SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF WALKATHON AGAINST ADDICTION – DRUG FREE CHANDIGARH AT CHANDIGARH SEPTEMBER 5, 2026.
- by Admin
- 2026-09-05 20:50
“वॉकाथॉन अगेंस्ट एडिक्शन-नशा मुक्त चंडीगढ़” के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 05.09.2026, शनिवार समयः सुबह 7:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
आप सभी को सुप्रभात!
आज सुखना झील के शांत और प्रेरणादायी वातावरण में “वॉकाथॉन अगेंस्ट एडिक्शन-नशा मुक्त चंडीगढ़” के इस आयोजन में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आज हम केवल कुछ किलोमीटर चलने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं। आज हम एक विचार के साथ चल रहे हैं, एक संकल्प के साथ चल रहे हैं और एक ऐसे चंडीगढ़ की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं जहाँ हमारे बच्चों और युवाओं का भविष्य नशे से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कौशल, नवाचार और अवसरों से निर्धारित हो।
आज की वॉकाथॉन का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। नशा हमारे समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है और इसके विरुद्ध लड़ाई में पूरा चंडीगढ़ एकजुट है। यह संदेश केवल यहाँ उपस्थित लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए; इसे प्रत्येक घर, विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यस्थल, बाजार, मोहल्ले और परिवार तक पहुँचना चाहिए।
साथियो,
नशे की समस्या किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। इसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। एक युवा नशे की गिरफ्त में आता है तो उसकी शिक्षा प्रभावित होती है, स्वास्थ्य बिगड़ता है, रोजगार की संभावनाएँ कम होती हैं, पारिवारिक संबंध कमजोर होते हैं और कई बार पूरा परिवार सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक संकट का सामना करता है। इसलिए नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था अथवा स्वास्थ्य की समस्या समझना पर्याप्त नहीं है। यह सामाजिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक और मानवीय चुनौती है और इसका समाधान भी समन्वित होना चाहिए।
हमें इस चुनौती का सामना एक समग्र दृष्टिकोण के साथ करना होगा। एक ओर नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति को रोकना होगा और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी, वहीं दूसरी ओर नशे की मांग को कम करने के लिए जागरूकता, शिक्षा, परामर्श, उपचार, पुनर्वास और समाज में पुनः समावेशन पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। इस लड़ाई में सरकार, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थान, परिवार, सामाजिक संगठन और आम नागरिक, सभी की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
रोकथाम सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण दीवार है। यदि हम बच्चों और युवाओं को समय रहते नशे के दुष्प्रभावों से परिचित करा दें, उन्हें स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ें, उन्हें खेल, शिक्षा, संगीत, कला, कौशल, नवाचार और सामाजिक सेवा के पर्याप्त अवसर दें, तो हम अनेक युवाओं को इस संकट तक पहुँचने से पहले ही बचा सकते हैं। ‘रोकथाम’ हमेशा ’उपचार’ से बेहतर, सरल और मानवीय होता है।
लेकिन रोकथाम का अर्थ केवल स्कूल में एक भाषण दे देना या पोस्टर लगा देना नहीं है। रोकथाम का अर्थ है बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करना, साथियों के दबाव का सामना करना सिखाना, तनाव से स्वस्थ तरीके से निपटने की क्षमता देना, उन्हें लक्ष्य देना और जीवन में उद्देश्य का अनुभव कराना। जिस युवा के जीवन में सकारात्मक लक्ष्य होता है, उसकी ऊर्जा सही दिशा में लगती है।
मैं विशेष रूप से अभिभावकों से कहना चाहता हूँ कि बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें। परीक्षा का दबाव, मित्रों का प्रभाव, अकेलापन, असफलता, पारिवारिक तनाव या सोशल मीडिया से उत्पन्न तुलना, ये सब युवा मन पर प्रभाव डाल सकते हैं। यदि बच्चे के व्यवहार, मित्र समूह, दिनचर्या, पढ़ाई, नींद या भावनात्मक स्थिति में अचानक बड़ा परिवर्तन दिखाई दे, तो उसे केवल अनुशासनहीनता मानकर नजरअंदाज न करें। उससे बात करें, सुनें और आवश्यकता हो तो विशेषज्ञ की सहायता लें। समय पर की गई एक बातचीत किसी जीवन को बदल सकती है।
मैं शिक्षकों से भी विशेष आग्रह करना चाहता हूँ। शिक्षक कई बार वह पहला व्यक्ति होता है जो बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन को पहचान सकता है। स्कूल और कॉलेज केवल पढ़ाई के केंद्र न रहें; वे सुरक्षित संवाद और मार्गदर्शन के केंद्र भी बनें। प्रत्येक संस्थान में विद्यार्थियों के लिए परामर्श, जागरूकता, खेल गतिविधियाँ और जीवन कौशल से जुड़ी व्यवस्थाएँ मजबूत की जानी चाहिए।
साथियो,
नशे से जूझ रहे व्यक्ति के प्रति हमारी भाषा और व्यवहार भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमें किसी व्यक्ति को उसकी समस्या से परिभाषित नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सहायता चाहता है, तो उसे तिरस्कार नहीं, उपचार चाहिए; उसे सामाजिक बहिष्कार नहीं, सहयोग चाहिए; उसे निराशा नहीं, यह विश्वास चाहिए कि वह फिर से सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकता है। हम यह बात समाज में स्थापित करें कि उपचार लेने में शर्म नहीं है। सहायता माँगना कमजोरी नहीं है। सहायता माँगना साहस का कदम है।
नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार के सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए हमारे अस्पतालों, नशामुक्ति केंद्रों, परामर्श सेवाओं और सामुदायिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
इसी प्रकार, उपचार के बाद पुनर्वास को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा। केवल नशा छोड़ देना यात्रा का अंत नहीं है। असली चुनौती तब शुरू होती है जब व्यक्ति को दोबारा परिवार, शिक्षा, रोजगार और समाज के साथ जोड़ा जाता है। यदि उसे नया कौशल मिले, रोजगार का अवसर मिले, परिवार का सहयोग मिले और समाज उसे सम्मान के साथ स्वीकार करे, तभी रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) स्थायी बनती है।
हमारा प्रयास होना चाहिए कि उपचार के बाद व्यक्ति खाली न बैठे। उसे कौशल विकास, शिक्षा, खेल, रोजगार और सामाजिक भागीदारी से जोड़ा जाए। वह अपने जीवन में नया उद्देश्य महसूस करे। हमें ऐसे पुनर्वास मॉडल विकसित करने होंगे जो व्यक्ति को केवल नशे से बाहर न निकालें, बल्कि उसे जीवन में वापस लाएँ।
साथियो,
मुझे विशेष रूप से गर्व है कि चंडीगढ़ एक शिक्षित, आधुनिक, जागरूक और युवा शहर है। यहाँ देश के प्रतिष्ठित विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थान, तकनीकी संस्थान और खेल सुविधाएँ हैं। यह हमारी ताकत है। हमें इस ताकत को नशे के विरुद्ध सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में उपयोग करना चाहिए।
हमारे युवा हमारी सबसे बड़ी पूँजी हैं। वे किसी समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि समाधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हमें युवा को केवल यह नहीं कहना है कि नशा मत करो; हमें उसे यह भी दिखाना है कि उसके जीवन में करने के लिए कितना कुछ है।
खेलो। सीखो। नई तकनीक सीखो। कौशल विकसित करो। स्टार्टअप शुरू करो। किताब पढ़ो। संगीत सीखो। समाज सेवा करो। प्रकृति से जुड़ो। अपने शरीर को मजबूत बनाओ और अपने सपनों को बड़ा बनाओ। जब युवाओं के सामने सकारात्मक विकल्प बढ़ते हैं, तो नकारात्मक आकर्षण कमजोर होता है।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने युवाओं को जीवन में बड़े सपने देखने और उन सपनों को मेहनत से साकार करने की प्रेरणा दी। मैं आज अपने युवा मित्रों से कहना चाहता हूँ कि अपने सपनों को किसी भी नशे से बड़ा बनाइए। जो जीवन आपको मिला है, उसकी संभावना को पहचानिए।
स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा था, “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” आज मैं इस संदेश को नशामुक्ति के संदर्भ में कहना चाहूँगा कि उठो-नशे के खिलाफ। जागो-अपने भविष्य के लिए। और तब तक मत रुको, जब तक आपका जीवन अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाए।
नशा कुछ समय के लिए वास्तविकता से दूर ले जा सकता है, लेकिन मेहनत आपको वास्तविकता को बदलने की शक्ति देती है। नशा कुछ समय का भ्रम देता है, लेकिन उपलब्धि जीवन भर का आत्मविश्वास देती है। नशा शरीर और मन की शक्ति कम करता है, लेकिन खेल और अनुशासन उसी शक्ति को बढ़ाते हैं।
मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है।
महात्मा गांधी जी ने कहा था, ‘‘वास्तविक शक्ति केवल शारीरिक क्षमता से नहीं आती, बल्कि अटूट इच्छाशक्ति से आती है।’’ नशे से मुक्ति की यात्रा में यही इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति ने नशे को पीछे छोड़ने का निर्णय लिया है, तो हमें उसके निर्णय को सम्मान देना चाहिए और उसे आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहयोग देना चाहिए।
नशा आपको मजबूत नहीं बनाता, नशा आपको स्वतंत्र नहीं बनाता और नशा आपको आधुनिक नहीं बनाता। वास्तविक स्वतंत्रता अपने मन, अपने निर्णयों, अपने समय और अपने भविष्य पर नियंत्रण रखने में है। जो व्यक्ति किसी पदार्थ के बिना अपने जीवन को नियंत्रित नहीं कर सकता, वह वास्तव में स्वतंत्र नहीं है। इसलिए अपने जीवन के बारे में एक मजबूत निर्णय लीजिए, "Say Yes to Life. Say No to Drugs."अपने मित्रों से भी कहिए कि सच्चा मित्र वह नहीं जो आपको नशे की ओर ले जाए, बल्कि वह है जो आपको आपके सपनों और आपके लक्ष्य की ओर ले जाए।
इसलिए मेरा युवा साथियों से आग्रह है कि नशे को नहीं, अपने सपनों को चुनिए। निराशा को नहीं, मेहनत को चुनिए। गलत संगत को नहीं, अच्छे मार्गदर्शन को चुनिए। क्षणिक सुख को नहीं, दीर्घकालीन सफलता को चुनिए।
साथियो,
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। प्रधानमंत्री जी का यह स्पष्ट विजन है कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए हमारे युवाओं का स्वस्थ और नशामुक्त होना सबसे पहली शर्त है।
और इसी राष्ट्रीय संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए, 15 अगस्त 2020 को जब ‘नशामुक्त भारत अभियान’ की शुरुआत हुई थी, तब इसे देश के 272 अत्यंत संवेदनशील जिलों में लागू किया गया था। लेकिन अगस्त 2023 में इसे देश के हर एक जिले तक विस्तारित कर दिया गया।
आज यह एक विशाल ‘जन-आंदोलन’ बन चुका है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि अब तक, 29 करोड़ से अधिक नागरिकों तक नशामुक्ति का यह संदेश पहुँच चुका है। इनमें लगभग 11 करोड़ युवा और 8 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, नशे से प्रभावित परिवारों को सही मार्गदर्शन और पुनर्वास का रास्ता दिखाने के लिए, ‘राष्ट्रीय टोल-फ्री नशा-मुक्ति हेल्पलाइन-14446’ एक मजबूत सहारा बन रही है। अब तक लगभग 5 लाख लोगों ने इस हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क कर एक नई उम्मीद और दिशा पाई है।
साथ ही, व्यापक मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक संबल प्रदान करने के लिए ‘टेली-मानस’ हेल्पलाइन 14416 भी चौबीसों घंटे अपनी अमूल्य सेवाएं दे रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति इस संघर्ष में स्वयं को अकेला न समझे। अब तक 4 लाख 50 हजार से अधिक लोगों ने इस पर संपर्क किया है।
इसी राष्ट्रीय संकल्प को एक नई और अभूतपूर्व ऊर्जा देने के लिए, अभी हाल ही में 2 अगस्त 2026 को हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” का ऐतिहासिक शुभारंभ किया है। इसके तहत आने वाले 100 सप्ताहों तक पूरे देश में वॉकथॉन, खेल-कूद, योग और ध्यान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और अन्य जागरूकता गतिविधियों की एक श्रृंखला चलाई जाएगी। इसका एकमात्र उद्देश्य हमारे युवाओं की असीम ऊर्जा को नशे के अंधकार से बचाकर राष्ट्र निर्माण के प्रकाश की ओर मोड़ना है।
आज चंडीगढ़ में आयोजित हमारा यह ‘वॉकथॉन’ भी प्रधानमंत्री जी के उसी 100 सप्ताह के राष्ट्रीय संकल्प का एक सशक्त और शानदार हिस्सा है!
साथियो,
मैं चाहता हूँ कि चंडीगढ़ नशामुक्ति के क्षेत्र में भी देश के लिए एक मॉडल बने। हमारा लक्ष्य ऐसा शहर बनाना है जहाँ हमारे बच्चे सुरक्षित हों, हमारे युवा नशे से दूर हों, हमारे परिवार मजबूत हों, हमारे खेल मैदान जीवंत हों, हमारे विद्यालय जागरूकता के केंद्र बनें और हमारे कॉलेज नवाचार, रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र बनें। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जहाँ युवाओं को शिक्षा, कौशल, खेल, रोजगार, उद्यमिता, कला, संस्कृति और राष्ट्रसेवा के पर्याप्त अवसर मिलें।
आज हम इस “वॉकाथॉन” में कुछ किलोमीटर चलेंगे, लेकिन हमारा वास्तविक लक्ष्य इस यात्रा को आज के कार्यक्रम के बाद भी जारी रखना है। यह यात्रा हमारे घरों में पहुँचे, हमारे विद्यालयों और कॉलेजों में पहुँचे, हमारे मोहल्लों और समुदायों में पहुँचे और हमारी युवा पीढ़ी के विचारों तक पहुँचे। प्रत्येक नागरिक इस अभियान का ‘दूत’ बन सकता है। प्रत्येक युवा नशामुक्ति का संदेश अपने मित्रों तक पहुँचा सकता है। प्रत्येक परिवार अपने घर को जागरूकता और सकारात्मकता का केंद्र बना सकता है।
हमें यह समझना होगा कि नशामुक्ति केवल “नशा छोड़ने” का अभियान नहीं है। यह युवाओं को निराशा से मुक्त करने, अकेलेपन से मुक्त करने, गलत संगति से मुक्त करने और जीवन में उद्देश्यहीनता से मुक्त करने का अभियान भी है। हमें अपने युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि उनका जीवन मूल्यवान है, उनके सपने मूल्यवान हैं, उनका भविष्य मूल्यवान है और राष्ट्र को उनकी आवश्यकता है।
आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। साईंस और टेक्नोलॉजी से लेकर स्पेस, डिजिटल इनोवेशन, स्टार्टअप्स, स्पोर्ट्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर तक हर क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुल रही हैं। विकसित भारत का निर्माण स्वस्थ, शिक्षित, कुशल, अनुशासित और आत्मविश्वासी युवा ही कर सकते हैं। इसलिए नशामुक्ति केवल सामाजिक सुधार का विषय नहीं है; यह विकसित भारत के निर्माण की बुनियादी आवश्यकता भी है।
आज इस अवसर पर मैं चंडीगढ़ के प्रत्येक नागरिक से आग्रह करना चाहूँगा कि हम सभी अपने जीवन में एक व्यक्तिगत संकल्प लें। हम स्वयं नशे से दूर रहेंगे। अपने परिवार और मित्रों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। नशे को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि को समर्थन नहीं देंगे। नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों का उपहास नहीं, मदद करेंगे। युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ेंगे और एकजुट होकर नशे के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई को जीतेंगे।
आइए, आज इस ‘वाकाथॉन’ के प्रत्येक कदम को एक संकल्प बनाएं। हमारा एक कदम नशे के खिलाफ हो, दूसरा कदम स्वस्थ जीवन की ओर हो, तीसरा कदम खेल और शिक्षा की ओर हो, चौथा कदम आत्मविश्वास की ओर हो और हर अगला कदम हमारे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की ओर हो।
आइए, हम पूरे विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आवाज उठाएँ, नशे को ना, जीवन को हाँ। नशे को ना, खेल को हाँ। नशे को ना, शिक्षा को हाँ। नशे को ना, सपनों को हाँ। नशे को ना, भारत के उज्ज्वल भविष्य को हाँ।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हमारा चंडीगढ़ केवल "City Beautiful" ही नहीं, बल्कि "City Healthy, City Safe and City Drug-Free" भी बनेगा। हमारा युवा नशे में नहीं, अपने सपनों में खोया होगा। उसके हाथ में नशे की बोतल नहीं, सफलता की मशाल होगी। उसकी आँखों में नशे का धुआँ नहीं, भविष्य के सपने होंगे।
आज का हमारा हर कदम एक संदेश है। हर कदम एक प्रतिज्ञा है। हर कदम एक उम्मीद है। और हर कदम हमें उस चंडीगढ़ की ओर ले जा रहा है जहाँ हर युवा पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सके, “मैं अपने जीवन का मालिक हूँ। मैं अपने भविष्य का निर्माता हूँ। मैं नशे से दूर हूँ। मैं अपने सपनों के साथ हूँ। और मैं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दूँगा।”
इसी विश्वास और संकल्प के साथ आइए, हम सब मिलकर “नशामुक्त चंडीगढ़” के इस अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन बनाएँ और अपने शहर, अपने युवाओं तथा अपने देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ें।
अंत में, मैं इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन तथा इसमें सहयोग देने वाले सभी विभागों, संस्थाओं, स्वयंसेवकों और नागरिकों को बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि आज की यह वॉकाथॉन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नशामुक्त चंडीगढ़ की दिशा में एक सशक्त जनसंदेश सिद्ध होगी।
इसी कामना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!
जय भारत!