SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CHANDIGARH MUNICIPAL CORPORATION’S DRUG FREE AWARENESS PROGRAMME AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 10, 2026.
- by Admin
- 2026-09-10 13:25
नगर निगम चंडीगढ़ के ‘नशामुक्त जागरूकता कार्यक्रम’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 10.09.2026, गुरूवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज इस महत्वपूर्ण “नशा मुक्त जागरूकता कार्यक्रम” में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं नगर निगम चंडीगढ़ तथा इस अभियान से जुड़े सभी विभागों, सामाजिक संस्थाओं, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मार्केट एसोसिएशनों, स्वयं सहायता समूहों, स्वयंसेवकों और नागरिकों को इस सार्थक पहल के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
किसी कवि ने बहुत खूब कहा है, ‘‘यूँ ही नहीं मिलती राही को मंजिल, एक जुनून सा दिल में जगाना होता है।’’ आज चंडीगढ़ के आप सभी नागरिकों ने अपने दिल में जो यह ‘नशा मुक्त समाज’ बनाने का जुनून जगाया है, वह निश्चित ही हमारी सबसे बड़ी विजय बनेगा। आज का यह कार्यक्रम एक संदेश है कि चंडीगढ़ अपने युवाओं के स्वास्थ्य, उनके भविष्य और अपने परिवारों की खुशहाली को लेकर सजग है।
नशे की समस्या केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती जो नशे की गिरफ्त में आता है। इसका प्रभाव उसके माता-पिता पर पड़ता है, भाई-बहनों पर पड़ता है, उसकी शिक्षा और रोजगार पर पड़ता है, परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है और धीरे-धीरे पूरे समाज की सामाजिक तथा मानसिक सेहत प्रभावित होती है।
इसलिए नशे के विरुद्ध लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानना पर्याप्त नहीं है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार, सामाजिक व्यवहार, रोजगार, खेल, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जिम्मेदारी, इन सभी से जुड़ा विषय है।
प्रिय चंडीगढ़वासियो,
नशे की शुरुआत अक्सर छोटी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के सपनों, रिश्तों, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को प्रभावित करने लगती है। हालांकि, बदलाव संभव है, और इसके लिए समाज का एकजुट होना आवश्यक है।
इसी सोच के साथ आज एक समुदाय आधारित जन-जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसमें एरिया लेवल फेडरेशन, स्वयं सहायता समूह, व्यापारी और आम नागरिक मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँचाएंगे।
शहर के विभिन्न बाजारों और क्षेत्रों में हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हर हस्ताक्षर केवल एक निशान नहीं, बल्कि नशा-मुक्त चंडीगढ़ के लिए एक संकल्प होगा।
आज की यह पहल किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से नशे के खिलाफ संदेश को चंडीगढ़ के हर कोने तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
हमारा प्रयास केवल मंच से संदेश देने का नहीं होना चाहिए; हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि हर नागरिक इस अभियान का भागीदार बने।
सरकार नीति बना सकती है। प्रशासन व्यवस्था उपलब्ध करा सकता है। पुलिस कार्रवाई कर सकती है। अस्पताल उपचार दे सकते हैं। लेकिन किसी युवा को नशे तक पहुँचने से पहले संभालने में सबसे पहली भूमिका कई बार परिवार, मित्र, शिक्षक और पड़ोस की होती है। इसलिए नशा मुक्त चंडीगढ़ की वास्तविक शुरुआत किसी सरकारी कार्यालय से नहीं, बल्कि घर से, स्कूल से, मोहल्ले से और समाज से होगी।
आज यहाँ रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन, चंडीगढ़ व्यापार मंडल, स्वयं सहायता समूह और अनेक सामाजिक संस्थाएँ उपस्थित हैं। ये संगठन हमारे शहर की जमीनी ताकत हैं। इनके पास समाज तक सीधे पहुँचने की क्षमता है।
मेरा सुझाव है कि प्रत्येक रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन अपने क्षेत्र में नशे के विरुद्ध नियमित जागरूकता अभियान चलाए। युवाओं के लिए खेल, स्वास्थ्य और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। यदि किसी परिवार को सहायता चाहिए तो उसे सही चिकित्सा या परामर्श व्यवस्था तक पहुँचाने में सहयोग किया जाए।
इसी प्रकार हमारी मार्केट एसोसिएशन केवल बाजार व्यवस्था तक सीमित न रहें। वे भी सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएँ। अपने बाजार क्षेत्र में नशे और नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन को सूचना दें।
विशेष रूप से हमारे स्वयं सहायता समूहों की बहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है। महिलाएँ परिवार की सामाजिक और भावनात्मक धुरी होती हैं। स्वयं सहायता समूहों की बहनें घर-घर तक पहुँचती हैं, परिवारों से संवाद करती हैं और समुदाय का विश्वास रखती हैं। यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण और जानकारी दी जाए तो वे नशे के शुरुआती संकेतों, उपचार की उपलब्ध सेवाओं, परामर्श, हेल्पलाइन और पुनर्वास संबंधी जानकारी को घर-घर तक पहुँचा सकती हैं।
आज प्रस्तुत किया जा रहा नुक्कड़ नाटक भी जनजागरूकता का बहुत प्रभावी माध्यम है। भारत में लोककला और जनसंवाद की परंपरा बहुत पुरानी है। नुक्कड़ नाटक सीधे लोगों की भाषा में, लोगों के बीच जाकर संदेश देता है। कई बार मंच पर दिया गया लंबा भाषण भूल जाता है, लेकिन किसी भावपूर्ण नाटक का दृश्य लोगों के मन में लंबे समय तक रहता है।
इसलिए मैं चाहता हूँ कि इस प्रकार के नुक्कड़ नाटक केवल आज तक सीमित न रहें। इन्हें अलग-अलग सेक्टरों, कॉलोनियों, बाजारों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों तक ले जाया जाए।
प्यारे नागरिको,
हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति हमारी युवा पीढ़ी है। युवा किसी समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि समाधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हमें युवाओं को केवल यह नहीं कहना है कि नशा मत करो; हमें उन्हें यह भी दिखाना है कि उनके जीवन में करने के लिए कितना कुछ है।
खेलो। सीखो। नई तकनीक सीखो। कौशल विकसित करो। स्टार्टअप शुरू करो। किताब पढ़ो। संगीत सीखो। समाज सेवा करो। प्रकृति से जुड़ो। अपने शरीर को मजबूत बनाओ और अपने सपनों को बड़ा बनाओ। जब युवाओं के सामने सकारात्मक विकल्प बढ़ते हैं, तो नकारात्मक आकर्षण कमजोर होता है।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने युवाओं को जीवन में बड़े सपने देखने और उन सपनों को मेहनत से साकार करने की प्रेरणा दी। मैं आज अपने युवा मित्रों से कहना चाहता हूँ कि अपने सपनों को किसी भी नशे से बड़ा बनाइए। जो जीवन आपको मिला है, उसकी संभावना को पहचानिए।
स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा था, “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” आज मैं इस संदेश को नशामुक्ति के संदर्भ में कहना चाहूँगा कि उठो-नशे के खिलाफ। जागो-अपने भविष्य के लिए। और तब तक मत रुको, जब तक आपका जीवन अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाए।
नशा कुछ समय के लिए वास्तविकता से दूर ले जा सकता है, लेकिन मेहनत आपको वास्तविकता को बदलने की शक्ति देती है। नशा कुछ समय का भ्रम देता है, लेकिन उपलब्धि जीवन भर का आत्मविश्वास देती है। नशा शरीर और मन की शक्ति कम करता है, लेकिन खेल और अनुशासन उसी शक्ति को बढ़ाते हैं।
मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है।
साथियो,
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। प्रधानमंत्री जी का यह स्पष्ट विजन है कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए हमारे युवाओं का स्वस्थ और नशामुक्त होना सबसे पहली शर्त है।
और इसी राष्ट्रीय संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए, 15 अगस्त 2020 को जब ‘नशामुक्त भारत अभियान’ की शुरुआत हुई थी, तब इसे देश के 272 अत्यंत संवेदनशील जिलों में लागू किया गया था। लेकिन अगस्त 2023 में इसे देश के हर एक जिले तक विस्तारित कर दिया गया।
आज यह एक विशाल ‘जन-आंदोलन’ बन चुका है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि अब तक, 29 करोड़ से अधिक नागरिकों तक नशामुक्ति का यह संदेश पहुँच चुका है। इनमें लगभग 11 करोड़ युवा और 8 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, नशे से प्रभावित परिवारों को सही मार्गदर्शन और पुनर्वास का रास्ता दिखाने के लिए, ‘राष्ट्रीय टोल-फ्री नशा-मुक्ति हेल्पलाइन-14446’ एक मजबूत सहारा बन रही है। अब तक लगभग 5 लाख लोगों ने इस हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क कर एक नई उम्मीद और दिशा पाई है।
साथ ही, व्यापक मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक संबल प्रदान करने के लिए ‘टेली-मानस’ हेल्पलाइन 14416 भी चौबीसों घंटे अपनी अमूल्य सेवाएं दे रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति इस संघर्ष में स्वयं को अकेला न समझे। अब तक 4 लाख 50 हजार से अधिक लोगों ने इस पर संपर्क किया है।
इसी राष्ट्रीय संकल्प को एक नई और अभूतपूर्व ऊर्जा देने के लिए, अभी हाल ही में 2 अगस्त 2026 को हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” का ऐतिहासिक शुभारंभ किया है। इसके तहत आने वाले 100 सप्ताहों तक पूरे देश में वॉकथॉन, खेल-कूद, योग और ध्यान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और अन्य जागरूकता गतिविधियों की एक श्रृंखला चलाई जाएगी।
प्रधानमंत्री जी ने इस अभियान के शुभारंभ पर बहुत महत्वपूर्ण बात कही कि विकसित भारत के लिए देश का युवा तन से स्वस्थ, मन से स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरपूर और नशे जैसी विनाशकारी आदतों से दूर होना आवश्यक है।
मैं इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ। हम वर्ष 2047 में विकसित भारत की बात करते हैं। लेकिन विकसित भारत केवल एक्सप्रेसवे, उद्योग, तकनीक या बड़े आर्थिक आंकड़ों से नहीं बनेगा। विकसित भारत के लिए स्वस्थ युवा चाहिए। आत्मविश्वासी युवा चाहिए। कौशलयुक्त युवा चाहिए। नशामुक्त युवा चाहिए। और यह जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, हम सबकी है।
चंडीगढ़ के संदर्भ में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण है। हमारा चंडीगढ़ देश के सबसे सुव्यवस्थित और सुंदर शहरों में गिना जाता है। इसकी पहचान “सिटी ब्यूटीफुल” के रूप में है। हमारे यहाँ प्रतिष्ठित स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थान, तकनीकी संस्थान, खेल सुविधाएँ, पार्क और मजबूत नागरिक संस्थाएँ हैं। इसलिए हमारी आकांक्षा भी सामान्य नहीं होनी चाहिए।
मैं चाहता हूँ कि चंडीगढ़ केवल स्वच्छ और सुंदर शहर न हो, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित, जागरूक और नशामुक्त शहर के रूप में भी देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत करे।
हमारे पास एक कॉम्पैक्ट शहर होने का लाभ है। प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा संस्थान, आर.डब्ल्यू.ए. और नागरिक समाज यदि एक साझा कार्ययोजना पर काम करें तो चंडीगढ़ पूरे देश के लिए एक सफल सामुदायिक आधारित नशा-विरोधी मॉडल विकसित कर सकता है।
जीवन में अक्सर हम देखते हैं कि जब कोई व्यक्ति किसी बड़ी चुनौती के खिलाफ अकेले संघर्ष करता है, तो कभी-कभी वह थकान और हताशा महसूस करने लगता है। एक लंबी और कठिन यात्रा में, अकेले चलने पर कदम डगमगाने लगते हैं और मन निराश हो सकता है।
लेकिन, जब वही व्यक्तिगत प्रयास एक ‘सामूहिक अभियान’ एक जन-आंदोलन का रूप ले लेता है, जब कंधे से कंधा मिलाकर लाखों-करोड़ों लोग एक ही दिशा में चल पड़ते हैं, तो उस सामूहिकता से एक असीम ताकत का जन्म होता है। यह सामूहिक शक्ति उन लोगों के भीतर भी एक नई ऊर्जा और अदम्य साहस भर देती है, जो शायद अकेले इस लड़ाई को लड़ने में स्वयं को असमर्थ पा रहे थे।
मैं चाहूँगा कि हम केवल कार्यक्रमों की संख्या न गिनें। हमें यह भी देखना होगा कि कितने युवाओं तक प्रभावी संदेश पहुँचा? कितने परिवार सहायता लेने के लिए आगे आए? कितने प्रभावित व्यक्तियों को उपचार तक पहुँचाया गया? कितने लोगों ने उपचार पूरा किया? कितने लोग पुनर्वास के बाद शिक्षा या रोजगार से दोबारा जुड़े? कितने स्कूल, कॉलेज, बाजार और मोहल्ले सक्रिय रूप से इस अभियान का हिस्सा बने?
किसी भी सामाजिक अभियान की वास्तविक सफलता पोस्टर या कार्यक्रम की संख्या में नहीं होती, बदले हुए जीवन में होती है। हमारा लक्ष्य activity नहीं, impact होना चाहिए।
साथियो,
हमें यह समझना होगा कि नशामुक्ति केवल “नशा छोड़ने” का अभियान नहीं है। यह युवाओं को निराशा से मुक्त करने, अकेलेपन से मुक्त करने, गलत संगति से मुक्त करने और जीवन में उद्देश्यहीनता से मुक्त करने का अभियान भी है। हमें अपने युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि उनका जीवन मूल्यवान है, उनके सपने मूल्यवान हैं, उनका भविष्य मूल्यवान है और राष्ट्र को उनकी आवश्यकता है।
आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। साईंस और टेक्नोलॉजी से लेकर स्पेस, डिजिटल इनोवेशन, स्टार्टअप्स, स्पोर्ट्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर तक हर क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुल रही हैं। हम एक आत्मनिर्भर और ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, जिसका नेतृत्व हमारी युवा शक्ति कर रही है।
लेकिन साथियों, प्रगति की इस तेज गति, आधुनिक जीवनशैली और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, हमें एक अत्यंत संवेदनशील विषय पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।
हमें यह समझना होगा कि नशे के विरुद्ध हमारी इस निर्णायक लड़ाई में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ को कभी अलग करके नहीं देखा जा सकता। कई लोग तनाव, अकेलेपन, चिंता या अन्य मानसिक कठिनाइयों के कारण नशे की ओर बढ़ते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता को नशा रोकथाम और पुनर्वास के साथ जोड़ना आवश्यक है।
हमें मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करनी चाहिए। यदि कोई बच्चा या व्यक्ति मानसिक तनाव में है तो उसे यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह अकेला है। योग, ध्यान, खेल, परिवार का संवाद, स्वस्थ दिनचर्या और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर परामर्श, ये सभी जीवन को संतुलित रखने में सहायक हो सकते हैं।
श्री गुरु नानक देव जी का अत्यंत प्रेरक संदेश है, “मन जीतै जग जीत।” अर्थात् जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत लिया। नशे के विरुद्ध सबसे बड़ी शक्ति भी हमारे भीतर का आत्मसंयम, आत्मविश्वास और सकारात्मक उद्देश्य है। हमारे युवाओं को यही आंतरिक शक्ति देनी होगी।
आज मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहता हूँ कि अच्छे मित्र बनिए। यदि आपका कोई मित्र गलत दिशा में जा रहा है, तो उसका मजाक मत बनाइए। उसे अकेला मत छोड़िए। उसकी बात सुनिए। उसे सही सहायता तक पहुँचाइए। सच्चा मित्र वह नहीं जो गलत काम में साथ दे; सच्चा मित्र वह है जो गलत रास्ते से वापस लाए।
साथियो,
आज हम जो ‘नशा मुक्त शपथ’ लेने जा रहे हैं, वह केवल एक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। यह हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक संकल्प का प्रतीक होनी चाहिए।
मैं सभी नागरिकों से आह्वान करता हूँ कि अपने परिवार से शुरुआत करें, अपने मोहल्ले को जागरूक करें, अपने बाजार को नशा मुक्त बनाने में सहयोग करें, और अपने आसपास के युवाओं को सकारात्मक दिशा दें।
सरकार और प्रशासन अपना कार्य कर रहे हैं, लेकिन जनभागीदारी के बिना किसी भी अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती।
आज जिन व्यक्तियों, संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों और नागरिक प्रतिनिधियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है, मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ। आप सभी समाज के लिए प्रेरणा हैं।
आइए, हम एक ऐसा चंडीगढ़ बनाने का संकल्प लें जहाँ नागरिक केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न हों, बल्कि शहर के विकास और सामाजिक परिवर्तन के सक्रिय भागीदार बनें।
हमारा लक्ष्य केवल नशे के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि ऐसा सामाजिक वातावरण तैयार करना होना चाहिए जहाँ हमारे युवा नशे की ओर जाएँ ही नहीं, जहाँ परिवार जागरूक हों, जहाँ समाज संवेदनशील हो और जहाँ जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता मिले।
नशा मुक्त चंडीगढ़ केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, यह चंडीगढ़ के प्रत्येक नागरिक का संकल्प होना चाहिए।
आइए, हम सब मिलकर यह संदेश हर घर, हर गली, हर बाजार और हर मोहल्ले तक पहुंचाएं:
“नशे को ना, जीवन को हाँ।”
“स्वस्थ युवा-सशक्त समाज-नशा मुक्त चंडीगढ़।”
इसी संकल्प के साथ मैं एक बार फिर नगर निगम चंडीगढ़, सभी विभागों, स्वयं सहायता समूहों, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मार्केट एसोसिएशनों और इस अभियान में जुड़े प्रत्येक नागरिक को शुभकामनाएं देता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!
जय भारत!