SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INAUGURATION CEREMEONY OF THE 11 KV UNDERGROUND POWER NETWORK PROJECT AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 6, 2026.
- by Admin
- 2026-09-06 18:05
11 केवी भूमिगत बिजली नेटवर्क परियोजना के उद्घाटन समारोह पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 06.09.2026, रविवार समयः शाम 4:30 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज का दिन हमारे इस ‘सिटी ब्युटीफुल’ चंडीगढ़ के ढांचागत विकास और आधुनिकीकरण के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। आज मुझे सी.पी.डी.एल. (चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड) द्वारा सम्पन्न ‘11 केवी भूमिगत बिजली नेटवर्क परियोजना’ का उद्घाटन करते हुए अपार हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है। यह परियोजना चंडीगढ़ की बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आधुनिक तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचे और नागरिक-केंद्रित सुविधाओं के माध्यम से देश के शहरों को स्मार्ट, सुरक्षित और बेहतर बनाने के विजन के अनुरूप चंडीगढ़ भी निरंतर आधुनिक सुविधाओं की ओर आगे बढ़ रहा है। आज का यह प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस भगीरथ प्रयास को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए मैं सी.पी.डी.एल. की पूरी टीम, इंजीनियरों और दिन-रात पसीना बहाने वाले सभी श्रमिकों को हृदय से बधाई देता हूँ।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, ने 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ के बिजली वितरण तंत्र का कार्यभार संभालने के बाद से बिजली व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना इन प्रयासों का प्रमुख उद्देश्य है।
देवियो और सज्जनो,
आज जिन सेक्टरों में इस परियोजना का उद्घाटन किया जा रहा है, उनमें सेक्टर 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 शामिल हैं। ये चंडीगढ़ के अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में प्रमुख सरकारी कार्यालय, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों के सरकारी आवास, वरिष्ठ अधिकारियों के आवास तथा अनेक महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक संस्थान स्थित हैं।
इस परियोजना से इन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 25 हजार लोगों और करीब 12 हजार बिजली उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलेगा। लगभग 18 किलोमीटर लंबी 11 केवी भूमिगत केबल बिछाई गई है तथा 4 डिस्ट्रीब्यूशन फीडरों पर 14 रिमोट कंट्रोल रिंग मेन यूनिट, यानी RMU, स्थापित किए गए हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना के अंतर्गत ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत करने से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और सुरक्षा में सुधार होगा। आंधी, तेज हवाओं, पेड़ों के गिरने तथा मौसम से जुड़ी अन्य घटनाओं के कारण होने वाले बिजली व्यवधान को कम करने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, भूमिगत नेटवर्क से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देने वाली बिजली की तारों और अन्य ओवरहेड ढांचे में कमी आएगी। इससे चंडीगढ़ की सुंदरता और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।
मेरे विचार से इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पक्ष सुरक्षा है। बिजली की ओवरहेड लाइनों को हटाने से नागरिकों के साथ-साथ बिजली के रखरखाव और फील्ड में कार्य करने वाली टीमों हेतु भी सुरक्षा बेहतर होगी।
देवियो और सज्जनो,
मुझे बताया गया है कि इस परियोजना में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया है। नए नेटवर्क में एक फीडर से दूसरे फीडर पर बिजली का लोड ट्रांसफर करने की सुविधा उपलब्ध है। सेक्टर-18 स्थित सीपीडीएल के कंट्रोल सेंटर से त्डन् को रिमोट कंट्रोल के माध्यम से संचालित किया जा सकता है।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि किसी एक फीडर में तकनीकी समस्या आती है, तो बिजली आपूर्ति को दूसरे फीडर से शीघ्र बहाल करने में सहायता मिलेगी। इससे बिजली कटौती की अवधि कम होगी और उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकेगी। मैं समझता हूं कि आधुनिक तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यवस्था को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए है।
साथियो,
हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा में कहा गया है, “तमसो मा ज्योतिर्गमय”, अर्थात् हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। आज के समय में बिजली केवल प्रकाश का साधन नहीं रही है। यह हमारे घरों, विद्यालयों, अस्पतालों, उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संचार व्यवस्था, यातायात प्रणाली और डिजिटल सेवाओं का आधार है।
इसलिए एक सुदृढ़ विद्युत व्यवस्था किसी भी आधुनिक शहर की जीवनरेखा होती है। परंतु, समय के साथ इस जीवनरेखा को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक तथा विश्वस्तरीय बनाना हमारी जिम्मेदारी है।
इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए, मेरे विचार से चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण और नियोजित शहर में बिजली का भूमिगत नेटवर्क भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निवेश है।
आने वाले वर्षों में बिजली की मांग बढ़ेगी, नई तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और नागरिकों की अपेक्षाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे में हमें आज से ही अपनी बिजली वितरण व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करना होगा। इस दिशा में सी.पी.डी.एल. द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
इस परियोजना का पर्यावरणीय महत्व भी है। रॉक गार्डन और सुखना झील के आसपास के वन क्षेत्रों में पहले से मौजूद खुले बिजली के तारों से प्रवासी पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए जोखिम की संभावना बनी रहती है। बिजली नेटवर्क को भूमिगत करने से इस जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी और इन प्राकृतिक क्षेत्रों की सुंदरता को बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
हम सभी जानते हैं कि चंडीगढ़ की पहचान केवल एक आधुनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि हरित और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील शहर के रूप में भी है। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।
मैं यह कहना चाहूंगा कि किसी भी बिजली वितरण व्यवस्था की सफलता केवल बुनियादी ढांचे से नहीं मापी जाती। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से होती है कि उपभोक्ताओं को कितनी विश्वसनीय सेवा मिल रही है, उनकी शिकायतों का कितनी तेजी से समाधान हो रहा है और बिजली व्यवस्था उनकी बढ़ती जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा कर पा रही है।
इसलिए मैं सी.पी.डी.एल. से अपेक्षा करता हूं कि वह बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ उपभोक्ता सेवा, तकनीक, पारदर्शिता और तुरंत प्रतिक्रिया पर भी लगातार ध्यान देता रहेगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चंडीगढ़ के प्रत्येक उपभोक्ता को सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध हो।
मुझे खुशी है कि ‘जॉइन्ट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन’ ने वर्ष 2025 से 2030 की अवधि के लिए सी.पी.डी.एल. के लगभग 956 करोड़ रुपये के बिज़नेस प्लान को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। इस व्यापक योजना में सेक्टर 34 में नए 66 केवी सब-स्टेशन का निर्माण, सेक्टर 37 और सेक्टर 17 के मौजूदा 33 और 11 केवी सब-स्टेशनों को 66 और 11 केवी स्तर पर उन्नत करना, 220 केवी हल्लोमाजरा से नए 66 केवी फीडर बिछाना, उच्च एवं निम्न दाब वितरण तंत्र को मज़बूत कर विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना तथा स्मार्ट मीटर स्थापित करना शामिल है।
साथ ही, कागजरहित कार्यप्रणाली, डेटा एवं सूचना प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर और डेटा रिक्वरी सेंटर की स्थापना तथा स्काडा प्रणाली (SCADA - Supervisory Control and Data Acquisition) के माध्यम से विद्युत तंत्र की दूरस्थ निगरानी और नियंत्रण जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अपनाया जाएगा। यह निवेश केवल विद्युत अवसंरचना के विस्तार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि चंडीगढ़ को एक अधिक आधुनिक, सुरक्षित, सक्षम, डिजिटल और भविष्य के लिए तैयार विद्युत व्यवस्था प्रदान करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका अंतिम उद्देश्य प्रत्येक उपभोक्ता को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर सेवा उपलब्ध कराना है।
देवियो और सज्जनो,
मैं इस अवसर पर हमारे लाइनमैन, तकनीशियन, इंजीनियर और मैदानी कर्मचारियों की विशेष सराहना करना चाहता हूँ। जब किसी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित होती है, तब यही कर्मचारी गर्मी, सर्दी, बारिश अथवा रात के समय भी बाहर निकलकर विद्युत व्यवस्था बहाल करने में जुट जाते हैं। उनका कार्य कई बार दिखाई नहीं देता, लेकिन शहर के सामान्य जीवन को चलाए रखने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं सी.पी.डी.एल. से अपेक्षा करता हूँ कि वह अपने तकनीकी कर्मचारियों की सुरक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास और कल्याण पर विशेष ध्यान दे।
आज हमें केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विद्युत व्यवस्था नहीं बनानी है। हमें आने वाले दस, बीस और तीस वर्षों की जरूरतों को भी समझना होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, चार्जिंग केंद्रों की संख्या बढ़ेगी, घरों और संस्थानों में सौर ऊर्जा का विस्तार होगा, डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता बढ़ेगी और ऊर्जा की मांग के स्वरूप में बदलाव आएगा। इसलिए आज का विद्युत तंत्र ऐसा होना चाहिए जो भविष्य की इन सभी आवश्यकताओं को संभालने में सक्षम हो।
चंडीगढ़ के लिए हरित और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ना भी अत्यंत आवश्यक है। छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र, ऊर्जा भंडारण व्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, ऊर्जा दक्ष उपकरण तथा आधुनिक विद्युत जाल, ये सभी भविष्य की शहरी ऊर्जा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग होंगे। भूमिगत केबलिंग जैसी परियोजनाएँ इसी व्यापक आधुनिकीकरण की नींव को मजबूत करती हैं।
मैं समझता हूं कि ऊर्जा संरक्षण की जिम्मेदारी केवल प्रशासन या सी.पी.डी.एल. की नहीं है। हर नागरिक को भी बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। आवश्यकता न होने पर बिजली के उपकरण बंद करना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना, प्राकृतिक प्रकाश का अधिक उपयोग करना और बिजली की अनावश्यक खपत से बचना, ये छोटे कदम मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। संसाधनों का सम्मान ही सतत विकास की पहली शर्त है।
मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहता हूँ कि वे अपने घरों में ऊर्जा संरक्षण के प्रेरक बनें। वे अपने परिवार के सदस्यों को बिजली बचाने के लिए प्रेरित करें और स्वयं भी जिम्मेदार उपभोक्ता बनें। आज बचाई गई ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देती है।
साथियो,
किसी भी आधारभूत संरचना परियोजना में केवल प्रारंभिक लागत को नहीं देखना चाहिए। हमें यह भी देखना चाहिए कि वह परियोजना कितने वर्षों तक प्रभावी ढंग से काम करेगी, उसका रखरखाव कितना सरल होगा, उससे नागरिकों को कितना लाभ होगा और वह बदलते मौसम तथा बढ़ती मांग का सामना कितनी अच्छी तरह कर पाएगी। गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोगिता, इन तीनों को हमारी हर परियोजना का आधार बनना चाहिए।
यह भी याद रखना चाहिए कि किसी परियोजना का वास्तविक मूल्य उद्घाटन के दिन नहीं, बल्कि वर्षों बाद उसकी कार्यक्षमता से सिद्ध होता है। इसलिए मैं सी.पी.डी.एल. से अपेक्षा करता हूँ कि इस परियोजना का नियमित निरीक्षण, परीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
मैं यह भी चाहूँगा कि चंडीगढ़ में उन क्षेत्रों की व्यवस्थित पहचान की जाए जहाँ विद्युत आपूर्ति बार-बार बाधित होती है, जहाँ पेड़ों अथवा मौसम से ऊपर से गुजरने वाली लाइनों पर अधिक जोखिम रहता है और जहाँ भूमिगत केबलिंग से अधिकतम सार्वजनिक लाभ प्राप्त हो सकता है। ऐसी परियोजनाओं की प्राथमिकता तकनीकी आवश्यकता और नागरिक हित के आधार पर तय की जानी चाहिए।
मेरा मानना है कि अच्छी शासन व्यवस्था वह है जो केवल समस्या आने पर प्रतिक्रिया न दे, बल्कि समस्या आने की संभावना को पहले ही पहचानकर समाधान तैयार करे। यदि किसी क्षेत्र में बार-बार खराबी आती है, तो केवल हर बार मरम्मत करना पर्याप्त नहीं है। हमें उसके मूल कारण को समझकर स्थायी समाधान की दिशा में जाना चाहिए। यही आधुनिक और दूरदर्शी प्रशासन की पहचान है।
मैं इस अवसर पर एक प्रेरक पंक्ति साझा करना चाहूँगा, “जो व्यवस्था केवल आज की समस्या हल करती है, वह उपयोगी है; लेकिन जो आने वाले कल की समस्या को जन्म लेने से पहले रोक देती है, वही दूरदर्शी व्यवस्था है।” आज की यह परियोजना इसी सोच का उदाहरण है।
इसी प्रकार हमें यह भी याद रखना चाहिए कि विकास केवल वही नहीं जो दिखाई दे; विकास वह भी है जिसका लाभ नागरिक बिना किसी बाधा के प्रतिदिन अनुभव करे। भूमिगत विद्युत केबल शायद जमीन के नीचे दिखाई न दे, लेकिन इसका लाभ बेहतर विद्युत आपूर्ति, अधिक सुरक्षा और कम व्यवधान के रूप में नागरिकों तक पहुँचेगा।
चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के सभी अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और इस परियोजना से जुड़े श्रमिकों को मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। किसी भी परियोजना के उद्घाटन के पीछे अनेक महीनों की योजना, सर्वेक्षण, स्वीकृति, निर्माण, तकनीकी परीक्षण और समन्वय का योगदान होता है। इस कार्य में लगे सभी लोगों का प्रयास सराहनीय है।
हमारी प्राचीन परंपरा में एक और सुंदर संदेश है, “चरैवेति, चरैवेति”, अर्थात् आगे बढ़ते रहो। यही विकास का भी मंत्र है। आज एक क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था मजबूत हुई है, कल अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी सुधार होना चाहिए। आज एक नई केबल व्यवस्था बनी है, कल इसके साथ आधुनिक निगरानी और स्वचालन की व्यवस्था जुड़नी चाहिए। निरंतर सुधार ही किसी शहर को श्रेष्ठ बनाता है।
मैं नागरिकों से भी आग्रह करता हूँ कि वे सार्वजनिक विद्युत संपत्ति को अपनी सामूहिक संपत्ति समझें। यदि कहीं क्षतिग्रस्त तार, खुला विद्युत उपकरण, टूटे हुए खंभे अथवा कोई अन्य विद्युत जोखिम दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग या सी.पी.डी.एल. को सूचित करें। एक जिम्मेदार नागरिक की समय पर दी गई सूचना किसी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि 11 केवी विद्युत केबल भूमिगत परियोजना चंडीगढ़ के आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप विद्युत तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य केवल बिजली पहुँचाना नहीं, बल्कि भरोसा पहुँचाना है; केवल तार बिछाना नहीं, बल्कि नागरिक सुविधा का मजबूत आधार तैयार करना है; केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए शहर को तैयार करना है।
चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं, बल्कि सुविचारित शहरी नियोजन, अनुशासित विकास और उत्कृष्ट जीवन-शैली का प्रेरक उदाहरण है। इसकी सुव्यवस्थित सेक्टर योजना, हरियाली, स्वच्छता, सुंदर उद्यान और विशिष्ट वास्तुकला ने इसे देश और विश्व में विशेष पहचान दिलाई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, खेल, संस्कृति और सार्वजनिक सेवाओं में भी इसने उच्च मानदंड स्थापित किए हैं।
चंडीगढ़ की वास्तविक शक्ति इसकी प्रगतिशील सोच में है, जो परंपरा और आधुनिकता, प्रकृति और प्रौद्योगिकी तथा सुविधा और सुशासन के बीच संतुलन स्थापित करती है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि इसकी गौरवशाली पहचान को और मजबूत करते हुए इसे देश के सबसे सुरक्षित, स्वच्छ, हरित, स्मार्ट और नागरिक-केंद्रित शहरों में अग्रणी बनाए रखें। महान शहर केवल बनाए नहीं जाते, उन्हें दूरदृष्टि, अनुशासन और निरंतर उत्कृष्टता से गढ़ा जाता है”, चंडीगढ़ इसका जीवंत उदाहरण है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा चंडीगढ़ बनाने का संकल्प लें जहाँ प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिले; जहाँ तकनीक और प्रशासन मिलकर जनसेवा को सरल बनाएँ; और जहाँ हर नई परियोजना नागरिकों के जीवन में वास्तविक सुधार लेकर आए।
मैं पुनः चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, चंडीगढ़ प्रशासन के संबंधित विभागों तथा परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों, कर्मचारियों और श्रमिकों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे विश्वास है कि यह परियोजना आने वाले समय में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता, सुरक्षा और शहरी सौंदर्य, तीनों में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं इस 11 केवी विद्युत केबल भूमिगत परियोजना को चंडीगढ़ के नागरिकों को समर्पित करता हूँ और आशा करता हूँ कि विकास की यह रोशनी निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द! जय भारत!