SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF SWACHHATA HI SEVA 2026 CAMPAIGN AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 17, 2026.

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 17.09.2026, गुरूवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

  

नमस्कार!

आज मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि हम सभी यहां ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के शुभारंभ के लिए एकत्रित हुए हैं। मैं इस जनहितकारी अभियान के आयोजन के लिए नगर निगम चंडीगढ़, सभी स्वच्छता मित्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और इससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को हार्दिक बधाई देता हूँ।

 

“स्वच्छता ही सेवा” केवल एक नारा नहीं है। यह हमारी सोच, हमारी आदतों और हमारी जीवनशैली को बदलने का राष्ट्रीय संकल्प है। इसका सीधा संदेश है कि स्वच्छता किसी एक विभाग, संस्था अथवा कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का साझा कर्तव्य है।

स्वच्छता का अर्थ सड़क से कूड़ा उठाना नहीं है। स्वच्छता का अर्थ है, अपने घर, गली, बाजार, विद्यालय, कार्यालय, पार्क, जलस्रोत और पूरे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करना। स्वच्छता स्वास्थ्य से जुड़ी है, आत्मसम्मान से जुड़ी है, पर्यावरण से जुड़ी है और राष्ट्र की प्रगति से भी जुड़ी है।

महात्मा गांधी जी ने कहा था, “स्वच्छता स्वतंत्रता से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” उनके लिए स्वच्छता केवल बाहरी सफाई का विषय नहीं थी। वह इसे व्यक्ति के चरित्र, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखते थे। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गांधी जी के इसी सपने को जन-आंदोलन में बदलते हुए 2 अक्टूबर, 2014 को ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की शुरुआत की। प्रधानमंत्री जी ने स्वयं झाड़ू उठाकर देशवासियों को यह संदेश दिया कि स्वच्छता का कार्य छोटा नहीं है और इसमें भाग लेना प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मान की बात है।

स्वच्छ भारत मिशन ने देश में स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी का अभियान बनाया। करोड़ों परिवारों को शौचालय की सुविधा मिली, खुले में शौच से मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति हुई और स्वच्छता के प्रति लोगों की सोच में बड़ा परिवर्तन आया।

इसी दिशा में सितंबर 2017 में “स्वच्छता ही सेवा” जन-आंदोलन प्रारंभ किया गया। तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से इसका राष्ट्रीय शुभारंभ किया था। तभी से “स्वच्छता ही सेवा” अभियान प्रत्येक वर्ष महात्मा गांधी की जयंती से पहले देशभर में व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित किया जाता है। इसका भाव अत्यंत सरल है, “सेवा का सबसे सहज और प्रभावी रूप स्वच्छता है।”

साथियो,

पिछले वर्षों इस अभियान ने देशभर में स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी को लगातार मजबूत किया है। वर्ष 2025 में लगभग 18 करोड़ लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छता अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।

इस वर्ष ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक पूरे एक महीने चलेगा। इस अभियान के पांच प्रमुख आधार हैं। स्वच्छता से समृद्धि, सफाई मित्रों की सुरक्षा एवं सम्मान, स्वच्छता के लिए जनभागीदारी, स्वच्छ पाठशाला और युवाओं की भागीदारी तथा स्वच्छ सार्वजनिक स्थानों का निर्माण।

हमारा पहला आधार है ‘स्वच्छता से समृद्धि’। हमें यह समझना होगा कि जिसे हम कचरा समझते हैं, उसमें भी उपयोग और मूल्य की संभावना छिपी है। ‘कबाड़ से जुगाड़’ और ‘कबाड़ से कला’ जैसी पहल के माध्यम से बेकार वस्तुओं को उपयोगी वस्तुओं और सुंदर कलाकृतियों में बदला जा सकता है। इससे कचरा कम होगा और रोजगार व आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।

हमारे दूसरे और अत्यंत महत्वपूर्ण आधार हैं हमारे सफाई मित्र और स्वच्छता कर्मी। जो लोग हर दिन हमारे शहर और हमारे घरों को स्वच्छ रखने के लिए मेहनत करते हैं, उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी भी हमारी है।

‘सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ के माध्यम से स्वास्थ्य जांच, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, सुरक्षा उपकरण और सम्मान उपलब्ध कराया जाएगा। मैं विशेष रूप से कहना चाहता हूं कि सफाई मित्रों का सम्मान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हमारी निरंतर जिम्मेदारी होनी चाहिए।

तीसरा आधार है जनभागीदारी। हमें घरों से ही इसकी शुरुआत करनी है। कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना, गीले कचरे से खाद बनाना, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना और वस्तुओं का पुनः उपयोग तथा पुनर्चक्रण करना, ये छोटे कदम हैं, लेकिन इनका प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है।

मैं चंडीगढ़ वासियों से विशेष आग्रह करूंगा कि वे स्वच्छता को केवल नगर निगम की जिम्मेदारी न समझें। अपने घर के सामने, अपनी गली, बाजार, पार्क, स्कूल और आसपास के सार्वजनिक स्थान को साफ रखना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। स्वच्छ चंडीगढ़ का निर्माण सफाई कर्मचारियों से शुरू होकर हर नागरिक की भागीदारी से पूरा होगा।

इस अभियान में हमारे विद्यार्थी और युवा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ‘स्वच्छ पाठशाला-स्वच्छता के लिए युवा’ के माध्यम से स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता, प्रतियोगिताएं, संवाद, स्वच्छता यात्राएं और कचरे से कला जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 

मेरा चंडीगढ़ के युवाओं से आह्वान है कि वे स्वच्छता को एक जिम्मेदारी के साथ-साथ एक जन-अभियान और जीवनशैली बनाने का संकल्प लें।

इस अभियान के दौरान स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और कचरा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उनकी सफाई और सुंदरता बढ़ाई जाएगी। बाजारों, पार्कों, सार्वजनिक शौचालयों, पर्यटन स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, जल निकायों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

 

साथियो,          

स्वच्छता के क्षेत्र में चंडीगढ़ लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 3 से 10 लाख की आबादी वाली श्रेणी में चंडीगढ़ ने ‘सुपर स्वच्छ लीग’ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इससे पहले 2023 में 11वाँ, 2022 में 12वाँ और 2021 में 66वाँ स्थान रहा था। यह हमारी निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

चंडीगढ़ में स्वच्छता की शुरुआत कचरे को घर से ही अलग करने और जिम्मेदारी के साथ घर-घर कचरा एकत्र करने से होती है। इसके लिए 523 अलग-अलग कचरा एकत्र करने वाले वाहनों की व्यवस्था की गई है, जो सप्ताह में छह दिन कचरा एकत्र करते हैं। चार डिब्बों की व्यवस्था, नियमित बैठकें और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को कचरा अलग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

हमारा प्रयास केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और पुनः उपयोग भी किया जा रहा है। गीले कचरे से खाद, सूखे कचरे से ईंधन और निर्माण एवं विध्वंस के कचरे से उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जा रही है। इस प्रकार कचरे को बोझ नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

इन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है हमारा मानवीय दृष्टिकोण, जिसके तहत अनौपचारिक कचरा श्रमिकों को औपचारिक प्रणाली से जोड़ा जा रहा है, महिला श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है, और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ट्रांसजेंडर साथियों को भी शामिल किया गया है। हमारे श्रमिकों का कल्याण, स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमा और सामाजिक सुरक्षा हमेशा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता रहे हैं।

तकनीक के माध्यम से स्वच्छता व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। आईसीसीसी, जीपीएस ट्रैकिंग, डिजिटल डैशबोर्ड और नागरिकों की प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाएँ निगरानी और जवाबदेही को मजबूत कर रही हैं।

साथ ही, ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ के साथ मिलकर रोजगार और आजीविका के अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। अर्पण, स्वच्छ सवारी, आर.आर.आर. केंद्र और पुनः उपयोग केंद्र जैसी पहलें इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए ‘स्वच्छ वार्ड रैंकिंग’ भी शुरू की गई है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों को 50 लाख, 30 लाख और 20 लाख रूपये की विकास राशि दी जाएगी, जिसमें 10 प्रतिशत राशि सफाई कर्मचारियों के लिए निर्धारित होगी।

साथियो,

चंडीगढ़ देश के सबसे सुनियोजित शहरों में से एक है। इसकी पहचान केवल इसकी सुंदर सड़कों, हरियाली और वास्तुकला से नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों से भी है। हमें इस पहचान को और मजबूत करना है। नगर निगम अपना काम कर सकता है, लेकिन नागरिकों के सहयोग के बिना शहर स्वच्छ नहीं रह सकता।

“मेरा शहर है, मेरी जिम्मेदारी है।” जब हर नागरिक यह संकल्प अपनाएगा, तभी चंडीगढ़ देश का सबसे स्वच्छ, सुंदर और अनुशासित शहर बनेगा।

हमें “आर-आर-आर” यानी रिड्यूस, रीयूज़ और रीसाइकिल का मंत्र अपनाना चाहिए। कम उपयोग करें, वस्तुओं का दोबारा उपयोग करें, और अधिक से अधिक सामग्री को पुनर्चक्रित करें।

जो वस्तु हमारे लिए बेकार है, वह किसी जरूरतमंद के लिए उपयोगी हो सकती है। पुराने कपड़े, पुस्तकें, खिलौने, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फेंकने के बजाय “रिड्यूस, रीयूज़ और रीसाइकिल केंद्रों” तक पहुंचाना चाहिए।

मैं विशेष रूप से 1 अक्टूबर को ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के अंतर्गत होने वाले सामूहिक श्रमदान में अधिक से अधिक नागरिकों से भाग लेने का आह्वान करता हूं। इसी प्रकार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस को जनभागीदारी के साथ मनाया जाएगा।

हमें याद रखना चाहिए कि स्वच्छता केवल कचरा उठाने का काम नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, सोच और जिम्मेदारी का हिस्सा है। जब नागरिक स्वयं अपने आसपास को स्वच्छ रखने का संकल्प लेते हैं, तो इससे स्वास्थ्य बेहतर होता है, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है तथा अपने शहर के प्रति गर्व की भावना मजबूत होती है।

साथियो,

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वच्छता को जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा है। हमें उनके “जनभागीदारी से जन-आंदोलन” के मंत्र को चंडीगढ़ में पूरी शक्ति के साथ साकार करना है।

विकसित भारत 2047 के निर्माण का मार्ग स्वच्छ और स्वस्थ भारत से होकर गुजरता है। कोई शहर तब विकसित बनता है, जब उसके नागरिक अनुशासित हों, सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें। आज आवश्यकता है कि हम "Not in My Backyard" की सोच छोड़कर "My Waste, My Responsibility" यानी ‘‘मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी’’ का भाव अपनाएं।

मैं आज चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से भी कहना चाहता हूँ कि वे नागरिकों को बेहतर, सरल और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराएं। घर-घर कचरा संग्रह निर्धारित समय पर हो, शिकायतों का शीघ्र समाधान हो, कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था पारदर्शी हो और नागरिकों को सही जानकारी निरंतर दी जाए।

जनता से जिम्मेदारी की अपेक्षा तभी प्रभावी होगी, जब प्रशासन भी सेवा की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करे। नागरिक और नगर निगम एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि स्वच्छ चंडीगढ़ के साझेदार हैं।

आइए, आज हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि स्वच्छता हमारे लिए केवल अभियान नहीं, बल्कि संस्कार और जीवनशैली होगी।

हम अपने घर से शुरुआत करेंगे, अपने मोहल्ले को साथ जोड़ेंगे, अपने बाजार और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

मैं चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम, सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, सफाई मित्रों, स्वयं सहायता समूहों, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, युवाओं और चंडीगढ़वासियों से आह्वान करता हूं कि ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ को जनभागीदारी का एक मजबूत उदाहरण बनाएं।

आइए, हम मिलकर ऐसा चंडीगढ़ बनाएं जो केवल देखने में सुंदर न हो, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता के मामले में भी पूरे देश के लिए उदाहरण बने।

स्वच्छता को आदत बनाएं, स्वच्छता को संस्कार बनाएं और स्वच्छता को जनआंदोलन बनाएं।

इसी संकल्प और विश्वास के साथ मैं ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के सफल शुभारंभ की शुभकामनाएं देता हूं।

स्वच्छ चंडीगढ़, स्वस्थ चंडीगढ़ और सुंदर चंडीगढ़ के लिए हम सभी मिलकर आगे बढ़ें।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिन्द!

जय भारत!