SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CHANDIGARH’S START UP POLICY AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 9, 2026.
- by Admin
- 2026-09-09 13:30
चंडीगढ़ की स्टार्टअप नीति के तहत आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 09.09.2026, बुधवार समयः सुबह 10:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज का यह अवसर केवल कुछ स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता प्रदान करने का कार्यक्रम नहीं है। मेरे लिए यह उस सोच को आगे बढ़ाने का अवसर है, जिस सोच पर स्वयं चंडीगढ़ की नींव रखी गई थी।
इस शहर की एक विशेष बात है। चंडीगढ़ को बनने से पहले कागज पर सोचा गया था। इसके सेक्टर तब नक्शे पर अंकित हो चुके थे, जब उन स्थानों पर खेत थे। स्वतंत्र भारत उस समय बहुत युवा था, संसाधन सीमित थे, चुनौतियाँ अनेक थीं; फिर भी देश ने यह साहस किया कि एक ऐसा आधुनिक शहर बनाया जाए जिसकी योजना भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई हो।
निश्चित रूप से समय के साथ हर योजना में सुधार की आवश्यकता होती है। चंडीगढ़ की मूल योजना के भी कुछ निर्णय ऐसे होंगे जिन्हें आज हम अलग दृष्टि से देखते हैं। लेकिन उसके पीछे जो मूल भावना थी, वह आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कभी-कभी सरकार को किसी विचार पर तब विश्वास करना पड़ता है, जब वह विचार अभी पूरी तरह सिद्ध नहीं हुआ होता।
मेरे विचार में आज दिया जा रहा ’’स्टार्टअप ग्रांट’’ भी इसी विश्वास की अभिव्यक्ति है। आज हम 8 स्टार्टअप्स को कुल 85 लाख 80 हजार रूपये और 4 इनक्यूबेटर्स को 1 करोड़ 17 लाख 50 हजार रूपये की ग्रांट प्रदान कर रहे हैं। यह सहायता चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी, ताकि स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स अपने निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकें।
मैं यहाँ एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूँ। यह ग्रांट कोई पुरस्कार नहीं है। आज यहाँ किसी को किसी बड़ी सफलता के लिए सम्मानित नहीं किया जा रहा। यह काई सब्सिडी भी नहीं है, जिसमें सरकार किसी पहले से स्थापित गतिविधि की लागत कम करती है।
यह सहायता उससे अलग है। यह उस समय उपलब्ध कराई जा रही सहायता है, जब एक अच्छा विचार अभी व्यवसाय बनने की प्रक्रिया में है; जब तकनीक प्रयोगशाला से निकल चुकी है, लेकिन बाजार तक नहीं पहुँची; जब संस्थापक के पास क्षमता है, लेकिन पर्याप्त पूँजी नहीं; जब उसके सामने संभावना है, लेकिन उस संभावना को सिद्ध करने के लिए संसाधन चाहिए।
एक युवा उद्यमी की स्थिति को समझिए। अपने व्यवसाय के दूसरे वर्ष में वह बैंक के पास जाता है। बैंक उससे गारंटी माँग सकता है, जो उसके पास अभी नहीं है। क्रैडिट हिस्ट्री माँगी जा सकती है, जिसे बनाने के लिए उसे समय ही नहीं मिला। वह निवेशक के पास जाता है तो निवेशक बाजार में पकड़ या प्रगति और ग्राहकों की संख्या दिखाने को कहता है। लेकिन बाजार में पकड़ बनाने और ग्राहकों तक पहुँचने के लिए भी पहले कुछ पूँजी चाहिए।
यानी एक विचार को सफल उद्यम में बदलने, एक नमूने को उपयोगी उत्पाद बनाने और प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को पहले ग्राहक तक पहुँचाने के बीच एक लंबी और चुनौतीपूर्ण दूरी होती है।
निजी निवेशक और वित्तीय संस्थाएँ अक्सर इस शुरुआती चरण में निवेश करने से हिचकिचाती हैं, क्योंकि इस समय सफलता की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती। तकनीक या व्यवसाय के सफल होने में समय लग सकता है और असफलता की स्थिति में निवेश की गई पूँजी वापस मिलने की संभावना भी कम होती है।
ऐसी स्थिति में सरकार की भूमिका दान देने की नहीं, बल्कि उस जोखिम के एक छोटे हिस्से को साझा करने की है, जिसका सामाजिक और आर्थिक लाभ भविष्य में बहुत बड़ा हो सकता है। इसलिए यह नीति उदारता की नहीं, आर्थिक समझ और भविष्य में निवेश की नीति है।
हम सार्वजनिक धन को किसी अनिश्चित प्रयोग में बिना सोच-विचार के नहीं लगा रहे। हम उस बिंदु पर सीमित सहायता दे रहे हैं जहाँ सार्वजनिक निवेश एक नए उत्पाद, नई तकनीक, नई कंपनी, नए रोजगार और संभवतः एक नए उद्योग के जन्म का कारण बन सकता है। यही स्टार्टअप इकोसिस्टम की मूल अर्थव्यवस्था है।
देवियो और सज्जनो,
चंडीगढ़ को स्टार्टअप और नवाचार की दृष्टि से सोचने के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण है। चंडीगढ़ का कुल क्षेत्रफल केवल ’114 वर्ग किलोमीटर’ है। हमारे पास बड़े राज्यों की तरह हजारों एकड़ अतिरिक्त औद्योगिक भूमि उपलब्ध नहीं है। हमारी भूमि सीमित है और सुखना कैचमेंट, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र तथा क्षेत्रीय पर्यावरण से जुड़ी सीमाएँ ऐसी वास्तविकताएँ हैं जिनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
इसलिए चंडीगढ़ की आर्थिक प्रगति का मॉडल अन्य बड़े राज्यों से अलग होना ही चाहिए।
हमारा भविष्य यह नहीं हो सकता कि हर कुछ वर्षों में नया विशाल औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए भूमि का विस्तार करते जाएँ। हमारी वास्तविक संभावना है, ’’कम भूमि में अधिक मूल्य पैदा करना।’’ ऐसे उद्योग और उद्यम जो जमीन कम लें, लेकिन ज्ञान अधिक उपयोग करें। जो कच्चे माल से अधिक बौद्धिक पूंजी पर आधारित हों। जो प्रति वर्ग फुट अधिक आर्थिक मूल्य उत्पन्न करें।
सॉफ्टवेयर, ए.आई., चिकित्सा तकनीक, रोग-जाँच, जैव-प्रौद्योगिकी, सटीक उपकरण निर्माण, डिजाइन, डिजिटल सेवाएँ, स्वच्छ एवं हरित तकनीक, जलवायु तकनीक, कृषि-तकनीक तथा शोध-आधारित उद्यम, ये वे क्षेत्र हैं जहाँ चंडीगढ़ अपनी वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित कर सकता है। और इस दिशा में हमारे पास एक असाधारण ताकत पहले से मौजूद है।
यदि हम चंडीगढ़ और इसके आसपास के क्षेत्र को देखें, तो यहाँ पी.जी.आई.एम.ई.आर., पंजाब विश्वविद्यालय, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन, सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया तथा आई.आई.टी. रोपड़ जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी मौजूद हैं। देश में बहुत कम ऐसे शहरी क्षेत्र हैं, जहाँ इतने छोटे भौगोलिक दायरे में इतनी मजबूत शोध एवं ज्ञान-क्षमता एक साथ उपलब्ध हो।
लेकिन हमें ईमानदारी से यह भी स्वीकार करना होगा कि हमने शोध तो बहुत किया है, लेकिन शोध को उद्यम में बदलने में अभी उतनी सफलता नहीं मिली है। यहाँ शोध-पत्र प्रकाशित हुए, लेकिन कई कंपनियाँ कहीं और जाकर बनीं। हमारे संस्थानों में तैयार हुई प्रतिभा ने भी अक्सर दूसरे शहरों और राज्यों में जाकर अपनी क्षमता का उपयोग किया।
यह किसी व्यक्ति या संस्था की कमी नहीं है। लोग वहीं जाते हैं जहाँ उन्हें आगे बढ़ने के लिए सही अवसर, संसाधन और सहयोग का पूरा माहौल मिलता है। हमारी चुनौती यह रही कि वह पूरा माहौल यहाँ पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं था।
2025 की स्टार्टअप नीति का मूल उद्देश्य इसी दूरी को कम करना है ताकि इस शहर की प्रयोगशालाओं में पैदा होने वाला ज्ञान और तकनीक यहीं से निकलकर देश और दुनिया के बाजार तक पहुँच सके। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हमारे युवाओं और शोधकर्ताओं को अवसर तलाशने के लिए शहर छोड़ना न पड़े, बल्कि वे यहीं रहकर अपने विचारों को सफल उद्यमों में बदल सकें और चंडीगढ़ में ही नए रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा कर सकें।
लेकिन किसी भी नीति की सफलता केवल उसके उद्देश्यों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पहुँचता है। इसलिए आज मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि आज वितरित की जा रही सहायता राशि का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत हुआ है, क्योंकि मेरे विचार में यह राशि से भी अधिक महत्वपूर्ण है।
आज जारी किया गया प्रत्येक रुपया एक स्पष्ट और सार्वजनिक प्रक्रिया के माध्यम से आया है। इसके लिए कार्य-निर्देश तैयार किए गए और उन्हें सार्वजनिक किया गया। मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटरों ने निर्धारित मानदंडों के आधार पर आवेदन किए और प्रत्येक आवेदन का मूल्यांकन तय मानकों के अनुसार किया गया, किसी व्यक्तिगत पहचान या सिफारिश के आधार पर नहीं।
आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई, ताकि किसी किराए के छोटे से कमरे में बैठा कोई युवा उद्यमी भी बिना किसी से परिचय या संपर्क के, किसी भी समय अपना आवेदन जमा कर सके। प्रस्तावों को परियोजना निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति के सामने रखा गया और इस नीति का मार्गदर्शन मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा किया जाता है।
मैं आज सभी संस्थापकों से एक बात विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि आप यहाँ इसलिए नहीं हैं कि किसी ने आपके लिए सिफारिश की। आप यहाँ इसलिए हैं क्योंकि आपके विचार और आपके प्रस्ताव ने निर्धारित कसौटियों को पूरा किया है।
इस बात को याद रखिए। जब कभी आपको लगे कि व्यवस्था आपके साथ निष्पक्ष नहीं है, तो याद रखिए कि जिस दरवाजे से आप आज यहाँ पहुँचे हैं, वह दरवाजा किसी पहचान से नहीं, बल्कि एक तय और पारदर्शी प्रक्रिया से खुला है।
अब मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि प्रशासन आपसे बदले में क्या अपेक्षा करता है। मेरी तीन स्पष्ट अपेक्षाएँ हैं।
पहली है, जवाबदेही। यह जनता का पैसा है। इसलिए इसके उपयोग का पूरा हिसाब होना चाहिए। उपयोग प्रमाण-पत्र, प्रगति रिपोर्ट और जिस उद्देश्य के लिए राशि मंजूर हुई है, उसी उद्देश्य पर उसका उचित उपयोग, ये सभी आवश्यक हैं। आपका सही हिसाब-किताब केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है। यह भविष्य में आने वाले दूसरे युवा उद्यमियों के लिए भी विश्वास का आधार बनेगा।
दूसरी है, ईमानदारी और स्पष्ट संवाद। यदि किसी चरण में समस्या आती है, तो उसके बारे में समय रहते बताइए। अपने इनक्यूबेटर को बताइए, विभाग को बताइए। व्यवसाय की दिशा में बदलाव शुरुआती चरण में सामने आ जाए तो उसे समझना और संभालना आसान होता है। लेकिन वही बदलाव बहुत देर बाद, जाँच के दौरान सामने आए, तो स्थिति कहीं अधिक कठिन हो जाती है।
और यहाँ मैं एक चिंता भी दूर करना चाहता हूँ। आज जिन उद्यमों को सहायता मिल रही है, उनमें से हर उद्यम तीन वर्ष बाद भी अस्तित्व में रहे, यह जरूरी नहीं है। स्टार्टअप की दुनिया में असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि आज दिए गए हर अनुदान को शत-प्रतिशत सफलता मिल जाए, तो शायद इसका अर्थ यह होगा कि हमने बहुत सुरक्षित विकल्प चुने और केवल उन्हीं को सहायता दी जिन्हें कोई निजी निवेशक भी आसानी से चुन सकता था।
हम आपसे केवल सफल होने की गारंटी नहीं माँगते। हम आपसे मेहनत, ईमानदारी, पारदर्शिता और मिली हुई सहायता के सही उपयोग की अपेक्षा करते हैं।
तीसरी अपेक्षा है, चंडीगढ़ से जुड़ाव। यदि शुरुआती वर्षों में यह शहर आपके जोखिम को कम करने में आपका साथ देता है, तो सफलता मिलने के बाद आपकी सफलता का कुछ हिस्सा भी इस शहर के विकास में दिखाई देना चाहिए। यहीं रोजगार पैदा कीजिए। अपना कार्यालय यहीं रखिए। स्थानीय प्रतिभा को अवसर दीजिए।
और जब आप सफलता की उस मंजिल तक पहुँच जाएँ, तो एक दिन इसी मंच पर अगली पीढ़ी के युवा उद्यमियों के साथ बैठने के लिए वापस आइए। केवल सम्मान लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें यह बताने के लिए कि वास्तविक यात्रा कैसी थी, बिना किसी दिखावे और चमक-दमक के।
मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटरों से भी मेरी एक स्पष्ट अपेक्षा है। आपकी मान्यता केवल एक दर्जा नहीं है; यह एक जिम्मेदारी है। आपकी सफलता का माप यह नहीं होना चाहिए कि आपने कितनी सीटें भरीं या कितने कार्यक्रम आयोजित किए। वास्तविक प्रश्न यह है कि आपकी मदद से कितने स्टार्टअप बेहतर तरीके से संचालित हुए? कितने संस्थापकों को सही मार्गदर्शन मिला? कितनों को बाजार तक पहुँच मिली? और कितनों ने बेहतर प्रशासन और मजबूत व्यवस्था के साथ आगे बढ़ना सीखा? मार्गदर्शन, बाजार से जुड़ाव और मजबूत प्रबंधन व्यवस्था, यही आपकी वास्तविक जिम्मेदारी है।
मैं इस सभागार में बैठे सभी परिवारों से भी कुछ कहना चाहता हूँ। आप में से बहुत से परिवारों ने अपने बेटे या बेटी के सपने को पूरा करने के लिए कम आय, लंबे इंतजार और भविष्य की अनिश्चितता के बावजूद उनका साथ दिया है, ताकि वे अपने विचार और सपने को एक अवसर दे सकें।
किसी भी नए उद्यम का जोखिम केवल उसका संस्थापक नहीं उठाता। उस जोखिम का एक बड़ा हिस्सा परिवार भी चुपचाप उठाता है। वे लोग किसी आवेदन पत्र पर दिखाई नहीं देते, लेकिन उनकी हिम्मत, सहयोग और त्याग के बिना कोई भी युवा अपने सपने को आगे बढ़ाने का साहस नहीं कर सकता। प्रशासन आपके इस मौन सहयोग और विश्वास को समझता है और इसके लिए आपका हृदय से आभार व्यक्त करता है।
साथियो,
भारत की पिछले दस वर्षों की स्टार्टअप यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बड़े बदलाव संभव हैं। स्टार्टअप इंडिया अभियान 16 जनवरी 2016 को शुरू हुआ था। जहाँ 2016 में केवल 502 स्टार्टअप्स को DPIIT मान्यता मिली थी, वहीं अब यह संख्या 2.50 लाख से अधिक हो चुकी है। अब तक इन स्टार्टअप्स ने लगभग 24 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 55 हजार से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली।
यह आंदोलन अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। करीब 50 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स Tier-II और Tier-III शहरों से आ रहे हैं। देश में 120 से अधिक यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली स्टार्टअप कंपनी) बन चुके हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
सरकार ने शुरुआती और विकास के विभिन्न चरणों के लिए वित्तीय सहायता भी बढ़ाई है। Startup India Seed Fund Scheme के लिए 945 करोड़ रूपये का कोष रखा गया, जिसके तहत 219 इनक्यूबेटर्स चुने गए और 3 हजार 400 से अधिक स्टार्टअप्स के लिए 605 करोड़ रूपये से अधिक की फंडिंग मंजूर हुई।
इसी वर्ष Startup India Fund of Funds 2.0 के लिए 10 हजार करोड़ मंजूर किए गए हैं, ताकि डीप-टेक, तकनीक आधारित विनिर्माण और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए निवेश जुटाया जा सके।
महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी भी उत्साहजनक है। अब 1 लाख 7 हज़ार से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक या साझेदार है, जो कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का लगभग 48 प्रतिशत है।
मैं चंडीगढ़ की बेटियों और युवा महिलाओं से कहना चाहता हूँ कि अपनी महत्वाकांक्षा की सीमा छोटी मत रखिए। प्रतिभा का कोई लिंग नहीं होता, सपनों की कोई सीमा नहीं होती और नवाचार के लिए कोई बंद दरवाजा नहीं होता।
मैं अपनी बात यहीं समाप्त करूँगा। तीन वर्ष बाद आज की इस सुबह की असली सफलता न तो यह सभागार होगा, न ये स्वीकृति-पत्र और न ही आज की तस्वीरें।
असली सफलता यह होगी कि आज से तीन वर्ष बाद चंडीगढ़ का कोई युवा जब एक ओर सुरक्षित नौकरी और दूसरी ओर अपने अनजमाए हुए विचार के बीच चुनाव करे, तो उसे अपने विचार को चुनने का रास्ता आज की तुलना में थोड़ा कम कठिन और थोड़ा कम अकेला महसूस हो। यही इस नीति का मूल उद्देश्य है। बाकी सब उसकी प्रक्रिया है।
आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपके विचार सफल हों, आपके उद्यम आगे बढ़ें और आपकी सफलता चंडीगढ़ की सफलता बने।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!
जय भारत!