SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 35TH ANNUAL DAY CELEBRATION AND WHITE COAT CEREMONY OF GMCH CHANDIGARH ON SEPTEMBER 9, 2026.

जी.एम.सी.एच. चंडीगढ़ के ‘35वें वार्षिक दिवस समारोह’ और ‘व्हाइट कोट सेरेमनी’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 09.09.2026, बुधवारसमयः शाम 4:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जी.एम.सी.एच.), चंडीगढ़ के 35वें वार्षिक दिवस समारोह और एम.बी.बी.एस. बैच 2026 की ‘व्हाइट कोट सेरेमनी’ के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

इस विशेष अवसर पर उपस्थित होना मेरे लिए वास्तव में एक सौभाग्य की बात है। यह न केवल इस प्रतिष्ठित संस्थान की यात्रा में एक और गौरवशाली वर्ष पूरा होने का प्रतीक है, बल्कि युवा मेडिकल छात्रों की एक नई पीढ़ी के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत भी है।

सबसे पहले, मैं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में श्रेष्ठता के प्रति निरंतर समर्पण के लिए जी.एम.सी.एच. के डायरेक्टर-प्रिंसिपल, फैकल्टी, स्टाफ और छात्रों को अपनी हार्दिक बधाई देता हूँ। जी.एम.सी.एच. जैसे संस्थानों का हमारे समाज में एक विशेष स्थान है, क्योंकि वे एक ही छत के नीचे शिक्षा, सेवा और अनुसंधान का शानदार संगम हैं।

देवियो और सज्जनो,

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जी.एम.सी.एच.), चंडीगढ़ की यात्रा स्वयं में अत्यंत प्रेरणादायी है। आज जिस संस्थान को हम उत्तर भारत के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में देखते हैं, उसकी शुरुआत बहुत विनम्र परिस्थितियों में हुई थी। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद वर्ष 1991 में इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना हुई।

इसकी आधारशिला 20 जनवरी 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी ने सेक्टर-32 में लगभग 36 एकड़ भूमि पर रखी थी। अगस्त 1991 में केवल 50 विद्यार्थियों के पहले एमबीबीएस बैच के साथ यह यात्रा शुरू हुई। आज इसकी वार्षिक प्रवेश क्षमता 200 विद्यार्थियों की हो गई है। इसके पीछे तीन दशकों से अधिक का संस्थागत निर्माण, फैकल्टी की मेहनत, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ और चंडीगढ़ प्रशासन की निरंतर प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है।

आज यह संस्थान केवल एक मेडिकल कॉलेज नहीं है। यह एक विशाल शिक्षण, उपचार और अनुसंधान का केन्द्र है। इसकी वर्तमान क्षमता लगभग 1 हजार 118 बेड है और इसके साथ ‘मानसिक स्वास्थ्य संस्थान’ भी स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण अंग है। 

यह भी अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि ‘इंडिया टुडे रैंकिंग 2026’ में इस संस्थान ने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए 17वें से 15वाँ स्थान प्राप्त किया है। लेकिन मैं आज जी.एम.सी.एच. परिवार से कहना चाहता हूँ कि हमारी महत्वाकांक्षा केवल अच्छी रैंकिंग की नहीं, बल्कि हमारा वास्तविक लक्ष्य उत्तम रोगी देखभाल, विश्वस्तरीय शिक्षा, समाजोपयोगी अनुसंधान और संवेदना से परिपूर्ण चिकित्सा पद्धति स्थापित करना होना चाहिए।

यह प्रतिष्ठित संस्थान न केवल चंडीगढ़ के लोगों की, बल्कि पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों के मरीजों की भी सेवा कर रहा है। लोग इस संस्थान पर जो भरोसा जताते हैं, वह यहाँ के डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, शिक्षकों और छात्रों की लगन और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

हालांकि, आज का दिन विशेष रूप से इसलिए खास है क्योंकि हमारे युवा छात्रों को उनके ‘सफेद कोट’ मिल रहे हैं, जो इस पवित्र पथ पर उनकी यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

प्यारे छात्रों, आज आप जो सफेद कोट पहन रहे हैं, वह एक साधारण यूनिफॉर्म से कहीं बढ़कर है। यह विश्वास, जिम्मेदारी, करुणा और पेशेवर ईमानदारी का प्रतीक है। आज से, जब भी आप इस कोट को पहनें, तो यह याद रखें कि एक मरीज आपमें केवल एक डॉक्टर को नहीं देखता है, बल्कि वह आपमें उस व्यक्ति को देखता है जिस पर उसने अपनी पीड़ा और लाचारी के क्षणों में उम्मीद की एक बड़ी किरण देखी है।

हमारी भारतीय चिकित्सा परंपरा ने हमेशा सेवा को चिकित्सा का आधार माना है। हमारे चिंतन में कहा गया है, “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।” अर्थात् सभी सुखी हों और सभी निरोग रहें। मेरे विचार में एक डॉक्टर के जीवन का उद्देश्य इससे बेहतर किसी वाक्य में व्यक्त नहीं किया जा सकता। याद रखिए, रोग का इलाज विज्ञान करता है, लेकिन रोगी की देखभाल विज्ञान के साथ संवेदना भी मांगती है।

आप बीमारियों की पहचान करना, जांच रिपोर्ट समझना और कठिन निर्णय लेना सीखेंगे। लेकिन इस तमाम ज्ञान के साथ-साथ, मुझे उम्मीद है कि आप अपने मरीज की बात सुनने, उनके सम्मान की रक्षा करने और हर व्यक्ति के साथ करुणा का व्यवहार करने के महत्व को हमेशा याद रखेंगे।

आप एक ऐसे पेशे में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है। नई तकनीकें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.), जीनोमिक्स, उन्नत डायग्नोस्टिक्स और नए उपचार स्वास्थ्य सेवा को पूरी तरह बदल रहे हैं। आप इन नए बदलावों को अपनाएं, लेकिन तकनीक को कभी भी एक डॉक्टर और मरीज के बीच के ‘मानवीय जुड़ाव’ की जगह न लेने दें।

भविष्य के डॉक्टर को न केवल ज्ञानी होना चाहिए, बल्कि उसे करुणामय, नैतिक, परिस्थितियों के अनुकूल ढलने वाला और आजीवन सीखते रहने के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए। हमारे देश को केवल बड़े शहरों और महानगरों में ही नहीं, बल्कि हमारे गांवों, कस्बों और समुदायों में भी डॉक्टरों की आवश्यकता है। हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब उत्तम चिकित्सा सुविधाएँ भौगोलिक और आर्थिक सीमाओं से परे जाकर, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक उपलब्ध हों।

मुझे आशा है कि आप में से कई लोग अपने पेशे में आगे बढ़ते हुए सेवा की इस भावना को अपने साथ रखेंगे और याद रखेंगे कि एक डॉक्टर की जिम्मेदारी अस्पताल की दीवारों से कहीं आगे तक होती है। स्वास्थ्य सेवा को समुदायों और उन लोगों के करीब ले जाकर जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, आप हमारे राष्ट्र के स्वास्थ्य और कल्याण में एक स्थायी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

जैसे-जैसे आप अपनी चिकित्सा शिक्षा में आगे बढ़ेंगे, मुझे उम्मीद है कि आपमें समाज की सेवा करने की भावना विकसित होगी। आपकी शिक्षा एक अवसर है, लेकिन यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। जो ज्ञान और कौशल आप यहाँ प्राप्त कर रहे हैं, वह अंततः हमारे देश के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर जीवन के काम आना चाहिए।

मैं इस अवसर पर नए छात्रों के माता-पिता और परिवारों को भी विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ। प्यारे अभिभावकों, आज आपका दिन भी है। यहाँ सफेद कोट में खड़े हर छात्र के पीछे उनके परिवारों की वर्षों की कड़ी मेहनत, प्रोत्साहन, त्याग और समर्थन है। आपके बच्चे अपनी लगन के कारण इस महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचे हैं, लेकिन यह उस ताकत और सहयोग के कारण भी संभव हुआ है जो आपने उन्हें हमेशा दिया। मैं आपको बधाई देता हूँ और इस गर्व के अवसर पर आपकी खुशी में शामिल हूँ।

नए बैच के छात्रों के लिए, मैं एक सरल विचार के साथ अपनी बात रखना चाहूँगा। आप केवल सफल डॉक्टर बनने का ही प्रयास न करें, बल्कि ऐसे डॉक्टर बनने का प्रयास करें जिन पर मरीज भरोसा कर सकें।

अपने शिक्षकों से सीखें। अपने मरीजों से सीखें। स्वास्थ्य सेवा टीम के हर सदस्य का सम्मान करें। विनम्र बने रहें, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान आपको लगातार याद दिलाएगा कि अभी भी कितना कुछ सीखना बाकी है। और सबसे बड़ी बात, उस कारण को कभी न भूलें जिसकी वजह से आपने सबसे पहले इस पेशे को चुना था यानी लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा।

देवियो और सज्जनो,

हमारे समाज में डॉक्टरों का स्थान अत्यंत सम्माननीय रहा है। भारतीय संस्कृति में चिकित्सक को “धरती का भगवान” कहा गया है, क्योंकि वह केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि जीवन बचाने का कार्य करता है। आपका कार्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

महात्मा गांधी जी ने कहा था, “स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोना और चाँदी नहीं।” इसी सोच के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं।

वर्ष 2014 तक जहाँ देश में केवल 7 एम्स थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहाँ 387 मेडिकल कॉलेज थे, अब 808 हो गए हैं जो 109 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 141 प्रतिशत वृद्धि के साथ एमबीबीएस सीटें 51 हजार 348 से बढ़कर 1 लाख 23 हजार 700 हो गई हैं और 144 प्रतिशत वृद्धि के साथ पीजी सीटें 31 हजार 185 से बढ़कर 76 हजार 174 तक पहुंची हैं। 

स्वास्थ्य बजट में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2014 में यह 33 हजार 278 करोड़ रूपये था, जो अब बढ़कर 1 लाख 6 हजार 530 करोड़ रूपये हो गया है जो 220 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 

इसके अलावा, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती, समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं। 

आज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना है। 

इसके अंतर्गत अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं तथा 1,80,435 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के अंतर्गत 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से लगभग 90 करोड़ करोड़ नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान की जा चुकी है। इसी प्रकार, देशभर में 1 लाख 86 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही, मिशन इंद्रधनुष, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा आदि जैसी पहलों ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता व पारदर्शिता को नई दिशा प्रदान की है।

इन सभी पहलों का उद्देश्य स्पष्ट है, देश के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण, किफायती और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा ‘स्वस्थ भारत, विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करना।

साथियो,

आज इस 35वें वार्षिक दिवस पर हमें उन सभी पूर्व निदेशकों, शिक्षकगणों, डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों और पूर्व छात्रों सहित उन सभी लोगों को भी याद करना चाहिए जिन्होंने इस संस्थान को यहाँ तक पहुँचाया। संस्थाएँ केवल ईंट-पत्थर से नहीं, बल्कि समर्पित और निष्ठावान लोगों से बनती हैं। आज का यह अवसर उन सभी कर्मयोगियों को हृदय से धन्यवाद देने का भी है।

आने वाले दशक में हमारा लक्ष्य इलाज की गुणवत्ता को और बेहतर करना, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देना, विभिन्न विभागों के बीच साझा शोध को मजबूत करना तथा ए.आई. और डिजिटल तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग बढ़ाना होना चाहिए। साथ ही, छात्रों के लिए व्यावहारिक और मरीज-केंद्रित चिकित्सा शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।

हमारी आपातकालीन और गहन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत करने के साथ मरीजों के अनुभव तथा शिकायतों के शीघ्र निवारण की व्यवस्था भी बेहतर हो। हमारे छात्रों में चिकित्सा ज्ञान के साथ संवाद, नैतिकता और सहानुभूति को भी समान महत्व मिले। अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को यह महसूस हो कि हम उसकी बीमारी के साथ-साथ उसकी चिंता और पीड़ा को भी समझते हैं।

चंडीगढ़ में पी.जी.आई., जी.एम.सी.एच., जी.एम.एस.एच. सहित मजबूत स्वास्थ्य संस्थानों का नेटवर्क है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि चंडीगढ़ गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा का राष्ट्रीय आदर्श बने।

इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक सुगम और मजबूत रेफरल व्यवस्था, समय पर जाँच, आधुनिक तकनीक का उपयोग, रोगों की रोकथाम एवं प्रारंभिक पहचान तथा हर समय तत्पर आपातकालीन और गहन चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करनी होंगी। मरीज और उनके परिजन पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को सरल, सुगम और संवेदनशील महसूस करें।

एक अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था केवल बीमारी का इलाज नहीं करती; वह हर नागरिक के मन में सुरक्षा, विश्वास और आशा भी पैदा करती है।

देवियो और सज्जनो,

मैं स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की अगली पीढ़ी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए इस प्रतिष्ठित संस्थान के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की भी सराहना करता हूँ। चिकित्सा पढ़ाना केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं है; यह मूल्यों, पेशेवर आचरण और सेवा की संस्कृति का संचार है। शिक्षकों द्वारा स्थापित उदाहरण अक्सर छात्रों पर गहरी और स्थायी छाप छोड़ते हैं।

चूंकि जी.एम.सी.एच. संस्थान अपना 35वां वार्षिक दिवस मना रहा है, मुझे आशा है कि यह संस्थान उत्कृष्टता के प्रति उसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ता रहेगा। यह अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों को मजबूत करना, सार्थक अनुसंधान व नवाचार को बढ़ावा देना, और अपनी सेवाएं लेने वाले सभी लोगों को करुणामय और सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना जारी रखेगा।

आइए हम यह भी याद रखें कि किसी चिकित्सा संस्थान की ताकत केवल उसकी इमारतों, तकनीक या शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती है। इसकी सच्ची ताकत उन लोगों में निहित है जिनकी यह सेवा करता है, जो डॉक्टर यह तैयार करता है, जो ज्ञान यह उत्पन्न करता है और जिन जिंदगियों को यह छूता है।

मैं एक बार फिर डायरेक्टर-प्रिंसिपल, फैकल्टी, स्टाफ, छात्रों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से नए एमबीबीएस बैच और उनके गौरवान्वित माता-पिता को इस यादगार अवसर पर बधाई देता हूँ।

प्यारे छात्रों, आज जब आप इस उल्लेखनीय यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, तो मेरी कामना है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में आपके ये वर्ष ज्ञान, नई खोज, मित्रता और व्यक्तिगत विकास से भरे हों। आप न केवल एक कुशल चिकित्सा पेशेवर के रूप में उभरें, बल्कि समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध एक करुणामय इंसान भी बनें।

मैं आने वाले वर्षों में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, चंडीगढ़  की निरंतर सफलता और बड़ी उपलब्धियों की कामना करता हूँ।

इस शानदार समारोह का हिस्सा बनने के लिए मुझे आमंत्रित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी के साथ इस विशेष क्षण को साझा करना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है, और मैं कल के युवा डॉक्टरों को उनकी आगे की यात्रा में हर सफलता की कामना करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!