्यकताओं को देखते हुए हमें जल और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। भारत सरकार का अमृत 2.0 अभियान शहरों को जल-सुरक्षित बनाने, सीवरेज व्यवस्था मजबूत करने, जलाशयों के पुनर्जीवन और हरित क्षेत्रों के विस्तार पर केंद्रित है। इसलिए नई सार्वजनिक परियोजनाओं में वर्षा जल संचयन, उपचारित जल के पुनः उपयोग, ऊर्जा की बचत और अधिक हरियाली की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आने वाली पीढ़ियां हमारा मूल्यांकन केवल इस बात से नहीं करेंगी कि हमने उनके लिए कितनी नई इमारतें खड़ी कीं, बल्कि इस बात से करेंगी कि हमने उन्हें कितना स्वच्छ जल, कितनी हरियाली और कैसा शुद्ध पर्यावरण विरासत में दिया। इसीलिए कहा जाता है कि सच्चा विकास वही है, जो हमारी आज की जरूरतों को तो पूरा करे, लेकिन हमारे बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों से कोई समझौता न करे।

साथियो,

आज नागरिकों को तेज, सरल और पारदर्शी नगर सेवाएं चाहिए। राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन इसी दिशा में नागरिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक सुगम बनाने का प्रयास है। नगर निगम चण्डीगढ़ में भी शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध है। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कम कागजी कार्यवाही, अधिक पारदर्शिता; कम विलंब, अधिक जवाबदेही; कम असुविधा, अधिक नागरिक संतुष्टि।

नगर निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाना भी आवश्यक है। बढ़ती शहरी आवश्यकताओं के बीच प्रत्येक सार्वजनिक रुपये का अधिकतम जनहित में उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। परियोजनाएं समय पर पूरी हों, गुणवत्ता से समझौता न हो और रखरखाव की व्यवस्था निर्माण के साथ ही तय की जाए। सुशासन की पहचान केवल योजना की घोषणा नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी क्रियान्वयन है।

मैं संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा करता हूं कि सेक्टर-29 के इस सामुदायिक केन्द्र का निर्माण भी निर्धारित मानकों, उच्च गुणवत्ता और तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

साथियो,

आज भारत विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की इस यात्रा में आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मैं समझता हूं कि विकसित भारत, विकसित राज्यों से बनेगा; विकसित राज्य, विकसित शहरों से बनेंगे; और विकसित शहर, विकसित मोहल्लों तथा जिम्मेदार नागरिकों से बनेंगे।

विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी सड़कें, हवाई अड्डे और उद्योग नहीं है। विकसित भारत वह होगा जहां शहर स्वच्छ हों, नागरिक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण हों, सार्वजनिक स्थान सुरक्षित और सुगम हों, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा मिले, युवाओं को अवसर मिलें, दिव्यांगजनों के लिए समान पहुंच हो और स्थानीय लोकतंत्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो।

इसीलिए मैं कहना चाहूंगा, विकसित भारत की तस्वीर देश के हर शहर की गली, हर पार्क, हर स्कूल और हर सामुदायिक केन्द्र में दिखाई देनी चाहिए।

साथियो,

चण्डीगढ़ ने अपनी सुव्यवस्थित योजना, सेक्टर व्यवस्था, हरित क्षेत्रों और वास्तुकला से विशिष्ट पहचान बनाई है। अब हमें इसे ऐसा शहर बनाना है जो स्वच्छ भी हो, हरित भी; योजनाबद्ध भी हो, समावेशी भी; आधुनिक भी हो और संवेदनशील भी।

हमारा लक्ष्य केवल एक तकनीकी रूप से उन्नत या बाहरी तौर पर खूबसूरत शहर बनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक ऐसा मानव-केंद्रित  चण्डीगढ़ बनाना होना चाहिए, जहाँ विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे, सार्वजनिक स्थान सभी के लिए सुलभ हों और नागरिक स्वयं शहर के विकास में सहभागी बनें।

आखिरकार, ‘सिटी ब्यूटीफुल’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि यह हमारी एक साझा जिम्मेदारी और सामूहिक संकल्प है। हमें ऐसी व्यवस्था और ऐसी नागरिक संस्कृति विकसित करनी होगी, जहाँ प्रत्येक नागरिक गर्व से कह सके कि अपने इस खूबसूरत शहर को सुंदर बनाए रखने और इसे और भी बेहतर बनाने में मेरा भी पूरा योगदान है।

साथियो,

भारत की सबसे बड़ी शक्ति हमारी विविधता है। हम अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, विभिन्न धर्मों और परंपराओं को मानते हैं, लेकिन हमें जो बात मजबूती से जोड़ती है, वह है हमारी भारतीयता। हमारे सामुदायिक केन्द्र ऐसे स्थान हैं, जहाँ यह विविधता और एकता हर दिन एक साथ दिखाई देती है। जब यहाँ त्योहार मनाए जाएं तो सामाजिक सद्भाव बढ़े, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हमारी विरासत की झलक मिले, बैठकों में स्थानीय समस्याओं का समाधान हो और युवाओं के कार्यक्रमों से राष्ट्र निर्माण का संदेश निकले। 

दीवारें केवल भवन बनाती हैं, लेकिन आपसी संवाद एक समुदाय बनाता है। ईंट से ईंट जुड़े तो भवन बनता है, और दिल से दिल जुड़े तो समाज बनता है। आज इस आधारशिला के साथ हम केवल एक सामुदायिक केंद्र नहीं बना रहे, बल्कि हम आने वाले कल के लिए एक मजबूत और जीवंत समुदाय का निर्माण कर रहे हैं।

मैं यहां उपस्थित बच्चों और युवाओं से एक विशेष बात कहना चाहूंगा। सार्वजनिक संपत्ति जनता के संसाधनों से बनती है, इसलिए इसकी सुरक्षा हम सबका दायित्व है। जिस दिन हम सार्वजनिक स्थानों को अपने घर जितना सम्मान देना सीख जाएंगे, उस दिन हमारे शहरों का स्वरूप स्वतः बदल जाएगा।

आज जब हम इस भवन की आधारशिला रख रहे हैं, तो मैं चाहता हूं कि हम इसके साथ नागरिक जिम्मेदारी की भी आधारशिला रखें। आइए, हम पांच संकल्प लें, अपने क्षेत्र को स्वच्छ रखेंगे; पानी और ऊर्जा बचाएंगे; सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेंगे; वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहेंगे; तथा नगर निगम और प्रशासन के साथ मिलकर विकसित चण्डीगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे।

अंत में, मैं नगर निगम चण्डीगढ़ के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों, अभियंताओं, सफाई कर्मचारियों, बागवानी कर्मियों तथा सभी क्षेत्रीय कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए बधाई देता हूं।

मुझे विश्वास है कि यह सामुदायिक केन्द्र सेक्टर-29 में जनसेवा, सामाजिक सद्भाव और नागरिक सहभागिता का जीवंत केन्द्र बनेगा।

आइए, हम सब मिलकर स्वच्छ चण्डीगढ़, हरित चण्डीगढ़, समावेशी चण्डीगढ़ और विकसित चण्डीगढ़ के निर्माण का संकल्प लें।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!