SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERNATIONAL YOUTH DAY, THE BREAK FREE HIV/AIDS AWARENESS CAMPAIGN AT PUNJAB LOK BHAVAN ON AUGUST 12, 2026.

एचआईवी/एड्स संबंधी ‘सघन आईईसी अभियान के तीसरे चरण’ पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 12.08.2026,  बुधवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

       

नमस्कार!

आज 12 अगस्त का यह दिन हम सभी के लिए अत्यंत विशेष है। आज पूरा विश्व ‘अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस’ मना रहा है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए युवा शक्ति की असीम क्षमता को पहचानने का दिन है। आज इस विशेष अवसर पर "Break Free – One Scan, One Step Towards Breaking Free" अभियान तथा Intensified IEC Campaign का शुभारंभ करना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का विषय है।

आज का यह अवसर केवल किसी सरकारी अभियान के उद्घाटन का अवसर नहीं है। यह जागरूकता को व्यवहार में, तकनीक को जनसेवा में और युवा शक्ति को सामाजिक परिवर्तन की शक्ति में परिवर्तित करने का अवसर है। आज हम एक ऐसे अभियान की शुरुआत कर रहे हैं, जिसका संदेश बहुत सरल है, जानकारी प्राप्त कीजिए, अपने जोखिम को समझिए, आवश्यकता होने पर जांच कराइए और बिना किसी भय अथवा संकोच के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़िए। 

मैं समझता हूं कि आज का कार्यक्रम युवाओं के नेतृत्व में एक ऐसे जन-आंदोलन की शुरुआत है, जो जागरूकता, जिम्मेदारी और स्वस्थ जीवन के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाएगा।

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि चण्डीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के मार्गदर्शन में, एचआईवी की रोकथाम, जागरूकता, निःशुल्क परामर्श एवं परीक्षण तथा उपचार सेवाओं के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही है। समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचने के लिए किए जा रहे इनके प्रयास वास्तव में प्रशंसनीय हैं।

मेरे युवा साथियो,

भारत आज विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादियों वाले देशों में है। लगभग 65 प्रतिशत भारतीय 35 वर्ष से कम आयु के हैं। यह जनसांख्यिकीय शक्ति भारत के लिए एक असाधारण अवसर है। लेकिन यह अवसर तभी राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित होगा जब हमारी युवा पीढ़ी शिक्षित, स्वस्थ, जागरूक, कुशल, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार होगी।

इसीलिए मैं मानता हूं कि अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर इस अभियान की शुरुआत अत्यंत सार्थक है। आज के युवा केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं हैं; वे परिवर्तन के नेतृत्वकर्ता हैं। वे केवल कल के भारत का भविष्य नहीं हैं, वे आज के भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा हैं।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने युवा शक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि "Youth power is both the agent of change and also the beneficiaries of change." अर्थात् युवा शक्ति परिवर्तन की वाहक भी है और परिवर्तन की लाभार्थी भी।

आज हमारे हाथ में स्मार्टफोन है, इंटरनेट हमारी पहुंच में है और दुनिया की जानकारी कुछ ही क्षणों में हमारे सामने आ सकती है। लेकिन डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही और गलत जानकारी में अंतर करने की क्षमता है।

विशेषकर स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर सोशल मीडिया में आधी-अधूरी जानकारियां, मिथक और भ्रम कई बार बीमारी से भी अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए डिजिटली सक्षम होने का अर्थ केवल मोबाइल चलाना नहीं है; इसका अर्थ है, वैज्ञानिक सोच रखना, प्रमाणित स्रोतों पर विश्वास करना और किसी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता को जांचना।

इसी संदर्भ में आज प्रारंभ किया जा रहा "Break Free"अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल एक QR Code स्कैन करके कोई व्यक्ति गोपनीय तरीके से अपना HIV Self-Risk Assessment कर सकता है, एचआईवी से संबंधित वैज्ञानिक और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकता है और आवश्यकता होने पर संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है।

यहां मैं एक बात विशेष रूप से स्पष्ट करना चाहूंगा, Self-Risk Assessment स्वयं एच.आई.वी. की चिकित्सकीय जांच अथवा निदान नहीं है। यह व्यक्ति को अपने संभावित जोखिम को समझने और आवश्यकता होने पर उचित जांच तथा परामर्श की ओर बढ़ने में सहायता करने का माध्यम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्पष्ट करता है कि एच.आई.वी. की पुष्टि निर्धारित परीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती है; केवल self-test या risk assessment को अंतिम diagnosis नहीं माना जाना चाहिए।

इसलिए हमारा संदेश होना चाहिए, "Scan से शुरुआत कीजिए, आवश्यकता हो तो Test तक पहुंचिए, और सही जानकारी के साथ स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़िए।”

मुझे विशेष प्रसन्नता है कि यह अभियान युवाओं की भाषा में, युवाओं के माध्यम से और युवाओं के लिए तैयार किया गया है।

कई बार सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इसलिए सीमित प्रभाव छोड़ते हैं क्योंकि उनका संदेश लोगों तक उस भाषा और माध्यम में नहीं पहुंचता जिससे वे स्वयं को जोड़ सकें। लेकिन आज यदि एक QR Code, एक मोबाइल स्क्रीन और कुछ मिनट का समय किसी व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना सकता है, तो हमें इस तकनीक का पूरा उपयोग करना चाहिए।

केंद्र सरकार ने भी पिछले वर्षों में डिजिटल स्वास्थ्य को जनस्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन देश में नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित कर रहा है। जुलाई 2026 तक 93 करोड़ से अधिक ABHA खाते बनाए जा चुके हैं और 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड इनसे जोड़े जा चुके हैं। इसी प्रकार eSanjeevani ने जून 2026 तक 48 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन उपलब्ध कराए हैं। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि तकनीक किस प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बना सकती है।

"Break Free" इसी व्यापक डिजिटल परिवर्तन की भावना को आगे बढ़ाता है, Technology for Awareness, Technology for Prevention vkSj Technology for Public Good.

देवियो एवं सज्जनो,

एच.आई.वी. के विरुद्ध भारत की यात्रा तीन दशकों से अधिक समय से निरंतर जारी है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) वर्ष 1992 से देश के HIV/AIDS कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहा है। समय के साथ यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोकथाम, जांच, उपचार, समुदाय की भागीदारी तथा एच.आई.वी. के साथ जीवन जी रहे लोगों के अधिकारों तक विस्तृत हुआ है।

भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक National AIDS and STD Control Programme Phase-V को पूर्णतः Central Sector Scheme के रूप में लागू किया था, जिसके लिए लगभग 15 हजार 472 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास लक्ष्य 3.3’ को प्राप्त करना है। हमारा लक्ष्य है कि रोकथाम, जांच और उपचार सेवाओं के एक व्यापक पैकेज के माध्यम से, वर्ष 2030 तक इस महामारी को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए।

इन प्रयासों के परिणाम उत्साहजनक हैं। वर्ष 2020-21 में 4.13 करोड़ एच.आई.वी. परीक्षणों की संख्या बढ़कर 2024-25 में 6.62 करोड़ हो गई। Antiretroviral Treatment (ART) से जुड़े लोगों की संख्या 14.94 लाख से बढ़कर 18.60 लाख तथा Viral Load Testing 8.90 लाख से बढ़कर 15.98 लाख तक पहुंची। वर्ष 2010 से 2024 के बीच भारत में नए एच.आई.वी. संक्रमणों में 48.7 प्रतिशत, एड्स से संबंधित मृत्यु में 81.4 प्रतिशत तथा मां से बच्चे में संक्रमण में 74.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

ये उपलब्धियां हमें आशा देती हैं, लेकिन हमारा कार्य तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हर व्यक्ति सही जानकारी, समय पर जांच और उपचार तक नहीं पहुंचता तथा एच.आई.वी. से जुड़े सामाजिक कलंक का अंत नहीं होता।

इसीलिए 95-95-95 का लक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस रणनीति के तहत यह तय किया गया है कि एच.आई.वी. के साथ जी रहे 95 प्रतिशत लोगों को अपनी इस स्थिति की जानकारी हो; जिनकी पहचान हो चुकी है, उनमें से 95 प्रतिशत लोग नियमित रूप से एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी ले रहे हों; और जो लोग इलाज करवा रहे हैं, उनमें से 95 प्रतिशत लोगों के शरीर में वायरस का असर नगण्य हो जाए।

ऐसा करने से न केवल इस बीमारी के फैलने में भारी कमी आएगी, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य में भी बड़ा सुधार होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसे एचआईवी नियंत्रण की महत्वपूर्ण कसौटी मानता है।

मेरे युवा साथियो,

एच.आई.वी. के विषय में जागरूकता के साथ-साथ हमें इससे जुड़े मिथकों को भी समाप्त करना होगा। एच.आई.वी. सामान्य सामाजिक संपर्क, जैसे हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने या भोजन साझा करने से नहीं फैलता। यह मुख्यतः संक्रमित रक्त, वीर्य, योनि द्रव, स्तन-दूध तथा गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैल सकता है। सुरक्षित व्यवहार, समय पर जांच और उपचार इसके प्रभावी नियंत्रण के साधन हैं। इसलिए एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाना विज्ञान नहीं, भेदभाव है।

एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, समान अवसर, चिकित्सा सुविधा और सामाजिक स्वीकार्यता चाहिए। HIV and AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 भी उनके साथ किसी प्रकार के भेदभाव को रोकता है और उनकी निजी जानकारी तथा उनकी सहमति के अधिकार की रक्षा करता है।

प्रभावी एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART)  के माध्यम से एच.आई.वी. के साथ जीवन जी रहे लोग लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नियमित उपचार से Viral Load नियंत्रित होने पर संक्रमण के प्रसार का जोखिम भी प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। इसलिए diagnosis अंत नहीं, बल्कि उपचार और आशा की शुरुआत है।

प्रिय युवाओ,

आज सोशल मीडिया आपके हाथ में एक बड़ी शक्ति है। यदि चण्डीगढ़ का प्रत्येक युवा एक प्रमाणिक HIV Awareness Message अपने पांच मित्रों तक पहुंचाए, प्रत्येक रेड रिब्बन क्लब पांच नए युवाओं को जागरूक करे और प्रत्येक विद्यार्थी कम-से-कम एक मिथक को वैज्ञानिक तथ्य से बदल दे, तो यह अभियान जन-आंदोलन बन सकता है।

इसीलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि एक QR Code स्कैन कीजिए, स्वयं जागरूक बनिए और कम-से-कम पांच अन्य लोगों को भी सही जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित कीजिए। याद रखिए, बड़ा परिवर्तन हमेशा बड़े कदम से नहीं, कई बार एक सही निर्णय से शुरू होता है। यही इस अभियान की भावना है, One Scan, One Step Towards Breaking Free.

देवियो एवं सज्जनो,

यह अभियान केवल प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, औद्योगिक क्षेत्रों, कार्यस्थलों और समुदायों तक ले जाना होगा। रेड रिब्बन क्लब, एन.एस.एस., एन.सी.सी., नेहरू युवा केन्द्र संगठनए स्वयंसेवी संस्थाओं, रेज़िडेंस वेलफेयर एसोसिएशन्स तथा स्वास्थ्य संस्थानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

अभियान की सफलता पोस्टरों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि क्या लोगों में एच.आई.वी. की सही जानकारी बढ़ी, जांच को लेकर झिझक घटी, उपचार तक पहुंच आसान हुई और सामाजिक संकोच में कमी आई।

मैं शिक्षकों और अभिभावकों से आग्रह करता हूं कि वे युवाओं के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षित व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुलकर संवाद करें। जहां सही जानकारी नहीं होती, वहां अफवाहें स्थान ले लेती हैं।

मीडिया की भी बड़ी जिम्मेदारी है, सनसनी नहीं, संवेदनशीलता; अफवाह नहीं, विज्ञान; पहचान उजागर करना नहीं, गरिमा की रक्षा।

साथियो,

यह अभियान MY Bharat की उस भावना से भी जुड़ा है, जिसमें युवाओं को राष्ट्र निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है। मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि केवल संदेश पाने वाले नहीं, संदेश पहुंचाने वाले युवा बनिए। केवल जागरूक नागरिक नहीं, जागरूकता फैलाने वाले नागरिक बनिए। परिवर्तन की प्रतीक्षा मत कीजिए, परिवर्तन की शुरुआत स्वयं कीजिए।

स्वामी विवेकानंद का संदेश, ‘‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको’’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, एक ऐसा समाज जहां एच.आई.वी. के बारे में सही जानकारी हो, जांच को लेकर भय न हो, उपचार सहज उपलब्ध हो और किसी भी व्यक्ति को सामाजिक कलंक या भेदभाव का सामना न करना पड़े।

यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की हमारी राष्ट्रीय आकांक्षा से भी जुड़ा है। विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सम्मान और समान अवसरों वाला समाज है। मैं कहना चाहूंगा, ‘‘स्वस्थ युवा ही स्वस्थ भारत बनाएगा और स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा।’’

इसी भावना को फिट इंडिया मूवमेंट भी आगे बढ़ाता है। इसका संदेश है कि स्वस्थ रहने का अर्थ केवल बीमारी होने पर इलाज कराना नहीं, बल्कि सही जानकारी रखना, बीमारियों से बचाव के उपाय अपनाना, नियमित व्यायाम करना और अपने स्वास्थ्य से जुड़े सही एवं जिम्मेदार निर्णय लेना भी है।

एच.आई.वी. का विषय किसी पर नैतिक निर्णय देने का नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जानकारी, रोकथाम और उपचार उपलब्ध कराने का विषय है। हेल्थ सिस्टम पर विश्वास तभी बनेगा जब गोपनीयता और गरिमा हमारी सेवाओं का आधार हों। 

जिस व्यक्ति ने जांच कराई है, उसे सामाजिक संकोच नहीं सम्मान मिलना चाहिए; और जिसे एच.आई.वी. है, उसे निराशा नहीं उपचार और आशा मिलनी चाहिए। इसीलिए हमें वास्तव में Break Freeकरना है, गलत सूचना से। डर से। सामाजिक संकोच से। भेदभाव से।

मेरे युवा साथियो,

आज आइए हम संकल्प लें कि हम केवल प्रमाणिक जानकारी का प्रसार करेंगे, समय पर जांच और उपचार को प्रोत्साहित करेंगे, एच.आई.वी. के साथ जीवन जी रहे लोगों के साथ भेदभाव नहीं करेंगे, सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करेंगे तथा कम-से-कम पांच अन्य लोगों को इस अभियान से जोड़ेंगे।

याद रखिए, जागरूक समाज की शुरुआत जागरूक व्यक्ति से होती है। स्वस्थ राष्ट्र की शुरुआत स्वस्थ नागरिक से होती है। और विकसित भारत की शुरुआत जिम्मेदार युवा से होती है।

देवियो एवं सज्जनो,

भारत ने एच.आई.वी. नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन 2030 का लक्ष्य हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मैं चाहता हूं कि चण्डीगढ़ तकनीक, मज़बूत स्वास्थ्य सेवाएं और जनभागीदारी के आधार पर एच.आई.वी. जागरूकता का एक मॉडल केन्द्र शासित प्रदेश बने।

मैं अपनी बात इन पंक्तियों के साथ समाप्त करना चाहूंगा, ‘‘ज्ञान से भय की दीवार गिराएं, जांच से विश्वास की राह बनाएं। भेदभाव नहीं, सम्मान बढ़ाएं, मिलकर स्वस्थ भारत बनाएं।’’

आइए, हम सब मिलकर कहें, One Scan… One Step… Towards Breaking Free.एक स्कैन-जागरूकता की ओर एक कदम। एक सही निर्णय-स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम। एक जागरूक युवा-विकसित भारत की ओर एक कदम।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं "Break Free – One Scan, One Step Towards Breaking Free" अभियान एवं Intensified IEC Campaign के शुभारंभ की घोषणा करता हूं।

मैं चण्डीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी, स्वास्थ्य विभाग, चण्डीगढ़ प्रशासन, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, रेड रिब्बन क्लब, स्वयंसेवी संगठनों, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वयंसेवकों और मीडिया को हार्दिक बधाई देता हूं।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें, भय नहीं जानकारी। भेदभाव नहीं, सम्मान। लापरवाही नहीं, जिम्मेदारी। और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!