SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF DAINIK BHASKAR PUNJAB EMINENCE AWARDS 2026 AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 6, 2026.

“दैनिक भास्कर पंजाब एमिनेंस अवॉर्ड्स 2026” के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 06.09.2026, रविवारसमयः शाम 6:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

  

नमस्कार!

आज “दैनिक भास्कर पंजाब एमिनेंस अवॉर्ड्स 2026” के इस विशेष अवसर पर उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले मैं दैनिक भास्कर परिवार और इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों को इस सार्थक पहल के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। साथ ही, आज सम्मान प्राप्त करने वाले सभी 35 विशिष्ट व्यक्तियों को भी मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

आज का यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता या पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं है। यह समाज के उन असली नायकों को पहचानने, उन्हें सम्मान देने और उनके योगदान का उत्सव मनाने का एक पावन अवसर है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम और नवाचार के माध्यम से हमारे समाज और प्रदेश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है।

हम अक्सर समाज में किसी व्यक्ति की केवल ‘सफलता’ और उसकी चमक को देखते हैं। लेकिन उस सफलता के पीछे छिपी रातों की नींद, वर्षों का संघर्ष, पसीना और लगातार आगे बढ़ते रहने का वह अदम्य जज़्बा अक्सर हमारी आँखों से ओझल रह जाता है। हर बड़ी उपलब्धि के पीछे अनगिनत चुनौतियां और कई बार निराशाजनक असफलताएं भी होती हैं। 

किसी कवि ने बहुत खूब कहा है, ‘‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’ जो व्यक्ति चुनौतियों के तूफानों के बीच भी अपनी नाव खेता रहता है, वही अंत में समाज के लिए एक मिसाल बनता है। आज इस मंच पर ऐसे ही ‘कर्मवीरों’ का सम्मान हो रहा है। आपकी यह उपलब्धि उन हजारों-लाखों युवाओं के लिए एक ‘प्रेरणा का प्रकाश’ है, जो आज अपने क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का सपना देख रहे हैं।

और मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि यह प्रेरणा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आज यहां जिन लोगों को सम्मानित किया जा रहा है, वे अपने-अपने क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। किसी ने व्यवसाय को नई ऊंचाई दी है। किसी ने नई सोच और इनोवेशन के माध्यम से अपने क्षेत्र को आगे बढ़ाया है। किसी ने रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। किसी ने समाज के लिए काम किया है। और किसी ने अपनी मेहनत से आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता तैयार किया है। ऐसे सभी प्रयासों का सम्मान होना जरूरी है।

देवियो और सज्जनो,

पंजाब सदियों से साहस, श्रम, उद्यम और सेवा की धरती रहा है। हमारे गुरुओं ने हमें सेवा और मानवता का संदेश दिया। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया। हमारे सैनिकों ने सीमाओं पर वीरता दिखाई और पंजाब के उद्यमियों ने देश और विदेश में अपनी मेहनत से विशिष्ट पहचान बनाई है।

पंजाबी समाज की सबसे बड़ी विशेषता है, मेहनत से कभी पीछे न हटना। कृषि हो या उद्योग, व्यापार हो या शिक्षा, चिकित्सा हो या खेल, कला हो या तकनीक, पंजाब की प्रतिभा ने हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ाया है।

लेकिन समय बदल रहा है और इसके साथ पंजाब की अर्थव्यवस्था तथा हमारे युवाओं की आकांक्षाएँ भी बदल रही हैं। कृषि हमारी शक्ति है और आगे भी रहेगी, लेकिन इसके साथ हमें एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड टेक्नोलॉजी, आधुनिक विनिर्माण, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यटन, खेल उद्योग, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप्स जैसे नए क्षेत्रों में भी अवसर पैदा करने होंगे। मैं हमेशा कहता हूँ, समय बदलने का इंतजार मत कीजिए; स्वयं को इतना सक्षम बनाइए कि आप बदलते समय का नेतृत्व कर सकें।

आज यहाँ सम्मानित होने वाले उद्यमियों और व्यवसायिक संस्थानों से मैं विशेष रूप से कहना चाहूँगा कि आपकी उपलब्धि केवल कारोबार या विकास दर से नहीं मापी जानी चाहिए। आपकी सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह भी है कि आपने कितने लोगों को रोजगार दिया, कितने युवाओं को अवसर दिया, कितनी नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया और समाज के विकास में कितना योगदान दिया। लाभ कमाना व्यवसाय की आवश्यकता है, लेकिन समाज के लिए मूल्य पैदा करना उसकी श्रेष्ठता है।

आज समय की मांग है कि हमारे युवा आगे आएं, नए स्टार्टअप्स शुरू करें, नवीनतम तकनीक को अपनाएं, रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनें, और आधुनिक पंजाब के नवनिर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि पंजाब की यह नई पीढ़ी इस राज्य को सफलता के नए शिखर तक अवश्य लेकर जाएगी।

देवियो और सज्जनो,

मैं दैनिक भास्कर समूह को इस बात के लिए विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ कि उसने पत्रकारिता की अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर, समाज के साथ सीधे जुड़ने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने का यह सराहनीय बीड़ा उठाया है।

जब हम दैनिक भास्कर के इतिहास पर नज़र डालते हैं, तो हमें दूरदृष्टि और संकल्प की एक महान गाथा दिखाई देती है। 1958 में भोपाल (मध्य प्रदेश) से शुरू हुआ यह सफर स्वर्गीय श्री रमेश चंद्र अग्रवाल जी की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम था। उनके नेतृत्व में एक क्षेत्रीय समाचार पत्र ने जो उड़ान भरी, वह आज पूरे विश्व के सबसे बड़े और सर्वाधिक पढ़े जाने वाले समाचार पत्रों में से एक बन गया है।

दैनिक भास्कर की विकास यात्रा की विशालता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज यह 14 राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले 61 संस्करणों के माध्यम से 14 करोड़ पाठकों का अटूट विश्वास जीतना, 30 रेडियो स्टेशनों के जरिए 2 करोड़ श्रोताओं तक अपनी आवाज़ पहुँचाना और 4 डिजिटल पोर्टलों के साथ आधुनिक युग में कदमताल करना, यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय पत्रकारिता के इतिहास का एक कीर्तिमान है।

दैनिक भास्कर की पहचान हमेशा उसकी निर्भीक विचारधारा, ‘‘सच्ची बात, बेधड़क’’ से रही है। इसके साथ ही, समूह का नारा ‘‘ज़िद करो, दुनिया बदलो’’ युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार करता है। सच्ची और निष्पक्ष बात को सामने रखना पत्रकारिता का परम धर्म है। लेकिन, समाज में जो लोग चुपचाप अच्छा काम कर रहे हैं, जो लोग सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, उनकी सफलता की कहानियों को मुख्यधारा में लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आज का यह ‘पंजाब एमिनेंस अवॉर्ड्स’ उसी महान और सकारात्मक पत्रकारिता का एक जीवंत उदाहरण है।

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। कहा जाता है, “कलम की ताकत तलवार से बड़ी होती है, क्योंकि तलवार केवल चोट कर सकती है, लेकिन कलम सोच बदल सकती है।” एक पत्रकार की जिम्मेदारी केवल यह बताना नहीं है कि क्या हुआ; उसकी जिम्मेदारी यह भी है कि वह तथ्यों को सामने रखे, समाज के जरूरी सवालों को उठाए और उन लोगों की आवाज़ बने, जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।

आज के डिजिटल युग में सूचनाएँ कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुँच जाती हैं। ऐसे समय में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया के दौर में खबर और अफवाह के बीच अंतर करना चुनौती बन गया है। ऐसे में एक विश्वसनीय पत्रकारिता संस्था की सबसे बड़ी पूंजी उसका विश्वास होती है।

मेरे विचार में पत्रकारिता का मूल मंत्र होना चाहिए, “तेज़ खबर से अधिक महत्वपूर्ण है सही खबर।” क्योंकि एक गलत सूचना केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती; वह पूरे समाज की सोच और निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए पत्रकारिता में तथ्य, निष्पक्षता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का होना अत्यंत आवश्यक है।

पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण दायित्व यह भी है कि वह समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों को सामने लाए। हमारे आसपास ऐसे हजारों लोग हैं जो बिना किसी प्रचार के शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं। जब मीडिया उनकी कहानियों को सामने लाता है, तो वह केवल एक व्यक्ति को पहचान नहीं देता, वह समाज को एक उदाहरण देता है।

एक अच्छी कहानी किसी एक व्यक्ति को प्रेरित कर सकती है, लेकिन एक प्रेरणादायक पत्रकारिता लाखों लोगों को सोचने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसीलिए कहा जा सकता है, “पत्रकारिता की असली शक्ति केवल खबर में नहीं, बल्कि उस बदलाव में है जो खबर पढ़ने के बाद समाज में पैदा होता है।”

आज पत्रकारिता एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल मीडिया, मोबाइल पत्रकारिता, सोशल मीडिया और अब ए.आई. जैसी नई तकनीकें भी पत्रकारिता का हिस्सा बन रही हैं। 

तकनीक ने खबरों की गति बढ़ा दी है, लेकिन पत्रकारिता का मूल उद्देश्य नहीं बदला है। तकनीक माध्यम बदल सकती है, लेकिन सत्य की जिम्मेदारी नहीं। आज भी पाठक यही चाहता है कि उसे ऐसी खबर मिले जिस पर वह भरोसा कर सके। इसलिए आने वाले समय की पत्रकारिता में हमें तकनीक की गति और पत्रकारिता की विश्वसनीयता, दोनों का संतुलन बनाना होगा।

मेरा मानना है कि पत्रकारिता में सबसे बड़ा पुरस्कार कोई ट्रॉफी नहीं होती, सबसे बड़ा पुरस्कार पाठक का विश्वास होता है। जब कोई पाठक किसी समाचार संस्था की खबर को देखकर कहता है, “हाँ, मैं इस पर भरोसा कर सकता हूँ,” तो उससे बड़ी उपलब्धि किसी पत्रकार और मीडिया संस्थान के लिए नहीं हो सकती।

आज के पंजाब एमिनेंस अवार्ड्स जैसे कार्यक्रम भी इसी सकारात्मक भूमिका को आगे बढ़ाते हैं। पत्रकारिता केवल समाज की कमियों को उजागर करने का माध्यम नहीं है; वह समाज की उपलब्धियों को पहचान देने और अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। 

और यही कारण है कि आज इस मंच पर सम्मानित होने वाले लोगों की कहानियाँ केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानियाँ नहीं हैं, ये पंजाब की प्रतिभा, मेहनत और संभावनाओं की कहानियाँ हैं।

मैं आज यहाँ सम्मानित होने वाले सभी विशिष्टजनों से एक बात विशेष रूप से कहना चाहूँगा। पुरस्कार और सम्मान प्राप्त करना निश्चित रूप से आपके और आपके परिवार के लिए गर्व का क्षण है। लेकिन हम सभी को याद रखना चाहिए कि सम्मान के साथ हमेशा एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।

जब समाज आपको अपने क्षेत्र में एक ‘आदर्श’ के रूप में देखता है, तो आपसे अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करूँगा कि अपनी सफलता के इस सफर को समाज के कल्याण के साथ भी जोड़ें। अपने साथ युवाओं को आगे बढ़ाएं, नई प्रतिभाओं को अवसर दें, और अपने अनुभव व संसाधनों के माध्यम से समाज को कुछ वापस देने का हर संभव प्रयास करें।

देवियो और सज्जनो,

आज मैं पंजाब के उद्योग एवं व्यापार जगत से भी कहना चाहूँगा कि विकास को हमें अधिक व्यापक दृष्टि से देखना होगा। इंडस्ट्री 4.0 (टेक्नोलॉजी के ज़रिए संगठनों का डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन), ऑटोमेशन (न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप), ए.आई. और डिजिटल टेक्नोलॉजी आने वाले वर्षों में काम करने के तरीकों को तेजी से बदलेंगे।

इस परिवर्तन में हमें दो काम एक साथ करने होंगे। नई तकनीक को अपनाना और अपने लोगों को उसके अनुरूप तैयार करना। तकनीक का उद्देश्य मनुष्य को पीछे छोड़ना नहीं, उसकी क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए।

हमारे उद्योगों को अपने कर्मचारियों की कार्यक्षमता और कौशल विकास में निवेश करना होगा। हमारे शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच अधिक संवाद होना चाहिए, ताकि जो कौशल बाजार को चाहिए, वे युवाओं को समय पर मिल सकें।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे। उनका संदेश था कि सपने विचार बनते हैं और विचार कर्म में बदलते हैं। मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ कि सपना देखना शुरुआत है, सीखना तैयारी है, मेहनत रास्ता है, और निरंतरता सफलता की कुंजी है।

साथियो,

हमारे विकास का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है, सामाजिक जिम्मेदारी। व्यवसाय तब महान बनता है जब वह समाज को भी आगे बढ़ाता है। यदि उद्योग किसी विद्यालय को बेहतर बनाता है, किसी युवा को कौशल देता है, किसी खिलाड़ी को सहयोग देता है, किसी जरूरतमंद को स्वास्थ्य सुविधा देता है, पर्यावरण संरक्षण में निवेश करता है, या किसी गाँव को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देता है, तो उसका प्रभाव ‘बैलेंस शीट’ से कहीं आगे जाता है।

भारतीय परंपरा में कहा गया है, “परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः” यानी वृक्ष अपने फल दूसरों के लिए देते हैं। हमारी सफलता का सर्वोत्तम स्वरूप भी वही है जो दूसरों के जीवन में कुछ सकारात्मक जोड़ सके।

पंजाब के सामने पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ भी हैं। इसलिए मैं आज उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र के प्रतिनिधियों से आग्रह करता हूँ कि विकास और पर्यावरण को विरोधी न मानें। हरित ऊर्जा अपनाएँ। ऊर्जा दक्षता बढ़ाएँ। जल संरक्षण करें। कचरे को संसाधन में बदलें। सर्कुलर इकोनॉमी (संसाधनों का अधिकतम उपयोग और कचरे या अपशिष्ट को पूरी तरह समाप्त करना) को बढ़ावा दें। और नई परियोजनाओं में स्थिरता को शुरुआत से ही शामिल करें।

साथियो, जिस प्रकार हम अपने ‘प्राकृतिक पर्यावरण’ को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उसी प्रकार आज हमें अपने ‘सामाजिक पर्यावरण’ को भी एक गहरे प्रदूषण से बचाना है। इसी संदर्भ में, मैं प्रदेश की एक अत्यंत गंभीर और हृदयविदारक समस्या का उल्लेख करना चाहूँगा, जिसने मुझे व्यक्तिगत रूप से भी बहुत आहत किया है, और वह है, ‘नशे का बढ़ता अभिशाप’।

आज, अत्यंत भारी मन से यह कहना पड़ रहा है कि गुरुओं की इस महान और पवित्र धरती को यह नशा रूपी दीमक भीतर ही भीतर खोखला कर रही है। सीमाओं पर बैठे दुश्मन से लड़ना पंजाब ने सदियों से जाना है, लेकिन आज यह अदृश्य दुश्मन हमारी सीमाओं के भीतर, हमारे घरों और हमारे बच्चों की रगों में घुसपैठ कर चुका है।

नशे के इस अभिशाप ने न जाने कितने ही हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है और कितनी ही माताओं की गोद हमेशा के लिए सूनी कर दी है। इसलिए, अब समय आ गया है कि हम नशे के खिलाफ चल रहे इस अभियान को एक ‘निर्णायक युद्ध’ का रूप दें। आइए, आज हम सब मिलकर यह अटूट संकल्प लें कि हम अपने युवाओं की ऊर्जा को इस अंधकार से निकालकर सकारात्मक दिशा में मोड़ेंगे, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ, सुरक्षित और पूर्णतः ‘नशामुक्त पंजाब’ सौंप सकें।

इसी कामना के साथ, मैं आज के इस महत्वपूर्ण आयाजन के लिए एक बार फिर दैनिक भास्कर की पूरी टीम को साधुवाद देता हूँ। मुझे पूर्ण आशा है कि यह ‘पंजाब एमिनेंस अवॉर्ड्स’ आने वाले वर्षों में भी ऐसे ही छुपे हुए हीरों और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को समाज के सामने लाता रहेगा।

अंत में, आज के सभी विजेताओं को एक बार फिर मेरी हार्दिक बधाई! आज आपकी मेहनत को जो पहचान मिली है, वह आपको कल और बेहतर करने के लिए प्रेरित करे। आप आगे बढ़ें, आपके साथ आपका क्षेत्र आगे बढ़े, आपके साथ हमारा पंजाब आगे बढ़े, और अंततः एक सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण हो।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ...

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिन्द!

जय भारत!