SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THE FIRST ANNIVERSARY OF THE SENIOR JOURNALISTS FORUM AT CHANDIGARH ON SEPTEMBER 13, 2026.
- by Admin
- 2026-09-13 13:55
सीनियर जर्नलिस्ट फोरम की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 13.09.2026, रविवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज ‘सीनियर जर्नलिस्ट फोरम’ के प्रथम वर्ष पूर्ण होने के इस विशेष अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं इस फोरम के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को इसके सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
चंडीगढ़, ‘द सिटी ब्यूटीफुल’ के लिए भी यह गर्व की बात है कि यह देश का पहला ऐसा शहर है, जहाँ वरिष्ठ पत्रकारों ने भाईचारे को मजबूत करने, सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने और मानवता की सेवा के उद्देश्य से एक साझा मंच का गठन किया है।
सीनियर जर्नलिस्ट्स फोरम वरिष्ठ पत्रकारों के सम्मान, कल्याण और सशक्तिकरण के लिए समर्पित एक मंच है। यह फोरम आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे पत्रकारों को सहायता उपलब्ध कराने, चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी सहयोग सुनिश्चित करने तथा वरिष्ठ पत्रकारों के अधिकारों, हितों और सम्मान की रक्षा के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है।
विशेष रूप से यह फोरम वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभव, ज्ञान और दूरदृष्टि को समाज के हित में उपयोग करने का अवसर प्रदान करता है। युवा पत्रकारों के मार्गदर्शन, ज्ञान-साझाकरण और पत्रकारिता के उच्च आदर्शों के संवर्धन में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह फोरम इस विश्वास को साकार करता है कि पत्रकारिता से सेवानिवृत्ति हो सकती है, लेकिन समाज और राष्ट्र के प्रति पत्रकार का दायित्व कभी समाप्त नहीं होता।
वरिष्ठ पत्रकार मंच की गतिविधियाँ केवल अपने सदस्यों तक सीमित नहीं हैं। स्वच्छता अभियान, रक्तदान को प्रोत्साहित करना और नशे के खिलाफ जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषय भी मंच के एजेंडे का हिस्सा हैं।
यह अत्यंत सराहनीय है कि मंच के सदस्य अपने मीडिया प्लेटफॉर्म और व्यक्तिगत प्रयासों के माध्यम से समाज में इन विषयों पर जागरूकता पैदा कर रहे हैं। कई सदस्य दशकों से नियमित रक्तदाता रहे हैं और पीजीआई जैसे संस्थानों के ब्लड बैंकों से भी जुड़े हुए हैं।
किसी ने बहुत सुंदर कहा है, “हमारे जीवन की सार्थकता इस बात से नहीं मापी जाती कि हमने कितना पाया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हमने कितना दिया।”
वास्तव में, यह फोरम अनुभव, प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना का एक उत्तम उदाहरण है, जो वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानजनक, सक्रिय और सार्थक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान कर रहा है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है, “संगच्छध्वम संवदध्वम सम वो मनांसि जानताम्।” अर्थात् हम साथ चलें, साथ संवाद करें और हमारे विचारों में एकता हो। वरिष्ठ पत्रकार मंच इसी भावना को वास्तविक रूप प्रदान कर रहा है। एक वर्ष पहले कुछ साथियों द्वारा शुरू की गई यह छोटी-सी पहल आज एक बड़े परिवार का रूप ले चुकी है।
मित्रों,
आज पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं है। पत्रकारिता समाज की आवाज़, आईना और प्रहरी, तीनों की भूमिका निभाती है। महात्मा गांधी जी ने पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था, “पत्रकारिता का पहला उद्देश्य सेवा है।”
वास्तव में, पत्रकार समाज की समस्याओं को सामने लाता है, सत्ता से सवाल करता है, लोगों की आवाज़ को मंच देता है और उन मुद्दों को सामने लाता है, जिन पर ध्यान देना आवश्यक होता है। और जब कोई पत्रकार दशकों तक इस जिम्मेदारी को निभाता है, तो उसका अनुभव केवल उसका व्यक्तिगत अनुभव नहीं रहता; वह समाज की सामूहिक पूँजी बन जाता है।
इसलिए वरिष्ठ पत्रकारों की भूमिका आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। बदलते समय, बदलती तकनीक और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच वरिष्ठ पत्रकार अपने अनुभव और विवेक से नई पीढ़ी को दिशा दे सकते हैं।
इसी प्रकार नशे की समस्या से निपटने में भी पत्रकारों की भूमिका अत्यंत प्रभावी हो सकती है। हमें नशे की समस्या को सनसनीखेज समाचार तक सीमित न रखकर उसके सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को भी सामने लाना चाहिए। युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने हेतु समाज को प्रेरित करना भी जरूरी है।
साथियो,
पत्रकारिता को यूं ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं कहा जाता। यह जनता और शासन के बीच का वह सबसे सशक्त और जीवंत सेतु है, जिस पर एक स्वस्थ समाज की नींव टिकी होती है। विधायिका नीतियां बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है, न्यायपालिका न्याय सुनिश्चित करती है, लेकिन पत्रकारिता ही वह शक्ति है जो जनता की धड़कन और आवाज़ को इन सभी संस्थाओं तक पहुँचाती है।
भारत में पत्रकारिता की यात्रा केवल समाचारों के प्रसार का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त वाहक रही है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रसेवा’ का सबसे बड़ा माध्यम थी।
आज भी जब हम लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के ‘केसरी’, महात्मा गांधी के ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’, तथा गणेश शंकर विद्यार्थी की निर्भीक पत्रकारिता को याद करते हैं, तो हमें यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य सत्ता या लोकप्रियता नहीं, बल्कि सत्य और जनहित की निस्वार्थ सेवा है।
कहा गया है कि, ‘‘कलम की नोक पर इतिहास लिखा जाता है।’’ एक संवेदनशील पत्रकार समाज की आँख, कान और अंतरात्मा के समान होता है। लेकिन आज, मीडिया का परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है। प्रिंट मीडिया और रेडियो से शुरू हुआ यह सफर आज डिजिटल मीडिया, सैटेलाइट चैनलों और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.)’ के युग तक आ पहुँचा है।
आज सूचनाएं पलक झपकते ही लाखों लोगों तक पहुँच जाती हैं। इस डिजिटल क्रांति ने अभूतपूर्व अवसर तो दिए हैं, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में, जब भ्रामक सूचनाएं और सनसनीखेज सामग्री तेजी से फैल सकती हैं, तब सत्यता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के मानक और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
हमें स्वामी विवेकानंद जी का वह विचार हमेशा याद रखना चाहिए, ‘‘सत्य को हजार तरीकों से कहा जा सकता है, फिर भी वह सत्य ही रहता है।’’ पत्रकारिता का दायित्व सत्य को उसी ईमानदारी के साथ समाज के सामने प्रस्तुत करना है।
आज जब हमारा देश ‘विकसित भारत 2047’ और आत्मनिर्भरता के एक महान संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तो मीडिया की यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। समाज को सकारात्मक दिशा देने, विशेषकर युवाओं को दिशाहीन होने से बचाने और ‘नशा-मुक्त समाज’ के निर्माण के जन-जागरूकता अभियानों में आपकी कलम किसी भी हथियार से अधिक कारगर साबित हो सकती है।
यहीं पर आप जैसे अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। आप समाज के उस विशिष्ट वर्ग से हैं, जिसकी पहचान केवल उसके पेशे से नहीं, बल्कि उसके विचार, दृष्टि और सामाजिक योगदान से होती है।
आपने अपनी संतानों का सही मार्गदर्शन कर उन्हें सफलता के उच्च शिखरों तक पहुँचाया है। आपका यह अनुभव और समर्पण न केवल आपके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
साथियो,
आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जब सूचना बहुत तेजी से बदल रही है। तकनीक बदल रही है, संचार के माध्यम बदल रहे हैं और पत्रकारिता का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। लेकिन कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं, सत्य का महत्व, विश्वसनीयता की आवश्यकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी।
यही वह क्षेत्र है, जहाँ वरिष्ठ पत्रकारों का अनुभव नई पीढ़ी के लिए अमूल्य मार्गदर्शन बन सकता है। वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता के उस दौर को देखा है, जब समाचारों की दुनिया में तकनीक सीमित थी। फिर उन्होंने समाचार-पत्रों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और आज के डिजिटल युग तक का परिवर्तन देखा है। इसलिए वरिष्ठ पत्रकार केवल अतीत के साक्षी नहीं हैं; वे भविष्य के मार्गदर्शक भी हैं।
आज डिजिटल और ए.आई. के इस दौर में युवा पत्रकारों के मन में अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर जो आशंकाएं हैं, वरिष्ठ पत्रकार ही उन्हें यह विश्वास दिला सकते हैं कि तकनीक केवल माध्यम बदलती है, सत्य की खोज और मानवीय संवेदनशीलता का स्थान कभी नहीं ले सकती।
साथ ही, यह वरिष्ठ पत्रकारों का ही दायित्व है कि वे युवा पीढ़ी को यह समझाएं कि ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए भी हमें अपनी मातृभाषा, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रहना है, क्योंकि अपनी संस्कृति से कटकर कोई भी राष्ट्र सही अर्थों में महान नहीं बन सकता।
साथियो,
आज मैं युवा पत्रकारों से भी कहना चाहूँगा कि तकनीक सीखिए, नए माध्यमों को अपनाइए, डिजिटल दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलिए, लेकिन सत्य, संवेदना और जिम्मेदारी को कभी पीछे मत छोड़िए।
पत्रकारिता में गति आवश्यक है, लेकिन गति से अधिक महत्वपूर्ण है सत्य। सूचना आवश्यक है, लेकिन सूचना से अधिक महत्वपूर्ण है विश्वसनीयता। और सफलता महत्वपूर्ण है, लेकिन सफलता से अधिक महत्वपूर्ण है चरित्र। क्योंकि पत्रकार की सबसे बड़ी पूँजी उसका पद नहीं, उसका संस्थान नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता होती है।
साथियो,
कुछ लोग मानते हैं कि जीवन की सफलता उसकी लंबाई में है। लेकिन मेरा मानना है कि जीवन की असली सफलता इस बात में है कि वह कितना सार्थक और समाज के लिए कितना उपयोगी रहा। जीवन केवल वर्षों की गिनती नहीं, बल्कि नई राह बनाने, नई संभावनाएँ तलाशने और आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता आसान करने का नाम है।
कहा जाता है, “रास्ते कभी खत्म नहीं होते, मंजिलें बदलती रहती हैं।” हर पीढ़ी अपनी राह बनाती है। कभी एक छोटी-सी पगडंडी बनती है, उस पर कुछ कदम बढ़ते हैं, फिर कारवां जुड़ता जाता है और एक दिन वही पगडंडी राजमार्ग बन जाती है।
मुझे विश्वास है कि वरिष्ठ पत्रकार मंच भी ऐसी ही एक नई पगडंडी की शुरुआत है, जो भविष्य में एक सशक्त राजमार्ग का रूप ले सकती है।
मैं चाहता हूं कि यह फोरम चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को एक साझा मंच पर जोड़ने का प्रेरक मॉडल बने। वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज के अनुभव, स्मृतियों और जीवन-ज्ञान की अमूल्य पूँजी हैं।
हमें ऐसा समाज बनाना है जहाँ उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति अकेला नहीं, बल्कि और अधिक जुड़ा हुआ, सम्मानित और सक्रिय महसूस करे।
उम्र हमें पीछे नहीं करती; अनुभव हमें आगे बढ़ने की दृष्टि देता है। वरिष्ठ पत्रकार मंच इसी विचार को सार्थक दिशा देने का एक सुंदर माध्यम बन सकता है।
साथियो,
आज वरिष्ठ पत्रकार मंच के प्रथम वर्ष की यह उपलब्धि केवल एक वर्ष पूरा होने का अवसर नहीं है। यह उस विचार की सफलता है, जो भाईचारे, अपनत्व, सामाजिक सरोकार और मानव सेवा में विश्वास रखता है।
मैं मंच के सभी संस्थापक सदस्यों, पदाधिकारियों और सदस्यों को इस सुंदर पहल के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। मेरी कामना है कि यह मंच आने वाले वर्षों में और मजबूत हो, अधिक से अधिक वरिष्ठ पत्रकार इससे जुड़ें और यह समाज सेवा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करे।
आज इस अवसर पर मैं यही कहना चाहूँगा कि चलते रहिए, जुड़ते रहिए, दूसरों को जोड़ते रहिए। अपने अनुभव को अगली पीढ़ी की ताकत बनाइए। अपने समय को समाज की सेवा में लगाइए। और जीवन को केवल लंबा नहीं, सार्थक बनाइए।
वरिष्ठ पत्रकार मंच की इस गौरवपूर्ण यात्रा के प्रथम वर्ष पूर्ण होने पर आप सभी को हृदय की गहराइयों से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
ईश्वर करे यह कारवां निरंतर आगे बढ़ता रहे, नई राहें बनाता रहे, लोगों को जोड़ता रहे और मानवता की सेवा करता रहे।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!
जय भारत!