SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CIVIC ISSUES RAISED BY FOSWAC REPRESENTATIVES AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 6, 2026.
- by Admin
- 2026-09-06 14:10
FOSWAC के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए नागरिक मुद्दों संबंधी आयोजित बैठक के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 06.09.2026, रविवार समयः दोपहर 12:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज Federation of Sectors Welfare Association Chandigarh (FOSWAC)के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विभिन्न नागरिक मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद आपसे संवाद करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है।
सबसे पहले मैं फेडरेशन और चंडीगढ़ के सभी ‘रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स’ को बधाई देना चाहता हूँ कि वे केवल शिकायतें लेकर नहीं आए, बल्कि समस्याओं के साथ-साथ उनके समाधान के सुझाव भी लेकर आए हैं। लोकतंत्र में नागरिकों की आवाज़ को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि जो नागरिक चंडीगढ़ की समस्याओं को उठाते हैं, वे प्रशासन के विरुद्ध नहीं हैं; वे चंडीगढ़ के साथ खड़े हैं और उसके बेहतर भविष्य के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
साथियो,
चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के आधुनिक सपनों, नियोजन और दूरदृष्टि का प्रतीक है। चंडीगढ़ की नगर योजना प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बूज़िए ने तैयार की। वर्ष 1952 में इसकी आधारशिला रखी गई और 1966 में यह पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी तथा केंद्र शासित प्रदेश बना। आज भी दो राज्यों की राजधानी होने का गौरव इसकी विशिष्ट पहचान है।
केवल 114 वर्ग किलोमीटर में फैला चंडीगढ़ लगभग 11 लाख लोगों का घर है। इसकी मूल योजना में प्रत्येक सेक्टर को एक आत्मनिर्भर पड़ोस के रूप में विकसित किया गया, जहाँ आवास, बाजार, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएँ लोगों के निकट उपलब्ध हों। यही सुनियोजित व्यवस्था चंडीगढ़ को देश के अन्य शहरों से अलग पहचान देती है।
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी ताकत इसकी हरियाली भी है। आज चंडीगढ़ का कुल हरित आवरण 51.54 प्रतिशत है। सुखना झील, रॉक गार्डन, रोज गार्डन, लीजर वैली और कैपिटल कॉम्प्लेक्स इसकी वास्तुकला, प्रकृति और सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करते हैं। कैपिटल कॉम्प्लेक्स में विधानसभा, उच्च न्यायालय और सचिवालय का एक साथ होना लोकतांत्रिक विरासत का प्रतीक है, जबकि ‘ओपन हैंड’ खुलेपन और देने-ग्रहण करने की भावना को दर्शाता है।
साथियो,
चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है। यह स्वतंत्र भारत की आधुनिक सोच, सुनियोजित विकास और दूरदृष्टि का प्रतीक है। लेकिन समय बदल रहा है। शहर का विस्तार हो रहा है, आसपास के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं और नागरिकों की अपेक्षाएँ भी बढ़ रही हैं। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चंडीगढ़ की योजना केवल अतीत की विरासत बनकर न रह जाए, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप भी विकसित होती रहे।
सबसे गंभीर विषयों में से एक कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा का है। नागरिकों ने यह चिंता व्यक्त की है कि यातायात नियमों के उल्लंघन को पकड़ने के लिए सीसीटीवी कैमरों का प्रभावी ढंग से उपयोग हो रहा है, तो अपराधों की पहचान, रोकथाम और अपराधियों तक पहुँचने के लिए भी इस तकनीक का अधिक प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।
हमें ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें सीसीटीवी कैमरों के पूरे नेटवर्क को प्रभावी रूप से जोड़ा जाए, पुलिस की नियंत्रण एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए, पुलिस की क्षेत्रीय गश्त और अपराध-रोकथाम व्यवस्था बढ़ाई जाए, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी दिखाई दे और नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो। हमारा जोर केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसकी रोकथाम पर भी होना चाहिए।
किसी भी नागरिक को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसकी शिकायत केवल एक फाइल बनकर रह गई है। चंडीगढ़ की पहचान केवल सुंदर शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक सुरक्षित शहर के रूप में भी होनी चाहिए।
साथियो,
आज चंडीगढ़ की रोजमर्रा की प्रमुख समस्याओं में यातायात जाम और पार्किंग की समस्या शामिल है। केवल चालान काटकर यातायात की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक व्यापक यातायात और आवागमन योजना की आवश्यकता है।
इस योजना में पर्याप्त और वैज्ञानिक पार्किंग व्यवस्था, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला के बीच बेहतर संपर्क, ऑटो और ई-रिक्शा का व्यवस्थित संचालन, पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित मार्ग, स्कूल और कॉलेज क्षेत्रों में बेहतर यातायात प्रबंधन तथा वाहन आवागमन के व्यस्ततम समय के लिए विशेष यातायात योजना शामिल होनी चाहिए।
चंडीगढ़ की मूल योजना का उद्देश्य लोगों को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन उपलब्ध कराना था। हमें उसी भावना को आज की आवश्यकताओं के अनुरूप फिर से मजबूत करना होगा।
यातायात चौराहों पर बच्चों द्वारा भीख माँगना भी एक गंभीर सामाजिक समस्या है। इसे केवल पुलिस की समस्या नहीं माना जा सकता। इसके समाधान के लिए समाज कल्याण विभाग, बाल संरक्षण संस्थाओं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि बच्चों को शिक्षा, संरक्षण और बेहतर जीवन का अवसर मिल सके।
साथियो,
आज चंडीगढ़ को केवल अपनी 114 वर्ग किलोमीटर की सीमा के भीतर देखकर समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। मोहाली, जीरकपुर, खरड़, न्यू चंडीगढ़ और पंचकूला का तेज विकास सीधे चंडीगढ़ को प्रभावित कर रहा है। यातायात, जल निकासी, पानी की आपूर्ति, सीवरेज, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण, इनमें से कोई भी समस्या प्रशासनिक सीमाओं को नहीं मानती। इसलिए चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और आसपास के क्षेत्रों के लिए एकीकृत क्षेत्रीय योजना की आवश्यकता है।
भविष्य में बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाते समय वहाँ उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की क्षमता, यातायात पर पड़ने वाला प्रभाव, जल निकासी, पानी की उपलब्धता और पर्यावरण पर प्रभाव को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। मैं समझता हूं कि विकास को बुनियादी सुविधाओं से आगे नहीं भागना चाहिए। विकास और बुनियादी सुविधाएँ साथ-साथ चलनी चाहिए।
साथियो,
नागरिकों ने खराब सड़कों, गड्ढों, जलभराव और जल निकासी की समस्याएँ भी उठाई हैं। बार-बार सड़क बनाना और फिर कुछ समय बाद उसी सड़क को खोद देना टिकाऊ योजना नहीं है। हमें सड़कों की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी, समय पर मरम्मत, भूमिगत सुविधाओं और पाइपलाइन से जुड़े कार्यों के बीच बेहतर समन्वय, मानसून से पहले नालियों की सफाई, वर्षा जल निकासी की वैज्ञानिक योजना और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के लिए स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
जनता का पैसा केवल सरकारी खर्च नहीं है; यह जनता का विश्वास है। जिस संस्था या ठेकेदार को जनता के पैसे से काम करने की जिम्मेदारी दी जाती है, उससे अच्छी गुणवत्ता और पूरी जवाबदेही की अपेक्षा भी उतनी ही होनी चाहिए।
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी ताकत उसकी हरियाली, स्वच्छता और खुली जगहें हैं। डड्डूमाजरा क्षेत्र में कचरे के पुराने ढेर को हटाने तथा शहर को अधिक स्वच्छ बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए मैं प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को बधाई देता हूँ।
लेकिन अब आवश्यकता एक व्यापक और दीर्घकालीन कचरा प्रबंधन योजना की है। हमें घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को उसी स्थान पर अलग करने, कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण, निर्माण से निकलने वाले मलबे के उचित प्रबंधन और पुराने कचरा स्थलों के पर्यावरणीय पुनर्वास पर ध्यान देना होगा। स्वच्छता केवल नगर निगम की नहीं, यह प्रशासन और नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। प्रशासन व्यवस्था उपलब्ध कराए और नागरिक उसमें सहयोग करें, तभी स्वच्छता एक स्थायी आदत बन सकती है।
इसके अलावा, स्वच्छ और नियमित पानी हर नागरिक की बुनियादी आवश्यकता है। जहाँ भी पानी की आपूर्ति में अनियमितता, कम दबाव, पाइपलाइन में रिसाव या पानी की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें हैं, वहाँ उनके समाधान के लिए समयबद्ध जवाबदेही की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसी प्रकार बिजली की आपूर्ति और बिलों से संबंधित नागरिकों की शिकायतों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। निजीकरण या संस्थागत व्यवस्था में बदलाव का अंतिम उद्देश्य यही होना चाहिए कि नागरिकों को बेहतर, भरोसेमंद और जवाबदेह सेवाएँ मिलें।
साथियो,
आवारा कुत्तों और बंदरों से संबंधित शिकायतें अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गई हैं। यह नागरिकों, विशेषकर बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से इनकी संख्या को नियंत्रित करने, नसबंदी और टीकाकरण, कचरा प्रबंधन तथा त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। हमें मानवीय और वैज्ञानिक समाधान अपनाना चाहिए। न तो नागरिकों की सुरक्षा की अनदेखी हो और न ही पशु कल्याण से समझौता किया जाए।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अनेक निवासी लंबे समय से नोटिस और मकान टूटने की आशंका के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस विषय में हमें व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। जरूरत के अनुसार किए गए निर्माण या बदलावों के मामले में स्पष्ट अंतर होना चाहिए कि क्या नियमित किया जा सकता है, क्या निर्धारित शुल्क लेकर स्वीकार किया जा सकता है और क्या वास्तव में नियमित नहीं किया जा सकता।
जहाँ कानून अनुमति देता है, वहाँ पारदर्शी और समयबद्ध नियमितीकरण या समाधान की नीति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। लंबे समय तक अनिश्चितता में रहने वाला नागरिक न तो अपने घर में सुरक्षित महसूस करता है और न ही उसमें निवेश कर पाता है। हमें ऐसा समाधान चाहिए जिसमें शहर की नियोजन व्यवस्था और नियमों का अनुशासन भी बना रहे और नागरिकों के वैध हितों की भी रक्षा हो।
साथियो,
फेडरेशन ने उत्तराधिकार में मिली संपत्तियों के हिस्से के अनुसार पंजीकरण में आने वाली कठिनाइयों का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है।
उत्तराधिकार में संपत्ति प्राप्त करने वाले नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों को केवल पंजीकरण की प्रक्रिया के कारण वर्षों तक मुकद्मेबाजी में नहीं धकेला जाना चाहिए। यदि वर्तमान कानून या नियमों में किसी संशोधन की आवश्यकता है, तो उसका गंभीरता से परीक्षण किया जाना चाहिए।
एक सुनियोजित शहर में संपत्ति से जुड़े विवादों के भी व्यवस्थित और सरल समाधान होने चाहिए। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि कानून की भावना और चंडीगढ़ की नियोजन आवश्यकताओं को सुरक्षित रखते हुए नागरिकों के वास्तविक और वैध संपत्ति अधिकारों का सम्मान किया जाए।
सामुदायिक केंद्रों की बात करें तो ये जनता के पैसे से बनाए गए हैं और उनका मूल उद्देश्य नागरिकों को सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। इनमें निवासियों के लिए कुछ निर्धारित मनोरंजन और सामुदायिक गतिविधियों की जगह होनी चाहिए, जहाँ वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, महिलाएँ और अन्य निवासी बिना अनावश्यक प्रतिबंधों के गतिविधियाँ कर सकें।
इन केंद्रों की बुकिंग व्यवस्था पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध होनी चाहिए। रेज़िडेंट वेलफेयर ऐसोसिएशन्स के वैध कार्यक्रमों के लिए अनावश्यक सिफारिशों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
इसी प्रकार पड़ोस के पार्कों की देखभाल में रेज़िडेंट वेलफेयर ऐसोसिएशन्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जहाँ ये ऐसोसिएशन्स पार्कों की देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहाँ उनके वैध बकाये का समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके साथ ही खतरनाक पेड़ों की समय पर छंटाई या हटाने तथा पेड़ों के व्यवस्थित प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
साथियो,
आज के नागरिक को केवल अपनी शिकायत लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए। हमारा लक्ष्य कम कागजी कार्रवाई, तेज निर्णय, पारदर्शी प्रक्रिया और जवाबदेह अधिकारी होना चाहिए।
नागरिकों की शिकायतों के लिए समयबद्ध उत्तर और समाधान की व्यवस्था होनी चाहिए। जहाँ शिकायत सही है, वहाँ समाधान होना चाहिए और जहाँ शिकायत सही नहीं है, वहाँ भी नागरिक को स्पष्ट कारण बताया जाना चाहिए। केवल चुप रहना शिकायत का समाधान नहीं है।
प्रशासन तभी सफल माना जाएगा, जब नागरिक को यह विश्वास हो कि उसकी बात सुनी जा रही है, उस पर विचार किया जा रहा है और उचित कार्रवाई की जा रही है।
साथियो,
हमें आज यह तय करना होगा कि आने वाले 20-30 वर्षों में हम चंडीगढ़ को कैसा देखना चाहते हैं। मेरा स्पष्ट दृष्टिकोण है-एक सुरक्षित चंडीगढ़, जहाँ प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। एक स्वच्छ चंडीगढ़, जहाँ कचरे, अतिक्रमण और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हो। एक हरा-भरा चंडीगढ़, जहाँ पार्क, पेड़ और खुले स्थान सुरक्षित रहें। एक आधुनिक और तकनीक-सक्षम चंडीगढ़, जहाँ तकनीक का उपयोग नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हो। एक सुगम आवागमन वाला चंडीगढ़, जहाँ यातायात और पार्किंग की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान हो तथा सार्वजनिक परिवहन मजबूत हो। और सबसे महत्वपूर्ण, एक ऐसा चंडीगढ़, जो अपने नागरिकों का हो और जहाँ नागरिक स्वयं को शहर के विकास का सहभागी समझें।
मैं फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेलफेयर ऐसोसिएशन और चंडीगढ़ के सभी रेज़िडेंट वेलफेयर ऐसोसिएशन्स से कहना चाहता हूँ कि प्रशासन और नागरिकों को एक-दूसरे के सामने खड़े होने की आवश्यकता नहीं है। हम सभी एक ही तरफ हैं, चंडीगढ़ की तरफ।
मैं फेडरेशन को केवल समस्याएँ उठाने वाले संगठन के रूप में नहीं, बल्कि रचनात्मक सहयोगी और समाधान के भागीदार के रूप में देखता हूँ। आप जमीनी वास्तविकताओं को जानते हैं, आप नागरिकों की समस्याओं को जानते हैं और प्रशासन के पास संस्थागत व्यवस्था और संसाधन हैं। यदि दोनों मिलकर काम करें, तो बहुत से मुद्दों का समाधान केवल बैठकों और ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर दिखाई देगा।
साथियो,
आज हमने जिन महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया है, आने वाले समय में चंडीगढ़ के विकास के लिए हमें इन सभी क्षेत्रों में स्पष्ट, समयबद्ध और ठोस परिणाम देने वाली कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। मेरा मानना है कि केवल योजनाएँ बनाना या घोषणाएँ करना पर्याप्त नहीं है; प्रत्येक पहल का प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। हमें ऐसे मापने योग्य परिणाम निर्धारित करने होंगे, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि किसी निर्णय के बाद नागरिकों के जीवन, सेवाओं की गुणवत्ता और शहर की कार्यप्रणाली में वास्तव में कितना सुधार आया है।
हमारा लक्ष्य केवल कार्यवाही दिखाना नहीं, परिवर्तन दिखाना होना चाहिए। नागरिकों को महसूस होना चाहिए कि प्रशासन के निर्णयों से उनकी समस्याएँ कम हुई हैं, सेवाएँ अधिक सरल और समयबद्ध हुई हैं तथा शहर अधिक स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधाजनक और रहने योग्य बना है। अंततः सुशासन की वास्तविक कसौटी यही है कि नीति का लाभ अंतिम नागरिक तक पहुँचे और परिणाम स्वयं अपनी कहानी कहें।
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि चंडीगढ़ की असली सुंदरता केवल उसकी सड़कों, इमारतों, बगीचों और हरे-भरे चौराहों में नहीं है। किसी भी शहर की वास्तविक पहचान उसके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से होती है।
यदि हमारे वरिष्ठ नागरिक सुरक्षित हैं, हमारे बच्चे सुरक्षित हैं, हमारी महिलाएँ सुरक्षित हैं, नागरिकों को स्वच्छ पानी मिलता है, हमारी सड़कें सुरक्षित हैं, हमारे पार्क जीवंत हैं, हमारा प्रशासन संवेदनशील और जवाबदेह है और नागरिकों को अपनी बात रखने का विश्वास है, तभी हम कह सकते हैं कि चंडीगढ़ वास्तव में ‘सिटी ब्यूटीफुल’ है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा चंडीगढ़ बनाएँ जो अपनी सुनियोजित विकास की विरासत को सुरक्षित रखे, लेकिन भविष्य की आवश्यकताओं से पीछे न रहे। एक ऐसा चंडीगढ़ जो सुरक्षित हो, स्वच्छ हो, हरा-भरा हो, आधुनिक हो, संवेदनशील और जवाबदेह हो और सबसे बढ़कर, अपने नागरिकों का हो।
आइए, हम सब मिलकर अपने चंडीगढ़ को और बेहतर बनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द! जय भारत!