SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF LAUNCHING OF CBDC BASED DIRECT BENEFIT TRANSFER UNDER THE PUBLIC DISTRIBUTION SYSTEM AT CHANDIGARH ON AUGUST 14, 2026.

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत CBDC-आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के शुभारंभ पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 14.08.2026,  शुक्रवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज 14 अगस्त 2026 का यह दिन चंडीगढ़ के इतिहास में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के डिजिटल शासन और सार्वजनिक कल्याण के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, हमारा ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ पूरे देश के सामने आधुनिक शासन, पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण की एक ऐसी नई मिसाल पेश कर रहा है, जिस पर हर नागरिक को गर्व होगा। 

‘‘नया दौर है, नई सोच है, नया है हमारा संकल्प,

तकनीक और पारदर्शिता ही है सुशासन का एकमात्र विकल्प।’’

मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व है कि चंडीगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS) के अंतर्गत खाद्य सब्सिडी के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency - CBDC) आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू करने वाला देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश बन रहा है।

यह उपलब्धि केवल चंडीगढ़ प्रशासन की नहीं है। यह भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, पंजाब नेशनल बैंक, सूचीबद्ध व्यापारियों, संबंधित विभागों और सबसे बढ़कर हमारे लाभार्थी परिवारों के विश्वास एवं सहयोग का परिणाम है।

मैं इस ऐतिहासिक पहल से जुड़े प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी, बैंक प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, व्यापारी और लाभार्थी को हार्दिक बधाई देता हूँ।

साथियो, 

आज इस बहुउद्देशीय हॉल से जिस व्यवस्था का शुभारंभ हो रहा है, वह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के वितरण में एक ऐतिहासिक और ढांचागत क्रांति है। अब तक लाभार्थियों को उनके बैंक खातों में पारंपरिक नकद सब्सिडी ट्रांसफर की जाती थी। लेकिन आज से पात्र लाभार्थी परिवारों की खाद्य सुरक्षा सब्सिडी सीधे उनके व्यक्तिगत ‘डिजिटल रुपया (e₹) वॉलेट’ में स्थानांतरित की जाएगी।

बहुत-से लोगों के मन में यह प्रश्न हो सकता है कि डिजिटल रुपया क्या है और यह सामान्य डिजिटल भुगतान से किस प्रकार अलग है। डिजिटल रुपया, जिसे ‘ई-रुपया’ (e₹) भी कहा जाता है, भारतीय रुपये का डिजिटल रूप है। जिस प्रकार हमारे पास नकद रुपये होते हैं, उसी प्रकार डिजिटल रुपया हमारे मोबाइल फोन में बने सुरक्षित ‘डिजिटल रुपया (e₹) वॉलेट’ में रखा जा सकता है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी और समर्थित वैध मुद्रा है। इसका मूल्य सामान्य रुपये के बराबर होता है। 

इस डिजिटल रुपये के माध्यम से हमारे लाभार्थी प्रशासन द्वारा सूचीबद्ध व्यापारियों और दुकानों से सीधे खाद्यान्न खरीद सकेंगे। इसका अर्थ यह है कि सरकारी खजाने से लेकर आपकी रसोई की मेज तक का सफर अब एक सुरक्षित, पारदर्शी और एकल डिजिटल रेल पर पूरा होगा।

देवियो और सज्जनो,

यह नया मॉडल भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई ऊँचाई पर ले जाता है। इसके माध्यम से हमें अभूतपूर्व लाभ प्राप्त होंगे। सबसे पहला लाभ है, सीधा और पारदर्शी हस्तांतरण। खाद्य सब्सिडी बिना किसी बिचौलिए के सीधे पात्र लाभार्थी के डिजिटल रुपया वॉलेट में पहुँचेगी, जिससे देरी, कागजी कार्रवाई और गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

दूसरा लाभ है, शुरू से अंत तक डिजिटल रिकॉर्ड। सरकारी खजाने से लाभार्थी के वॉलेट और वहाँ से खाद्यान्न की खरीद तक पूरी प्रक्रिया का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। तीसरा लाभ है, उद्देश्य-आधारित उपयोग। सब्सिडी का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिसके लिए वह दी गई है। चौथा लाभ है, तत्काल जानकारी। सरकार वितरण और उपयोग की जानकारी समय पर देख सकेगी तथा लाभार्थी भी अपने वॉलेट में राशि और उसके उपयोग का विवरण देख सकेगा।

पाँचवाँ लाभ है, सुरक्षित और तेज भुगतान। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समर्थित डिजिटल व्यवस्था भुगतान को सरल, तेज और सुरक्षित बनाएगी। छठा लाभ है, लाभार्थी का सम्मान और अधिकार। उसे कार्यालयों के चक्कर लगाने या बिचौलियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। सातवाँ लाभ है, वित्तीय समावेशन। यह व्यवस्था वंचित परिवारों को सुरक्षित डिजिटल वित्तीय प्रणाली से जोड़कर उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाएगी। इस प्रकार, यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और लाभार्थी की गरिमा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियो,

आज की यह सफलता एक दिन में प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे कई महीनों की योजनाबद्ध तैयारी और विभिन्न संस्थाओं का लगातार समन्वय है। पात्र लाभार्थी परिवारों को डिजिटल रुपया वॉलेट से जोड़ना, घर-घर जाकर सत्यापन करना, विशेष सहायता शिविर लगाना, लाभार्थियों को पूरी प्रक्रिया समझाना, व्यापारियों को सूचीबद्ध करना, डिजिटल वॉलेट एवं क्यूआर भुगतान का परीक्षण करना और तकनीकी प्रणाली को सुरक्षित बनाना, इन सभी कार्यों को गंभीरता से पूरा किया गया है।

चंडीगढ़ प्रशासन, भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और पंजाब नेशनल बैंक के बीच मजबूत तकनीकी सहयोग इस कार्यक्रम की रीढ़ रहा है।

इस व्यापक अभियान का उद्देश्य केवल नई व्यवस्था आरंभ करना नहीं था। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि व्यवस्था लागू होने पर कोई भी पात्र परिवार जानकारी, प्रशिक्षण अथवा तकनीकी सहायता के अभाव में पीछे न रह जाए। चंडीगढ़ प्रशासन का स्पष्ट संकल्प है “तकनीक सुविधा बनेगी, बाधा नहीं; तकनीक अधिकार मजबूत करेगी, अधिकार से वंचित नहीं।”

साथियो,

हमारी विकास-नीति का मूल भाव अंत्योदय है यानी समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान। महात्मा गांधी जी ने हमें प्रेरणा दी थी कि कोई निर्णय लेते समय समाज के सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को याद करें और विचार करें कि उस निर्णय से उसके जीवन में क्या सुधार आएगा। 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के विचार और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र का सार भी यही है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

आज की यह पहल उसी भावना का आधुनिक रूप है। इसे हम “डिजिटल अंत्योदय” कह सकते हैं, जहाँ अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति की खाद्य सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री जी ने शासन में “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” और “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” का आह्वान किया है। चंडीगढ़ की यह पहल इन्हीं सिद्धांतों का व्यावहारिक उदाहरण है। यहाँ सुधार भी है, बेहतर कार्यप्रणाली भी है और जनकल्याणकारी व्यवस्था का परिवर्तन भी है।

देवियो और सज्जनो,

खाद्य सुरक्षा किसी भी कल्याणकारी राष्ट्र का बुनियादी दायित्व है। कोई नागरिक भूखा न सोए और किसी गरीब परिवार को भोजन तथा अन्य आवश्यकताओं के बीच कठिन चुनाव न करना पड़े, इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को व्यापक रूप दिया गया है। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2024 से लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को पाँच वर्षों तक निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस अवधि में लगभग 11.80 लाख करोड़ रुपये की खाद्य सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी। यह योजना विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में शामिल है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों को यह भरोसा भी देती है कि कठिन परिस्थितियों में देश और सरकार उनके साथ खड़े हैं। अब CBDC&आधारित व्यवस्था के माध्यम से हम खाद्य सुरक्षा की इसी प्रतिबद्धता को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उद्देश्यपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

इसी क्रम में ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ ने राशन की सुविधा को किसी एक स्थान या दुकान तक सीमित रहने से मुक्त किया है। यह व्यवस्था सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है। इसके माध्यम से प्रवासी श्रमिक और उनके परिवार देश में अपनी पसंद की उचित मूल्य की दुकान से राशन प्राप्त कर सकते हैं। एक मजदूर रोजगार के लिए दूसरे शहर में जाए, तो उसका खाद्य सुरक्षा का अधिकार पीछे नहीं छूटना चाहिए। उसकी आजीविका का स्थान बदल सकता है, लेकिन उसका अधिकार नहीं। ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ का संदेश है, “नागरिक जहाँ जाए, उसका अधिकार उसके साथ जाए।” और डिजिटल रुपया आधारित व्यवस्था इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि “लाभार्थी जहाँ हो, लाभ सुरक्षित रूप से उसी तक पहुँचे।”

इस पूरी डिजिटल यात्रा में जनधन, आधार और मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत देश में लगभग 58 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं। इनमें लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के और लगभग 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इसका अर्थ है कि करोड़ों गरीब परिवारों, महिलाओं, ग्रामीण नागरिकों और छोटे कामगारों को बैंकिंग, बचत, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ा गया है।

जनधन, आधार और मोबाइल ने सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाकर शासन में क्रांतिकारी बदलाव किया है। डीबीटी के माध्यम से अब तक 52 लाख करोड़ रुपये से अधिक हस्तांतरित हुए हैं और 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित बचत हुई है। यह प्रमाण है कि सही तकनीक, स्पष्ट नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति मिलकर शासन में कितना बड़ा परिवर्तन ला सकती है। डिजिटल रुपया आधारित खाद्य सब्सिडी व्यवस्था इसी यात्रा का अगला स्वाभाविक चरण है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने गरीब, किसान, महिला, युवा, श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने गरीब माताओं-बहनों को स्वच्छ रसोई ईंधन उपलब्ध कराया है; आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने पात्र परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है; प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी है; प्रधानमंत्री आवास योजना ने पात्र परिवारों को पक्के घर का सपना साकार करने की दिशा में कार्य किया है; वहीं जल जीवन मिशन ने घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के संकल्प को आगे बढ़ाया है।

इसी प्रकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए ऋण की सुविधा बढ़ाई है, जबकि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने रेहड़ी-पटरी वालों को औपचारिक ऋण व्यवस्था और डिजिटल लेन-देन से जोड़ा है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना ने सामान्य नागरिकों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। 

इन सभी योजनाओं में एक साझा सोच दिखाई देती है, लाभ को बिचौलियों से मुक्त करके सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुँचाना, नागरिक को निर्भर नहीं बल्कि सशक्त बनाना और कल्याण को दया नहीं, अधिकार एवं सम्मान से जोड़ना। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण  व्यवस्था इसी व्यापक जनकल्याणकारी सोच का आधुनिक उदाहरण है।

साथियो, 

आज भारत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में विश्व के सामने एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। आधार, जनधन, मोबाइल, यूपीआई, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, डिजिलॉकर और डिजिटल रुपया जैसी व्यवस्थाओं ने शासन तथा नागरिक सेवाओं की तस्वीर बदल दी है। 

लेकिन डिजिटल इंडिया का अर्थ केवल मोबाइल एप्लिकेशन, पोर्टल या ऑनलाइन भुगतान नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है कि नागरिक को सरकारी सेवा के लिए बार-बार कार्यालय न जाना पड़े, उसे अपने अधिकार की जानकारी समय पर मिले, सरकारी सहायता बिना देरी और बिना कटौती के पहुँचे तथा शासन पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बने।

हमें याद रखना चाहिए कि “डिजिटल व्यवस्था तभी सफल है, जब वह मानवीय भी हो; तेज होने के साथ सरल भी हो; और आधुनिक होने के साथ समावेशी भी हो।” आधुनिक नगर नियोजन का प्रतीक चंडीगढ़ अब डिजिटल सुशासन और नागरिक-केंद्रित जनकल्याण का भी राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर अग्रसर है।

CBDC&आधारित खाद्य सब्सिडी का यह कार्यक्रम केवल चंडीगढ़ तक सीमित पहल नहीं है। यह देश के लिए एक उपयोगी और दोहराए जा सकने वाले मॉडल के रूप में विकसित हो सकता है। यहाँ के अनुभव, चुनौतियाँ और समाधान भविष्य में अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। 

हम स्वतंत्र भारत की विकास-यात्रा के उस महत्वपूर्ण दौर में हैं, जब राष्ट्र ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी अर्थव्यवस्था या आधुनिक भवन नहीं है। विकसित भारत वह होगा जहाँ कोई नागरिक भूखा न रहे, प्रत्येक परिवार को शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की सुविधा मिले, महिलाओं को समान अवसर और आर्थिक स्वतंत्रता मिले, किसान समृद्ध हों, युवा कुशल हों, तकनीक नागरिक के जीवन को सरल बनाए और योजनाओं का पूरा लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।

यदि हमें 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है, तो हमें तकनीक और करुणा, विकास और समावेशन तथा नवाचार और विश्वास, इन सभी को साथ लेकर चलना होगा। ‘विकसित भारत’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि हर नागरिक का सामूहिक संकल्प है। इसकी राह डिजिटल और व्यवस्था आधुनिक होगी, लेकिन इसका हृदय मानवीय और लक्ष्य अंतिम व्यक्ति का कल्याण होगा।

मैं सभी लाभार्थी परिवारों से आग्रह करता हूँ कि वे इस नई व्यवस्था को समझें और आत्मविश्वास के साथ इसका उपयोग करें। अपना मोबाइल नंबर, डिजिटल वॉलेट और आवश्यक विवरण सुरक्षित रखें तथा किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड या वॉलेट संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।

मैं सूचीबद्ध व्यापारियों से भी आग्रह करता हूँ कि वे लाभार्थियों के साथ धैर्य और सम्मान से व्यवहार करें, उन्हें क्यू.आर. भुगतान की प्रक्रिया समझाएँ, निर्धारित गुणवत्ता और मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराएँ तथा प्रत्येक लेन-देन में पूरी पारदर्शिता रखें। अधिकारियों से मेरी अपेक्षा है कि वे नियमित निगरानी रखें, समस्याओं का तत्काल समाधान करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र परिवार तकनीकी कारणों से अपने अधिकार से वंचित न हो। 

आज के इस अवसर पर मैं भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ, जिसने इस पहल को दिशा और सहयोग प्रदान किया है। मैं भारतीय रिज़र्व बैंक को डिजिटल रुपया प्रणाली, तकनीकी मार्गदर्शन और सुरक्षित भुगतान व्यवस्था के लिए धन्यवाद देता हूँ। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र तथा पंजाब नेशनल बैंक की टीमों को तकनीकी एकीकरण और इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए बधाई देता हूँ। साथ ही, चंडीगढ़ प्रशासन के खाद्य एवं आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामले एवं वैध मापविज्ञान विभाग सहित सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत की सराहना करता हूँ।

साथियो, 

इतिहास केवल बड़े भाषणों से नहीं बनता। इतिहास तब बनता है, जब नई सोच सामान्य नागरिक के जीवन में वास्तविक सुधार लेकर आती है। आज चंडीगढ़ एक ऐसा ही कदम उठा रहा है। जब नीयत जनकल्याण की हो, नीति पारदर्शिता की हो और तकनीक नागरिक के हित में हो, तो परिवर्तन केवल संभव नहीं, निश्चित हो जाता है।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि चंडीगढ़ को पारदर्शी शासन, डिजिटल नवाचार, खाद्य सुरक्षा और नागरिक सुविधा का आदर्श केंद्रशासित प्रदेश बनाएँगे। तकनीक को सेवा का माध्यम, जनकल्याण को शासन का उद्देश्य और अंतिम व्यक्ति के सम्मान को विकास की कसौटी बनाएँगे।

इसी विश्वास के साथ मैं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत डिजिटल रुपया आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण व्यवस्था के शुभारंभ पर सभी लाभार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि चंडीगढ़ का यह मॉडल आने वाले समय में पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा और ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द! जय भारत!